विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: जीव विज्ञान – विकास और पर्यावरण विषय-वस्तु: 19.5 खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल
पारितंत्र में जीवों के बीच भोजन का संबंध खाद्य श्रृंखला (Food Chain) के रूप में जाना जाता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल से संबंधित प्रश्न प्रतिवर्ष पूछे जाते हैं। खाद्य श्रृंखला उस क्रम को दर्शाती है जिसमें उत्पादक से प्रारंभ होकर उपभोक्ताओं तक ऊर्जा और पोषक तत्व स्थानांतरित होते हैं। उदाहरण के लिए, घास-खरगोश-साँप-बाज़ एक खाद्य श्रृंखला है। खाद्य श्रृंखला में प्रत्येक जीव अपने से पहले वाले जीव को खाता है और स्वयं अपने से आगे वाले जीव के भोजन का स्रोत बनता है।
खाद्य श्रृंखला की शुरुआत हमेशा उत्पादक (हरे पौधे) से होती है क्योंकि ये प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। खाद्य श्रृंखला में प्रत्येक पोषण स्तर को ट्रॉफिक स्तर (Trophic Level) कहते हैं। ट्रॉफिक स्तर में जीवों की संख्या, उनका जैव द्रव्यमान और ऊर्जा धीरे-धीरे घटती जाती है। यह घटाव खाद्य श्रृंखला की संरचना को प्रभावित करता है। सामान्यतः खाद्य श्रृंखला में चार से पाँच ट्रॉफिक स्तर से अधिक नहीं होते क्योंकि ऊर्जा की हानि के कारण आगे के स्तर पर पर्याप्त ऊर्जा शेष नहीं रहती।
खाद्य जाल (Food Web) अनेक खाद्य श्रृंखलाओं का जटिल जाल है। किसी पारितंत्र में एक ही जीव कई खाद्य श्रृंखलाओं का सदस्य हो सकता है। उदाहरण के लिए, खरगोश घास और अन्य पौधों को खाता है और स्वयं साँप, लोमड़ी तथा बाज़ जैसे अनेक जीवों का शिकार बनता है। इस प्रकार कई खाद्य श्रृंखलाएँ आपस में जुड़कर खाद्य जाल बनाती हैं। खाद्य जाल पारितंत्र में स्थिरता प्रदान करता है क्योंकि किसी एक जीव के समाप्त होने पर जीवों के बीच वैकल्पिक खाद्य स्रोत उपलब्ध होते हैं।
खाद्य श्रृंखला मुख्यतः दो प्रकार की होती है: चराई खाद्य श्रृंखला और अपरदी खाद्य श्रृंखला। इन दोनों को समझना परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
चराई खाद्य श्रृंखला (Grazing Food Chain): इस खाद्य श्रृंखला की शुरुआत हरे पौधों (उत्पादकों) से होती है और इसमें ऊर्जा जीवित जीवों के माध्यम से प्रवाहित होती है। जैसे घास-खरगोश-लोमड़ी-शेर। यह खाद्य श्रृंखला पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह का मुख्य मार्ग है। चराई खाद्य श्रृंखला में प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी) हरे पौधों को खाते हैं, द्वितीयक उपभोक्ता प्राथमिक उपभोक्ताओं को और तृतीयक उपभोक्ता द्वितीयक उपभोक्ताओं को खाते हैं।
अपरदी खाद्य श्रृंखला (Detritus Food Chain): इस खाद्य श्रृंखला की शुरुआत मृत कार्बनिक पदार्थ (अपरद) से होती है। इसमें मृत पौधों और जीवों के अवशेषों को अपघटक और परभक्षी जीव खाते हैं। जैसे मृत पत्तियाँ-केंचुआ-पक्षी। अपरदी खाद्य श्रृंखला पोषक तत्वों के चक्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अपरदी खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा का प्रवाह चराई खाद्य श्रृंखला की तुलना में अधिक होता है।
परभक्षी खाद्य श्रृंखला और परजीवी खाद्य श्रृंखला: परभक्षी खाद्य श्रृंखला में शिकारी जीव शिकार को खाते हैं, जैसे शेर-हिरण। परजीवी खाद्य श्रृंखला में परजीवी जीव पोषक जीव से भोजन ग्रहण करते हैं, जैसे पिस्सू-कुत्ता। परजीवी जीव पोषक जीव को मारते नहीं हैं परंतु उसे हानि पहुँचाते हैं।
खाद्य श्रृंखला में प्रत्येक पोषण स्तर को ट्रॉफिक स्तर (Trophic Level) कहते हैं। ट्रॉफिक स्तरों को समझना खाद्य श्रृंखला के प्रश्नों को हल करने की कुंजी है।
प्रथम ट्रॉफिक स्तर (उत्पादक): हरे पौधे और शैवाल पहले ट्रॉफिक स्तर पर होते हैं। ये सूर्य की ऊर्जा को प्रकाश संश्लेषण द्वारा रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं। उदाहरण के लिए घास।
द्वितीय ट्रॉफिक स्तर (प्राथमिक उपभोक्ता): शाकाहारी जीव दूसरे ट्रॉफिक स्तर पर होते हैं। ये उत्पादकों को खाते हैं। उदाहरण के लिए खरगोश, हिरण, गाय।
तृतीय ट्रॉफिक स्तर (द्वितीयक उपभोक्ता): छोटे मांसाहारी जीव तीसरे ट्रॉफिक स्तर पर होते हैं। ये शाकाहारियों को खाते हैं। उदाहरण के लिए मेंढक, छोटे साँप।
चतुर्थ ट्रॉफिक स्तर (तृतीयक उपभोक्ता): बड़े मांसाहारी जीव चौथे ट्रॉफिक स्तर पर होते हैं। ये द्वितीयक उपभोक्ताओं को खाते हैं। उदाहरण के लिए बाज़, शेर। इन्हें शीर्ष उपभोक्ता (Top Consumers) भी कहते हैं।
ट्रॉफिक स्तर की विशेषताएँ: प्रत्येक ट्रॉफिक स्तर पर ऊर्जा, जैव द्रव्यमान और जीवों की संख्या पिछले स्तर की तुलना में घटती जाती है। इस क्रमिक घटाव को पारिस्थितिकी पिरामिड में दर्शाया जाता है। पिरामिड का आधार सदैव उत्पादकों का होता है और शीर्ष पर शीर्ष उपभोक्ता होते हैं। खाद्य श्रृंखला में सामान्यतः चार से पाँच ट्रॉफिक स्तर से अधिक नहीं होते।
खाद्य जाल (Food Web) एक पारितंत्र की सभी खाद्य श्रृंखलाओं का जटिल नेटवर्क है। किसी पारितंत्र में एक ही जीव कई खाद्य श्रृंखलाओं में शामिल हो सकता है। इस प्रकार अनेक खाद्य श्रृंखलाएँ आपस में जुड़कर एक जाल का निर्माण करती हैं।
खाद्य जाल पारितंत्र की स्थिरता का प्रमुख आधार है। यदि खाद्य जाल में किसी एक प्रजाति की संख्या घट जाए तो जीव दूसरे खाद्य स्रोतों पर निर्भर हो जाते हैं। इससे पारितंत्र का संतुलन बना रहता है। उदाहरण के लिए, यदि खरगोशों की संख्या घट जाए तो लोमड़ी चूहों या पक्षियों का शिकार कर सकती है। खाद्य जाल जितना अधिक जटिल होता है, पारितंत्र उतना ही स्थिर रहता है। सरल खाद्य श्रृंखला वाले पारितंत्र जैसे मरुस्थल आसानी से असंतुलित हो सकते हैं।
खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल का महत्व पारितंत्र की कार्यप्रणाली में अत्यधिक है। खाद्य श्रृंखला ऊर्जा प्रवाह की दिशा दर्शाती है। खाद्य जाल जनसंख्या नियंत्रण में सहायक है। शिकारी जीव शिकार की जनसंख्या को नियंत्रित करते हैं। जैव आवर्धन (Biomagnification) की प्रक्रिया खाद्य श्रृंखला से ही संबंधित है, जिसमें हानिकारक रसायन खाद्य श्रृंखला में एक स्तर से अगले स्तर तक स्थानांतरित होते हुए शीर्ष उपभोक्ताओं में अधिक मात्रा में संचित हो जाते हैं। डीडीटी जैसे रसायनों का जैव आवर्धन खाद्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
| ट्रॉफिक स्तर | जीव | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्रथम (उत्पादक) | हरे पौधे, शैवाल | घास, पेड़ |
| द्वितीय (प्राथमिक उपभोक्ता) | शाकाहारी | खरगोश, हिरण, गाय |
| तृतीय (द्वितीयक उपभोक्ता) | छोटे मांसाहारी | मेंढक, छोटे साँप |
| चतुर्थ (तृतीयक उपभोक्ता) | शीर्ष मांसाहारी | बाज़, शेर |
| आधार | चराई खाद्य श्रृंखला | अपरदी खाद्य श्रृंखला |
|---|---|---|
| प्रारंभ | हरे पौधों से | मृत कार्बनिक पदार्थ से |
| ऊर्जा स्रोत | सूर्य की ऊर्जा | अपरद (मृत पदार्थ) |
| उदाहरण | घास-खरगोश-लोमड़ी-शेर | मृत पत्तियाँ-केंचुआ-पक्षी |
| महत्व | मुख्य ऊर्जा प्रवाह | पोषक तत्व चक्रण |
flowchart TD
A[खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल] --> B[खाद्य श्रृंखला]
A --> C[खाद्य जाल]
A --> D[ट्रॉफिक स्तर]
B --> B1[चराई श्रृंखला]
B --> B2[अपरदी श्रृंखला]
B --> B3[परभक्षी श्रृंखला]
B --> B4[परजीवी श्रृंखला]
C --> C1[कई श्रृंखलाओं का जाल]
C --> C2[पारितंत्र स्थिरता]
D --> D1[उत्पादक - घास]
D --> D2[प्राथमिक उपभोक्ता - खरगोश]
D --> D3[द्वितीयक उपभोक्ता - साँप]
D --> D4[तृतीयक उपभोक्ता - बाज़]
खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल पारितंत्र की खाद्य व्यवस्था को दर्शाते हैं। खाद्य श्रृंखला उत्पादक से प्रारंभ होकर शीर्ष उपभोक्ता तक ऊर्जा के प्रवाह को दर्शाती है। चराई और अपरदी खाद्य श्रृंखला इसके दो मुख्य प्रकार हैं। ट्रॉफिक स्तरों में ऊर्जा, जैव द्रव्यमान और जीवों की संख्या क्रमिक रूप से घटती है। खाद्य जाल अनेक खाद्य श्रृंखलाओं का जटिल नेटवर्क है जो पारितंत्र को स्थिरता प्रदान करता है। जनसंख्या नियंत्रण, पोषक तत्व चक्रण और जैव आवर्धन जैसी प्रक्रियाएँ खाद्य श्रृंखला से ही संबंधित हैं। अगले अध्याय में हम ऊर्जा प्रवाह का विस्तार से अध्ययन करेंगे जो खाद्य श्रृंखला की कार्यप्रणाली को और स्पष्ट करेगा।