विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: जीव विज्ञान – नियंत्रण जनन और आनुवंशिकता विषय-वस्तु: 18.4 अलैंगिक जनन
जनन (reproduction) वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपनी ही प्रजाति के नए जीव उत्पन्न करते हैं। जनन जीवों की सबसे आधारभूत विशेषताओं में से एक है, क्योंकि इसी से प्रजाति की निरंतरता बनी रहती है। जनन के दो मुख्य प्रकार होते हैं — अलैंगिक जनन और लैंगिक जनन। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में जनन के प्रकारों, उनके उदाहरणों तथा अलैंगिक जनन की विधियों से संबंधित प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं। अलैंगिक जनन में नया जीव एक ही जनक (parent) से बिना युग्मकों (गैमीट्स) के संलयन के उत्पन्न होता है। इस प्रक्रिया में संतति जनक के आनुवंशिक रूप से समान (क्लोन) होती है।
अलैंगिक जनन की मुख्य विशेषताएँ हैं — इसमें केवल एक जनक भाग लेता है, युग्मक निर्माण और निषेचन नहीं होता, संतति जनक के समरूप होती है, विभाजन प्रायः माइटोसिस द्वारा होता है तथा इस प्रक्रिया में आनुवंशिक विविधता नहीं आती। इसलिए अलैंगिक जनन से उत्पन्न संततियाँ सभी एक जैसी होती हैं, जिन्हें क्लोन कहते हैं। यह विधि उन जीवों में अधिक पाई जाती है जो निम्न श्रेणी के हैं, जैसे अमीबा, पैरामीशियम, हाइड्रा, यीस्ट, जीवाणु तथा अनेक पादप।
इस अध्याय में हम अलैंगिक जनन की प्रमुख विधियों — द्विखंडन, बहुखंडन, मुकुलन, बीजाणु निर्माण, विखंडन, कायिक प्रवर्धन और भागिक विखंडन — का विस्तार से अध्ययन करेंगे। प्रत्येक विधि के उदाहरण परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, जैसे अमीबा का द्विखंडन, हाइड्रा का मुकुलन, मशरूम का बीजाणु जनन। साथ ही हम यह भी समझेंगे कि अलैंगिक जनन के प्रकार का ज्ञान व्यावहारिक रूप से कृषि एवं बागवानी में किस प्रकार उपयोगी है। इन तथ्यों की पकड़ परीक्षा में सीधे अंक दिलाती है।
द्विखंडन (Binary Fission): इस विधि में एकल कोशिका जीव स्वयं को दो समान भागों में विभाजित करता है। सर्वप्रथम केंद्रक का विभाजन होता है, फिर साइटोप्लाज्म का। अमीबा में द्विखंडन किसी भी दिशा में होता है, इसलिए इसे अनियमित द्विखंडन कहते हैं। पैरामीशियम में द्विखंडन अनुप्रस्थ (अनुदैर्ध्य) रूप में होता है। यूग्लीना तथा जीवाणु में द्विखंडन अनुदैर्ध्य होता है। जीवाणु में द्विखंडन अत्यंत तीव्र होता है, जिससे इनकी संख्या तेजी से बढ़ती है। प्लैज्मोडियम (मलेरिया परजीवी) में द्विखंडन नहीं, बल्कि बहुखंडन होता है। परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है कि अमीबा में द्विखंडन अनियमित और पैरामीशियम में अनुप्रस्थ होता है।
बहुखंडन (Multiple Fission): इस विधि में एक जीव एक साथ अनेक छोटे जीवों में विभाजित होता है। सर्वप्रथम केंद्रक का बार-बार विभाजन होता है, जिससे अनेक केंद्रक बनते हैं, फिर प्रत्येक केंद्रक के चारों ओर साइटोप्लाज्म जुड़कर नई कोशिकाएँ बनाते हैं। बहुखंडन का श्रेष्ठ उदाहरण प्लैज्मोडियम तथा अमीबा (प्रतिकूल परिस्थिति में) हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों में अमीबा चारों ओर मोटी भित्ति बनाकर पुटी (cyst) में बदल जाता है तथा उसमें बहुखंडन होता है।
मुकुलन (Budding): इस विधि में जनक जीव की कोशिका पर एक या अधिक उभार (bud) बनते हैं। ये उभार धीरे-धीरे बढ़ते हैं और विकसित होकर नए जीव बनते हैं। नया जीव शुरू में जनक से जुड़ा रहता है, बाद में अलग हो जाता है। मुकुलन का श्रेष्ठ उदाहरण हाइड्रा है। यीस्ट में भी मुकुलन होता है, जिससे यीस्ट की श्रृंखला बनती है। मुकुलन में केंद्रक का विभाजन असमान होता है। रेलवे परीक्षा में हाइड्रा को मुकुलन का उदाहरण मानना सबसे अधिक पूछा जाता है।
बीजाणु निर्माण (Spore Formation): इस विधि में जीव विशेष कोशिकाएँ उत्पन्न करता है जिन्हें बीजाणु (spores) कहते हैं। बीजाणु प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं तथा अनुकूल परिस्थिति मिलने पर नया जीव बनाते हैं। इसका श्रेष्ठ उदाहरण मशरूम, राइजोपस (ब्रेड मोल्ड) तथा मॉस हैं। ब्रेड पर रखी हुई रोटी पर दिखने वाला सफेद-काला साँचा राइजोपस का बीजाणु जनन है। बीजाणु सामान्यतः प्रतिकूल परिस्थितियों में बनते हैं।
विखंडन (Fragmentation): इस विधि में पादप का काय भाग छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाता है, और प्रत्येक टुकड़ा नया पादप बनाता है। इसका श्रेष्ठ उदाहरण स्पाइरोगाइरा (शैवाल) है। इसके तंतु टूटकर अलग-अलग टुकड़े बनाते हैं, जिनमें से प्रत्येक नया तंतु विकसित करता है।
कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation): यह पादपों में होने वाला अलैंगिक जनन है जिसमें जड़, तना, पत्ती जैसे कायिक भागों से नया पादप बनता है। कायिक प्रवर्धन के कई उदाहरण हैं — आलू की कलियाँ (आँख) तने से नए पादप बनाती हैं, प्याज तथा लहसुन गूँथन (bulb) से, अदरक तथा घास प्रकंद (rhizome) से, स्ट्रॉबेरी तथा मेंथा (पुदीना) स्टोलन से तथा कोलियस पत्ती या तना से। कैक्टस तथा ब्रायोफिलम (पत्थरचट्टा) की पत्ती के किनारों पर स्थित कलियों से नए पादप बनते हैं।
कायिक प्रवर्धन के लाभ हैं — नया पादप माता पादप के समरूप (क्लोन) होता है, फल एवं पुष्प जल्दी प्राप्त होते हैं, उत्तम गुणवत्ता वाले पादपों को बड़ी मात्रा में उगाया जा सकता है। इसीलिए बागवानी में गुलाब, अंगूर, केला, गन्ना आदि का कायिक प्रवर्धन किया जाता है। रेलवे परीक्षा में आलू की आँख, प्याज का गूँथन तथा अदरक का प्रकंद याद रखना महत्वपूर्ण है।
भागिक विखंडन (Regeneration): यह वह प्रक्रिया है जिसमें कोई जीव अपने खोए हुए अंग को पुनः विकसित करता है तथा कुछ जीवों में एक टुकड़े से पूरा नया जीव बन जाता है। भागिक विखंडन के उदाहरण हैं — छिपकली की पूँछ का पुनः विकसित होना, स्टारफिश का टूटा भाग से नया जीव बनना, प्लेनेरिया (समतल कृमि) का कटे टुकड़े से पुनः निर्माण। हाइड्रा की छोटी-छोटी कटी हुई टहनियों से भी नए हाइड्रा बनते हैं। ध्यान दें कि भागिक विखंडन उच्च जीवों में सामान्यतः नहीं होता।
अलैंगिक जनन का महत्व: अलैंगिक जनन से संतति की संख्या तीव्रता से बढ़ती है, इसमें समय और ऊर्जा की बचत होती है, तथा अनुकूल परिस्थितियों में यह अत्यंत कारगर होता है। परंतु इसमें आनुवंशिक विविधता नहीं होती, जिससे बदलते पर्यावरण में जीवित रहने की क्षमता कम हो जाती है। इस कमी को लैंगिक जनन दूर करता है।
अलैंगिक जनन से उत्पन्न संततियाँ जनक के आनुवंशिक रूप से समरूप होती हैं, जिन्हें क्लोन कहते हैं। क्लोनिंग (cloning) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी जीव की आनुवंशिक रूप से समान प्रतिलिपि बनाई जाती है। विज्ञान में इसका उपयोग पादपों तथा जंतुओं दोनों में होता है। सबसे प्रसिद्ध क्लोनिंग का उदाहरण भेड़ 'डॉली' है, जो 1996 में कायिक कोशिका से बनाई गई थी। पौधों में ऊतक संवर्धन (tissue culture) द्वारा असंख्य क्लोन बनाए जाते हैं।
अलैंगिक जनन की माइटोसिस प्रक्रिया से तुलना की जाए तो यह स्पष्ट होता है कि अलैंगिक जनन का प्रत्येक चरण माइटोसिस पर आधारित है। माइटोसिस में एक कोशिका से दो समरूप कोशिकाएँ बनती हैं, जिनका गुणसूत्र संख्या समान रहता है। इसीलिए अलैंगिक जनन में संतति जनक के समरूप होती है। रेलवे परीक्षा में अलैंगिक जनन और माइटोसिस का संबंध तथा क्लोन की परिभाषा प्रायः पूछी जाती है।
कृषि में उपयोग: कायिक प्रवर्धन का उपयोग उत्तम गुणवत्ता वाले फलों, सब्जियों तथा फूलों के पादपों को बड़ी संख्या में उगाने में होता है। गन्ने की कटिंग, आलू की कलियाँ तथा केले के सकर (sucker) इसके सामान्य उदाहरण हैं। रेलवे परीक्षा में कायिक प्रवर्धन के व्यावहारिक उपयोग से संबंधित प्रश्न भी पूछे जाते हैं।
| विधि | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| द्विखंडन | एक कोशिका दो भागों में विभाजित | अमीबा, पैरामीशियम, जीवाणु |
| बहुखंडन | एक जीव से अनेक जीव | प्लैज्मोडियम, अमीबा (पुटी) |
| मुकुलन | कोशिका पर उभार से नया जीव | हाइड्रा, यीस्ट |
| बीजाणु निर्माण | बीजाणुओं से नया जीव | मशरूम, राइजोपस |
| विखंडन | काय का टुकड़ों में टूटना | स्पाइरोगाइरा |
| भागिक विखंडन | टुकड़े से पूरा जीव | स्टारफिश, प्लेनेरिया |
| पादप भाग | उदाहरण |
|---|---|
| तना (कलियाँ/आँख) | आलू, गन्ना |
| प्रकंद (Rhizome) | अदरक, घास |
| गूँथन (Bulb) | प्याज, लहसुन |
| स्टोलन | स्ट्रॉबेरी, पुदीना |
| पत्ती | ब्रायोफिलम, कैक्टस |
flowchart TD
A[अलैंगिक जनन] --> B[द्विखंडन]
A --> C[बहुखंडन]
A --> D[मुकुलन]
A --> E[बीजाणु निर्माण]
A --> F[विखंडन]
A --> G[कायिक प्रवर्धन]
A --> H[भागिक विखंडन]
B --> B1[अमीबा - अनियमित]
B --> B2[पैरामीशियम - अनुप्रस्थ]
C --> C1[प्लैज्मोडियम]
D --> D1[हाइड्रा, यीस्ट]
E --> E1[मशरूम, राइजोपस]
F --> F1[स्पाइरोगाइरा]
G --> G1[आलू, अदरक, प्याज]
H --> H1[स्टारफिश, प्लेनेरिया]
A --> I[माइटोसिस आधारित]
A --> J[संतति समरूप - क्लोन]
अलैंगिक जनन जीवों के जनन का सरल तथा प्राचीन प्रकार है, जिसमें केवल एक जनक भाग लेता है। इस अध्याय में हमने अलैंगिक जनन की सात प्रमुख विधियों — द्विखंडन, बहुखंडन, मुकुलन, बीजाणु निर्माण, विखंडन, कायिक प्रवर्धन और भागिक विखंडन — को उनके उदाहरणों सहित विस्तार से समझा। अमीबा का द्विखंडन, हाइड्रा का मुकुलन तथा प्लैज्मोडियम का बहुखंडन सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। कायिक प्रवर्धन का उपयोग कृषि और बागवानी में उत्तम पादप प्राप्त करने के लिए किया जाता है। अलैंगिक जनन में संतति जनक के आनुवंशिक रूप से समरूप (क्लोन) होती है, जिसमें आनुवंशिक विविधता नहीं होती। रेलवे टेक्नीशियन परीक्षा में इस विषय से सरल परंतु निर्णायक प्रश्न पूछे जाते हैं, अतः उदाहरण-आधारित अभ्यास से इन्हें पूर्ण रूप से स्मरण रखना चाहिए।