विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (भौतिक विज्ञान)
अध्याय: 16.6 ध्वनि
विषय-वस्तु: ध्वनि तरंगें
1. परिचय
ध्वनि ऊर्जा का वह रूप है जो किसी वस्तु के कंपन के कारण उत्पन्न होती है तथा कानों में सुनाई देती है। ध्वनि उत्पन्न करने के लिए कंपन अनिवार्य है। ध्वनि के प्रचार के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है; निर्वात में ध्वनि नहीं चल सकती। ध्वनि एक अनुदैर्घ्य तरंग है, जिसमें माध्यम के कण तरंग की दिशा में आगे-पीछे कंपन करते हैं। ध्वनि तरंगें संपीड़न और विरलन के रूप में माध्यम में संचरित होती हैं। ध्वनि की उत्पत्ति, संचरण और श्रवण की प्रक्रिया NTPC परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ध्वनि का संचरण ठोस, द्रव और गैस तीनों में होता है। ध्वनि की चाल माध्यम की प्रत्यास्थता तथा घनत्व पर निर्भर करती है। ठोस में ध्वनि की चाल सबसे अधिक, द्रव में मध्यम और गैस में सबसे कम होती है। वायु में ध्वनि की चाल 0°C पर लगभग 331 m/s तथा 20°C पर लगभग 343 m/s होती है। तापमान बढ़ने पर ध्वनि की चाल बढ़ती है। ध्वनि की चाल प्रकाश की चाल से बहुत कम होती है, इसीलिए बिजली चमकने के बाद गरजने की आवाज देर से सुनाई देती है।
इस अध्याय में हम ध्वनि तरंगों के गुण, आवृत्ति, आयाम, तरंगदैर्घ्य, चाल, प्रतिध्वनि, परावर्तन, सोनार, अल्ट्रासाउंड, श्रव्यता की सीमा तथा ध्वनि प्रदूषण का अध्ययन करेंगे। ध्वनि की गणना से संबंधित सूत्र v = fλ (चाल = आवृत्ति × तरंगदैर्घ्य) सबसे महत्वपूर्ण है। मानव कान 20 Hz से 20000 Hz के बीच की ध्वनि सुन सकता है; इससे कम आवृत्ति को इन्फ्रासाउंड तथा अधिक को अल्ट्रासाउंड कहते हैं।
2. ध्वनि तरंगों के गुण: आवृत्ति, आयाम, तरंगदैर्घ्य और चाल
तरंग: कंपन द्वारा ऊर्जा के संचरण की प्रक्रिया तरंग कहलाती है। ध्वनि यांत्रिक तरंग है, जिसके संचरण के लिए माध्यम आवश्यक है। प्रकाश विद्युतचुंबकीय तरंग है, जिसे माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।
आवृत्ति: एक सेकंड में उत्पन्न होने वाले कंपनों की संख्या आवृत्ति कहलाती है। इसका SI मात्रक हर्ट्ज (Hz) है। आवृत्ति जितनी अधिक, ध्वनि उतनी तीक्ष्ण होती है। आवृत्ति से ध्वनि की तारत्व निर्धारित होती है।
आयाम: माध्यम के कणों का माध्य स्थिति से अधिकतम विस्थापन आयाम कहलाता है। आयाम से ध्वनि की प्रबलता निर्धारित होती है। आयाम अधिक होने पर ध्वनि प्रबल होती है। ध्वनि की प्रबलता डेसिबल (dB) में मापी जाती है।
तरंगदैर्घ्य: एक पूर्ण तरंग की लंबाई तरंगदैर्घ्य कहलाती है, इसे λ से दर्शाते हैं। दो क्रमागत संपीड़न या विरलन के केंद्रों के बीच की दूरी तरंगदैर्घ्य होती है। इसका मात्रक मीटर है।
ध्वनि की चाल का सूत्र:v = f × λ, जहां v चाल, f आवृत्ति और λ तरंगदैर्घ्य है। इस सूत्र से किसी भी राशि की गणना की जा सकती है। ध्वनि की चाल माध्यम की प्रत्यास्थता, घनत्व और तापमान पर निर्भर करती है।
अनुदैर्घ्य और अनुप्रस्थ तरंग: ध्वनि अनुदैर्घ्य तरंग है, जिसमें कण तरंग के समांतर कंपन करते हैं। प्रकाश तथा पानी की लहरें अनुप्रस्थ तरंगें हैं, जिनमें कण तरंग के लंबवत कंपन करते हैं।
श्रव्यता की सीमा: मानव कान की श्रव्यता सीमा 20 Hz से 20000 Hz है। 20 Hz से कम — इन्फ्रासाउंड (भूकंप से उत्पन्न), 20000 Hz से अधिक — अल्ट्रासाउंड (चमगादड़, डॉल्फिन तथा चिकित्सा उपयोग)।
हल किया गया उदाहरण: ध्वनि की आवृत्ति 500 Hz है तथा तरंगदैर्घ्य 0.68 m है। ध्वनि की चाल ज्ञात कीजिए।
हल: v = f × λ = 500 × 0.68 = 340 m/s
हल किया गया उदाहरण: ध्वनि की चाल 340 m/s है तथा आवृत्ति 170 Hz है। तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए।
हल: λ = v/f = 340/170 = 2 m
3. ध्वनि का परावर्तन, प्रतिध्वनि और ध्वनि प्रदूषण
ध्वनि का परावर्तन: ध्वनि तरंगें किसी सतह से टकराकर वापस लौटती हैं, इसे ध्वनि का परावर्तन कहते हैं। परावर्तन के नियमों के अनुसार आपतन कोण = परावर्तन कोण। ध्वनि का परावर्तन प्रकाश के परावर्तन के समान होता है।
प्रतिध्वनि: जब ध्वनि किसी दूर सतह से परावर्तित होकर सुनने वाले तक वापस पहुँचती है, तो उसे प्रतिध्वनि कहते हैं। प्रतिध्वनि सुनने के लिए स्रोत से परावर्तक सतह की न्यूनतम दूरी 17.2 मीटर होनी चाहिए, क्योंकि कान में ध्वनि का प्रभाव 0.1 सेकंड तक रहता है। दूरी = (344 × 0.1)/2 = 17.2 m।
ध्वनि के अनुप्रयोग: सोनार (पनडुब्बी में गहराई मापना), ध्वनि अवशोषण (ध्वनिरोधी कक्ष, थिएटर के पर्दे), स्टेथोस्कोप (शरीर की ध्वनि सुनना), मेगाफोन (ध्वनि को एक दिशा में भेजना)। सभी ध्वनि परावर्तन के सिद्धांत पर आधारित हैं।
सोनार: यह अल्ट्रासोनिक ध्वनि तरंगें भेजकर प्रतिध्वनि के समय से समुद्र की गहराई तथा मछलियों का पता लगाता है। गहराई = (चाल × समय)/2।
ध्वनि प्रदूषण: अवांछित और अत्यधिक तेज ध्वनि को ध्वनि प्रदूषण कहते हैं। ध्वनि की प्रबलता का मात्रक डेसिबल (dB) है। 80 dB से अधिक ध्वनि कानों के लिए हानिकारक होती है। फुसफुसाहट लगभग 30 dB, सामान्य बातचीत 60 dB, रेल इंजन 90 dB तथा तेज गड़गड़ाहट 120 dB से अधिक होती है।
प्रबलता एवं तारत्व: प्रबलता आयाम पर निर्भर करती है, जबकि तारत्व आवृत्ति पर निर्भर करती है। मोटी तार की आवाज कम आवृत्ति की, पतली तार की आवाज अधिक आवृत्ति की होती है।
हल किया गया उदाहरण: एक पहाड़ से ध्वनि परावर्तित होकर 2 सेकंड में सुनाई देती है। ध्वनि की चाल 340 m/s हो तो पहाड़ की दूरी ज्ञात कीजिए।
हल: कुल दूरी = चाल × समय = 340 × 2 = 680 m
पहाड़ की दूरी = 680/2 = 340 m
हल किया गया उदाहरण: एक पनडुब्बी सोनार द्वारा अल्ट्रासोनिक तरंग भेजती है, जो समुद्र तल से परावर्तित होकर 1.6 सेकंड में लौटती है। ध्वनि चाल 1500 m/s हो तो गहराई ज्ञात कीजिए।
हल: गहराई = (v × t)/2 = (1500 × 1.6)/2 = 2400/2 = 1200 m
4. अल्ट्रासाउंड, अनुप्रयोग और ध्वनि की चाल को प्रभावित करने वाले कारक
अल्ट्रासाउंड: 20000 Hz से अधिक आवृत्ति की ध्वनि अल्ट्रासाउंड है। चमगादड़, कुत्ते और डॉल्फिन इसका उपयोग करते हैं। अल्ट्रासाउंड की तरंगदैर्घ्य छोटी होती है, जिससे यह सीधी दिशा में लक्ष्य तक जाती है।
अल्ट्रासाउंड के उपयोग: चिकित्सा क्षेत्र में सोनोग्राफी, टूटी हड्डियों की जाँच, उपकरणों की सफाई, धातु की दरारों का पता लगाना, रत्नों की कटाई। ये सभी उच्च आवृत्ति की छोटी तरंगों के कारण संभव हैं।
ध्वनि की चाल को प्रभावित करने वाले कारक: (क) माध्यम की प्रत्यास्थता — प्रत्यास्थ माध्यम में चाल अधिक; (ख) घनत्व — घनत्व बढ़ने पर चाल बढ़ती है, परंतु कठोर माध्यम में चाल अधिक होती है; (ग) तापमान — तापमान बढ़ने पर चाल बढ़ती है; (घ) आर्द्रता — नम हवा में चाल अधिक होती है।
विभिन्न माध्यमों में चाल: लोहा/स्टील में ध्वनि चाल लगभग 5000-6000 m/s, जल में लगभग 1500 m/s, वायु में लगभग 343 m/s (20°C पर) होती है।
कान की संरचना और श्रवण: ध्वनि तरंगें कर्ण पटल में कंपन उत्पन्न करती हैं, जो आंतरिक कान में विद्युत संकेतों में बदलकर मस्तिष्क तक पहुँचते हैं।
निर्वात में ध्वनि का संचरण: निर्वात में कोई कण नहीं होते, अतः कंपन संचारित नहीं हो सकता। यही कारण है कि चंद्रमा पर ध्वनि नहीं सुनाई देती। निर्वात में बजाई घंटी की आवाज नहीं सुनाई देती।
हल किया गया उदाहरण: एक ध्वनि तरंग की आवृत्ति 1000 Hz तथा तरंगदैर्घ्य 0.33 m है। इसकी चाल ज्ञात कीजिए।
हल: v = f × λ = 1000 × 0.33 = 330 m/s
हल किया गया उदाहरण: किसी ध्वनि स्रोत की आवृत्ति 20 kHz है। इसका आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।
हल: आवर्तकाल T = 1/f = 1/(20 × 10³) = 5 × 10⁻⁵ s
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1
राशि
परिभाषा
SI मात्रक
आवृत्ति
1 सेकंड में कंपनों की संख्या
हर्ट्ज (Hz)
तरंगदैर्घ्य
एक पूर्ण तरंग की लंबाई
मीटर (m)
आयाम
माध्य स्थिति से अधिकतम विस्थापन
मीटर (m)
आवर्तकाल
एक कंपन में लगा समय
सेकंड (s)
प्रबलता
ध्वनि की तीव्रता
डेसिबल (dB)
ध्वनि चाल
v = fλ
m/s
तालिका 2
माध्यम
ध्वनि की चाल (लगभग)
वायु (0°C)
331 m/s
वायु (20°C)
343 m/s
जल
1500 m/s
लोहा/स्टील
5000-6000 m/s
काँच
5000 m/s
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[16.6 ध्वनि] --> B[ध्वनि तरंगें]
B --> B1[अनुदैर्घ्य तरंग]
B --> B2[संपीड़न और विरलन]
A --> C[गुण]
C --> C1[आवृत्ति हर्ट्ज]
C --> C2[तरंगदैर्घ्य मीटर]
C --> C3[आयाम]
C --> C4[चाल v = fλ]
A --> D[माध्यम]
D --> D1[ठोस में सबसे तेज]
D --> D2[गैस में धीमी]
D --> D3[निर्वात में नहीं चलती]
A --> E[परावर्तन]
E --> E1[प्रतिध्वनि]
E --> E2[सोनार]
E --> E3[स्टेथोस्कोप]
A --> F[श्रव्यता]
F --> F1[20 से 20000 हर्ट्ज]
F --> F2[इन्फ्रासाउंड]
F --> F3[अल्ट्रासाउंड]
A --> G[ध्वनि प्रदूषण]
G --> G1[डेसिबल इकाई]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
निर्वात में ध्वनि चलती है यह मानना: ध्वनि को माध्यम चाहिए, निर्वात में यह नहीं चलती।
आवृत्ति और प्रबलता को एक ही राशि समझना: तारत्व आवृत्ति से, प्रबलता आयाम से निर्धारित होती है।
ध्वनि की चाल को सभी माध्यमों में समान मानना: ठोस में सबसे अधिक, गैस में सबसे कम।
प्रतिध्वनि की दूरी की गणना में 2 से भाग देना भूलना: गहराई/दूरी = (चाल × समय)/2 होती है।
श्रव्यता सीमा को गलत लिखना: 20 Hz से 20000 Hz होती है, 20 kHz से 200 kHz नहीं।
आवर्तकाल को आवृत्ति समझना: आवर्तकाल T = 1/f होता है, आवृत्ति f = 1/T।
9. परीक्षा युक्तियाँ
v = fλ सूत्र से तीनों राशियों की गणना के अभ्यास करें, यह सबसे अधिक पूछा जाता है।
प्रतिध्वनि के प्रश्न में कुल दूरी को 2 से भाग देना न भूलें, क्योंकि ध्वनि आती-जाती है।
चाल के मान याद रखें: वायु 343, जल 1500, स्टील 5000-6000 m/s।
श्रव्यता सीमा 20 Hz - 20000 Hz और उससे नीचे/ऊपर के नाम (इन्फ्रा/अल्ट्रा) स्पष्ट रखें।
सोनार, स्टेथोस्कोप, मेगाफोन सभी ध्वनि परावर्तन के उदाहरण हैं, इन्हें अलग-अलग याद करें।
डेसिबल ध्वनि प्रबलता का मात्रक है, इसे आवृत्ति के साथ न भ्रमित करें।
10. निष्कर्ष
ध्वनि यांत्रिक तरंगों के अध्ययन का सबसे व्यावहारिक क्षेत्र है। ध्वनि की उत्पत्ति कंपन से, संचरण माध्यम से और गुण आवृत्ति, आयाम तथा तरंगदैर्घ्य से निर्धारित होते हैं। प्रतिध्वनि, सोनार, अल्ट्रासाउंड जैसे अनुप्रयोग ध्वनि परावर्तन के सिद्धांत पर आधारित हैं। श्रव्यता की सीमा, विभिन्न माध्यमों में चाल तथा ध्वनि प्रदूषण की समझ से वैचारिक प्रश्न आसानी से हल होते हैं। संख्यात्मक अभ्यास से v = fλ और प्रतिध्वनि की गणना में तेजी आती है। यह अध्याय NTPC की दृष्टि से सरल तथा उच्च स्कोरिंग है।