विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: जीव विज्ञान – कोशिका ऊतक और जीवन प्रक्रियाएँ विषय-वस्तु: 17.4 पादप ऊतक
ऊतक समान संरचना वाली उन कोशिकाओं का समूह है जो एक विशेष कार्य करने के लिए एक साथ जुड़ी होती हैं। बहुकोशिकीय पौधों में अलग-अलग कार्य करने वाली कोशिकाओं के समूह होते हैं, जिन्हें पादप ऊतक कहा जाता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में पादप ऊतकों के वर्गीकरण, उनकी विशेषताओं और उनके कार्यों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। पादप ऊतकों को समझना आवश्यक है क्योंकि ये पौधों की वृद्धि, संवहन और यांत्रिक सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पादप ऊतकों को मुख्यतः दो भागों में बाँटा जाता है — विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissue) और स्थायी ऊतक (Permanent Tissue)। विभज्योतक ऊतक में कोशिकाएँ विभाजित होती रहती हैं और पौधे की वृद्धि करती हैं। स्थायी ऊतक उन कोशिकाओं से बना होता है जिन्होंने विभाजन करने की क्षमता खो दी है और जो विशिष्ट कार्य करने के लिए परिपक्व हो चुकी हैं। स्थायी ऊतक को आगे सरल ऊतक और जटिल ऊतक में विभाजित किया जाता है।
इस अध्याय में हम विभज्योतक ऊतक के प्रकार (शीर्षस्थ, पार्श्व और अंतर्वेशी), स्थायी ऊतकों में पैरेन्काइमा, कॉलेन्काइमा और स्क्लेरेन्काइमा तथा जटिल ऊतकों में जाइलम और फ्लोएम का विस्तार से अध्ययन करेंगे। पादप ऊतकों की समझ पौधों में जल, खनिज और भोजन के परिवहन (संवहन) को समझने का आधार है, इसलिए यह अध्याय अगले अध्यायों से सीधे जुड़ा है।
विभज्योतक ऊतक की कोशिकाओं में विभाजन करने की क्षमता होती है। इनकी कोशिकाएँ छोटी, समान आकार की, पतली भित्ति वाली तथा घने कोशिकाद्रव्य वाली होती हैं। इनमें बड़ी रसधानियाँ नहीं होतीं। स्थान के आधार पर विभज्योतक ऊतक तीन प्रकार के होते हैं।
शीर्षस्थ विभज्योतक (Apical Meristem): यह तने और जड़ के शीर्ष पर पाया जाता है। यह पौधे की लंबाई में वृद्धि (प्राथमिक वृद्धि) करता है।
पार्श्व विभज्योतक (Lateral Meristem): यह तने एवं जड़ के पार्श्व भाग में पाया जाता है। यह पौधे की मोटाई में वृद्धि (द्वितीयक वृद्धि) करता है। कैम्बियम पार्श्व विभज्योतक का उदाहरण है।
अंतर्वेशी विभज्योतक (Intercalary Meristem): यह पत्तियों के आधार या इंटरनोड के आधार पर पाया जाता है। यह इंटरनोड की लंबाई बढ़ाता है।
विभाजन के पश्चात कोशिकाएँ विशिष्ट रूप ग्रहण कर परिपक्व हो जाती हैं और स्थायी ऊतक बनाती हैं। विभज्योतक का पौधे के जीवन भर वृद्धि में योगदान रहता है।
स्थायी ऊतक वह होता है जिसकी कोशिकाएँ विभाजन की क्षमता खो चुकी होती हैं। सरल ऊतक में समान प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं। इसके तीन मुख्य प्रकार हैं — पैरेन्काइमा, कॉलेन्काइमा और स्क्लेरेन्काइमा।
पैरेन्काइमा (Parenchyma): यह सबसे सामान्य सरल ऊतक है। इसकी कोशिकाएँ जीवित, पतली भित्ति वाली, बहुभुजीय या गोल होती हैं। इनमें बड़ी रसधानियाँ होती हैं। पैरेन्काइमा भोज्य पदार्थों का संचयन करता है। पत्तियों की हरित पैरेन्काइमा कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट होने से प्रकाश संश्लेषण होता है।
कॉलेन्काइमा (Collenchyma): इसकी कोशिकाएँ जीवित होती हैं परंतु इनकी भित्ति कोनों पर मोटी होती है। यह युवा तने और पत्ती के डंठल में पाया जाता है। यह पौधे को लचीलापन प्रदान करता है। इसकी कोशिकाएँ पैरेन्काइमा की तरह पतली भित्ति वाली नहीं होतीं।
स्क्लेरेन्काइमा (Sclerenchyma): इसकी कोशिकाएँ मृत, कठोर और मोटी भित्ति वाली होती हैं। भित्ति में लिग्निन का जमाव होता है। यह पौधे को यांत्रिक सुरक्षा और कठोरता प्रदान करता है। नारियल की भूसी और अखरोट का छिलका स्क्लेरेन्काइमा का उदाहरण है।
जटिल ऊतक में एक से अधिक प्रकार की कोशिकाएँ होती हैं जो मिलकर एक इकाई का कार्य करती हैं। पादपों के संवहन ऊतक जाइलम और फ्लोएम जटिल ऊतक हैं।
जाइलम (Xylem): यह जल और खनिज लवणों का पौधे के विभिन्न भागों में परिवहन करता है। जाइलम की मुख्य कोशिकाएँ ट्रेकिड्स और ट्रेकिआ (वाहिकाएँ) हैं जो मृत होती हैं। जाइलम का परिवहन सदैव एक दिशा में होता है — जड़ से पत्तियों की ओर। जाइलम पौधे को यांत्रिक सहारा भी देता है।
फ्लोएम (Phloem): यह पत्तियों में बना भोजन (शर्करा) पौधे के विभिन्न भागों में पहुँचाता है। फ्लोएम की मुख्य कोशिकाएँ सीव नलिकाएँ हैं जो जीवित होती हैं। फ्लोएम में स्थानांतरण द्विदिशात्मक होता है, अर्थात भोजन पत्ती से नीचे और ऊपर दोनों दिशाओं में जा सकता है। फ्लोएम का परिवहन जीवित कोशिकाओं द्वारा होता है।
परीक्षा में प्रायः जाइलम और फ्लोएम के कार्यों तथा दिशा से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। जाइलम जल परिवहन करता है और फ्लोएम भोजन का। जाइलम एकदिशात्मक है, फ्लोएम द्विदिशात्मक।
| ऊतक | कोशिकाएँ | भित्ति | कार्य |
|---|---|---|---|
| पैरेन्काइमा | जीवित | पतली | संचयन, प्रकाश संश्लेषण |
| कॉलेन्काइमा | जीवित | कोनों पर मोटी | लचीलापन और सहारा |
| स्क्लेरेन्काइमा | मृत | बहुत मोटी (लिग्निन) | कठोरता, यांत्रिक सुरक्षा |
| आधार | जाइलम | फ्लोएम |
|---|---|---|
| परिवहन | जल और खनिज | भोजन (शर्करा) |
| मुख्य कोशिकाएँ | ट्रेकिड्स, वाहिकाएँ | सीव नलिकाएँ |
| कोशिकाओं की स्थिति | मृत | जीवित |
| दिशा | एकदिशात्मक (जड़ से पत्ती) | द्विदिशात्मक |
| स्थिति | तने के अंदर (केंद्र) | जाइलम के बाहर |
flowchart TD
A[पादप ऊतक] --> B[विभज्योतक ऊतक]
A --> C[स्थायी ऊतक]
B --> B1[शीर्षस्थ - लंबाई वृद्धि]
B --> B2[पार्श्व - मोटाई वृद्धि]
B --> B3[अंतर्वेशी - इंटरनोड लंबाई]
C --> D[सरल ऊतक]
C --> E[जटिल ऊतक]
D --> D1[पैरेन्काइमा - जीवित, पतली भित्ति]
D --> D2[कॉलेन्काइमा - कोनों पर मोटी भित्ति]
D --> D3[स्क्लेरेन्काइमा - मृत, लिग्निनयुक्त]
E --> E1[जाइलम - जल परिवहन]
E --> E2[फ्लोएम - भोजन परिवहन]
पादप ऊतक पौधों की वृद्धि, सुरक्षा और संवहन के आधार हैं। विभज्योतक ऊतक विभाजन द्वारा पौधे की लंबाई, मोटाई और इंटरनोड की वृद्धि करता है। स्थायी ऊतकों में पैरेन्काइमा संचयन एवं प्रकाश संश्लेषण, कॉलेन्काइमा लचीलापन और स्क्लेरेन्काइमा कठोरता तथा यांत्रिक सुरक्षा प्रदान करता है। जटिल ऊतक जाइलम जल-खनिजों का और फ्लोएम भोजन का परिवहन करते हैं। जाइलम एकदिशात्मक जबकि फ्लोएम द्विदिशात्मक परिवहन करता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में इन ऊतकों के कार्यों और वर्गीकरण से संबंधित प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं। इस अध्याय की पकड़ पौधों में जल एवं भोजन के परिवहन तथा प्रकाश संश्लेषण जैसी जीवन प्रक्रियाओं को समझने की नींव है, अतः तुलनात्मक तालिकाओं का नियमित अभ्यास करना चाहिए।