16.9 चुंबकत्व और विद्युतचुंबकत्व Notes

16.9 चुंबकत्व और विद्युतचुंबकत्व

विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (भौतिक विज्ञान) अध्याय: 16.9 चुंबकत्व और विद्युतचुंबकत्व विषय-वस्तु: चुंबकत्व, विद्युतचुंबकत्व

1. परिचय

चुंबकत्व वह गुण है जिसके कारण कुछ पदार्थ लोहे, निकेल, कोबाल्ट जैसी चुंबकीय धातुओं को आकर्षित करते हैं। जो वस्तुएँ यह आकर्षण बल प्रदर्शित करती हैं, उन्हें चुंबक कहते हैं। चुंबक के दो ध्रुव होते हैं — उत्तरी ध्रुव (N) और दक्षिणी ध्रुव (S)। चुंबक का सबसे महत्वपूर्ण नियम है — समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं और विपरीत ध्रुव आकर्षित करते हैं। चुंबकीय बल सबसे अधिक चुंबक के सिरों (ध्रुवों) पर होता है। चुंबक से लोहा खींचना तथा दो चुंबकों का परस्पर आकर्षण-प्रतिकर्षण चुंबकत्व के मूल उदाहरण हैं।

विद्युतचुंबकत्व विद्युत और चुंबकत्व के बीच के गहरे संबंध को दर्शाता है। 1820 में हंस क्रिश्चियन ऑर्स्टेड ने खोजा कि धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। यह विद्युतचुंबकत्व की नींव है। धारावाही चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की रेखाओं की दिशा दाएँ हाथ के नियम (मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम) से ज्ञात होती है। एक सीधे तार में धारा बहने पर चुंबकीय क्षेत्र की रेखाएँ वृत्ताकार होती हैं। विद्युत चुंबक बनाने के लिए कुंडली को लोहे के क्रोड पर लपेटकर विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है।

इस अध्याय में हम चुंबक के प्रकार, चुंबकीय क्षेत्र और बल रेखाएँ, धारावाही चालक का चुंबकीय क्षेत्र, सोलेनॉइड, विद्युत चुंबक, विद्युत मोटर, विद्युत जनरेटर, फैराडे का विद्युतचुंबकीय प्रेरण का नियम तथा ट्रांसफार्मर का अध्ययन करेंगे। विद्युतचुंबकीय प्रेरण वह प्रक्रिया है जिसमें चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन से चालक में विद्युत धारा उत्पन्न होती है। ये अवधारणाएँ बिजली उत्पादन, मोटर, घंटी, माइक्रोफोन आदि में उपयोग होती हैं, इसलिए NTPC परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

2. चुंबक: प्रकार, ध्रुव और चुंबकीय क्षेत्र

हल किया गया उदाहरण: चुंबकीय क्षेत्र 0.2 T में धारावाही चालक की लंबाई 0.5 m है तथा चालक में 4 A धारा प्रवाहित हो रही है। यदि चालक क्षेत्र के लंबवत हो, तो उस पर लगने वाला बल ज्ञात कीजिए। हल: F = BIL·sinθ = 0.2 × 4 × 0.5 × sin90° = 0.2 × 4 × 0.5 = 0.4 N

हल किया गया उदाहरण: धारावाही चालक से 5 cm दूरी पर चुंबकीय क्षेत्र 8 × 10⁻⁵ T है। चालक में धारा ज्ञात कीजिए। (B = μ₀I/2πr, μ₀ = 4π × 10⁻⁷) हल: I = B × 2πr/μ₀ = 8 × 10⁻⁵ × 2π × 0.05 / (4π × 10⁻⁷) = 8 × 10⁻⁵ × 0.1 / (2 × 10⁻⁷) = 8 × 10⁻⁶ / (2 × 10⁻⁷) = 40 A

3. धारावाही चालक का चुंबकीय क्षेत्र, सोलेनॉइड और विद्युत चुंबक

हल किया गया उदाहरण: सोलेनॉइड में 500 फेरे हैं, लंबाई 0.5 m है तथा धारा 2 A है। सोलेनॉइड के अंदर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात कीजिए। (μ₀ = 4π × 10⁻⁷ T·m/A) हल: B = μ₀·n·I = 4π × 10⁻⁷ × (500/0.5) × 2 = 4π × 10⁻⁷ × 1000 × 2 = 8π × 10⁻⁴ ≈ 2.5 × 10⁻³ T

हल किया गया उदाहरण: एक विद्युत चुंबक में फेरों की संख्या दोगुनी करने पर चुंबकीय क्षेत्र कितना हो जाएगा? हल: चुंबकीय क्षेत्र फेरों की संख्या के अनुक्रमानुपाती है, अतः क्षेत्र भी दोगुना हो जाएगा।

4. विद्युतचुंबकीय प्रेरण, मोटर, जनरेटर और ट्रांसफार्मर

हल किया गया उदाहरण: एक ट्रांसफार्मर में प्राथमिक कुंडली में 1000 फेरे तथा द्वितीयक में 2000 फेरे हैं। प्राथमिक वोल्टेज 220 V है, द्वितीयक वोल्टेज ज्ञात कीजिए। हल: V₂ = V₁ × (N₂/N₁) = 220 × (2000/1000) = 220 × 2 = 440 V

हल किया गया उदाहरण: 4400 V के ट्रांसफार्मर की द्वितीयक कुंडली में 220 V के लिए फेरों की संख्या 200 है, तो प्राथमिक फेरों की संख्या ज्ञात कीजिए। हल: N₁ = N₂ × (V₁/V₂) = 200 × (4400/220) = 200 × 20 = 4000

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

यंत्र रूपांतरण सिद्धांत
विद्युत मोटर विद्युत → यांत्रिक धारावाही चालक पर बल
विद्युत जनरेटर यांत्रिक → विद्युत विद्युतचुंबकीय प्रेरण
ट्रांसफार्मर वोल्टेज परिवर्तन प्रेरण
विद्युत चुंबक विद्युत → चुंबकत्व धारा का चुंबकीय प्रभाव
इलेक्ट्रिक घंटी विद्युत → ध्वनि विद्युत चुंबक

तालिका 2

पद तथ्य/मात्रक
चुंबकीय क्षेत्र की इकाई टेस्ला (T)
1 टेस्ला 10⁴ गॉस
चुंबकीय बल रेखाओं की दिशा उत्तरी से दक्षिणी ध्रुव
विद्युतचुंबकीय प्रेरण के खोजकर्ता माइकल फैराडे
धारा का चुंबकीय प्रभाव के खोजकर्ता ऑर्स्टेड
भारत में AC आवृत्ति 50 Hz

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[16.9 चुंबकत्व और विद्युतचुंबकत्व] --> B[चुंबक]
    B --> B1[दो ध्रुव N और S]
    B --> B2[समान ध्रुव प्रतिकर्षण]
    B --> B3[चुंबकीय बल रेखाएँ]
    A --> C[चुंबकीय क्षेत्र]
    C --> C1[टेस्ला इकाई]
    C --> C2[उत्तरी से दक्षिणी दिशा]
    A --> D[धारा का चुंबकीय प्रभाव]
    D --> D1[ऑर्स्टेड खोज]
    D --> D2[सीधे तार का वृत्ताकार क्षेत्र]
    A --> E[सोलेनॉइड]
    E --> E1[एकसमान क्षेत्र]
    E --> E2[विद्युत चुंबक]
    A --> F[विद्युतचुंबकीय प्रेरण]
    F --> F1[फैराडे का नियम]
    F --> F2[लेन्ज का नियम]
    A --> G[यंत्र]
    G --> G1[मोटर विद्युत से यांत्रिक]
    G --> G2[जनरेटर यांत्रिक से विद्युत]
    G --> G3[ट्रांसफार्मर वोल्टेज]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र धारा दिशा चुंबकीय बल रेखाएँ संकेंद्री वृत्त हैं दाएँ हाथ के नियम से दिशा ज्ञात होती है स्वर्ण नियम: अंगूठा धारा की दिशा में, उँगलियाँ क्षेत्र की दिशा।

छड़ चुंबक और चुंबकीय बल रेखाएँ N S रेखाएँ N से निकलकर S में प्रवेश करती हैं रेखाएँ कभी प्रतिच्छेद नहीं करतीं स्वर्ण नियम: रेखाओं का घनत्व क्षेत्र की प्रबलता दर्शाता है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. समान ध्रुव आकर्षित करते हैं यह मानना: समान ध्रुव प्रतिकर्षित तथा विपरीत ध्रुव आकर्षित करते हैं।
  2. चुंबक को तोड़ने पर एक-ध्रुवीय टुकड़े मानना: प्रत्येक टुकड़े के दोनों ध्रुव होते हैं, एकल ध्रुव संभव नहीं।
  3. चुंबकीय बल रेखाएँ दक्षिणी से उत्तरी मानना: रेखाएँ उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर होती हैं।
  4. स्थायी चुंबक के लिए मृदु लोहा चुनना: स्थायी चुंबक इस्पात का बनता है, मृदु लोहा विद्युत चुंबक के क्रोड के लिए उपयुक्त है।
  5. जनरेटर और मोटर की भूमिका उलट देना: मोटर विद्युत से यांत्रिक, जनरेटर यांत्रिक से विद्युत ऊर्जा बनाता है।
  6. स्थिर चुंबक से भी धारा प्रेरित होती है मानना: प्रेरित धारा के लिए चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन आवश्यक है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. चुंबकीय क्षेत्र की इकाई टेस्ला, 1 T = 10⁴ गॉस तथा F = BIL·sinθ याद रखें।
  2. स्थायी चुंबक इस्पात, विद्युत चुंबक का क्रोड मृदु लोहा — यह प्रश्न बार-बार पूछा गया है।
  3. मोटर और जनरेटर के रूपांतरण तथा ट्रांसफार्मर के V₁/V₂ = N₁/N₂ संबंध की स्पष्ट समझ रखें।
  4. फैराडे प्रेरण और ऑर्स्टेड (धारा का चुंबकीय प्रभाव) के खोजकर्ता भिन्न हैं, इन्हें न मिलाएँ।
  5. भारत में AC आवृत्ति 50 Hz होती है, यह एक स्थिर तथ्य है।
  6. सोलेनॉइड के अंदर क्षेत्र एकसमान तथा B = μ₀nI सूत्र याद रखें।

10. निष्कर्ष

चुंबकत्व और विद्युतचुंबकत्व भौतिक विज्ञान की वे शाखाएँ हैं जिन्होंने आधुनिक तकनीक को संभव बनाया है। चुंबक के गुण, ध्रुवों के नियम तथा चुंबकीय बल रेखाओं की समझ मूल आधार है। धारा के चुंबकीय प्रभाव से विद्युत चुंबक, घंटी, मोटर का निर्माण होता है, जबकि फैराडे के विद्युतचुंबकीय प्रेरण से जनरेटर और ट्रांसफार्मर कार्य करते हैं। इन सिद्धांतों की स्पष्ट समझ से परीक्षा में वैचारिक और संख्यात्मक दोनों प्रकार के प्रश्न हल होते हैं। रेलवे में विद्युत इंजन, सिग्नलिंग तथा चुंबकीय ब्रेक का व्यापक उपयोग इस अध्याय को NTPC परीक्षा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।