कोशिका संरचना Notes

कोशिका संरचना

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: जीव विज्ञान – कोशिका ऊतक और जीवन प्रक्रियाएँ विषय-वस्तु: 17.1 कोशिका संरचना

1. परिचय

जीव विज्ञान की सबसे बुनियादी अवधारणा कोशिका है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में कोशिका से संबंधित प्रश्न कोशिका की खोज, कोशिका सिद्धांत, कोशिका के भागों तथा प्रोकैरियोटिक एवं यूकैरियोटिक कोशिकाओं के आधार पर पूछे जाते हैं। कोशिका (Cell) शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम रॉबर्ट हुक ने सन 1665 में किया था। उन्होंने कॉर्क (एक वृक्ष की छाल) की पतली कटी का सूक्ष्मदर्शी से अध्ययन करते समय छोटे-छोटे कमरों जैसी रचनाएँ देखीं, जिन्हें उन्होंने कोशिका नाम दिया। इस प्रकार कोशिका की खोज रॉबर्ट हुक द्वारा हुई, परंतु पहली जीवित कोशिका का अवलोकन लीउवेनहॉक ने किया था।

कोशिका को जीवन की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई कहा जाता है। हर जीवित प्राणी, चाहे वह एककोशिकीय अमीबा हो या बहुकोशिकीय मानव, कोशिकाओं से ही बना होता है। एक सामान्य कोशिका के तीन मुख्य भाग होते हैं — कोशिका झिल्ली (प्लाज्मा झिल्ली), कोशिकाद्रव्य (साइटोप्लाज्म) और केन्द्रक (न्यूक्लियस)। पादप कोशिकाओं में इनके अतिरिक्त कोशिका भित्ति (सेल वॉल) भी पाई जाती है जो सेल्यूलोज से बनी होती है। कोशिका के भीतर पाए जाने वाले विशेष कार्य करने वाले घटकों को कोशिकांग कहते हैं, जिनमें माइटोकॉन्ड्रिया, राइबोसोम, गॉल्जीकाय, अंतर्द्रव्यी जालिका आदि प्रमुख हैं।

इस अध्याय में हम कोशिका की खोज, कोशिका सिद्धांत, कोशिका की सामान्य संरचना, कोशिका के भागों के कार्य तथा कोशिकाओं के प्रकारों का विस्तार से अध्ययन करेंगे। रेलवे परीक्षा में इस विषय से प्रायः एक से तीन प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए यह अध्याय उच्च स्कोरिंग माना जाता है। कोशिका संरचना की पकड़ ही आगे के सभी जीव विज्ञान विषयों — कोशिकांग, ऊतक, पोषण, श्वसन और उत्सर्जन — को समझने की नींव है।

2. कोशिका की खोज और कोशिका सिद्धांत

रॉबर्ट हुक (1665): अंग्रेज वैज्ञानिक रॉबर्ट हुक ने अपने बनाए सूक्ष्मदर्शी से कॉर्क की कटी का अध्ययन किया। उन्होंने देखा कि इसमें अनेक छोटी-छोटी कोठरियाँ जैसी रचनाएँ हैं, जिन्हें उन्होंने 'सेल' (कोशिका) कहा। हुक ने वास्तव में मृत कोशिकाओं की कोशिका भित्ति ही देखी थी।

एंटोनी वान लीउवेनहॉक (1674): उन्होंने पहली बार जीवित कोशिकाओं का अवलोकन किया। उन्होंने जीवाणु, रक्त कोशिकाओं और स्पर्मेटोजोआ को देखा, इसलिए उन्हें 'सूक्ष्म जीव विज्ञान का जनक' कहा जाता है।

कोशिका सिद्धांत (Cell Theory): सन 1838-39 में जर्मन वैज्ञानिक मैथियास श्लाइडेन और थियोडोर श्वान ने यह सिद्धांत प्रस्तुत किया कि सभी पौधे और जंतु कोशिकाओं से बने होते हैं। सन 1855 में रुडोल्फ विरचो ने कोशिका सिद्धांत में यह जोड़ा कि 'नई कोशिकाएँ पूर्ववर्ती कोशिकाओं के विभाजन से ही उत्पन्न होती हैं' (Omnis cellula-e cellula)। आधुनिक कोशिका सिद्धांत के अनुसार सभी जीव कोशिकाओं से बने हैं, कोशिका जीवन की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है तथा नई कोशिकाएँ पूर्ववर्ती कोशिकाओं के विभाजन से बनती हैं।

3. कोशिका के मुख्य भाग और उनके कार्य

कोशिका भित्ति (Cell Wall): केवल पादप कोशिकाओं, कवक तथा जीवाणु में पाई जाती है। यह सेल्यूलोज की बनी होती है और कोशिका को कठोरता, आकार तथा यांत्रिक सुरक्षा प्रदान करती है। जंतु कोशिकाओं में कोशिका भित्ति नहीं होती।

कोशिका झिल्ली (Cell Membrane / Plasma Membrane): यह प्रत्येक कोशिका में पाई जाती है। यह दोहरी परत वाली अर्धपारगम्य झिल्ली है जो कोशिका के अंदर-बाहर पदार्थों के आवागमन को नियंत्रित करती है। इसी गुण के कारण इसे चयनात्मक पारगम्य झिल्ली भी कहते हैं।

कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm): कोशिका झिल्ली और केन्द्रक के बीच का जेली जैसा अर्धतरल पदार्थ है। इसमें सभी कोशिकांग तैरते रहते हैं। यहीं पर अनेक जैव रासायनिक क्रियाएँ होती हैं।

केन्द्रक (Nucleus): यह कोशिका का नियंत्रक केंद्र है। इसमें गुणसूत्र और डीएनए होते हैं जो आनुवंशिक सूचनाओं का वहन करते हैं। केन्द्रक दोहरी झिल्ली से घिरा होता है जिसे केन्द्रक झिल्ली कहते हैं। केन्द्रक के अंदर केन्द्रिका (Nucleolus) तथा क्रोमैटिन जालिका पाई जाती है।

केन्द्रक वाली एवं बिना केन्द्रक वाली कोशिकाएँ: जिन कोशिकाओं में स्पष्ट केन्द्रक नहीं होता, उन्हें प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ कहते हैं, जैसे जीवाणु। जिन कोशिकाओं में स्पष्ट झिल्लीबद्ध केन्द्रक होता है, उन्हें यूकैरियोटिक कोशिकाएँ कहते हैं, जैसे मानव, पौधे, कवक।

4. कोशिकाओं के प्रकार और उनके आकार

कोशिकाओं को आकार और आकृति के आधार पर अनेक प्रकारों में बाँटा जाता है। सबसे छोटी कोशिका माइकोप्लाज्मा है जबकि सबसे बड़ी कोशिका शुतुरमुर्ग का अंडा है। मानव शरीर की सबसे लंबी कोशिका तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) है। कोशिकाओं का आकार उनके कार्य पर निर्भर करता है — रक्त कोशिकाएँ गोल होती हैं, मांसपेशी कोशिकाएँ लंबी धागे जैसी होती हैं तथा तंत्रिका कोशिकाएँ लंबी तथा शाखायुक्त होती हैं।

प्रोकैरियोटिक कोशिका: इनमें कोशिका भित्ति होती है, स्पष्ट केन्द्रक अनुपस्थित होता है, आनुवंशिक पदार्थ कोशिकाद्रव्य में बिखरा रहता है। माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जीकाय जैसे झिल्लीबद्ध कोशिकांग नहीं होते। राइबोसोम छोटे (70S) होते हैं।

यूकैरियोटिक कोशिका: इनमें स्पष्ट केन्द्रक तथा झिल्लीबद्ध कोशिकांग होते हैं। राइबोसोम बड़े (80S) होते हैं। पादप एवं जंतु की सभी कोशिकाएँ यूकैरियोटिक होती हैं।

रेलवे परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है कि किस कोशिका में केन्द्रक नहीं होता, किसमें कोशिका भित्ति पाई जाती है तथा राइबोसोम का मुख्य कार्य क्या है। इन बिंदुओं को स्मरण रखने से प्रश्न आसानी से हल हो जाते हैं।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिका की तुलना

आधार प्रोकैरियोटिक कोशिका यूकैरियोटिक कोशिका
केन्द्रक अनुपस्थित (आनुवंशिक पदार्थ बिखरा) स्पष्ट झिल्लीबद्ध केन्द्रक
कोशिका भित्ति उपस्थित (म्यूरिन) पादप में सेल्यूलोज, जंतु में नहीं
कोशिकांग झिल्लीबद्ध कोशिकांग अनुपस्थित झिल्लीबद्ध कोशिकांग उपस्थित
राइबोसोम 70S 80S
उदाहरण जीवाणु, नील हरित शैवाल पादप, जंतु, कवक

तालिका 2: कोशिका के भाग और उनके कार्य

भाग स्थान मुख्य कार्य
कोशिका भित्ति पादप कोशिका का सबसे बाहरी भाग कठोरता और सुरक्षा
कोशिका झिल्ली सभी कोशिकाओं में बाहरी सीमा पदार्थों का आवागमन नियंत्रण
कोशिकाद्रव्य झिल्ली और केन्द्रक के बीच कोशिकांगों को आश्रय, रासायनिक क्रियाएँ
केन्द्रक कोशिका का केंद्र आनुवंशिक नियंत्रण, कोशिका विभाजन
राइबोसोम कोशिकाद्रव्य में स्वतंत्र या जालिका पर प्रोटीन संश्लेषण

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[कोशिका] --> B[खोज]
    A --> C[कोशिका सिद्धांत]
    A --> D[संरचना]
    A --> E[प्रकार]
    B --> B1[रॉबर्ट हुक 1665 - कॉर्क]
    B --> B2[लीउवेनहॉक - जीवित कोशिका]
    C --> C1[श्लाइडेन और श्वान 1838-39]
    C --> C2[विरचो 1855 - विभाजन]
    D --> D1[कोशिका भित्ति]
    D --> D2[कोशिका झिल्ली]
    D --> D3[कोशिकाद्रव्य]
    D --> D4[केन्द्रक]
    E --> E1[प्रोकैरियोटिक]
    E --> E2[यूकैरियोटिक]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

एक सामान्य कोशिका की संरचना कोशिका झिल्ली (प्लाज्मा झिल्ली) कोशिकाद्रव्य (साइटोप्लाज्म) केन्द्रक केन्द्रिका माइटोकॉन्ड्रिया राइबोसोम गॉल्जीकाय माइटोकॉन्ड्रिया स्वर्ण नियम केन्द्रक कोशिका का नियंत्रक केंद्र है और राइबोसोम प्रोटीन का कारखाना।

कोशिका सिद्धांत के विकास की समय रेखा 1665 - रॉबर्ट हुक ने कॉर्क में कोशिका देखी पहली बार 'सेल' शब्द का प्रयोग 1838-39 - श्लाइडेन और श्वान सभी पौधे और जंतु कोशिकाओं से बने 1855 - रुडोल्फ विरचो नई कोशिकाएँ पुरानी के विभाजन से बनती हैं आधुनिक कोशिका सिद्धांत कोशिका = जीवन की संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई कोशिका की खोजकर्ता कोशिका नहीं थी स्वर्ण नियम कोशिका की खोज रॉबर्ट हुक ने की, जीवित कोशिका लीउवेनहॉक ने देखी।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. छात्र कोशिका की खोज का श्रेय लीउवेनहॉक को दे देते हैं, जबकि कोशिका शब्द सर्वप्रथम रॉबर्ट हुक ने दिया।
  2. रॉबर्ट हुक द्वारा देखी गई संरचना जीवित कोशिका नहीं, बल्कि मृत कॉर्क कोशिकाओं की भित्ति थी, इसे भूल जाना।
  3. कोशिका भित्ति को सभी कोशिकाओं में पाई जाने वाली रचना मान लेना, जबकि यह जंतु कोशिका में नहीं होती।
  4. कोशिका झिल्ली को पूर्णतः पारगम्य (पर्मेबल) मान लेना, जबकि यह अर्धपारगम्य (चयनात्मक) होती है।
  5. केन्द्रक को कोशिका का ऊर्जा घर कह देना, जबकि ऊर्जा घर माइटोकॉन्ड्रिया है और केन्द्रक नियंत्रक केंद्र है।
  6. प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिका में अंतर नहीं समझना; जीवाणु में स्पष्ट केन्द्रक अनुपस्थित होता है।
  7. कोशिका सिद्धांत प्रस्तुत करने वालों में विरचो का योगदान भूल जाना, जिन्होंने 'कोशिका से कोशिका' का सिद्धांत दिया।
  8. केन्द्रक में केन्द्रिका और क्रोमैटिन जालिका की उपस्थिति को भूल जाना।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. कोशिका की खोज (रॉबर्ट हुक, 1665) और जीवित कोशिका का अवलोकन (लीउवेनहॉक) — दोनों तथ्य अलग-अलग स्मरण रखें।
  2. कोशिका सिद्धांत के तीन बिंदु याद रखें: सभी जीव कोशिकाओं से बने, कोशिका इकाई है, नई कोशिकाएँ विभाजन से बनती हैं।
  3. पादप और जंतु कोशिका की तुलना में कोशिका भित्ति की उपस्थिति/अनुपस्थिति ही मुख्य अंतर है।
  4. कोशिका झिल्ली की अर्धपारगम्यता के उदाहरण याद रखें, जैसे विसरण और परासरण।
  5. प्रोकैरियोटिक में 70S और यूकैरियोटिक में 80S राइबोसोम होते हैं, यह बार-बार पूछा जाता है।
  6. माइकोप्लाज्मा सबसे छोटी कोशिका और शुतुरमुर्ग का अंडा सबसे बड़ी कोशिका है।
  7. हर भाग के कार्य को याद रखें: भित्ति-सुरक्षा, झिल्ली-परिवहन, केन्द्रक-नियंत्रण, राइबोसोम-प्रोटीन।
  8. मानव शरीर की सबसे लंबी कोशिका तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) है, यह अक्सर पूछा जाता है।

10. निष्कर्ष

कोशिका जीवन की मूलभूत इकाई है, जिसकी खोज रॉबर्ट हुक ने सन 1665 में की थी। कोशिका सिद्धांत ने यह स्पष्ट किया कि सभी जीव कोशिकाओं से बने होते हैं तथा नई कोशिकाएँ पुरानी कोशिकाओं के विभाजन से बनती हैं। कोशिका के मुख्य भाग कोशिका भित्ति, कोशिका झिल्ली, कोशिकाद्रव्य और केन्द्रक हैं, जिनमें से प्रत्येक का विशिष्ट कार्य होता है। कोशिकाओं को आनुवंशिक पदार्थ की व्यवस्था के आधार पर प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक दो वर्गों में बाँटा जाता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि कोशिका की संरचना और कार्य की समझ के बिना कोशिकांग, ऊतक तथा जीवन प्रक्रियाओं को समझना संभव नहीं है। अभ्यास करते समय कोशिका सिद्धांत, भागों के कार्य और कोशिकाओं के प्रकारों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।