विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (भौतिक विज्ञान)
अध्याय: 16.7 प्रकाश और परावर्तन
विषय-वस्तु: प्रकाश, परावर्तन
1. परिचय
प्रकाश विद्युतचुंबकीय तरंगों का वह रूप है जो आँखों में दृष्टि का अनुभव उत्पन्न करता है। प्रकाश एक अनुप्रस्थ तरंग है, जिसके संचरण के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। निर्वात में प्रकाश की चाल 3 × 10⁸ m/s होती है, जो ब्रह्मांड में अधिकतम संभव चाल है। प्रकाश सरल रेखा में चलता है, इसी गुण को प्रकाश का सरल रेखीय संचरण कहते हैं। प्रकाश के अध्ययन को प्रकाशिकी कहते हैं, जिसके अंतर्गत परावर्तन, अपवर्तन, लेंस, दर्पण आदि का अध्ययन होता है। NTPC परीक्षा में प्रकाश से अनेक वैचारिक और संख्यात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं।
परावर्तन वह परिघटना है जिसमें प्रकाश किरणें किसी सतह से टकराकर उसी माध्यम में वापस लौट जाती हैं। दर्पण, चमकदार सतह, शांत जल सतह पर प्रकाश का परावर्तन होता है। परावर्तन के नियम कहते हैं — आपतन कोण, परावर्तन कोण के बराबर होता है तथा आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं। परावर्तन के दो प्रकार हैं — नियमित परावर्तन (चिकनी सतह पर) तथा अनियमित परावर्तन (खुरदरी सतह पर)। इन्हीं नियमों पर समतल दर्पण, गोलीय दर्पण, पेरिस्कोप, कैलीडोस्कोप आदि कार्य करते हैं।
इस अध्याय में हम प्रकाश की प्रकृति, परावर्तन के नियम, समतल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब, गोलीय दर्पण (अवतल तथा उत्तल), दर्पण सूत्र, आवर्धन, अपवर्तन, अपवर्तनांक, लेंस तथा प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण का अध्ययन करेंगे। मानव आँख, निकट दृष्टि और दूर दृष्टि दोष तथा इनके संशोधन के लिए उपयोग होने वाले लेंस भी इस अध्याय के महत्वपूर्ण भाग हैं। ये सभी अवधारणाएँ दैनिक जीवन में सदैव उपयोग होती हैं।
2. परावर्तन: नियम, समतल दर्पण और गोलीय दर्पण
परावर्तन के नियम: (क) आपतन कोण हमेशा परावर्तन कोण के बराबर होता है (i = r)। (ख) आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर अभिलंब तीनों एक ही तल में स्थित होते हैं। आपतन कोण अभिलंब से मापा जाता है।
समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब: समतल दर्पण में बना प्रतिबिम्ब सदैव आभासी, सीधा तथा आकार में वस्तु के बराबर होता है। प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे वस्तु की दूरी के बराबर दूरी पर बनता है। समतल दर्पण में पार्श्व परिवर्तन (लगाओ ओर दाएँ-बाएँ उलटना) होता है। वस्तु और दर्पण के बीच की दूरी दोगुनी करने पर वस्तु और प्रतिबिम्ब के बीच की दूरी चार गुनी हो जाती है।
गोलीय दर्पण: काँच की गोल सतह से बने दर्पण गोलीय दर्पण कहलाते हैं। दो प्रकार — अवतल दर्पण (अंदर की ओर वक्र, फोकस के बीच वस्तु रखने पर आवर्धित आभासी प्रतिबिम्ब) तथा उत्तल दर्पण (बाहर की ओर वक्र, हमेशा छोटा सीधा आभासी प्रतिबिम्ब)। उत्तल दर्पण का दृष्टि क्षेत्र अधिक होता है, इसीलिए वाहनों में पश्च दृश्य दर्पण के रूप में प्रयुक्त होता है।
गोलीय दर्पण से संबंधित पद: ध्रुव (P) दर्पण का केंद्र बिंदु, वक्रता केंद्र (C), वक्रता त्रिज्या (R), मुख्य अक्ष, फोकस (F), फोकस दूरी (f)। R = 2f होता है। अवतल दर्पण का फोकस दूरी ऋणात्मक, उत्तल का धनात्मक लेते हैं।
गोलीय दर्पण की छवि स्थिति: वस्तु को फोकस के बीच रखने पर अवतल दर्पण आवर्धित, सीधा तथा आभासी प्रतिबिम्ब बनाता है (शेविंग दर्पण)। वस्तु अनंत पर होने पर प्रतिबिम्ब फोकस पर वास्तविक बनता है। अवतल दर्पण वास्तविक और आभासी दोनों प्रतिबिम्ब बना सकता है, उत्तल दर्पण सदैव आभासी प्रतिबिम्ब बनाता है।
दर्पण सूत्र:1/v + 1/u = 1/f, जहां u वस्तु दूरी, v प्रतिबिम्ब दूरी तथा f फोकस दूरी है। आवर्धन m = -v/u होता है; m का धनात्मक मान सीधा और ऋणात्मक मान उल्टा प्रतिबिम्ब दर्शाता है।
हल किया गया उदाहरण: किसी वस्तु को अवतल दर्पण के सामने 20 cm पर रखा गया है। दर्पण की फोकस दूरी 15 cm है। प्रतिबिम्ब की स्थिति ज्ञात कीजिए।
हल: u = -20 cm, f = -15 cm
1/v = 1/f - 1/u = -1/15 + 1/20 = (-4 + 3)/60 = -1/60 → v = -60 cm
प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने 60 cm पर बनेगा।
हल किया गया उदाहरण: उत्तल दर्पण की फोकस दूरी 30 cm है। वस्तु को 60 cm दूर रखने पर प्रतिबिम्ब कहाँ बनेगा?
हल: u = -60 cm, f = +30 cm
1/v = 1/f - 1/u = 1/30 + 1/60 = 3/60 = 1/20 → v = +20 cm
प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे 20 cm पर (आभासी) बनेगा।
3. अपवर्तन, अपवर्तनांक और लेंस
अपवर्तन: जब प्रकाश किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है, तो वह अपने मार्ग से मुड़ जाती है, इसे अपवर्तन कहते हैं। इसका कारण दोनों माध्यमों में प्रकाश की चाल में अंतर है। विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाने पर किरण अभिलंब की ओर झुकती है; सघन से विरल में जाने पर अभिलंब से दूर हटती है।
अपवर्तनांक: किसी माध्यम का अपवर्तनांक निर्वात में प्रकाश की चाल तथा उस माध्यम में प्रकाश की चाल का अनुपात होता है। n = चाल निर्वात / चाल माध्यम। काँच का अपवर्तनांक लगभग 1.5 है। अपवर्तनांक जितना अधिक, माध्यम उतना सघन। अपवर्तनांक की कोई इकाई नहीं होती।
स्नेल का नियम:n₁·sin i = n₂·sin r — आपतन कोण की ज्या तथा अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात स्थिर रहता है। यह अपवर्तन का दूसरा नियम है।
क्रान्तिक कोण और पूर्ण आंतरिक परावर्तन: सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाते समय जब आपतन कोण एक निश्चित कोण (क्रान्तिक कोण) से अधिक हो जाता है, तो प्रकाश पूर्ण रूप से वापस परावर्तित हो जाता है। इसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं। हीरे की चमक तथा फाइबर ऑप्टिक्स इसी पर आधारित हैं।
लेंस: पारदर्शी काँच की वह सतह जो प्रकाश का अपवर्तन कर प्रतिबिम्ब बनाती है। दो प्रकार — उत्तल लेंस (बीच में मोटा, अभिसारी) और अवतल लेंस (बीच में पतला, अपसारी)। उत्तल लेंस का फोकस दूरी धनात्मक, अवतल का ऋणात्मक होता है। लेंस सूत्र भी 1/v - 1/u = 1/f होता है।
उत्तल लेंस के प्रयोग: आवर्धक लेंस, कैमरा, माइक्रोस्कोप, दूरबीन, आँख का लेंस। अवतल लेंस का उपयोग निकट दृष्टि दोष के चश्मे में होता है।
प्रतिबिम्ब बनने के नियम: उत्तल लेंस में वस्तु फोकस के बीच होने पर आवर्धित आभासी सीधा प्रतिबिम्ब; वस्तु 2F से परे होने पर उल्टा छोटा वास्तविक प्रतिबिम्ब बनता है। आँख में उत्तल लेंस रेटिना पर उल्टा वास्तविक प्रतिबिम्ब बनाता है।
हल किया गया उदाहरण: उत्तल लेंस की फोकस दूरी 10 cm है। वस्तु को 30 cm दूर रखने पर प्रतिबिम्ब की स्थिति ज्ञात कीजिए।
हल: u = -30 cm, f = +10 cm
1/v = 1/f + 1/u = 1/10 - 1/30 = (3 - 1)/30 = 2/30 → v = 15 cm
प्रतिबिम्ब लेंस से 15 cm दूर वास्तविक बनेगा।
हल किया गया उदाहरण: निर्वात में प्रकाश की चाल 3 × 10⁸ m/s है तथा काँच में 2 × 10⁸ m/s है। काँच का अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए।
हल: n = 3 × 10⁸ / 2 × 10⁸ = 1.5
4. प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण, मानव आँख और दृष्टि दोष
वर्ण-विक्षेपण: सफेद प्रकाश का काँच के प्रिज्म से गुजरने पर सात रंगों में विभक्त होना वर्ण-विक्षेपण कहलाता है। रंगों का क्रम — VIBGYOR (बैंगनी से लाल)। बैंगनी रंग का अपवर्तनांक सबसे अधिक तथा लाल का सबसे कम होता है। इंद्रधनुष वायुमंडल में जल बूंदों द्वारा प्रकाश के वर्ण-विक्षेपण का उदाहरण है।
मानव आँख: आँख में उत्तल लेंस होता है जो रेटिना पर वस्तु का उल्टा वास्तविक प्रतिबिम्ब बनाता है। आँख की समंजन क्षमता से विभिन्न दूरियों की वस्तुएँ स्पष्ट दिखती हैं। सामान्य दृष्टि की न्यूनतम दूरी (स्पष्ट दृष्टि की दूरी) 25 cm होती है। आँख का तारा (पुतली) प्रकाश की मात्रा नियंत्रित करता है।
दृष्टि दोष:
निकट दृष्टि दोष (मायोपिया): निकट की वस्तुएँ स्पष्ट, दूर की धुंधली। कारण — नेत्र गोलक लंबा या लेंस की फोकस दूरी कम। संशोधन — अवतल लेंस।
दूर दृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया): दूर की वस्तुएँ स्पष्ट, निकट की धुंधली। कारण — नेत्र गोलक छोटा या फोकस दूरी अधिक। संशोधन — उत्तल लेंस।
जरा दूर दृष्टि (प्रेसबायोपिया): वृद्धावस्था में समंजन क्षमता घटने से आता है; संशोधन — द्विफोकसी लेंस।
प्रिज्म और सरल रेखीय संचरण: प्रिज्म से सफेद प्रकाश का विक्षेपण होता है, जबकि पारदर्शी काँच की पट्टिका से केवल पार्श्व विस्थापन होता है, कोई विक्षेपण नहीं। छाया बनना, सूर्य ग्रहण-चंद्र ग्रहण प्रकाश के सरल रेखीय संचरण के उदाहरण हैं।
प्रकाश के अनुप्रयोग: पेरिस्कोप (पनडुब्बी में देखना) परावर्तन पर, दूरबीन-माइक्रोस्कोप लेंस पर, फाइबर ऑप्टिक्स पूर्ण आंतरिक परावर्तन पर आधारित हैं। आकाश का नीला दिखना प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण होता है।
हल किया गया उदाहरण: एक दूर दृष्टि दोष वाले व्यक्ति के नेत्र का न्यूनतम दूरी 1 m है। सही लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। (सामान्य दृष्टि दूरी 25 cm)
हल: u = -25 cm, v = -100 cm (आभासी प्रतिबिम्ब अंतिम बिंदु पर)
1/f = 1/v - 1/u = -1/100 + 1/25 = (-1 + 4)/100 = 3/100 → f = 100/3 ≈ +33.3 cm (उत्तल लेंस)
हल किया गया उदाहरण: 5 cm आकार की वस्तु को उत्तल लेंस से 25 cm दूर रखा गया है। लेंस की फोकस दूरी 10 cm है। प्रतिबिम्ब का आकार ज्ञात कीजिए।
हल: 1/v = 1/f + 1/u = 1/10 - 1/25 = (5 - 2)/50 = 3/50 → v = 50/3 ≈ 16.7 cm
m = v/u = 16.7/25 ≈ 0.67, प्रतिबिम्ब का आकार = 5 × 0.67 ≈ 3.3 cm
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1
पद
सूत्र/तथ्य
प्रकार
निर्वात में प्रकाश की चाल
3 × 10⁸ m/s
अधिकतम चाल
दर्पण सूत्र
1/v + 1/u = 1/f
गोलीय दर्पण
आवर्धन
m = -v/u
दर्पण
लेंस सूत्र
1/v - 1/u = 1/f
लेंस
अपवर्तनांक
n = चाल निर्वात/चाल माध्यम
मात्रकहीन
तालिका 2
उपकरण/दोष
प्रयुक्त सिद्धांत/लेंस
वाहन का पश्च दर्शक दर्पण
उत्तल दर्पण
शेविंग दर्पण
अवतल दर्पण
आवर्धक लेंस
उत्तल लेंस
निकट दृष्टि दोष
अवतल लेंस
दूर दृष्टि दोष
उत्तल लेंस
हीरे की चमक
पूर्ण आंतरिक परावर्तन
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[16.7 प्रकाश और परावर्तन] --> B[प्रकाश]
B --> B1[विद्युतचुंबकीय तरंग]
B --> B2[चाल 3 × 10⁸ m/s]
B --> B3[सरल रेखीय संचरण]
A --> C[परावर्तन]
C --> C1[आपतन कोण = परावर्तन कोण]
C --> C2[समतल दर्पण]
C --> C3[अवतल और उत्तल दर्पण]
A --> D[अपवर्तन]
D --> D1[माध्यम बदलने पर मुड़ना]
D --> D2[अपवर्तनांक n]
D --> D3[पूर्ण आंतरिक परावर्तन]
A --> E[लेंस]
E --> E1[उत्तल अभिसारी]
E --> E2[अवतल अपसारी]
E --> E3[लेंस सूत्र 1/v - 1/u = 1/f]
A --> F[वर्ण विक्षेपण]
F --> F1[प्रिज्म से सात रंग]
F --> F2[इंद्रधनुष]
A --> G[मानव आँख और दोष]
G --> G1[निकट दृष्टि अवतल लेंस]
G --> G2[दूर दृष्टि उत्तल लेंस]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
समतल दर्पण के प्रतिबिम्ब को वास्तविक मानना: समतल दर्पण का प्रतिबिम्ब सदैव आभासी, सीधा और बराबर आकार का होता है।
दर्पण सूत्र और लेंस सूत्र में भ्रम: दर्पण में 1/v + 1/u = 1/f, लेंस में 1/v - 1/u = 1/f होता है।
अवतल दर्पण को सदैव उल्टा प्रतिबिम्ब बनाने वाला मानना: फोकस के बीच वस्तु रखने पर यह सीधा आवर्धित आभासी प्रतिबिम्ब बनाता है।
अपवर्तन में किरण की दिशा गलत बताना: सघन में जाते समय अभिलंब की ओर, विरल में जाते समय अभिलंब से दूर।
निकट दृष्टि दोष में उत्तल लेंस लगाना: निकट दृष्टि दोष में अवतल तथा दूर दृष्टि दोष में उत्तल लेंस प्रयुक्त होता है।
अपवर्तनांक की इकाई होना मानना: अपवर्तनांक दो चालों का अनुपात है, अतः मात्रकहीन होता है।
9. परीक्षा युक्तियाँ
चिन्ह परिपाटी याद रखें: वास्तविक दूरियाँ ऋणात्मक (दर्पण/लेंस के सामने), आभासी धनात्मक; उत्तल दर्पण/अवतल लेंस का f धनात्मक/ऋणात्मक लिखें।
वाहनों का पश्च दर्शक दर्पण उत्तल होता है, शेविंग/सौंदर्य दर्पण अवतल — ये बार-बार पूछे जाते हैं।
R = 2f तथा दर्पण/लेंस सूत्रों का संख्यात्मक अभ्यास पर्याप्त करें।
निकट दृष्टि दोष अवतल, दूर दृष्टि दोष उत्तल लेंस से सुधरता है, याद रखें।
प्रिज्म से रंगों का क्रम VIBGYOR तथा लाल का अपवर्तनांक सबसे कम याद रखें।
मानव आँख में उत्तल लेंस और रेटिना पर उल्टा वास्तविक प्रतिबिम्ब बनता है।
10. निष्कर्ष
प्रकाश और परावर्तन प्रकाशिकी के मूल विषय हैं, जिनका उपयोग दैनिक जीवन से लेकर वैज्ञानिक उपकरणों तक सर्वत्र होता है। परावर्तन के नियम, समतल तथा गोलीय दर्पणों का व्यवहार, अपवर्तन, अपवर्तनांक और लेंस की अवधारणाएँ परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मानव आँख की कार्यप्रणाली और दृष्टि दोषों का संशोधन वैचारिक प्रश्नों में बार-बार आता है। वर्ण-विक्षेपण से प्रकाश की वास्तविक प्रकृति स्पष्ट होती है। संख्यात्मक प्रश्नों में दर्पण-लेंस सूत्रों के नियमित अभ्यास से निपुणता मिलती है। यह अध्याय NTPC के भौतिक विज्ञान में सर्वाधिक अंक देने वाला विषय है।