परिवहन और परिसंचरण Notes

परिवहन और परिसंचरण

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: जीव विज्ञान – कोशिका ऊतक और जीवन प्रक्रियाएँ विषय-वस्तु: 17.9 परिवहन और परिसंचरण

1. परिचय

परिवहन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पोषक पदार्थ, गैसें, अपशिष्ट पदार्थ और संदेशवाहक रसायन शरीर के एक भाग से दूसरे भाग तक पहुँचाए जाते हैं। एककोशिकीय जीवों में पदार्थों का परिवहन सीधे विसरण एवं परासरण द्वारा होता है, जबकि बहुकोशिकीय जीवों में विशेष परिवहन तंत्र की आवश्यकता होती है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में पादपों में संवहन, मानव रक्त परिसंचरण, हृदय, रक्त वाहिकाओं और रक्तदाब से संबंधित प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं।

पादपों में परिवहन के लिए जाइलम और फ्लोएम नामक संवहन ऊतक होते हैं। जाइलम जल और खनिजों का परिवहन जड़ से पत्तियों की ओर करता है जबकि फ्लोएम भोजन का परिवहन पत्तियों से सभी भागों में करता है। जल का ऊपर चढ़ना रसारोहण कहलाता है और यह वाष्पोत्सर्जन की खिंचाव शक्ति तथा संसंजक बल के कारण संभव होता है। जल के वाष्प रूप में बाहर निकलने की क्रिया वाष्पोत्सर्जन कहलाती है।

मानव शरीर में परिवहन रक्त, रक्त वाहिकाओं और हृदय द्वारा होता है। हृदय पंप का कार्य करता है और रक्त को संपूर्ण शरीर में परिसंचरित करता है। रक्त ऑक्सीजन, पोषक तत्व, हार्मोन तथा अपशिष्ट पदार्थों का वहन करता है। इस अध्याय में हम पादप परिवहन, मानव हृदय, रक्त और रक्त वाहिकाओं तथा रक्तदाब का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

2. पादपों में परिवहन

जल और खनिजों का परिवहन (जाइलम): जल जड़ों के मूल रोमों द्वारा परासरण के सिद्धांत से अवशोषित होता है। फिर यह जाइलम के द्वारा ऊपर की ओर पत्तियों तक पहुँचता है। जल के ऊपर चढ़ने की इस प्रक्रिया को रसारोहण कहते हैं। रसारोहण में वाष्पोत्सर्जन की खिंचाव शक्ति (ट्रांसपिरेशन पुल), जल अणुओं का संसंजन (कोहेसन) और जाइलम भित्ति का आसंजन (एडेहेशन) मुख्य भूमिका निभाते हैं।

भोजन का परिवहन (फ्लोएम): पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण से बना भोजन (शर्करा) फ्लोएम की सीव नलिकाओं द्वारा पौधे के विभिन्न भागों में पहुँचता है। इस प्रक्रिया को स्थानांतरण या ट्रांसलोकेशन कहते हैं। फ्लोएम में परिवहन द्विदिशात्मक होता है।

वाष्पोत्सर्जन (Transpiration): पत्तियों के रंध्रों द्वारा जल का वाष्प के रूप में बाहर निकलना वाष्पोत्सर्जन है। यह जल के अवशोषण और रसारोहण में सहायता करता है तथा पौधे को ठंडक प्रदान करता है।

3. मानव परिसंचरण तंत्र

रक्त (Blood): रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है। इसमें तरल मैट्रिक्स प्लाज्मा होता है जिसमें लाल रक्त कोशिकाएँ (एरिथ्रोसाइट), श्वेत रक्त कोशिकाएँ (ल्यूकोसाइट) और प्लेटलेट्स (थ्रॉम्बोसाइट) तैरती रहती हैं। लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन होता है जो ऑक्सीजन का परिवहन करता है। श्वेत रक्त कोशिकाएँ रोगों से सुरक्षा करती हैं। प्लेटलेट्स रक्त के थक्के बनने में सहायता करते हैं।

रक्त वाहिकाएँ: धमनियाँ (आर्टरी) रक्त को हृदय से दूर ले जाती हैं, ये मोटी और लचीली होती हैं। शिराएँ (वेन) रक्त को हृदय की ओर लाती हैं, इनमें कपाट (वाल्व) होते हैं जो रक्त को उल्टी दिशा में बहने से रोकते हैं। केशिकाएँ सबसे पतली वाहिकाएँ हैं जहाँ पदार्थों का विनिमय होता है।

हृदय (Heart): मानव हृदय चार कक्षों वाला पेशीय अंग है। ऊपर के दो कक्ष अलिंद (एट्रियम) और नीचे के दो कक्ष निलय (वेंट्रिकल) कहलाते हैं। दायाँ अलिंद और दायाँ निलय अशुद्ध (डीऑक्सीजनेटेड) रक्त का वहन करते हैं जबकि बायाँ अलिंद और बायाँ निलय शुद्ध (ऑक्सीजनेटेड) रक्त का वहन करते हैं। हृदय की लयबद्ध धड़कन द्वारा रक्त शरीर में परिसंचरित होता है। मानव हृदय में दोहरा परिसंचरण होता है — फुफ्फुसीय परिसंचरण और प्रणालीगत परिसंचरण।

4. रक्तदाब और लसीका

रक्तदाब (Blood Pressure): धमनियों की दीवारों पर रक्त द्वारा डाला गया दबाव रक्तदाब कहलाता है। इसे दो मानों में मापा जाता है — सिस्टोलिक (हृदय के संकुचन पर, सामान्यतः 120 मिमी पारा) और डायस्टोलिक (हृदय के शिथिलन पर, सामान्यतः 80 मिमी पारा)। सामान्य रक्तदाब 120/80 मिमी पारा होता है। रक्तदाब मापने की यंत्र को स्फिग्मोमैनोमीटर कहते हैं।

लसीका (Lymph): केशिकाओं से रिसकर कोशिकाओं के बीच पहुँचने वाला ऊतक द्रव लसीका कहलाता है। इसमें श्वेत रक्त कोशिकाएँ होती हैं जो रोगों से सुरक्षा करती हैं। लसीका ऊतकों से अपशिष्ट पदार्थों को एकत्र कर उन्हें रक्त में लौटाती है। लसीका तंत्र में लसीका वाहिकाएँ और लसीका ग्रंथियाँ होती हैं।

परीक्षा में प्रायः हृदय के कक्षों, रक्त के घटकों, धमनी-शिरा के अंतर तथा रक्तदाब से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इन अवधारणाओं की स्पष्ट समझ होना आवश्यक है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: रक्त के घटक और उनके कार्य

घटक प्रकार मुख्य कार्य
प्लाज्मा तरल पदार्थों का वहन
लाल रक्त कोशिकाएँ ठोस ऑक्सीजन परिवहन (हीमोग्लोबिन)
श्वेत रक्त कोशिकाएँ ठोस रोगों से सुरक्षा
प्लेटलेट्स ठोस रक्त का थक्का बनना

तालिका 2: धमनी और शिरा की तुलना

आधार धमनी शिरा
दिशा हृदय से दूर हृदय की ओर
भित्ति मोटी और लचीली पतली
कपाट नहीं होते होते हैं
रक्त शुद्ध (ऑक्सीजनयुक्त) अशुद्ध

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[परिवहन] --> B[पादप परिवहन]
    A --> C[मानव परिसंचरण]
    B --> B1[जाइलम - जल]
    B --> B2[फ्लोएम - भोजन]
    B --> B3[रसारोहण - जल ऊपर]
    B --> B4[वाष्पोत्सर्जन - रंध्र]
    C --> C1[रक्त - प्लाज्मा, RBC, WBC, प्लेटलेट्स]
    C --> C2[हृदय - 4 कक्ष]
    C --> C3[धमनी, शिरा, केशिका]
    C --> C4[रक्तदाब - 120/80]
    C --> C5[लसीका - प्रतिरक्षा]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

मानव हृदय के चार कक्ष दायाँ अलिंद अशुद्ध रक्त (फेफड़ों से आता) बायाँ अलिंद शुद्ध रक्त (फेफड़ों से) दायाँ निलय अशुद्ध रक्त (फेफड़ों को) बायाँ निलय शुद्ध रक्त (शरीर को) मानव हृदय में दोहरा परिसंचरण होता है सबसे मोटी दीवार बाएँ निलय की होती है स्वर्ण नियम दायाँ भाग अशुद्ध और बायाँ भाग शुद्ध रक्त वहन करता है।

रक्त वाहिकाओं के प्रकार धमनी मोटी भित्ति हृदय से दूर शिरा पतली भित्ति हृदय की ओर केशिका सबसे पतली पदार्थ विनिमय धमनी में रक्तदाब अधिक होता है सामान्य रक्तदाब 120/80 मिमी पारा स्वर्ण नियम धमनी हृदय से दूर ले जाती है, शिरा हृदय की ओर लाती है।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. धमनी और शिरा की दिशा में भ्रम; धमनी रक्त को हृदय से दूर ले जाती है जबकि शिरा हृदय की ओर लाती है।
  2. यह मान लेना कि सभी धमनियाँ शुद्ध रक्त वहन करती हैं; फुफ्फुसीय धमनी अशुद्ध रक्त ले जाती है।
  3. हृदय के बाएँ-दाएँ भागों में रक्त की प्रकृति भ्रमित करना; दायाँ भाग अशुद्ध, बायाँ भाग शुद्ध रक्त वहन करता है।
  4. शिराओं में कपाट का अभाव मान लेना; शिराओं में कपाट होते हैं जो उल्टी दिशा में प्रवाह रोकते हैं।
  5. पादप में रसारोहण को फ्लोएम द्वारा होने वाला मान लेना; रसारोहण जाइलम द्वारा होता है।
  6. लाल रक्त कोशिकाओं को रोग प्रतिरोधक बता देना; रोग प्रतिरोधक श्वेत रक्त कोशिकाएँ होती हैं।
  7. वाष्पोत्सर्जन को पत्तियों से भोजन निकालने की क्रिया समझ लेना; वाष्पोत्सर्जन जल का वाष्पीकरण है।
  8. सिस्टोलिक और डायस्टोलिक के मानों में भ्रम; सामान्य रक्तदाब 120/80 मिमी पारा है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. रक्त के चार घटक और उनके कार्य कंठस्थ करें: प्लाज्मा-वहन, RBC-ऑक्सीजन, WBC-सुरक्षा, प्लेटलेट्स-थक्का।
  2. धमनी और शिरा का अंतर याद रखें: धमनी-दूर/मोटी/कोई कपाट, शिरा-हृदय की ओर/पतली/कपाट।
  3. हृदय के कक्षों की संख्या और नाम याद रखें: 2 अलिंद, 2 निलय।
  4. सामान्य रक्तदाब 120/80 मिमी पारा और मापक यंत्र स्फिग्मोमैनोमीटर याद रखें।
  5. पादप परिवहन में जाइलम-जल और फ्लोएम-भोजन का संबंध अवश्य स्मरण रखें।
  6. सबसे मोटी हृदय दीवार बाएँ निलय की होती है क्योंकि वह पूरे शरीर में रक्त पंप करता है।
  7. लसीका में श्वेत रक्त कोशिकाएँ होती हैं जो प्रतिरक्षा में सहायक हैं।
  8. रसारोहण वाष्पोत्सर्जन की खिंचाव शक्ति से जाइलम द्वारा होता है।

10. निष्कर्ष

परिवहन और परिसंचरण जीवों के लिए अनिवार्य प्रक्रियाएँ हैं जो पोषक तत्वों, गैसों और अपशिष्ट पदार्थों का आदान-प्रदान सुनिश्चित करती हैं। पादपों में जाइलम जल और खनिजों का तथा फ्लोएम भोजन का परिवहन करता है। रसारोहण और वाष्पोत्सर्जन जल संतुलन में सहायक हैं। मानव शरीर में रक्त, हृदय और रक्त वाहिकाएँ परिसंचरण तंत्र बनाती हैं। हृदय के चार कक्षों द्वारा दोहरा परिसंचरण संपन्न होता है। रक्त में प्लाज्मा, लाल एवं श्वेत रक्त कोशिकाएँ तथा प्लेटलेट्स पाए जाते हैं, जिनमें से प्रत्येक का विशिष्ट कार्य होता है। सामान्य रक्तदाब 120/80 मिमी पारा होता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में हृदय, रक्त तथा रक्त वाहिकाओं से संबंधित प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं। परिवहन और परिसंचरण की पकड़ उत्सर्जन जैसी अन्य जीवन प्रक्रियाओं को समझने में भी सहायक होती है।