18.6 उत्सर्जन तंत्र Notes

18.6 उत्सर्जन तंत्र

विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (जीव विज्ञान) अध्याय: 18.6 उत्सर्जन तंत्र विषय-वस्तु: उत्सर्जी अंग

1. परिचय

उत्सर्जन (Excretion) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा शरीर से चयापचय के अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकाला जाता है। यह शरीर की रासायनिक संतुलन बनाए रखने की प्रक्रिया है। मानव शरीर के प्रमुख उत्सर्जी अंग हैं—गुर्दे (वृक्क), त्वचा, फेफड़े तथा यकृत। इनमें गुर्दे सबसे महत्वपूर्ण उत्सर्जी अंग हैं। शरीर में चयापचय के दौरान नाइट्रोजनी अपशिष्ट (यूरिया, यूरिक अम्ल) तथा कार्बन डाइऑक्साइड आदि बनते हैं, जिन्हें निष्कासित करना आवश्यक है।

गुर्दों (Kidneys) का मुख्य कार्य रक्त का निस्यंदन कर मूत्र बनाना तथा शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना है। गुर्दे शरीर में जल तथा लवणों का संतुलन भी बनाए रखते हैं। रेलवे NTPC परीक्षा में उत्सर्जन तंत्र से गुर्दों की संरचना, नेफ्रॉन, मूत्र निर्माण की प्रक्रिया, उत्सर्जी अंगों तथा गुर्दे से संबंधित विकारों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।

मानव में प्रमुख उत्सर्जी अंगों का विवरण इस प्रकार है—गुर्दे (मूत्र), त्वचा (पसीना), फेफड़े (CO2 एवं जलवाष्प) तथा यकृत (पित्त वर्णक)। यूरिया यकृत में बनकर गुर्दों से निष्कासित होती है। इस अध्याय में उत्सर्जन तंत्र की संरचना, नेफ्रॉन की कार्यविधि, मूत्र निर्माण तथा उत्सर्जन से संबंधित विकारों का विस्तृत अध्ययन किया गया है।

2. उत्सर्जी अंग और गुर्दे की संरचना

मानव शरीर के प्रमुख उत्सर्जी अंग निम्न हैं:

मूत्र का मार्ग: गुर्दा → मूत्रवाहिनी → मूत्राशय → मूत्रमार्ग → बाहर। इस क्रम को याद रखना परीक्षा के लिए आवश्यक है।

3. नेफ्रॉन की कार्यविधि और मूत्र निर्माण

मूत्र निर्माण नेफ्रॉन में तीन मुख्य चरणों में होता है:

एडीएच (ADH) हार्मोन: पीयूष ग्रंथि से स्रावित यह हार्मोन जल के पुनर्अवशोषण को नियंत्रित करता है। ADH की कमी से 'डायबिटीज इन्सिपिडस' होता है, जिसमें अत्यधिक पतला मूत्र बनता है।

मानव में प्रतिदिन मूत्र: एक स्वस्थ व्यक्ति में प्रतिदिन लगभग 1 से 1.5 लीटर मूत्र बनता है। गुर्दों से प्रतिदिन लगभग 180 लीटर फिल्ट्रेट बनता है, जिसमें से अधिकांश पुनः अवशोषित हो जाता है।

एल्डोस्टेरोन हार्मोन: अधिवृक्क ग्रंथि से स्रावित, जो सोडियम तथा पोटेशियम के संतुलन को नियंत्रित करता है।

4. उत्सर्जन से संबंधित विकार और रखरखाव

गुर्दे तथा उत्सर्जन तंत्र से संबंधित प्रमुख विकार निम्न हैं:

उत्सर्जन तंत्र का स्वास्थ्य: पर्याप्त जल पीना, कम नमक लेना, संतुलित आहार तथा नियमित व्यायाम गुर्दों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। गुर्दों की सुरक्षा के लिए अधिक शक्कर तथा प्रोटीन के अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए। मूत्र संक्रमण से बचाव हेतु स्वच्छता आवश्यक है।

गुर्दे के अन्य कार्य: गुर्दे शरीर में जल-लवण संतुलन, रक्तचाप नियंत्रण (रेनिन हार्मोन) तथा लाल रक्त कणिकाओं के निर्माण (एरिथ्रोपोइटिन हार्मोन) में भी सहायक होते हैं।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

उत्सर्जी अंग मुख्य अपशिष्ट निष्कासन का रूप
गुर्दा यूरिया, यूरिक अम्ल मूत्र
त्वचा जल, लवण, यूरिया पसीना
फेफड़े कार्बन डाइऑक्साइड श्वास द्वारा
यकृत पित्त वर्णक पित्त में

तालिका 2

मूत्र निर्माण का चरण स्थल क्रिया
निस्यंदन ग्लोमेरुलस रक्त का निस्यंदन
पुनर्अवशोषण नलिकाएँ ग्लूकोज-जल का पुनः अवशोषण
स्राव दूरस्थ नलिका अतिरिक्त आयनों का स्राव
एकत्रण एकत्रण नलिका अंतिम मूत्र

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[उत्सर्जन तंत्र] --> B[उत्सर्जी अंग]
    B --> B1[गुर्दे]
    B --> B2[त्वचा]
    B --> B3[फेफड़े]
    B --> B4[यकृत]
    A --> C[गुर्दे की संरचना]
    C --> C1[नेफ्रॉन]
    C --> C2[ग्लोमेरुलस]
    C --> C3[बोमैन कैप्सूल]
    C --> C4[मूत्रवाहिनी]
    A --> D[मूत्र निर्माण]
    D --> D1[निस्यंदन]
    D --> D2[पुनर्अवशोषण]
    D --> D3[स्राव]
    A --> E[हार्मोन]
    E --> E1[ADH पीयूष ग्रंथि]
    E --> E2[एल्डोस्टेरोन]
    A --> F[विकार]
    F --> F1[पथरी]
    F --> F2[नेफ्राइटिस]
    F --> F3[यूरीमिया]
    F --> F4[डायलिसिस]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

मानव उत्सर्जन तंत्र गुर्दा दायाँ गुर्दा बायाँ मूत्रवाहिनी मूत्राशय मूत्र का संग्रह मूत्रमार्ग स्वर्ण नियम मूत्र का मार्ग गुर्दा-मूत्रवाहिनी-मूत्राशय-मूत्रमार्ग है।

नेफ्रॉन की कार्यविधि 1. निस्यंदन ग्लोमेरुलस में रक्त से फिल्ट्रेट जल, ग्लूकोज, लवण रक्त कोशिकाएँ नहीं जातीं 2. पुनर्अवशोषण नलिकाओं में ग्लूकोज पूर्ण अवशोषण जल और लवण हेनले लूप में 3. स्राव अतिरिक्त H+, K+, अमोनिया मूत्र में स्रावित महत्वपूर्ण तथ्य प्रतिदिन मूत्र 1-1.5 लीटर, फिल्ट्रेट 180 लीटर स्वर्ण नियम: ADH जल पुनर्अवशोषण को नियंत्रित करता है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. गलती: यूरिया का निर्माण गुर्दे में होना बताना। यूरिया यकृत में बनता है और गुर्दों से निष्कासित होता है।
  2. गलती: नेफ्रॉन की संख्या 1000 बताना। प्रत्येक गुर्दे में लगभग 10 लाख नेफ्रॉन होते हैं।
  3. गलती: ग्लूकोज का पुनर्अवशोषण नहीं होता बताना। ग्लूकोज समीपस्थ नलिका में पूर्ण रूप से पुनः अवशोषित होता है।
  4. गलती: पसीने को यूरिया का मुख्य निष्कासन माध्यम बताना। यूरिया का मुख्य निष्कासन मूत्र द्वारा होता है।
  5. गलती: फेफड़े को अपशिष्ट रूप में यूरिया निकालने वाला बताना। फेफड़े CO2 तथा जलवाष्प निकालते हैं।
  6. गलती: ADH की कमी को मधुमेह (डायबिटीज मेलिटस) बताना। ADH की कमी से डायबिटीज इन्सिपिडस होता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. मूत्र निर्माण के तीन चरणों (निस्यंदन, पुनर्अवशोषण, स्राव) को उनके स्थलों के साथ याद करें।
  2. उत्सर्जी अंगों और उनके अपशिष्टों (गुर्दा-यूरिया, त्वचा-पसीना, फेफड़े-CO2) की तालिका रटें।
  3. नेफ्रॉन की संख्या, प्रतिदिन मूत्र मात्रा तथा फिल्ट्रेट (180 लीटर) जैसे आंकड़े स्मरण रखें।
  4. गुर्दे से संबंधित विकारों (पथरी, नेफ्राइटिस, यूरीमिया) तथा डायलिसिस का अध्ययन करें।
  5. हार्मोन—ADH (पीयूष ग्रंथि) तथा एल्डोस्टेरोन (अधिवृक्क)—के कार्य याद रखें।

10. निष्कर्ष

उत्सर्जन तंत्र शरीर से विषैले अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालकर रासायनिक संतुलन बनाए रखता है। गुर्दे और नेफ्रॉन की संरचना, मूत्र निर्माण की प्रक्रिया, उत्सर्जी अंग तथा संबंधित विकार इस अध्याय के केंद्रीय विषय हैं। रेलवे NTPC परीक्षा में उत्सर्जन तंत्र के प्रश्न नियमित रूप से आते हैं, इसलिए तालिकाओं एवं आरेखों के माध्यम से व्यवस्थित अध्ययन आवश्यक है। नियमित पुनरावृत्ति से इस अध्याय में पूर्ण अंक सरलता से प्राप्त किए जा सकते हैं।