विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (जीव विज्ञान)
अध्याय: 18.2 मानव शरीर और ऊतक
विषय-वस्तु: ऊतक, अंग
1. परिचय
मानव शरीर कोशिकाओं का एक जटिल संगठन है। जब समान संरचना और कार्य वाली कोशिकाएँ एक साथ मिलकर कार्य करती हैं, तो उनका समूह 'ऊतक' (Tissue) कहलाता है। विभिन्न ऊतक मिलकर 'अंग' (Organ) का निर्माण करते हैं, तथा अनेक अंग मिलकर 'अंग-तंत्र' (Organ System) बनाते हैं। इस प्रकार शरीर की संरचना का क्रम होता है—कोशिका, ऊतक, अंग, अंग-तंत्र, जीव। मानव शरीर में मुख्यतः चार प्रकार के ऊतक पाए जाते हैं—उपकला ऊतक, संयोजी ऊतक, पेशी ऊतक और तंत्रिका ऊतक।
शरीर के प्रत्येक अंग का निर्माण उपरोक्त ऊतकों के उचित संयोजन से होता है। उदाहरण के लिए, हृदय मुख्यतः पेशी ऊतक (हृदय पेशी) से बना है, परंतु इसमें संयोजी ऊतक तथा तंत्रिका ऊतक भी विद्यमान हैं। रेलवे NTPC की परीक्षा में मानव शरीर और ऊतकों से संबंधित प्रश्न सामान्य विज्ञान (जीव विज्ञान) के अंतर्गत नियमित रूप से पूछे जाते हैं। ऊतकों के प्रकार, उनकी विशेषताएँ, शरीर में उनके स्थान तथा अंग-तंत्रों के प्रमुख कार्य इस अध्याय की मुख्य विषय-वस्तु है।
यह अध्याय न केवल परीक्षा की दृष्टि से बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता के लिए भी महत्वपूर्ण है। शरीर में पाए जाने वाले प्रत्येक ऊतक का अपना विशिष्ट कार्य और स्थान होता है। अगले भागों में चारों प्रकार के ऊतकों, शरीर के प्रमुख अंगों तथा अंग-तंत्रों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई है।
2. ऊतकों के प्रकार और उनकी विशेषताएँ
मानव शरीर में मुख्यतः चार प्रकार के मूल ऊतक होते हैं:
उपकला ऊतक (Epithelial Tissue): यह शरीर की आंतरिक एवं बाह्य सतहों को ढकता है। यह शरीर का सबसे बाहरी आवरण तथा सुरक्षा कवच है। इसकी कोशिकाओं में जीवद्रव्य संबंध सामान्यतः नहीं होता और यह तंत्रिका तथा रक्त वाहिकाओं से रहित होता है। इसके कार्य हैं—सुरक्षा, अवशोषण, स्राव, उत्सर्जन तथा संवेदना ग्रहण करना। पाचन तंत्र की आंतरिक परत, त्वचा की बाहरी सतह तथा फेफड़ों की परत इसके उदाहरण हैं।
संयोजी ऊतक (Connective Tissue): यह शरीर के विभिन्न अंगों को जोड़ने, सहारा देने तथा पोषण प्रदान करने का कार्य करता है। इसमें रक्त, अस्थि (हड्डी), उपास्थि, एरियोलर ऊतक, वसा ऊतक तथा स्नायु शामिल हैं। इसकी कोशिकाएँ अंतरकोशिकीय जीवद्रव्य (Matrix) में बिखरी रहती हैं। रक्त को तरल संयोजी ऊतक कहते हैं।
पेशी ऊतक (Muscular Tissue): यह संकुचन एवं शिथिलन की क्षमता रखता है, जिससे शरीर की गति संभव होती है। इसके तीन प्रकार हैं—ऐच्छिक (अस्थि) पेशी, अनैच्छिक (चिकनी) पेशी तथा हृदय पेशी।
तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue): यह उद्दीपन ग्रहण करने तथा उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक संचारित करने का कार्य करता है। इसकी इकाई न्यूरॉन है, जिसमें कोशिका काय, डेंड्राइट तथा एक्सॉन होते हैं।
ऊतक विज्ञान (Histology) में इन ऊतकों का सूक्ष्म अध्ययन किया जाता है। मानव शरीर में इन चारों ऊतकों का वितरण नीचे दिए गए भाग में स्पष्ट किया गया है।
3. शरीर के प्रमुख अंग और उनके कार्य
अंग वे संरचनाएँ हैं जो एक या अधिक ऊतकों से मिलकर बनती हैं तथा किसी विशिष्ट कार्य को संपन्न करती हैं। मानव शरीर के प्रमुख अंग इस प्रकार हैं:
हृदय (Heart): मुख्यतः हृदय पेशी से बना, रक्त को पंप करने का कार्य करता है। इसके चार कक्ष होते हैं—दो आलिंद (अट्रिया) और दो निलय (वेंट्रिकल्स)।
फेफड़े (Lungs): श्वसन के मुख्य अंग; यहाँ गैसों का आदान-प्रदान होता है। दायाँ फेफड़ा तीन खंडों तथा बायाँ फेफड़ा दो खंडों में विभाजित होता है।
यकृत (Liver): शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि; पित्त रस का निर्माण, विषैले पदार्थों का निष्क्रिय करना तथा ग्लाइकोजन संग्रह इसके मुख्य कार्य हैं।
गुर्दे (Kidneys): उत्सर्जन के मुख्य अंग; रक्त का निस्यंदन कर मूत्र का निर्माण करते हैं। प्रत्येक गुर्दे में लगभग 10 लाख नेफ्रॉन होते हैं।
मस्तिष्क (Brain): तंत्रिका तंत्र का मुख्य नियंत्रण अंग; तीन प्रमुख भाग—अग्रमस्तिष्क, मध्यमस्तिष्क तथा पश्चमस्तिष्क।
आमाशय (Stomach): पाचन तंत्र का थैलीनुमा अंग; भोजन का आंशिक पाचन करता है तथा पेप्सिन तथा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल स्रावित करता है।
छोटी आँत (Small Intestine): पाचन तथा अवशोषण का मुख्य स्थल; विलाई नामक अंगुली जैसी रचनाएँ अवशोषण में सहायक होती हैं।
त्वचा (Skin): शरीर का सबसे बड़ा अंग; सुरक्षा, ताप नियंत्रण तथा विटामिन D के निर्माण में सहायक।
प्रत्येक अंग अपने विशिष्ट कार्य के कारण शरीर की स्थिरता (होमियोस्टैसिस) बनाए रखने में सहयोग करता है। अंगों का समन्वित समूह अंग-तंत्र कहलाता है।
4. अंग-तंत्र और शरीर की संरचना का क्रम
अंग-तंत्र अनेक अंगों का वह समूह है जो एक साथ मिलकर कोई बड़ी शारीरिक क्रिया संपन्न करते हैं। मानव शरीर के प्रमुख अंग-तंत्र निम्न हैं:
पाचन तंत्र: मुख, ग्रासनली, आमाशय, छोटी आँत, बड़ी आँत, यकृत, अग्न्याशय; भोजन का पाचन एवं अवशोषण।
श्वसन तंत्र: नाक, ग्रसनी, स्वरयंत्र, श्वासनली, ब्रांकाई तथा फेफड़े; ऑक्सीजन ग्रहण एवं कार्बन डाइऑक्साइड का निष्कासन।
परिसंचरण तंत्र: हृदय, रक्त वाहिकाएँ तथा रक्त; पोषक तत्वों एवं गैसों का परिवहन।
उत्सर्जन तंत्र: गुर्दे, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय तथा मूत्रमार्ग; अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन।
तंत्रिका तंत्र: मस्तिष्क, मेरु रज्जु तथा तंत्रिकाएँ; नियंत्रण एवं समन्वय।
अंतःस्रावी तंत्र: विभिन्न ग्रंथियाँ जो हार्मोन स्रावित करती हैं; शारीरिक क्रियाओं का रासायनिक नियंत्रण।
जनन तंत्र: जनन अंग; प्रजनन में सहायक।
अस्थि तंत्र (कंकाल तंत्र): अस्थियाँ; सहारा, सुरक्षा तथा गति।
पेशी तंत्र: पेशियाँ; गति उत्पन्न करना।
मानव शरीर के महत्वपूर्ण तथ्य: वयस्क मानव शरीर में कुल 206 अस्थियाँ होती हैं (शिशु में लगभग 300)। मानव शरीर में लगभग 639 पेशियाँ होती हैं। शरीर का सबसे बड़ा अंग त्वचा है, सबसे बड़ी ग्रंथि यकृत है, तथा सबसे लंबी अस्थि फीमर (जाँघ की हड्डी) है। सबसे छोटी अस्थि कान की स्टेपीज़ है। रक्त शरीर का सबसे बड़ा तरल ऊतक है।
ऊतक-अंग-तंत्र संबंध: उपकला ऊतक त्वचा और ग्रंथियाँ बनाता है; संयोजी ऊतक हड्डी, उपास्थि और रक्त; पेशी ऊतक विभिन्न पेशियाँ; तथा तंत्रिका ऊतक मस्तिष्क, मेरु रज्जु और तंत्रिकाएँ। यह क्रम समझना NTPC परीक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1
ऊतक का प्रकार
मुख्य विशेषता
शरीर में स्थान/उदाहरण
उपकला ऊतक
सुरक्षा एवं स्राव
त्वचा की बाहरी परत, आँत की परत
संयोजी ऊतक
जोड़ना एवं सहारा
रक्त, अस्थि, उपास्थि, स्नायु
पेशी ऊतक
संकुचन एवं गति
कंकाल पेशी, चिकनी पेशी, हृदय पेशी
तंत्रिका ऊतक
उद्दीपन संचरण
मस्तिष्क, मेरु रज्जु, न्यूरॉन
तालिका 2
अंग
मुख्य कार्य
संबंधित तंत्र
हृदय
रक्त पंप करना
परिसंचरण तंत्र
फेफड़े
गैसों का आदान-प्रदान
श्वसन तंत्र
यकृत
पित्त निर्माण, विषहरण
पाचन तंत्र
गुर्दे
मूत्र निर्माण
उत्सर्जन तंत्र
मस्तिष्क
नियंत्रण एवं समन्वय
तंत्रिका तंत्र
आमाशय
आंशिक पाचन
पाचन तंत्र
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[मानव शरीर और ऊतक] --> B[ऊतक के प्रकार]
B --> B1[उपकला ऊतक]
B --> B2[संयोजी ऊतक]
B --> B3[पेशी ऊतक]
B --> B4[तंत्रिका ऊतक]
A --> C[प्रमुख अंग]
C --> C1[हृदय रक्त पंप]
C --> C2[फेफड़े गैस विनिमय]
C --> C3[यकृत सबसे बड़ी ग्रंथि]
C --> C4[गुर्दे मूत्र निर्माण]
C --> C5[मस्तिष्क नियंत्रण]
C --> C6[आमाशय पाचन]
A --> D[अंग-तंत्र]
D --> D1[पाचन तंत्र]
D --> D2[श्वसन तंत्र]
D --> D3[परिसंचरण तंत्र]
D --> D4[उत्सर्जन तंत्र]
D --> D5[तंत्रिका तंत्र]
D --> D6[अंतःस्रावी तंत्र]
A --> E[महत्वपूर्ण तथ्य]
E --> E1[206 अस्थियाँ]
E --> E2[639 पेशियाँ]
E --> E3[त्वचा सबसे बड़ा अंग]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
गलती: रक्त को पेशी ऊतक मान लेना। वास्तव में रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है।
गलती: त्वचा को सबसे बड़ी ग्रंथि और यकृत को सबसे बड़ा अंग बताना। वास्तव में सबसे बड़ा अंग त्वचा तथा सबसे बड़ी ग्रंथि यकृत है।
गलती: वयस्क मानव में अस्थियों की संख्या 300 बताना। 300 अस्थियाँ शिशु में होती हैं; वयस्क में 206।
गलती: हृदय पेशी को ऐच्छिक पेशी बताना। हृदय पेशी अनैच्छिक होती है।
गलती: उपकला ऊतक को रक्तवाहिकाओं से युक्त मानना। उपकला ऊतक में रक्त वाहिकाएँ नहीं होतीं।
गलती: सबसे लंबी अस्थि फीमर के स्थान पर टिबिया या ह्यूमरस बताना। सबसे लंबी अस्थि फीमर (जाँघ की अस्थि) है।
9. परीक्षा युक्तियाँ
चार मूल ऊतकों के नाम, कार्य और उदाहरणों को एक तालिका के रूप में रटें; यह NTPC में सर्वाधिक पूछा जाने वाला भाग है।
'सबसे बड़ा' और 'सबसे लंबा' से संबंधित तथ्यों (त्वचा, यकृत, फीमर, स्टेपीज़) की अलग सूची बनाएँ।
शरीर संरचना के क्रम (कोशिका-ऊतक-अंग-तंत्र) को आरेख सहित याद करें।
ऐच्छिक, अनैच्छिक और हृदय पेशी के बीच का अंतर (स्थान एवं नियंत्रण) स्पष्ट रखें।
प्रत्येक अंग को उसके अंग-तंत्र के साथ जोड़कर पढ़ें; उदाहरण के लिए गुर्दा-उत्सर्जन, फेफड़ा-श्वसन।
10. निष्कर्ष
मानव शरीर और ऊतक का अध्ययन जीव विज्ञान की वह नींव है जिस पर पाचन, श्वसन, परिसंचरण जैसी सभी शारीरिक क्रियाएँ टिकी हैं। कोशिका से अंग-तंत्र तक का क्रम, चारों मूल ऊतकों की विशेषताएँ और प्रमुख अंगों के कार्य इस अध्याय के केंद्रीय बिंदु हैं। तथ्यात्मक संख्याओं (206 अस्थियाँ, 639 पेशियाँ) तथा 'सबसे बड़ा-सबसे लंबा' प्रकार के प्रश्नों को स्मरण कर NTPC परीक्षा में इस अध्याय से आसानी से अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। नियमित पुनरावृत्ति से यह अध्याय परीक्षा में पूर्ण अंक दिलाने में सक्षम है।