विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: जीव विज्ञान – कोशिका ऊतक और जीवन प्रक्रियाएँ विषय-वस्तु: 17.7 प्रकाश संश्लेषण
प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) वह जैव रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाइऑक्साइड और जल से कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज) बनाते हैं और ऑक्सीजन मुक्त करते हैं। यह प्रक्रिया पृथ्वी पर जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वायुमंडल में ऑक्सीजन की आपूर्ति करती है तथा सभी जीवों के लिए भोजन का मूल स्रोत है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में प्रकाश संश्लेषण के समीकरण, आवश्यक पदार्थ, अवस्थाओं और महत्व से संबंधित प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं।
प्रकाश संश्लेषण के लिए चार आवश्यक चीज़ें होती हैं — क्लोरोफिल (हरा वर्णक), सूर्य का प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड और जल। यह क्रिया मुख्यतः पत्तियों में स्थित क्लोरोप्लास्ट में होती है। पत्ती में गैसों का आदान-प्रदान रंध्रों (स्टोमाटा) द्वारा होता है। रंध्रों के किनारे दो किडनी के आकार की रक्षक कोशिकाएँ होती हैं जो रंध्रों का खुलना-बंद होना नियंत्रित करती हैं।
प्रकाश संश्लेषण का सामान्य समीकरण इस प्रकार है: 6CO2 + 6H2O प्रकाश तथा क्लोरोफिल की उपस्थिति में C6H12O6 + 6O2। अर्थात छह अणु कार्बन डाइऑक्साइड और छह अणु जल से एक अणु ग्लूकोज और छह अणु ऑक्सीजन बनते हैं। इस अध्याय में हम प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया, उसकी दो अवस्थाओं, आवश्यक पदार्थों तथा महत्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
क्लोरोफिल (Chlorophyll): यह हरा वर्णक है जो पत्तियों के क्लोरोप्लास्ट में पाया जाता है। क्लोरोफिल सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को अवशोषित कर उसे रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है। क्लोरोफिल प्रकाश को अवशोषित करने के कारण प्रकाश संश्लेषण की आधारशिला है।
कार्बन डाइऑक्साइड (CO2): यह वायुमंडल से रंध्रों के द्वारा पत्तियों में प्रवेश करता है। कार्बन डाइऑक्साइड ग्लूकोज के निर्माण में कार्बन का स्रोत है।
जल (H2O): जल जड़ों द्वारा अवशोषित होकर जाइलम के द्वारा पत्तियों तक पहुँचता है। जल इलेक्ट्रॉनों का स्रोत होता है और इसी से ऑक्सीजन मुक्त होती है।
सूर्य का प्रकाश: यह ऊर्जा का स्रोत है जो प्रकाश संश्लेषण की सम्पूर्ण प्रक्रिया को संचालित करता है। सूर्य का लाल और नीला प्रकाश प्रकाश संश्लेषण में सबसे अधिक प्रभावी होता है।
रंध्र (Stomata): ये पत्तियों की सतह पर स्थित सूक्ष्म छिद्र हैं। रंध्रों द्वारा CO2 का अंदर प्रवेश, O2 का बाहर निष्कासन तथा जल का वाष्पोत्सर्जन होता है। रंध्रों की सुरक्षा दो रक्षक कोशिकाएँ करती हैं।
प्रकाश संश्लेषण दो मुख्य अवस्थाओं में संपन्न होता है।
प्रकाश अभिक्रियाएँ (Light Reactions): यह अभिक्रियाएँ क्लोरोप्लास्ट के ग्रैना (थायलाकॉयड) में होती हैं और इनके लिए सूर्य का प्रकाश आवश्यक होता है। प्रकाश की ऊर्जा की सहायता से जल का विभाजन होता है, जिसे जल के प्रकाश-अपघटन (फोटोलिसिस) कहते हैं। इससे ऑक्सीजन गैस मुक्त होती है तथा एटीपी और एनएडीपीएच का निर्माण होता है। ये ऊर्जा-वाहक अणु आगे कार्बन यौगिकों के निर्माण में उपयोग होते हैं।
अप्रकाश अभिक्रियाएँ (Dark Reactions / केल्विन चक्र): ये अभिक्रियाएँ क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा में होती हैं और इनके लिए सीधे प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती। इनमें प्रकाश अभिक्रिया से बने एटीपी और एनएडीपीएच की सहायता से CO2 का अपचयन होकर ग्लूकोज बनता है। यह अवस्था केल्विन चक्र कहलाती है।
इस प्रकार सम्पूर्ण प्रकाश संश्लेषण में जल का प्रकाश-अपघटन, CO2 का अवशोषण और अंततः ग्लूकोज का निर्माण तथा ऑक्सीजन का मुक्त होना सम्मिलित है।
प्रकाश संश्लेषण पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र का आधार है। इसके मुख्य महत्व निम्न हैं — यह वायुमंडल में ऑक्सीजन की पूर्ति करता है, जिस पर सभी जीवों का श्वसन निर्भर है। यह सभी खाद्य श्रृंखलाओं का आधार है, क्योंकि हरे पौधे उत्पादक हैं। प्रकाश संश्लेषण CO2 का उपयोग कर वायुमंडल में इसकी मात्रा को नियंत्रित रखता है, जिससे ग्रीनहाउस प्रभाव कम होता है। यह जीवाश्म ईंधनों की उत्पत्ति का भी कारण है।
प्रकाश संश्लेषण की दर को प्रभावित करने वाले कारकों में प्रकाश की तीव्रता, CO2 की सांद्रता, तापमान और जल की उपलब्धता प्रमुख हैं। परीक्षा में इन कारकों तथा रंध्रों की भूमिका से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा की दृष्टि से समीकरण, अवस्थाओं के नाम और आवश्यक पदार्थों को कंठस्थ करना अत्यंत लाभदायक है।
| पदार्थ | स्रोत | भूमिका |
|---|---|---|
| क्लोरोफिल | क्लोरोप्लास्ट | प्रकाश ऊर्जा अवशोषण |
| कार्बन डाइऑक्साइड | वायुमंडल (रंध्रों से) | कार्बन का स्रोत |
| जल | जड़ों द्वारा (जाइलम से) | इलेक्ट्रॉन का स्रोत, O2 मुक्त |
| सूर्य प्रकाश | सूर्य | ऊर्जा का स्रोत |
| आधार | प्रकाश अभिक्रिया | अप्रकाश अभिक्रिया |
|---|---|---|
| स्थान | ग्रैना (थायलाकॉयड) | स्ट्रोमा |
| प्रकाश की आवश्यकता | होती है | सीधे नहीं |
| मुख्य क्रिया | जल का प्रकाश-अपघटन | CO2 का अपचयन |
| उत्पाद | O2, ATP, NADPH | ग्लूकोज |
flowchart TD
A[प्रकाश संश्लेषण] --> B[आवश्यक पदार्थ]
A --> C[अवस्थाएँ]
A --> D[महत्व]
B --> B1[क्लोरोफिल]
B --> B2[सूर्य प्रकाश]
B --> B3[CO2 - रंध्रों से]
B --> B4[जल - जड़ों से]
C --> C1[प्रकाश अभिक्रिया - ग्रैना]
C --> C2[अप्रकाश अभिक्रिया - स्ट्रोमा]
C1 --> C11[फोटोलिसिस - O2 मुक्त]
C2 --> C21[केल्विन चक्र - ग्लूकोज]
D --> D1[ऑक्सीजन पूर्ति]
D --> D2[खाद्य श्रृंखला का आधार]
D --> D3[CO2 नियंत्रण]
प्रकाश संश्लेषण पृथ्वी पर जीवन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें हरे पौधे सूर्य प्रकाश की ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलकर ग्लूकोज बनाते हैं और ऑक्सीजन मुक्त करते हैं। इसके लिए क्लोरोफिल, सूर्य प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड और जल आवश्यक हैं। यह प्रक्रिया प्रकाश अभिक्रिया और अप्रकाश अभिक्रिया (केल्विन चक्र) में विभाजित है। प्रकाश अभिक्रिया ग्रैना में जल के प्रकाश-अपघटन द्वारा O2, ATP और NADPH बनाती है, जबकि अप्रकाश अभिक्रिया स्ट्रोमा में CO2 से ग्लूकोज का निर्माण करती है। रंध्र गैस विनिमय में सहायक होते हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में प्रकाश संश्लेषण के समीकरण, अवस्थाओं और महत्व से संबंधित प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं। इस प्रक्रिया की स्पष्ट समझ पोषण, श्वसन और पारिस्थितिकी तंत्र को समझने में आधारभूत भूमिका निभाती है।