विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: जीव विज्ञान – विकास और पर्यावरण विषय-वस्तु: 19.8 जैव विविधता और संरक्षण
जैव विविधता (Biodiversity) पृथ्वी पर पाई जाने वाली जीवन की विविधता को दर्शाती है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में जैव विविधता के प्रकार, जैव विविधता हॉटस्पॉट, संरक्षण के उपाय और वन्यजीव संरक्षण से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले सभी प्रकार के जीवों की प्रजातियों की विविधता, आनुवंशिक विविधता और पारिस्थितिकीय विविधता को मिलाकर जैव विविधता कहते हैं। जैव विविधता शब्द सबसे पहले वाल्टर रोसेन (Walter Rosen) ने सन् 1985 में प्रयोग किया था। पृथ्वी पर जैव विविधता मानव सहित सभी जीवों के अस्तित्व का आधार है।
जैव विविधता की उत्पत्ति विकास की प्रक्रिया से हुई है। करोड़ों वर्षों के विकास ने पृथ्वी पर जीवों की असंख्य प्रजातियाँ उत्पन्न की हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि पृथ्वी पर लगभग 8.7 मिलियन प्रजातियाँ पाई जाती हैं। भारत जैव विविधता की दृष्टि से विश्व के सबसे समृद्ध देशों में से एक है। भारत में बाघ, हाथी, गैंडा, शेर, मोर जैसी अनेक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। भारत की मुद्रा में अशोक स्तंभ का शेर और राष्ट्रीय पक्षी मोर जैव विविधता के प्रतीक हैं। रेलवे के लिए जैव विविधता का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रेलवे ट्रैक कई वन्यजीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों से गुजरते हैं।
जैव विविधता का संरक्षण (Conservation) पर्यावरणीय स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है। जैव विविधता के ह्रास से खाद्य श्रृंखला असंतुलित होती है, पारितंत्र की सेवाएँ घटती हैं और औषधीय संसाधन नष्ट होते हैं। संरक्षण के दो मुख्य तरीके हैं: इन-सीटू संरक्षण (स्थान पर संरक्षण) और एक्स-सीटू संरक्षण (स्थान से बाहर संरक्षण)। इस अध्याय में हम जैव विविधता के प्रकार, हॉटस्पॉट, संरक्षण के तरीके और संरक्षण से संबंधित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का अध्ययन करेंगे।
जैव विविधता तीन मुख्य प्रकार की होती है जिन्हें समझना रेलवे परीक्षा के लिए आवश्यक है।
आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity): एक ही प्रजाति के विभिन्न जीवों के बीच पाई जाने वाली जीनों की विविधता को आनुवंशिक विविधता कहते हैं। यह विविधता उस प्रजाति में रंग, आकार, रोग प्रतिरोधक क्षमता आदि के अंतर के रूप में दिखाई देती है। उदाहरण के लिए, गेहूँ की विभिन्न किस्में, धान की विभिन्न किस्में और कुत्तों की विभिन्न नस्लें आनुवंशिक विविधता दर्शाती हैं। आनुवंशिक विविधता किसी प्रजाति की जलवायु परिवर्तन और रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाती है।
प्रजातीय विविधता (Species Diversity): किसी क्षेत्र में पाई जाने वाली विभिन्न प्रजातियों की संख्या को प्रजातीय विविधता कहते हैं। उदाहरण के लिए, एक वन में पेड़ों, पक्षियों, कीटों, स्तनधारियों और कवकों की विभिन्न प्रजातियाँ मिलकर प्रजातीय विविधता बनाती हैं। उष्णकटिबंधीय वनों में प्रजातीय विविधता सबसे अधिक होती है। प्रजातीय विविधता जितनी अधिक होगी, पारितंत्र उतना ही स्थिर होगा।
पारिस्थितिकीय विविधता (Ecological Diversity): किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पारितंत्रों की विविधता को पारिस्थितिकीय विविधता कहते हैं। वन, घास के मैदान, मरुस्थल, नदी, झील, समुद्र जैसे विभिन्न पारितंत्र पारिस्थितिकीय विविधता दर्शाते हैं। एक क्षेत्र में जितने अधिक प्रकार के पारितंत्र होंगे, वहाँ की जैव विविधता उतनी ही अधिक होगी।
जैव विविधता हॉटस्पॉट (Biodiversity Hotspot): ऐसे क्षेत्र जहाँ जैव विविधता अत्यधिक समृद्ध होती है परंतु निवास क्षेत्र नष्ट होने के खतरे में होते हैं, जैव विविधता हॉटस्पॉट कहलाते हैं। इस अवधारणा को नॉर्मन मायर्स (Norman Myers) ने सन् 1988 में प्रस्तुत किया। किसी क्षेत्र को हॉटस्पॉट तभी माना जाता है जब वहाँ कम से कम 1500 स्थानिक (Endemic) संवहनी पौधों की प्रजातियाँ हों और मूल निवास का 70 प्रतिशत नष्ट हो चुका हो। विश्व में कुल 36 जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं। भारत के प्रमुख हॉटस्पॉट हैं: पूर्वी हिमालय, पश्चिमी घाट और सुंडालैंड (इंडो-बर्मा)।
जैव विविधता का ह्रास (Loss of Biodiversity) आधुनिक युग की गंभीर समस्या है। जैव विविधता के ह्रास के मुख्य कारण हैं: निवास स्थानों का नष्ट होना, वनों की कटाई, शिकार और अवैध व्यापार, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और विदेशी प्रजातियों का आक्रमण। जब किसी प्रजाति का अंतिम सदस्य मर जाता है तो उसे विलुप्ति (Extinction) कहते हैं। डोडो पक्षी, सहारन चीता और डायनासोर विलुप्त प्रजातियों के उदाहरण हैं। विलुप्त होने के खतरे में रहने वाली प्रजातियों को लुप्तप्राय (Endangered) प्रजातियाँ कहते हैं।
संरक्षण के तरीके: जैव विविधता संरक्षण के दो मुख्य तरीके हैं: इन-सीटू संरक्षण और एक्स-सीटू संरक्षण।
इन-सीटू संरक्षण (In-situ Conservation): इस विधि में जीवों को उनके प्राकृतिक निवास स्थान में ही संरक्षित किया जाता है। राष्ट्रीय उद्यान (National Park), वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary), बायोस्फीयर रिजर्व (Biosphere Reserve) और संरक्षित वन इन-सीटू संरक्षण के उदाहरण हैं। भारत का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान जिम कॉर्बेट (सन् 1936) है। भारत में बाघ संरक्षण के लिए प्रोजेक्ट टाइगर सन् 1973 में आरंभ हुआ। इन-सीटू संरक्षण सबसे प्रभावी तरीका है क्योंकि इसमें जीव अपने प्राकृतिक पर्यावरण में रहते हैं।
एक्स-सीटू संरक्षण (Ex-situ Conservation): इस विधि में जीवों को उनके प्राकृतिक निवास स्थान से बाहर कृत्रिम परिस्थितियों में संरक्षित किया जाता है। चिड़ियाघर (Zoo), वनस्पति उद्यान (Botanical Garden), बीज बैंक (Seed Bank), जीन बैंक (Gene Bank) और इन विट्रो संस्कृति एक्स-सीटू संरक्षण के उदाहरण हैं। जब कोई प्रजाति अपने प्राकृतिक निवास में विलुप्त होने के कगार पर होती है तो एक्स-सीटू संरक्षण उसे बचाने में सहायक होता है।
जैव विविधता संरक्षण के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेक प्रयास किए गए हैं।
भारत में संरक्षण प्रयास: भारत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम सन् 1972 में लागू हुआ। इस अधिनियम के अंतर्गत वन्यजीवों के शिकार और अवैध व्यापार पर प्रतिबंध है। भारतीय वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 में लागू हुआ। वन्यजीव संरक्षण के लिए प्रोजेक्ट टाइगर (1973) बाघों के संरक्षण के लिए और प्रोजेक्ट एलिफैंट (1992) हाथियों के संरक्षण के लिए आरंभ हुए। भारत में बाघ (Tiger) राष्ट्रीय पशु और मोर (Peacock) राष्ट्रीय पक्षी है। कमल (Lotus) राष्ट्रीय पुष्प है। भारत में वर्तमान में कई राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभ्यारण्य और बायोस्फीयर रिजर्व हैं।
बायोस्फीयर रिजर्व (Biosphere Reserve): बायोस्फीयर रिजर्व वे क्षेत्र हैं जिन्हें जैव विविधता के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जाती है। भारत में नीलगिरि, नंदा देवी, सुंदरबन और नोकरेक जैसे बायोस्फीयर रिजर्व हैं। सुंदरबन बाघ और खारे जल के मगरमच्छ के लिए प्रसिद्ध है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रयास: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) जैव विविधता संरक्षण के लिए कार्य करता है। वन्यजीवों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय (CITES) और जैव विविधता अभिसमय (Convention on Biological Diversity, CBD) सन् 1992 में हस्ताक्षरित हुए। प्रत्येक वर्ष 22 मई को अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता है। विश्व वन्यजीव दिवस प्रत्येक वर्ष 3 मार्च को मनाया जाता है। पर्यावरण दिवस 5 जून को मनाया जाता है। रेलवे के संदर्भ में, रेलवे प्रशासन अपने ट्रैक के आस-पास जैव विविधता बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण करता है और वन्यजीव अभ्यारण्यों के पास ट्रेन की गति सीमित रखता है।
| प्रकार | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| आनुवंशिक विविधता | एक प्रजाति में जीनों की विविधता | गेहूँ की विभिन्न किस्में |
| प्रजातीय विविधता | क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों की संख्या | वन में विभिन्न जीव |
| पारिस्थितिकीय विविधता | विभिन्न पारितंत्रों की विविधता | वन, नदी, समुद्र, मरुस्थल |
| आधार | इन-सीटू संरक्षण | एक्स-सीटू संरक्षण |
|---|---|---|
| स्थान | प्राकृतिक निवास स्थान | निवास स्थान से बाहर |
| उदाहरण | राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभ्यारण्य | चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान, बीज बैंक |
| प्रभावशीलता | अधिक प्रभावी | कम प्रभावी |
| उद्देश्य | संपूर्ण पारितंत्र का संरक्षण | विशिष्ट प्रजातियों का संरक्षण |
flowchart TD
A[जैव विविधता और संरक्षण] --> B[जैव विविधता के प्रकार]
A --> C[हॉटस्पॉट]
A --> D[संरक्षण]
B --> B1[आनुवंशिक विविधता]
B --> B2[प्रजातीय विविधता]
B --> B3[पारिस्थितिकीय विविधता]
C --> C1[नॉर्मन मायर्स 1988]
C --> C2[भारत में - हिमालय, पश्चिमी घाट]
D --> D1[इन-सीटू - राष्ट्रीय उद्यान]
D --> D2[एक्स-सीटू - चिड़ियाघर, बीज बैंक]
D --> D3[प्रोजेक्ट टाइगर 1973]
D --> D4[वन्यजीव अधिनियम 1972]
जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन की समृद्धि और विविधता का प्रतीक है। इस अध्याय में हमने जैव विविधता के तीन प्रकारों, हॉटस्पॉट की अवधारणा, जैव विविधता के ह्रास के कारणों और संरक्षण के तरीकों का अध्ययन किया। इन-सीटू संरक्षण में राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभ्यारण्य शामिल हैं जबकि एक्स-सीटू संरक्षण में चिड़ियाघर और बीज बैंक शामिल हैं। भारत ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972, प्रोजेक्ट टाइगर 1973 और प्रोजेक्ट एलिफैंट 1992 के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण के प्रयास किए हैं। रेलवे टेक्नीशियन के रूप में, हम वन्यजीव अभ्यारण्यों के पास ट्रेन की गति सीमित करके और वृक्षारोपण करके जैव विविधता के संरक्षण में योगदान दे सकते हैं। इस अध्याय के साथ हमारा जीव विज्ञान – विकास और पर्यावरण का अध्ययन पूर्ण होता है।