पारितंत्र Notes

पारितंत्र

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: जीव विज्ञान – विकास और पर्यावरण विषय-वस्तु: 19.4 पारितंत्र

1. परिचय

पारितंत्र (Ecosystem) जीव विज्ञान की वह महत्वपूर्ण अवधारणा है जो जीवों और उनके पर्यावरण के बीच के संबंधों का अध्ययन करती है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में पारितंत्र से संबंधित प्रश्न प्रतिवर्ष पूछे जाते हैं। किसी विशेष क्षेत्र के सभी जीव (जैविक घटक) और उनके भौतिक पर्यावरण (अजैविक घटक) मिलकर एक पारितंत्र बनाते हैं। उदाहरण के लिए, एक तालाब, एक वन, एक नदी या एक मरुस्थल सभी पारितंत्र हैं। पारितंत्र शब्द सबसे पहले ए.जी. टेन्सले (A.G. Tansley) ने सन् 1935 में दिया था। पारितंत्र का अध्ययन करने वाली विज्ञान की शाखा को पारिस्थितिकी (Ecology) कहते हैं।

पारितंत्र में जीवों और पर्यावरण के बीच ऊर्जा और पदार्थ का निरंतर आदान-प्रदान होता रहता है। सूर्य की ऊर्जा को हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा ग्रहण कर खाद्य में बदलते हैं। यह खाद्य खाद्य श्रृंखला के माध्यम से विभिन्न जीवों में स्थानांतरित होती है। इसके साथ ही पोषक तत्व जैसे कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस और जल पारितंत्र में चक्रीय रूप से प्रवाहित होते रहते हैं। इस प्रकार पारितंत्र एक स्वतंत्र और संतुलित इकाई होती है जिसमें सभी घटक परस्पर निर्भर होते हैं।

इस अध्याय में हम पारितंत्र के घटक, जैविक और अजैविक घटकों के प्रकार, उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक, पारितंत्र के प्रकार तथा पारितंत्र के संतुलन का अध्ययन करेंगे। यह अध्याय आगे के खाद्य श्रृंखला, ऊर्जा प्रवाह, प्रदूषण और जैव विविधता के अध्यायों की नींव है। रेलवे परीक्षा में पारितंत्र के घटकों की पहचान, उत्पादक-उपभोक्ता-अपघटक का वर्गीकरण और पारितंत्र के प्रकारों पर आधारित प्रश्न सबसे अधिक पूछे जाते हैं।

2. पारितंत्र के घटक

पारितंत्र दो मुख्य घटकों से मिलकर बना होता है: अजैविक घटक और जैविक घटक। इन दोनों के बीच का संतुलन ही पारितंत्र के स्वास्थ्य का सूचक है।

अजैविक घटक (Abiotic Components): पारितंत्र के वे घटक जिनमें जीवन नहीं होता, अजैविक घटक कहलाते हैं। इनमें प्रकाश, तापमान, जल, वायु, मिट्टी, खनिज लवण, आर्द्रता और pH शामिल हैं। ये घटक जीवों के जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं। प्रकाश प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है। तापमान जीवों की वृद्धि और प्रजनन को प्रभावित करता है। जल सभी जीवों के लिए अत्यंत आवश्यक है। मिट्टी पौधों को पोषक तत्व प्रदान करती है। ये अजैविक घटक जीवों के वितरण को निर्धारित करते हैं।

जैविक घटक (Biotic Components): पारितंत्र के वे घटक जिनमें जीवन होता है, जैविक घटक कहलाते हैं। इन्हें उनके भोजन प्राप्त करने के तरीके के आधार पर तीन मुख्य समूहों में बाँटा गया है: उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक। जैविक घटकों में सभी प्रकार के पौधे, जानवर, सूक्ष्मजीव, कवक और जीवाणु शामिल हैं।

उत्पादक (Producers): हरे पौधे और कुछ शैवाल प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इन्हें स्वपोषी (Autotrophs) भी कहते हैं। ये पारितंत्र की खाद्य आपूर्ति का मूल स्रोत हैं। इसलिए इन्हें पारितंत्र के उत्पादक कहा जाता है।

उपभोक्ता (Consumers): वे जीव जो अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते और दूसरे जीवों पर निर्भर रहते हैं, उपभोक्ता या परपोषी (Heterotrophs) कहलाते हैं। उपभोक्ता तीन प्रकार के होते हैं: प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी), द्वितीयक उपभोक्ता (मांसाहारी) और तृतीयक उपभोक्ता (शीर्ष मांसाहारी)।

अपघटक (Decomposers): जीवाणु और कवक जैसे सूक्ष्मजीव जो मृत जीवों और अपशिष्ट पदार्थों का विघटन करते हैं, अपघटक कहलाते हैं। ये जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में बदलते हैं, जिससे पोषक तत्व मिट्टी में वापस लौट जाते हैं। अपघटक पारितंत्र में पोषक तत्वों के चक्रण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

3. पारितंत्र के प्रकार

पारितंत्र को उसके अस्तित्व और पर्यावरण के आधार पर मुख्यतः दो श्रेणियों में विभाजित किया जाता है।

प्राकृतिक पारितंत्र (Natural Ecosystem): प्रकृति द्वारा स्वयं निर्मित पारितंत्र को प्राकृतिक पारितंत्र कहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं। स्थलीय पारितंत्र जैसे वन, घास के मैदान, मरुस्थल, पर्वत और टुंड्रा। जलीय पारितंत्र जैसे ताजे जल के पारितंत्र (तालाब, झील, नदी) और खारे जल के पारितंत्र (समुद्र, सागर, मुहाना)। वन पारितंत्र पृथ्वी पर सबसे अधिक जैव विविधता वाले पारितंत्र हैं। मरुस्थलीय पारितंत्र में वर्षा बहुत कम होती है। समुद्री पारितंत्र पृथ्वी के सबसे बड़े पारितंत्र हैं।

कृत्रिम पारितंत्र (Artificial Ecosystem): मनुष्य द्वारा निर्मित पारितंत्र को कृत्रिम पारितंत्र कहते हैं। खेत, बगीचा, फिश पॉन्ड, ग्रीन हाउस और एक्वेरियम कृत्रिम पारितंत्र के उदाहरण हैं। एक्वेरियम एक छोटा कृत्रिम जलीय पारितंत्र है जिसमें मछली, जलीय पौधे और जल जैसे घटक होते हैं। कृत्रिम पारितंत्र को अपने संतुलन के लिए मनुष्य की देखभाल की आवश्यकता होती है।

सबसे बड़ा पारितंत्र: जीवमंडल (Biosphere) पृथ्वी का सबसे बड़ा पारितंत्र है। यह पृथ्वी का वह भाग है जहाँ जीवन पाया जाता है। जीवमंडल में स्थलमंडल (Lithosphere), जलमंडल (Hydrosphere) और वायुमंडल (Atmosphere) के वे भाग शामिल हैं जहाँ जीव रहते हैं। जीवमंडल में सभी स्थलीय और जलीय पारितंत्र शामिल हैं।

4. पारितंत्र का संतुलन और पोषक तत्व चक्र

पारितंत्र में संतुलन बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस संतुलन के लिए जैविक और अजैविक घटकों के बीच सामंजस्य आवश्यक है। खाद्य श्रृंखला के माध्यम से जनसंख्या का नियंत्रण होता है। शाकाहारी जीव पौधों को, मांसाहारी जीव शाकाहारियों को नियंत्रित करते हैं। यदि एक घटक की संख्या में असामान्य वृद्धि हो जाए तो संपूर्ण पारितंत्र असंतुलित हो सकता है।

पारितंत्र में पोषक तत्वों का चक्रीय प्रवाह होता रहता है। कार्बन चक्र में कार्बन डाइऑक्साइड प्रकाश संश्लेषण द्वारा पौधों में प्रवेश करती है और श्वसन तथा दहन द्वारा वायुमंडल में लौटती है। नाइट्रोजन चक्र में नाइट्रोजन स्थिरीकरण, नाइट्रीकरण और विच्छेदन की प्रक्रियाएँ शामिल हैं। नाइट्रोजन को पौधों द्वारा उपयोग के लिए स्थिर करने में राइज़ोबियम जैसे जीवाणु सहायक होते हैं। जल चक्र में जल वाष्पीकरण, संघनन और वर्षा के रूप में चक्रीय रूप से प्रवाहित होता है। ये चक्र पारितंत्र की स्थिरता के लिए आवश्यक हैं।

पारितंत्र में संतुलन बिगाड़ने वाले कारकों में मानवीय गतिविधियाँ, वनों की कटाई, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और जैविक आक्रमण शामिल हैं। रेलवे के संदर्भ में, रेलवे ट्रैक के किनारे के क्षेत्र, रेलवे कॉलोनियाँ और रेलवे द्वारा निर्मित तालाब सभी छोटे पारितंत्र हैं जिनके संरक्षण की आवश्यकता होती है। पर्यावरण संरक्षण के लिए पारितंत्र के संतुलन की समझ आवश्यक है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: पारितंत्र के जैविक घटक

घटक प्रकार भोजन विधि उदाहरण
उत्पादक स्वपोषी प्रकाश संश्लेषण हरे पौधे, शैवाल
प्राथमिक उपभोक्ता परपोषी पौधे खाते हैं खरगोश, गाय, हिरण
द्वितीयक उपभोक्ता परपोषी शाकाहारी खाते हैं मेंढक, छोटे साँप
तृतीयक उपभोक्ता परपोषी मांस खाते हैं बाज़, शेर
अपघटक सैप्रोट्रॉफ मृत जीवों का विघटन जीवाणु, कवक

तालिका 2: प्राकृतिक और कृत्रिम पारितंत्र

आधार प्राकृतिक पारितंत्र कृत्रिम पारितंत्र
निर्माता प्रकृति मनुष्य
देखभाल स्वतः संतुलित मनुष्य की आवश्यकता
उदाहरण वन, नदी, समुद्र, मरुस्थल खेत, एक्वेरियम, फिश पॉन्ड
स्थिरता अधिक कम

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[पारितंत्र] --> B[अजैविक घटक]
    A --> C[जैविक घटक]
    A --> D[प्रकार]
    B --> B1[प्रकाश, जल, तापमान]
    B --> B2[मिट्टी, वायु, खनिज]
    C --> C1[उत्पादक - पौधे]
    C --> C2[उपभोक्ता - जानवर]
    C --> C3[अपघटक - जीवाणु, कवक]
    D --> D1[प्राकृतिक]
    D --> D2[कृत्रिम]
    D1 --> D1a[स्थलीय - वन, मरुस्थल]
    D1 --> D1b[जलीय - तालाब, समुद्र]
    D2 --> D2a[खेत, एक्वेरियम]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

पारितंत्र के घटक पारितंत्र अजैविक घटक जैविक घटक प्रकाश, तापमान, जल वायु, मिट्टी, खनिज लवण आर्द्रता, pH उत्पादक - हरे पौधे उपभोक्ता - जानवर अपघटक - जीवाणु, कवक स्वर्ण नियम पारितंत्र में अजैविक और जैविक घटक परस्पर निर्भर होते हैं।

तालाब पारितंत्र (जलीय पारितंत्र) सूर्य का प्रकाश जलीय पौधे (उत्पादक) छोटी मछली (प्राथमिक उपभोक्ता) बड़ी मछली (द्वितीयक उपभोक्ता) जीवाणु (अपघटक) कवक (अपघटक) तालाब का तल - कीचड़ एवं खनिज (अजैविक) स्वर्ण नियम तालाब में उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक सभी उपस्थित रहते हैं।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. छात्र उत्पादक को केवल पौधे नहीं मानते, जबकि कुछ शैवाल और प्रकाश संश्लेषक जीवाणु भी उत्पादक हैं।
  2. अपघटक को उपभोक्ता की श्रेणी में रखना गलत है, अपघटक मृत जीवों का विघटन करते हैं।
  3. प्राथमिक उपभोक्ता को मांसाहारी समझना गलत है, प्राथमिक उपभोक्ता शाकाहारी होते हैं।
  4. 'पारिस्थितिकी' (Ecology) और 'पारितंत्र' (Ecosystem) को एक ही मानना गलत है, पारिस्थितिकी पारितंत्र का अध्ययन है।
  5. जीवमंडल को पारितंत्र के समान स्तर पर रखना भ्रम पैदा करता है, जीवमंडल सबसे बड़ा पारितंत्र है।
  6. एक्वेरियम को प्राकृतिक पारितंत्र बताना गलत है, यह कृत्रिम पारितंत्र है।
  7. अपघटकों को पारितंत्र के लिए अनावश्यक मानना गलत है, इनके बिना पोषक तत्वों का चक्रण नहीं होता।
  8. जलीय पारितंत्र में केवल समुद्र को शामिल करना गलत है, तालाब और नदी भी जलीय पारितंत्र हैं।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. पारितंत्र शब्द ए.जी. टेन्सले (1935) ने दिया था, यह तथ्य याद रखें।
  2. उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक का वर्गीकरण भोजन प्राप्त करने के तरीके पर आधारित है।
  3. अपघटक के उदाहरण: जीवाणु और कवक सदैव याद रखें।
  4. प्राकृतिक पारितंत्र के उदाहरण: वन, नदी, समुद्र, मरुस्थल और कृत्रिम के उदाहरण: खेत, एक्वेरियम याद रखें।
  5. जीवमंडल में स्थलमंडल, जलमंडल और वायुमंडल के जीवन वाले भाग शामिल हैं।
  6. कार्बन, नाइट्रोजन और जल चक्र पारितंत्र के पोषक तत्व चक्र के मुख्य उदाहरण हैं।
  7. राइज़ोबियम जैसे जीवाणु नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक होते हैं, यह बिंदु अक्सर पूछा जाता है।

10. निष्कर्ष

पारितंत्र पृथ्वी पर जीवन की मूल इकाई है जिसमें जैविक और अजैविक घटक परस्पर निर्भर होकर संतुलित व्यवस्था बनाते हैं। इस अध्याय में हमने पारितंत्र की परिभाषा, उसके घटक, उत्पादक-उपभोक्ता-अपघटक का वर्गीकरण, प्राकृतिक और कृत्रिम पारितंत्र के प्रकार तथा पोषक तत्व चक्र का अध्ययन किया। हमने सीखा कि अपघटक पोषक तत्वों को मिट्टी में लौटाकर पारितंत्र के चक्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जीवमंडल पृथ्वी का सबसे बड़ा पारितंत्र है। पारितंत्र के संतुलन की समझ पर्यावरण संरक्षण का आधार है। अगले अध्यायों में हम खाद्य श्रृंखला, खाद्य जाल और ऊर्जा प्रवाह का अध्ययन करेंगे जो पारितंत्र की कार्यप्रणाली को और स्पष्ट करेंगे।