18.2 मस्तिष्क और प्रतिवर्त क्रिया Notes

18.2 मस्तिष्क और प्रतिवर्त क्रिया

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: जीव विज्ञान – नियंत्रण जनन और आनुवंशिकता विषय-वस्तु: 18.2 मस्तिष्क और प्रतिवर्त क्रिया

1. परिचय

मस्तिष्क मानव शरीर का सबसे जटिल और महत्वपूर्ण अंग है जो सभी क्रियाओं को नियंत्रित तथा समन्वित करता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में मस्तिष्क के भागों, उनके कार्यों तथा प्रतिवर्त क्रिया की कार्यविधि से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। मस्तिष्क खोपड़ी (क्रेनियम) के भीतर सुरक्षित रहता है और इसका भार लगभग 1.4 किलोग्राम होता है। मस्तिष्क को चार मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है — अग्र मस्तिष्क, मध्य मस्तिष्क, पश्च मस्तिष्क और अंत: मस्तिष्क। प्रत्येक भाग का एक विशिष्ट कार्य होता है, और इनका समन्वय ही सामान्य शारीरिक क्रियाओं को संभव बनाता है।

प्रतिवर्त क्रिया (reflex action) शरीर की वह तीव्र, स्वचालित तथा अनैच्छिक प्रतिक्रिया है जो किसी उद्दीपन के प्रति तुरंत उत्पन्न होती है। उदाहरण के लिए, गर्म बर्तन को छूते ही हाथ का तुरंत हट जाना, घुटने पर चोट लगने पर पैर का लात मारना, आँखों में धूल पड़ने पर पलकों का बंद होना। यह क्रिया मस्तिष्क के सीधे हस्तक्षेप के बिना मेरु रज्जु के स्तर पर होती है, जिससे प्रतिक्रिया अत्यंत तीव्र बनती है। इस क्रिया का संबंध पूर्ण रूप से तंत्रिका तंत्र के कार्य से है।

रेलवे परीक्षा की दृष्टि से मस्तिष्क के प्रत्येक भाग का कार्य, प्रतिवर्त चाप (reflex arc) का मार्ग, संवेदी तथा चालक न्यूरॉन की भूमिका तथा मस्तिष्क को हुई चोट के प्रभाव महत्वपूर्ण हैं। इस अध्याय में हम मस्तिष्क की संरचना और उसके भागों के कार्य, प्रतिवर्त क्रिया की पूरी कार्यविधि, प्रतिवर्त चाप तथा मस्तिष्कीय विकारों का अध्ययन करेंगे। यह विषय तंत्रिका तंत्र के ज्ञान को पूर्ण करता है तथा परीक्षा में अंक प्राप्त करने में सीधे सहायक है।

2. मस्तिष्क की संरचना और उसके भाग

मानव मस्तिष्क लगभग 100 अरब न्यूरॉन्स से बना होता है। इसे मुख्यतः चार भागों में विभाजित किया जाता है।

अग्र मस्तिष्क (Forebrain): इसमें प्रमस्तिष्क (cerebrum) तथा अंत: मस्तिष्क (diencephalon) शामिल होते हैं। प्रमस्तिष्क मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है जो दो गोलार्धों — बाएँ और दाएँ — में विभक्त होता है। ये गोलार्ध कॉर्पस कॉलोसम नामक तंतु पुल द्वारा जुड़े होते हैं। प्रमस्तिष्क की बाहरी परत को प्रमस्तिष्क प्रांतस्था (cerebral cortex) कहते हैं, जो सोच, स्मृति, बुद्धि, भाषा तथा स्वैच्छिक गतियों का केंद्र है। प्रमस्तिष्क का बायाँ गोलार्ध भाषा तथा तार्किक चिंतन तथा दायाँ गोलार्ध कलात्मक गतिविधियों से अधिक संबंधित होता है। अंत: मस्तिष्क में थैलेमस तथा हाइपोथैलेमस आते हैं। थैलेमस संवेदी संकेतों का रिले स्टेशन है, जबकि हाइपोथैलेमस शरीर के तापमान, भूख, प्यास तथा हार्मोन नियंत्रण में सहायक है।

मध्य मस्तिष्क (Midbrain): यह अग्र मस्तिष्क और पश्च मस्तिष्क के बीच स्थित छोटा भाग है। यह दृष्टि और श्रवण से संबंधित कुछ प्रतिवर्तों तथा शरीर की मुद्रा को नियंत्रित करता है।

पश्च मस्तिष्क (Hindbrain): इसमें अनुमस्तिष्क (cerebellum), पोंस तथा मेड्युला आब्लोंगेटा आते हैं। अनुमस्तिष्क शरीर का संतुलन तथा गति का समन्वय बनाए रखता है। पोंस श्वसन को नियंत्रित करने में सहायक है तथा मस्तिष्क के विभिन्न भागों को जोड़ता है। मेड्युला आब्लोंगेटा हृदय गति, श्वसन, रक्तचाप, खाँसी, छींक तथा निगलने जैसी जीवन-नियामक अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है। मेड्युला का क्षतिग्रस्त होना प्राणघातक सिद्ध होता है।

मस्तिष्क की सुरक्षा: मस्तिष्क तीन आवरणों (मस्तिष्कावरण) से ढका होता है — ड्यूरा मेटर, एराकनॉइड तथा पिया मेटर। इनके बीच मस्तिष्कमेरु द्रव भरा रहता है, जो झटकों से सुरक्षा करता है तथा पोषण प्रदान करता है। रेलवे दुर्घटना में सिर में लगने वाली चोट से मस्तिष्कावरण में रक्तस्राव (सबड्यूरल हेमरेज) हो सकता है, जो गंभीर स्थिति है।

3. प्रतिवर्त क्रिया और प्रतिवर्त चाप

प्रतिवर्त क्रिया शरीर की स्वचालित तथा अनैच्छिक प्रतिक्रिया है जो उद्दीपन के प्रति मस्तिष्क की सचेतन भागीदारी के बिना होती है। यह क्रिया मेरु रज्जु के स्तर पर पूरी होती है, इसलिए प्रतिक्रिया अत्यंत तेज होती है। प्रतिवर्त क्रिया की संरचना को प्रतिवर्त चाप (reflex arc) कहते हैं।

प्रतिवर्त चाप के अवयव: प्रतिवर्त चाप में पाँच मुख्य अवयव होते हैं — ग्राही (receptor), संवेदी न्यूरॉन, अंतर न्यूरॉन (इंटरन्यूरॉन), चालक न्यूरॉन और कार्यकारी अंग (effector)। ग्राही उद्दीपन ग्रहण करता है। संवेदी न्यूरॉन आवेग को मेरु रज्जु तक लाता है। मेरु रज्जु में अंतर न्यूरॉन संवेदी न्यूरॉन को चालक न्यूरॉन से जोड़ता है। चालक न्यूरॉन आवेग को कार्यकारी अंग (पेशी या ग्रंथि) तक पहुँचाता है। इस प्रकार पूरा मार्ग पूर्ण होता है।

प्रतिवर्त क्रिया का उदाहरण: जब हमारा हाथ गर्म बर्तन को छूता है, तो त्वचा में स्थित ग्राही ताप उद्दीपन ग्रहण करते हैं। संवेदी न्यूरॉन यह संदेश मेरु रज्जु तक पहुँचाता है। मेरु रज्जु में अंतर न्यूरॉन तुरंत चालक न्यूरॉन को सक्रिय करता है। चालक न्यूरॉन बाजू की पेशी में संदेश पहुँचाता है और पेशी सिकुड़कर हाथ को तुरंत हटा लेती है। यह पूरी प्रक्रिया सेकंड के एक अंश में पूरी हो जाती है। इसके बाद ही मस्तिष्क को दर्द का अनुभव होता है।

प्रतिवर्त क्रिया की विशेषताएँ: यह जन्मजात (स्वाभाविक) होती है, अनैच्छिक होती है, अत्यंत तीव्र होती है तथा इसमें मस्तिष्क का चेतन हस्तक्षेप नहीं होता। प्रतिवर्त क्रियाओं के कुछ उदाहरण — पलक झपकना, छींकना, खाँसना, ज्वाला से हाथ हटाना, घुटने की प्रतिवर्त क्रिया। वातानुकूलित प्रतिवर्त (conditioned reflex) वे होते हैं जो अनुभव से सीखे जाते हैं, जैसे पावलव के कुत्ते के प्रयोग में घंटी सुनकर लार आना।

4. मस्तिष्क के कार्य और समन्वय

मस्तिष्क के विभिन्न भाग मिलकर शरीर की प्रत्येक क्रिया का समन्वय करते हैं। प्रमस्तिष्क चेतन मानसिक क्रियाओं — पढ़ना, लिखना, बोलना, सोचना — का केंद्र है। मस्तिष्क के विभिन्न लोब (lobe) विभिन्न कार्य करते हैं। अग्रललाट लोब (frontal lobe) व्यक्तित्व, निर्णय तथा स्वैच्छिक गति से संबंधित है। पार्श्विका लोब (parietal lobe) स्पर्श तथा ताप संवेदना का केंद्र है। टेम्पोरल लोब (temporal lobe) श्रवण तथा स्मृति से संबंधित है। पश्चकपाल लोब (occipital lobe) दृष्टि का केंद्र है।

हाइपोथैलेमस और आंतरिक संतुलन: हाइपोथैलेमस शरीर के आंतरिक वातावरण को स्थिर रखने में सहायक है, जिसे होमोस्टैसिस कहते हैं। यह शरीर का तापमान, भूख-प्यास, नींद तथा हार्मोन स्राव को नियंत्रित करता है। रेलवे परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है कि शरीर के तापमान का नियंत्रण केंद्र हाइपोथैलेमस है।

मस्तिष्क और जीवन-नियामक क्रियाएँ: मेड्युला आब्लोंगेटा जीवन के लिए अनिवार्य क्रियाओं — हृदय धड़कन, श्वसन, रक्तचाप — को नियंत्रित करता है। इसे महत्वपूर्ण केंद्र (vital centre) कहते हैं। इसलिए मेड्युला को होने वाली क्षति जीवन के लिए घातक होती है। अनुमस्तिष्क पेशियों के समन्वय को सुधारता है, जिससे चलना, दौड़ना, लिखना जैसी गतियाँ सटीक बनती हैं। शराब का अत्यधिक सेवन अनुमस्तिष्क को प्रभावित करता है, जिससे संतुलन बिगड़ता है।

प्रतिवर्त क्रिया और रेलवे सुरक्षा: रेलवे कर्मचारियों के लिए प्रतिवर्त क्रिया की गति अत्यंत महत्वपूर्ण है। संकेत, ब्रेक, अलार्म जैसी आपात स्थितियों में तीव्र प्रतिक्रिया आवश्यक होती है। थकान, नींद की कमी और तनाव प्रतिवर्त क्रिया को धीमा कर सकते हैं, जो रेलवे संचालन में दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: मस्तिष्क के भाग और उनके कार्य

मस्तिष्क भाग मुख्य संरचनाएँ मुख्य कार्य
अग्र मस्तिष्क प्रमस्तिष्क, थैलेमस, हाइपोथैलेमस सोच, स्मृति, संतुलन नहीं
मध्य मस्तिष्क टेक्टम दृष्टि-श्रवण प्रतिवर्त
पश्च मस्तिष्क अनुमस्तिष्क, पोंस, मेड्युला संतुलन, श्वसन, हृदय गति
अंत: मस्तिष्क थैलेमस, हाइपोथैलेमस संवेदी रिले, तापमान नियंत्रण

तालिका 2: प्रतिवर्त चाप के अवयव

अवयव भूमिका
ग्राही उद्दीपन ग्रहण करना
संवेदी न्यूरॉन आवेग को मेरु रज्जु तक लाना
अंतर न्यूरॉन संवेदी को चालक से जोड़ना
चालक न्यूरॉन आवेग को अंग तक पहुँचाना
कार्यकारी अंग पेशी/ग्रंथि में प्रतिक्रिया

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[मस्तिष्क] --> B[अग्र मस्तिष्क]
    A --> C[मध्य मस्तिष्क]
    A --> D[पश्च मस्तिष्क]
    B --> B1[प्रमस्तिष्क - सोच, स्मृति]
    B --> B2[थैलेमस - संवेदी रिले]
    B --> B3[हाइपोथैलेमस - तापमान]
    C --> C1[दृष्टि व श्रवण प्रतिवर्त]
    D --> D1[अनुमस्तिष्क - संतुलन]
    D --> D2[पोंस - श्वसन]
    D --> D3[मेड्युला - हृदय गति]
    A --> E[प्रतिवर्त क्रिया]
    E --> E1[ग्राही]
    E --> E2[संवेदी न्यूरॉन]
    E --> E3[अंतर न्यूरॉन]
    E --> E4[चालक न्यूरॉन]
    E --> E5[कार्यकारी अंग]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

मानव मस्तिष्क के भाग प्रमस्तिष्क (अग्र मस्तिष्क) सोच, स्मृति, भाषा मध्य मस्तिष्क अनुमस्तिष्क मेड्युला अनुमस्तिष्क - संतुलन मेड्युला - हृदय व श्वसन स्वर्ण नियम संतुलन अनुमस्तिष्क, जीवन-नियामक क्रियाएँ मेड्युला से नियंत्रित होती हैं।

प्रतिवर्त चाप ग्राही संवेदी न्यूरॉन मेरु रज्जु अंतर न्यूरॉन चालक न्यूरॉन पेशी (कार्यकारी अंग) प्रवाह: ग्राही → संवेदी न्यूरॉन → मेरु रज्जु → चालक न्यूरॉन → पेशी मस्तिष्क की चेतन भागीदारी के बिना तीव्र प्रतिक्रिया स्वर्ण नियम प्रतिवर्त क्रिया मेरु रज्जु के स्तर पर होती है, मस्तिष्क की भागीदारी आवश्यक नहीं।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. छात्र प्रतिवर्त क्रिया में मस्तिष्क की भागीदारी आवश्यक मान लेते हैं, जबकि यह मेरु रज्जु स्तर पर पूरी होती है।
  2. अनुमस्तिष्क और मेड्युला के कार्यों में भ्रम होना; संतुलन अनुमस्तिष्क का, हृदय गति मेड्युला का कार्य है।
  3. थैलेमस और हाइपोथैलेमस के कार्यों को एक-दूसरे से उलट देना।
  4. प्रतिवर्त चाप में अंतर न्यूरॉन को शामिल करना भूल जाना।
  5. प्रमस्तिष्क को सभी क्रियाओं का एकमात्र केंद्र मान लेना।
  6. मस्तिष्कावरणों की संख्या तीन लिखने की बजाय दो लिख देना।
  7. पोंस को श्रवण केंद्र मान लेना, जबकि श्रवण टेम्पोरल लोब से संबंधित है।
  8. वातानुकूलित प्रतिवर्त को जन्मजात मान लेना, जबकि यह सीखा हुआ होता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. मस्तिष्क के चार भागों तथा प्रत्येक भाग के एक प्रमुख कार्य को तालिका रूप में स्मरण रखें।
  2. प्रतिवर्त चाप का क्रम याद रखें: ग्राही → संवेदी न्यूरॉन → अंतर न्यूरॉन → चालक न्यूरॉन → कार्यकारी अंग।
  3. मेड्युला आब्लोंगेटा को जीवन-नियामक केंद्र मानें; इसका प्रश्न सदैव पूछा जाता है।
  4. हाइपोथैलेमस को शरीर का तापमान नियामक याद रखें।
  5. प्रमस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग होना तथा दो गोलार्धों में विभक्त होना याद रखें।
  6. मस्तिष्क के लोबों के कार्य — पश्चकपाल दृष्टि, टेम्पोरल श्रवण — की तालिका बनाएँ।
  7. उदाहरण-आधारित प्रश्नों के लिए प्रतिवर्त क्रियाओं के 4-5 सामान्य उदाहरण याद रखें।
  8. मस्तिष्कमेरु द्रव का कार्य सुरक्षा तथा पोषण दोनों समझें, केवल सुरक्षा नहीं।

10. निष्कर्ष

मस्तिष्क और प्रतिवर्त क्रिया तंत्रिका तंत्र के अध्ययन का केंद्रीय विषय है। इस अध्याय में हमने मस्तिष्क के चार भागों — अग्र, मध्य, पश्च तथा अंत: मस्तिष्क — की संरचना और उनके कार्यों को विस्तार से समझा। प्रमस्तिष्क सोच तथा स्मृति का केंद्र है, अनुमस्तिष्क संतुलन बनाए रखता है और मेड्युला हृदय गति तथा श्वसन को नियंत्रित करता है। प्रतिवर्त क्रिया मेरु रज्जु के स्तर पर होने वाली तीव्र, अनैच्छिक प्रतिक्रिया है, जिसका मार्ग प्रतिवर्त चाप कहलाता है। इन अवधारणाओं की पकड़ परीक्षा में निश्चित अंक दिलाती है। रेलवे टेक्नीशियन परीक्षा के लिए मस्तिष्क के भागों, प्रतिवर्त चाप के क्रम तथा जीवन-नियामक केंद्रों का नियमित अभ्यास अत्यंत आवश्यक है।