18.10 विविधता और वंशागति Notes

18.10 विविधता और वंशागति

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: जीव विज्ञान – नियंत्रण जनन और आनुवंशिकता विषय-वस्तु: 18.10 विविधता और वंशागति

1. परिचय

विविधता (variation) और वंशागति (inheritance) आनुवंशिकी के दो परस्पर संबंधित पहलू हैं। वंशागति से जनकों के गुण संतति में संचारित होते हैं, जबकि विविधता के कारण संतति के जीव आपस में तथा अपने जनकों से कुछ भिन्न होते हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में विविधता के प्रकार, वंशागति की प्रक्रिया तथा विकास में विविधता की भूमिका से संबंधित प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं। यदि सभी जीव एक-दूसरे के समरूप होते तो प्रकृति में विविधता नहीं होती। विविधता ही यह सुनिश्चित करती है कि पर्यावरण बदलने पर कुछ जीव जीवित रहें। इसीलिए विविधता विकास का आधार है।

वंशागति के कारण संतति में जनकों की विशेषताएँ — रंग, आकार, ऊँचाई, रोग प्रतिरोध — पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचारित होती हैं। यह संचरण जीनों के माध्यम से होता है। लैंगिक जनन में जनकों से मिले जीनों के संयोजन से संतति में विविधता उत्पन्न होती है। अलैंगिक जनन में संतति जनक के समरूप होती है, इसलिए उसमें विविधता सीमित होती है। विविधता का प्रमुख स्रोत युग्मक निर्माण के समय होने वाला क्रॉसिंग ओवर, युग्मकों का यादृच्छिक संयोजन तथा म्यूटेशन (उत्परिवर्तन) हैं।

इस अध्याय में हम विविधता के प्रकार, वंशागति की प्रक्रिया, विविधता के स्रोत, प्राकृतिक चयन तथा विकास में विविधता की भूमिका का विस्तार से अध्ययन करेंगे। साथ ही मेंडल के पृथक्करण के नियम के आधार पर वंशागति की गणितीय समझ को विकसित करेंगे। परीक्षा की दृष्टि से विविधता के प्रकार, म्यूटेशन की परिभाषा तथा प्राकृतिक चयन की अवधारणा सबसे महत्वपूर्ण है। इन तथ्यों की पकड़ परीक्षा में निश्चित अंक दिलाती है।

2. विविधता के प्रकार

विविधता (variation) का अर्थ है समान प्रजाति के जीवों में पाए जाने वाले अंतर। विविधता दो प्रकार की होती है — वंशानुगत विविधता तथा पर्यावरणीय (अर्जित) विविधता।

वंशानुगत विविधता (Hereditary Variation): वह विविधता जो जीनों में परिवर्तन के कारण होती है और पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचारित होती है, वंशानुगत विविधता कहलाती है। इसके स्रोत हैं — क्रॉसिंग ओवर, युग्मकों का यादृच्छिक संयोजन तथा म्यूटेशन। यह विविधता विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्राकृतिक चयन का आधार बनती है। उदाहरण के लिए, आँखों के रंग, ऊँचाई तथा रक्त समूह में पाए जाने वाले अंतर वंशानुगत विविधता हैं।

पर्यावरणीय विविधता (Environmental Variation): वह विविधता जो पर्यावरणीय परिस्थितियों — पोषण, प्रकाश, तापमान — के कारण होती है, पर्यावरणीय या अर्जित विविधता कहलाती है। यह विविधता संतति में संचारित नहीं होती। उदाहरण के लिए, अच्छे पोषण के कारण व्यक्ति का लंबा होना तथा व्यायाम से पेशियों का विकसित होना पर्यावरणीय विविधता है। अच्छी पोषण व्यवस्था में उगाए गए पौधे बड़े होते हैं, परंतु उनका जीन नहीं बदलता। रेलवे परीक्षा में वंशानुगत तथा पर्यावरणीय विविधता का अंतर प्रायः पूछा जाता है।

सतत एवं असतत विविधता: कुछ विविधताएँ सतत (continuous) होती हैं, जिनमें जीवों के बीच हल्के-हल्के अंतर होते हैं, जैसे ऊँचाई और वजन। कुछ विविधताएँ असतत (discontinuous) होती हैं, जिनमें स्पष्ट अंतर होते हैं, जैसे रक्त समूह तथा आँखों का रंग। सतत विविधता अनेक जीनों से प्रभावित होती है, जबकि असतत विविधता एक या कुछ जीनों से निर्धारित होती है।

3. वंशागति और विविधता के स्रोत

वंशागति (inheritance) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जनकों के गुण संतति में संचारित होते हैं। यह जीन के माध्यम से होती है। प्रत्येक जनक अपने गुणसूत्रों का आधा भाग संतति को देता है। लैंगिक जनन में नर तथा मादा दोनों के युग्मक मिलकर संतति के गुणसूत्र बनाते हैं। इस प्रकार संतति को दोनों जनकों से जीन मिलते हैं।

विविधता के स्रोत: विविधता के तीन प्रमुख स्रोत हैं — क्रॉसिंग ओवर, युग्मकों का यादृच्छिक संयोजन तथा म्यूटेशन।

क्रॉसिंग ओवर (Crossing Over): अर्धसूत्री विभाजन के समय समजात गुणसूत्रों के बीच खंडों का आदान-प्रदान होता है, जिसे क्रॉसिंग ओवर या विनिमय कहते हैं। इससे गुणसूत्रों पर जीनों का नया संयोजन बनता है, जिससे विविधता बढ़ती है। क्रॉसिंग ओवर अर्धसूत्री विभाजन प्रथम में होता है।

युग्मकों का यादृच्छिक संयोजन (Random Fertilization): निषेचन के समय किसी भी शुक्राणु का किसी भी अंडाणु से संयोजन हो सकता है। चूँकि पिता से लाखों शुक्राणु तथा माता से अंडाणु होते हैं, इसलिए संयोजन के असंख्य संभव तरीके होते हैं। यह यादृच्छिक संयोजन ही संतति में विविधता का एक प्रमुख स्रोत है।

म्यूटेशन (Mutation): जीन या गुणसूत्र में अचानक होने वाला स्थायी परिवर्तन म्यूटेशन या उत्परिवर्तन कहलाता है। म्यूटेशन के कारण नए लक्षण उत्पन्न होते हैं, जो आनुवंशिक विविधता का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत हैं। म्यूटेशन के कारक हैं — विकिरण, रासायनिक पदार्थ तथा कुछ विषाणु। अधिकांश म्यूटेशन हानिकारक होते हैं, परंतु कुछ लाभदायक भी होते हैं। लाभदायक म्यूटेशन ही विकास की दिशा निर्धारित करते हैं। रेलवे परीक्षा में म्यूटेशन की परिभाषा प्रायः पूछी जाती है।

वंशागति में अनुपातों का महत्व: मेंडल के प्रयोगों से यह सिद्ध हुआ कि लक्षणों का संचरण निश्चित अनुपात में होता है। F2 पीढ़ी में मोनोहाइब्रिड क्रॉस में 3:1 तथा डायहाइब्रिड क्रॉस में 9:3:3:1 का अनुपात मिलता है। ये अनुपात वंशागति की नियमितता को दर्शाते हैं।

4. विकास में विविधता की भूमिका

विविधता विकास (evolution) की प्रक्रिया का आधार है। चार्ल्स डार्विन ने अपने सिद्धांत — प्राकृतिक चयन — के द्वारा बताया कि जीवों में विविधता होने से कुछ जीव अपने पर्यावरण में अधिक अनुकूल होते हैं। जो जीव पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल होते हैं, वे अधिक संख्या में संतति छोड़ते हैं। यह प्रक्रिया प्राकृतिक चयन कहलाती है। जो लक्षण जीवित रहने में सहायक होते हैं, वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी अधिक संख्या में संचारित होते हैं।

प्राकृतिक चयन (Natural Selection): प्राकृतिक चयन के अनुसार, पर्यावरण में संसाधन सीमित हैं, जबकि जीव अधिक संतति उत्पन्न करते हैं। जीवों में विविधता के कारण कुछ जीव पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल होते हैं। ऐसे जीवों के जीवित रहने तथा प्रजनन की संभावना अधिक होती है। अनुकूल लक्षण पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचारित होते हैं। इस प्रकार समय के साथ प्रजाति बदलती है। रेलवे परीक्षा में प्राकृतिक चयन की अवधारणा तथा डार्विन का नाम प्रायः पूछा जाता है।

विविधता का व्यावहारिक महत्व: विविधता के कारण ही प्रजातियाँ रोगों तथा पर्यावरणीय परिवर्तनों के विरुद्ध सुरक्षित रहती हैं। कृषि में विविधता का उपयोग रोग प्रतिरोधक किस्में विकसित करने में होता है। आनुवंशिकी के ज्ञान से उत्तम नस्लों का चयन किया जाता है। मानव समुदाय में रक्त समूह, त्वचा के रंग तथा अन्य लक्षणों की विविधता स्वाभाविक है। विविधता जीवन की समृद्धि का कारण है।

वंशागति का वैज्ञानिक अध्ययन: वंशागति का अध्ययन पारिवारिक वृक्ष (pedigree) बनाकर भी किया जाता है। पारिवारिक वृक्ष में पीढ़ियों के लक्षणों का विश्लेषण करके यह जाना जाता है कि कोई गुण किस प्रकार संचारित हो रहा है। इसका उपयोग आनुवंशिक रोगों की पहचान में होता है। आधुनिक युग में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग से व्यक्तियों की पहचान तथा वंशागति का अध्ययन संभव हुआ है। डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का उपयोग अपराध जाँच तथा पितृत्व परीक्षण में होता है। रेलवे परीक्षा में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का उपयोग प्रायः पूछा जाता है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: विविधता के प्रकार

प्रकार कारण संचारण उदाहरण
वंशानुगत विविधता जीन परिवर्तन, क्रॉसिंग ओवर, म्यूटेशन पीढ़ी-दर-पीढ़ी आँखों का रंग, रक्त समूह
पर्यावरणीय विविधता पोषण, प्रकाश, तापमान संचारित नहीं व्यायाम से पेशियों का विकास

तालिका 2: विविधता के स्रोत

स्रोत प्रक्रिया प्रभाव
क्रॉसिंग ओवर अर्धसूत्री प्रथम में खंडों का आदान-प्रदान नया जीन संयोजन
यादृच्छिक संयोजन किसी भी शुक्राणु-अंडाणु का मिलन असंख्य संयोजन
म्यूटेशन जीन/गुणसूत्र में स्थायी परिवर्तन नए लक्षण

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[विविधता और वंशागति] --> B[वंशागति]
    A --> C[विविधता]
    A --> D[विविधता के स्रोत]
    A --> E[विकास]
    B --> B1[जीन द्वारा संचरण]
    B --> B2[जनक से संतति]
    C --> C1[वंशानुगत विविधता]
    C --> C2[पर्यावरणीय विविधता]
    D --> D1[क्रॉसिंग ओवर]
    D --> D2[यादृच्छिक संयोजन]
    D --> D3[म्यूटेशन]
    E --> E1[प्राकृतिक चयन]
    E --> E2[अनुकूलन]
    E --> E3[प्रजाति में परिवर्तन]
    A --> F[डीएनए फिंगरप्रिंटिंग]
    A --> G[पारिवारिक वृक्ष]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

विविधता और वंशागति का संबंध जनक नर युग्मक मादा युग्मक संतति (नया संयोजन) विविधता - युग्मक संयोजन लैंगिक जनन से आनुवंशिक विविधता उत्पन्न स्वर्ण नियम लैंगिक जनन में दो जनकों के युग्मकों का संयोजन ही विविधता का आधार है।

विविधता के स्रोत क्रॉसिंग ओवर - खंडों का आदान-प्रदान यादृच्छिक संयोजन - शुक्राणु-अंडाणु का मिलन म्यूटेशन - जीन में स्थायी परिवर्तन प्राकृतिक चयन (डार्विन) अनुकूल लक्षण पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचारित होते हैं स्वर्ण नियम म्यूटेशन विविधता का मूल स्रोत है, प्राकृतिक चयन इसका चयनकर्ता।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. छात्र पर्यावरणीय विविधता को संतति में संचारित मान लेते हैं; यह संचारित नहीं होती।
  2. वंशानुगत और अर्जित लक्षणों में भ्रम होना; व्यायाम से विकसित पेशियाँ अर्जित लक्षण हैं।
  3. म्यूटेशन को जीन का स्थायी परिवर्तन न मानना, बल्कि अस्थायी मानना।
  4. क्रॉसिंग ओवर का समय अर्धसूत्री विभाजन द्वितीय मान लेना, जबकि यह अर्धसूत्री प्रथम में होता है।
  5. विविधता के सभी प्रकार विकास के लिए लाभदायक मान लेना; अधिकांश म्यूटेशन हानिकारक होते हैं।
  6. प्राकृतिक चयन का सिद्धांत मेंडल को दे देना; यह डार्विन का सिद्धांत है।
  7. अलैंगिक जनन में भी अधिक विविधता होती है मान लेना; अलैंगिक जनन में संतति समरूप होती है।
  8. डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का उपयोग केवल रोग उपचार में मान लेना; इसका उपयोग पहचान तथा पितृत्व परीक्षण में होता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. वंशानुगत तथा पर्यावरणीय विविधता का अंतर उदाहरण सहित स्मरण रखें।
  2. विविधता के तीन स्रोत — क्रॉसिंग ओवर, यादृच्छिक संयोजन, म्यूटेशन — याद रखें।
  3. म्यूटेशन की परिभाषा — जीन/गुणसूत्र में स्थायी परिवर्तन — लिखित रूप में तैयार रखें।
  4. प्राकृतिक चयन को डार्विन के सिद्धांत से जोड़कर याद रखें।
  5. अर्जित लक्षण संचारित नहीं होते, यह तथ्य स्पष्ट रखें।
  6. डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के उपयोग (अपराध जाँच, पितृत्व परीक्षण) याद रखें।
  7. क्रॉसिंग ओवर का समय अर्धसूत्री प्रथम याद रखें।
  8. विकास और विविधता का संबंध एक पंक्ति में स्मरण रखें — विविधता ही विकास का आधार है।

10. निष्कर्ष

विविधता और वंशागति आनुवंशिकी के वे दो पहलू हैं जो प्रजाति की निरंतरता तथा परिवर्तन दोनों को स्पष्ट करते हैं। इस अध्याय में हमने वंशानुगत तथा पर्यावरणीय विविधता का अंतर, विविधता के स्रोत — क्रॉसिंग ओवर, यादृच्छिक संयोजन तथा म्यूटेशन — तथा विकास में विविधता की भूमिका का अध्ययन किया। जीन के माध्यम से लक्षण पीढ़ी-दर-पीढ़ी संचारित होते हैं, जबकि म्यूटेशन तथा युग्मक संयोजन नई विविधता उत्पन्न करते हैं। प्राकृतिक चयन अनुकूल लक्षणों को बनाए रखता है। डीएनए फिंगरप्रिंटिंग जैसी तकनीकें वंशागति के अध्ययन को आधुनिक बनाती हैं। रेलवे टेक्नीशियन परीक्षा में विविधता के प्रकार तथा स्रोतों से प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं, अतः इनका नियमित दोहराव आवश्यक है।