विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: रसायन विज्ञान – अभिक्रियाएँ और रासायनिक गुण विषय-वस्तु: 15.6 ऑक्सीकरण और अपचयन
ऑक्सीकरण और अपचयन रसायन विज्ञान की दो सबसे महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं, जो अनेक रासायनिक अभिक्रियाओं का आधार हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में ऑक्सीकरण-अपचयन से प्रतिवर्ष 3 से 4 प्रश्न पूछे जाते हैं। जंग लगना, भोजन का बिगड़ना, धातुओं का क्षरण और श्वसन — ये सभी प्रक्रियाएँ ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाओं पर आधारित हैं। इन्हें एक साथ रेडॉक्स अभिक्रिया (Redox Reaction) कहा जाता है, क्योंकि ये दोनों प्रक्रियाएँ कभी अलग-अलग नहीं होतीं।
ऑक्सीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें किसी पदार्थ का ऑक्सीजन के साथ संयोग होता है, या किसी पदार्थ से हाइड्रोजन का निष्कासन होता है, या पदार्थ इलेक्ट्रॉन त्यागता है। इसके विपरीत अपचयन वह प्रक्रिया है जिसमें किसी पदार्थ से ऑक्सीजन का निष्कासन होता है, या पदार्थ में हाइड्रोजन का संयोग होता है, या पदार्थ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है। जब कोई पदार्थ ऑक्सीकृत होता है तो कोई अन्य पदार्थ अवश्य अपचयित होता है।
आधुनिक परिभाषा में ऑक्सीकरण को इलेक्ट्रॉन का त्याग और अपचयन को इलेक्ट्रॉन का ग्रहण माना जाता है। ऑक्सीकरण में ऑक्सीकरण अवस्था बढ़ती है, जबकि अपचयन में घटती है। ऑक्सीकरण और अपचयन एक साथ होते हैं, इसलिए इन्हें संयुक्त रूप से रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं। रेलवे परीक्षा में रेडॉक्स अभिक्रिया के उदाहरण, ऑक्सीकरण अवस्था में परिवर्तन तथा अपचायक और ऑक्सीकारक की पहचान से प्रश्न पूछे जाते हैं।
ऑक्सीकरण को तीन प्रकार से परिभाषित किया जाता है।
ऑक्सीजन के आधार पर: जिस अभिक्रिया में ऑक्सीजन का संयोग होता है या हाइड्रोजन का निष्कासन होता है, वह ऑक्सीकरण है। उदाहरण के लिए, 2Mg + O₂ → 2MgO में मैग्नीशियम ऑक्सीकृत होता है क्योंकि इसमें ऑक्सीजन का संयोग होता है। इसी प्रकार हाइड्रोजन सल्फाइड के ऑक्सीकरण में हाइड्रोजन का निष्कासन होता है — 2H₂S + O₂ → 2S + 2H₂O।
इलेक्ट्रॉन के आधार पर: जिस प्रक्रिया में कोई पदार्थ इलेक्ट्रॉन त्यागता है, वह ऑक्सीकरण है। उदाहरण के लिए, Zn → Zn²⁺ + 2e⁻ में जिंक इलेक्ट्रॉन त्यागता है, अतः ऑक्सीकृत होता है।
ऑक्सीकरण अवस्था के आधार पर: जब किसी तत्व की ऑक्सीकरण अवस्था बढ़ती है तो वह ऑक्सीकृत होता है। उदाहरण के लिए, Na → Na⁺ में ऑक्सीकरण अवस्था 0 से बढ़कर +1 हो जाती है।
उदाहरण 1: कार्बन का ऑक्सीकरण —
C + O₂ → CO₂
कार्बन की ऑक्सीकरण अवस्था 0 से बढ़कर +4 हो जाती है। अतः कार्बन ऑक्सीकृत होता है। यहाँ ऑक्सीजन क्रियाशील पदार्थ है जो अपचयित होता है।
ऑक्सीकरण में ऑक्सीकरण अवस्था बढ़ती है और इलेक्ट्रॉन त्याग होता है। ऑक्सीकृत होने वाला पदार्थ ऑक्सीकरण के बाद उच्च ऑक्सीकरण अवस्था में पहुँच जाता है।
अपचयन को भी तीन प्रकार से परिभाषित किया जाता है।
ऑक्सीजन के आधार पर: जिस अभिक्रिया में ऑक्सीजन का निष्कासन होता है या हाइड्रोजन का संयोग होता है, वह अपचयन है। उदाहरण के लिए, CuO + H₂ → Cu + H₂O में कॉपर ऑक्साइड से ऑक्सीजन निकल जाता है, इसलिए कॉपर ऑक्साइड अपचयित होता है।
इलेक्ट्रॉन के आधार पर: जिस प्रक्रिया में कोई पदार्थ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, वह अपचयन है। उदाहरण के लिए, Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu में कॉपर आयन इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, अतः अपचयित होता है।
ऑक्सीकरण अवस्था के आधार पर: जब किसी तत्व की ऑक्सीकरण अवस्था घटती है तो वह अपचयित होता है। CuO में कॉपर की ऑक्सीकरण अवस्था +2 से घटकर Cu में 0 हो जाती है।
उदाहरण 2: कॉपर ऑक्साइड का अपचयन —
CuO + H₂ → Cu + H₂O
इस अभिक्रिया में कॉपर ऑक्साइड का अपचयन होता है और हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण होता है। यह अभिक्रिया रेडॉक्स अभिक्रिया का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें CuO ऑक्सीकारक और H₂ अपचायक है।
अपचयन में ऑक्सीकरण अवस्था घटती है और इलेक्ट्रॉन ग्रहण होता है। अपचयित होने वाला पदार्थ निम्न ऑक्सीकरण अवस्था में पहुँच जाता है। ऑक्सीकरण और अपचयन सदैव साथ-साथ होते हैं, क्योंकि एक पदार्थ द्वारा त्यागे गए इलेक्ट्रॉन को दूसरा पदार्थ ग्रहण करता है।
जिस रासायनिक अभिक्रिया में ऑक्सीकरण और अपचयन एक साथ होते हैं, उसे रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं। रेडॉक्स शब्द "रिडक्शन (Reduction)" और "ऑक्सीडेशन (Oxidation)" के संयोजन से बना है।
ऑक्सीकारक (Oxidising Agent): वह पदार्थ जो किसी अन्य पदार्थ का ऑक्सीकरण करता है तथा स्वयं अपचयित हो जाता है। उदाहरण — CuO + H₂ में CuO ऑक्सीकारक है। सामान्य ऑक्सीकारक हैं — ऑक्सीजन (O₂), पोटेशियम परमैंगनेट (KMnO₄), पोटेशियम डाइक्रोमेट (K₂Cr₂O₇), हाइड्रोजन पेरोक्साइड (H₂O₂) और नाइट्रिक अम्ल (HNO₃)।
अपचायक (Reducing Agent): वह पदार्थ जो किसी अन्य पदार्थ का अपचयन करता है तथा स्वयं ऑक्सीकृत हो जाता है। उदाहरण — CuO + H₂ में H₂ अपचायक है। सामान्य अपचायक हैं — हाइड्रोजन (H₂), कार्बन (C), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), सोडियम (Na) और धात्विक जिंक (Zn)।
उदाहरण 3: ZnO + C → Zn + CO
इस अभिक्रिया में जिंक ऑक्साइड का अपचयन होता है (ZnO से O₂ निकलता है) और कार्बन का ऑक्सीकरण होता है (C से CO बनता है)। इसलिए C अपचायक और ZnO ऑक्सीकारक है। धातुओं के निष्कर्षण में कार्बन का उपयोग अपचायक के रूप में होता है।
ऑक्सीकरण और अपचयन का स्मरणीय: इलेक्ट्रॉन त्याग = ऑक्सीकरण (LEO - Lose Electron Oxidation), इलेक्ट्रॉन ग्रहण = अपचयन (GER - Gain Electron Reduction)। इस मंत्र को याद रखने से रेडॉक्स प्रश्न तुरंत हल होते हैं।
| लक्षण | ऑक्सीकरण | अपचयन |
|---|---|---|
| ऑक्सीजन | संयोग / निष्कासन नहीं | निष्कासन |
| हाइड्रोजन | निष्कासन | संयोग |
| इलेक्ट्रॉन | त्याग (Lose) | ग्रहण (Gain) |
| ऑक्सीकरण अवस्था | बढ़ती है | घटती है |
| उदाहरण | Zn → Zn²⁺ + 2e⁻ | Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu |
| साथ होने वाला | स्वयं ऑक्सीकृत | स्वयं अपचयित |
| पदार्थ | भूमिका | अभिक्रिया में परिवर्तन |
|---|---|---|
| CuO | ऑक्सीकारक | CuO + H₂ → Cu + H₂O में अपचयित |
| H₂ | अपचायक | CuO + H₂ में ऑक्सीकृत |
| O₂ | ऑक्सीकारक | 2Mg + O₂ → 2MgO |
| C | अपचायक | ZnO + C → Zn + CO |
| KMnO₄ | ऑक्सीकारक | अनुनादी अभिक्रियाओं में प्रयुक्त |
| Zn | अपचायक | Zn → Zn²⁺ + 2e⁻ |
flowchart TD
A[ऑक्सीकरण और अपचयन] --> B[ऑक्सीकरण]
A --> C[अपचयन]
A --> D[रेडॉक्स अभिक्रिया]
A --> E[पदार्थ]
B --> B1[ऑक्सीजन संयोग]
B --> B2[हाइड्रोजन निष्कासन]
B --> B3[इलेक्ट्रॉन त्याग]
C --> C1[ऑक्सीजन निष्कासन]
C --> C2[हाइड्रोजन संयोग]
C --> C3[इलेक्ट्रॉन ग्रहण]
D --> D1[ऑक्सीकरण + अपचयन साथ]
D --> D2[CuO + H₂ → Cu + H₂O]
E --> E1[ऑक्सीकारक KMnO₄]
E --> E2[अपचायक C, H₂, CO]
B3 --> X1[Zn → Zn²⁺ + 2e⁻]
C3 --> X2[Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu]
ऑक्सीकरण और अपचयन रसायन विज्ञान की वे मूल अवधारणाएँ हैं जो अनेक अभिक्रियाओं को समझने का आधार प्रदान करती हैं। ऑक्सीकरण में ऑक्सीजन का संयोग, हाइड्रोजन का निष्कासन और इलेक्ट्रॉन का त्याग होता है, जबकि अपचयन में ऑक्सीजन का निष्कासन, हाइड्रोजन का संयोग और इलेक्ट्रॉन का ग्रहण होता है। ये दोनों प्रक्रियाएँ सदैव साथ-साथ चलती हैं और संयुक्त रूप से रेडॉक्स अभिक्रिया कहलाती हैं। ऑक्सीकारक वह पदार्थ है जो स्वयं अपचयित होता है, जबकि अपचायक वह है जो स्वयं ऑक्सीकृत होता है। रेलवे परीक्षा में इन अवधारणाओं से नियमित प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए इनकी दृढ़ पकड़ आवश्यक है। अगले अध्याय में हम अम्ल, क्षार और सूचकों का अध्ययन करेंगे।