विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (भौतिक विज्ञान)
अध्याय: 16.5 ऊष्मा और तापमान
विषय-वस्तु: ऊष्मा, तापमान
1. परिचय
ऊष्मा ऊर्जा का वह रूप है जो तापमान के अंतर के कारण एक वस्तु से दूसरी वस्तु में प्रवाहित होती है। ऊष्मा किसी निकाय की आंतरिक ऊर्जा से संबंधित है। जब दो वस्तुओं का तापमान भिन्न होता है, तो ऊष्मा उच्च तापमान से निम्न तापमान की ओर बहती है। ऊष्मा का SI मात्रक जूल (J) है, जबकि इसका पारंपरिक मात्रक कैलोरी है। 1 कैलोरी वह ऊष्मा है जो 1 ग्राम जल का तापमान 1°C बढ़ाती है। 1 कैलोरी = 4.186 जूल। ऊष्मा एक प्रवाहित राशि है, जबकि तापमान वस्तु की ऊष्मीय अवस्था का माप है।
तापमान किसी वस्तु की गर्मी या ठंडक की माप है, जो उसके अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा को दर्शाता है। तापमान जितना अधिक, अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा उतनी ही अधिक। तापमान मापने के यंत्र को थर्मामीटर कहते हैं। तापमान की माप विभिन्न पैमानों पर होती है — सेल्सियस, फारेनहाइट और केल्विन। केल्विन तापमान का SI मात्रक है। तापमान का निरपेक्ष शून्य -273.15°C पर होता है, जो 0 केल्विन कहलाता है। निरपेक्ष शून्य पर अणुओं की गति लगभग बंद हो जाती है।
इस अध्याय में हम ऊष्मा और तापमान के मूल अंतर, ऊष्मा के संचरण की तीन विधियाँ (चालन, संवहन, विकिरण), विशिष्ट ऊष्मा, गुप्त ऊष्मा, तापमान पैमानों का रूपांतरण, ऊष्मा का संरक्षण तथा ऊष्मा से संबंधित व्यावहारिक उदाहरणों का अध्ययन करेंगे। NTPC परीक्षा में इन अवधारणाओं से वैचारिक तथा संख्यात्मक दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं। ऊष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम भी तापमान की अवधारणा का आधार है।
2. ऊष्मा और तापमान: मूल अंतर, तापमान पैमाने
ऊष्मा बनाम तापमान: ऊष्मा ऊर्जा का प्रवाह है, जबकि तापमान वस्तु की ऊष्मीय अवस्था का संकेत है। ऊष्मा का मात्रक जूल/कैलोरी है, तापमान का मात्रक डिग्री सेल्सियस/केल्विन है। ऊष्मा प्रवाहित होती है, तापमान मापा जाता है। दो समान तापमान वाली वस्तुओं में अलग-अलग ऊष्मा हो सकती है।
तापमान पैमाने:
सेल्सियस (°C): जल का हिमांक 0°C तथा क्वथनांक 100°C।
फारेनहाइट (°F): जल का हिमांक 32°F तथा क्वथनांक 212°F।
केल्विन (K): वैज्ञानिक पैमाना, केल्विन = सेल्सियस + 273.15।
रूपांतरण सूत्र:C/100 = (F - 32)/180 = (K - 273.15)/100 या C/5 = (F - 32)/9 = (K - 273)/5। सरल रूप: K = C + 273 और F = (9/5)C + 32।
निरपेक्ष शून्य: 0 K = -273.15°C ≈ -273°C। यह न्यूनतम संभव तापमान है। इस तापमान पर अणुओं की तापीय गति न्यूनतम हो जाती है। तापमान का व्यावहारिक रूप से कोई ऊपरी परिमाण नहीं होता।
थर्मामीटर के प्रकार: क्लीनिकल थर्मामीटर (35°C से 42°C तक, मानव शरीर का ताप), प्रयोगशाला थर्मामीटर, निरपेक्ष/वैज्ञानिक थर्मामीटर। क्लीनिकल थर्मामीटर में किंक होती है, जो पारे को वापस गिरने से रोकती है।
ऊष्मा की इकाइयाँ: 1 कैलोरी = 4.186 जूल। 1 किलोकैलोरी = 1000 कैलोरी। ऊष्मा की बड़ी इकाई किलोकैलोरी खाद्य पदार्थों की ऊर्जा मापने में प्रयुक्त होती है।
हल किया गया उदाहरण: 100°C को फारेनहाइट में बदलिए।
हल: F = (9/5)C + 32 = (9/5) × 100 + 32 = 180 + 32 = 212°F
हल किया गया उदाहरण: 27°C को केल्विन में बदलिए।
हल: K = C + 273 = 27 + 273 = 300 K
3. विशिष्ट ऊष्मा, गुप्त ऊष्मा और ऊष्मा की गणना
विशिष्ट ऊष्मा (Specific Heat): किसी पदार्थ के 1 kg द्रव्यमान का तापमान 1°C (या 1 K) बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा उस पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा कहलाती है। इसका SI मात्रक J/kg·K है। जल की विशिष्ट ऊष्मा 4200 J/kg·K है, जो अन्य पदार्थों की तुलना में उच्च होती है। उच्च विशिष्ट ऊष्मा के कारण जल गर्मी को अधिक समय तक संग्रहित रखता है।
ऊष्मा की गणना का सूत्र:Q = m·c·ΔT, जहां m द्रव्यमान, c विशिष्ट ऊष्मा और ΔT तापमान में परिवर्तन है।
गुप्त ऊष्मा (Latent Heat): अवस्था परिवर्तन के दौरान तापमान बिना बदले अवशोषित या मुक्त होने वाली ऊष्मा गुप्त ऊष्मा कहलाती है। गुप्त ऊष्मा के दौरान तापमान स्थिर रहता है, केवल अवस्था बदलती है।
गलन की गुप्त ऊष्मा: ठोस का द्रव में बदलने पर अवशोषित ऊष्मा। बर्फ के गलन की गुप्त ऊष्मा 3.34 × 10⁵ J/kg है। 0°C की बर्फ 0°C के जल में बदलती है।
वाष्पन की गुप्त ऊष्मा: द्रव का वाष्प में बदलने पर अवशोषित ऊष्मा। जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा 22.6 × 10⁵ J/kg है। वाष्पीकरण में बहुत अधिक ऊष्मा अवशोषित होती है, यही कारण है कि पसीने से शरीर ठंडा होता है।
गुप्त ऊष्मा की गणना:Q = m × L, जहां L गुप्त ऊष्मा है।
हल किया गया उदाहरण: 2 kg जल का तापमान 20°C से बढ़ाकर 70°C करने के लिए कितनी ऊष्मा चाहिए? (जल की विशिष्ट ऊष्मा = 4200 J/kg·K)
हल: Q = m·c·ΔT = 2 × 4200 × (70 - 20) = 2 × 4200 × 50 = 420000 J
हल किया गया उदाहरण: 0°C पर 1 kg बर्फ को 0°C के जल में बदलने के लिए कितनी ऊष्मा आवश्यक है? (गलन की गुप्त ऊष्मा = 3.34 × 10⁵ J/kg)
हल: Q = m × L = 1 × 3.34 × 10⁵ = 3.34 × 10⁵ J
4. ऊष्मा के संचरण की विधियाँ और व्यावहारिक अनुप्रयोग
चालन (Conduction): ऊष्मा का कणों द्वारा बिना कणों के स्थानांतरण के संचरण चालन कहलाता है। यह मुख्यतः ठोसों में होता है। धातुएँ ऊष्मा की सुचालक होती हैं (चांदी सर्वोत्तम), जबकि लकड़ी, प्लास्टिक, काँच कुचालक होते हैं। तलझे हुए कुकर के हैंडल लकड़ी/प्लास्टिक के बनाए जाते हैं।
संवहन (Convection): ऊष्मा का संचरण द्रव या गैस के कणों के आपस में स्थानांतरित होने से होता है। गर्म द्रव हल्का होकर ऊपर उठता है और ठंडा नीचे आता है। समुद्री पवनें, स्थलीय पवनें, एयर कंडीशनर की स्थिति संवहन के उदाहरण हैं। रेफ्रिजरेटर का फ्रीजर ऊपर रखा जाता है ताकि ठंडी वायु संवहन से नीचे जाए।
विकिरण (Radiation): ऊष्मा का विद्युतचुंबकीय तरंगों द्वारा बिना किसी माध्यम के संचरण विकिरण कहलाता है। सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी तक निर्वात से होकर विकिरण द्वारा पहुँचती है। काली सतह ऊष्मा का अधिक अवशोषण करती है, चमकीली सतह अधिक परावर्तन करती है। थर्मस फ्लास्क में विकिरण को रोकने के लिए चमकदार दीवारें होती हैं।
थर्मस फ्लास्क: इसमें दोहरी दीवारों के बीच निर्वात होता है, जो चालन और संवहन रोकता है; चमकदार परतें विकिरण रोकती हैं। इससे ऊष्मा का लगभग पूर्ण संरक्षण होता है।
ऊष्मा के प्रभाव: तापमान में वृद्धि, आयतन में वृद्धि (प्रसार), अवस्था परिवर्तन, रासायनिक अभिक्रियाओं की दर में परिवर्तन। धातुओं का ऊष्मीय प्रसार सड़कों के जोड़ों, रेल पटरियों के बीच के अंतर से संबंधित है।
वाष्पीकरण से ठंडक: द्रव का वाष्पीकरण उष्मा अवशोषित करता है, जिससे शेष द्रव और उसकी सतह ठंडी होती है। मिट्टी के घड़े में पानी ठंडा रहना, पसीने से ठंडक, कुएँ के पानी की ठंडक वाष्पीकरण के उदाहरण हैं।
हल किया गया उदाहरण: 0.5 kg जल के वाष्पन के लिए आवश्यक ऊष्मा ज्ञात कीजिए। (वाष्पन की गुप्त ऊष्मा = 22.6 × 10⁵ J/kg)
हल: Q = m × L = 0.5 × 22.6 × 10⁵ = 11.3 × 10⁵ J
हल किया गया उदाहरण: 3 kg द्रव्यमान की वस्तु का तापमान 10°C बढ़ाने में 63000 J ऊष्मा लगती है। विशिष्ट ऊष्मा ज्ञात कीजिए।
हल: c = Q/(m·ΔT) = 63000/(3 × 10) = 2100 J/kg·K
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1
विधि
माध्यम
कैसे होता है
उदाहरण
चालन
ठोस
कणों के कंपन से
लोहे की छड़ का गर्म होना
संवहन
द्रव व गैस
कणों के स्थानांतरण से
समुद्री पवन
विकिरण
निर्वात भी
विद्युतचुंबकीय तरंगें
सूर्य से ऊष्मा
तालिका 2
मात्रा
मान/मात्रक
जल की विशिष्ट ऊष्मा
4200 J/kg·K
बर्फ गलन की गुप्त ऊष्मा
3.34 × 10⁵ J/kg
जल वाष्पन की गुप्त ऊष्मा
22.6 × 10⁵ J/kg
1 कैलोरी
4.186 जूल
निरपेक्ष शून्य
-273.15°C
क्लीनिकल थर्मामीटर परास
35°C - 42°C
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[16.5 ऊष्मा और तापमान] --> B[ऊष्मा]
B --> B1[ऊर्जा का रूप]
B --> B2[मात्रक जूल कैलोरी]
B --> B3[उच्च से निम्न ताप की ओर]
A --> C[तापमान]
C --> C1[अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा]
C --> C2[सेल्सियस फारेनहाइट केल्विन]
C --> C3[निरपेक्ष शून्य -273°C]
A --> D[विशिष्ट ऊष्मा]
D --> D1[Q = mcΔT]
D --> D2[जल की अधिकतम 4200]
A --> E[गुप्त ऊष्मा]
E --> E1[Q = mL]
E --> E2[गलन और वाष्पन]
A --> F[संचरण की विधियाँ]
F --> F1[चालन ठोस]
F --> F2[संवहन द्रव गैस]
F --> F3[विकिरण निर्वात]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
ऊष्मा और तापमान को एक ही चीज़ समझना: ऊष्मा ऊर्जा का प्रवाह है, तापमान ऊष्मीय अवस्था का माप है।
गुप्त ऊष्मा में भी तापमान बदलता है यह मानना: अवस्था परिवर्तन के दौरान तापमान नियत रहता है।
केल्विन में 273 जोड़ने के स्थान पर घटाना: K = C + 273 होता है, C = K - 273।
विकिरण के लिए माध्यम आवश्यक मानना: विकिरण निर्वात से होकर भी गुजरता है, सूर्य की ऊष्मा इसी से पहुँचती है।
सभी धातुओं की विशिष्ट ऊष्मा जल से अधिक मानना: जल की विशिष्ट ऊष्मा 4200 J/kg·K सबसे अधिक है।
वाष्पीकरण से ठंडक के स्थान पर गर्मी मानना: वाष्पीकरण ऊष्मा अवशोषित कर ठंडक उत्पन्न करता है।
9. परीक्षा युक्तियाँ
रूपांतरण सूत्र C/5 = (F-32)/9 = (K-273)/5 याद रखें; K = C + 273 सबसे अधिक प्रयुक्त है।
जल की विशिष्ट ऊष्मा 4200 J/kg·K तथा गुप्त ऊष्मा के मान (3.34 × 10⁵ और 22.6 × 10⁵) रटें।
चालन-संवहन-विकिरण के उदाहरण अलग-अलग याद रखें; सूर्य की ऊष्मा विकिरण है।
थर्मस फ्लास्क में निर्वात (चालन-संवहन रोकता है) और चमकदार परत (विकिरण रोकती है) का कारण समझें।
Q = mcΔT संख्यात्मक प्रश्नों में इकाइयों को SI में बदलें, ग्राम को किलोग्राम में।
क्लीनिकल थर्मामीटर का परास 35°C-42°C और किंक का कार्य याद रखें।
10. निष्कर्ष
ऊष्मा और तापमान ऊष्मागतिकी की आधारशिला हैं, जो प्रकृति के सभी परिवर्तनों में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। ऊष्मा और तापमान का अंतर, तापमान पैमानों का रूपांतरण, विशिष्ट ऊष्मा तथा गुप्त ऊष्मा की गणना, और ऊष्मा संचरण की तीन विधियों की समझ परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। वाष्पीकरण से ठंडक, थर्मस फ्लास्क, समुद्री पवन जैसे व्यावहारिक उदाहरण अवधारणाओं को स्थायी रूप से स्मरण रखने में सहायक होते हैं। इकाई रूपांतरण का अभ्यास करने से संख्यात्मक प्रश्न तेजी से हल होते हैं। यह अध्याय विज्ञान के अनेक विषयों से जुड़ा होने के कारण NTPC परीक्षा में अत्यधिक लाभकारी है।