विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: रसायन विज्ञान – धातु कार्बन और आवर्त सारणी विषय-वस्तु: 16.1 धातु और अधातु
धातु और अधातु तत्वों की दो मूलभूत श्रेणियाँ हैं, जिनके आधार पर संपूर्ण आवर्त सारणी को समझा जाता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की रसायन विज्ञान परीक्षा में धातु-अधातु के गुणों, भौतिक और रासायनिक विशेषताओं तथा उनके उपयोगों से 4 से 6 प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं। तत्वों के 118 में से अधिकांश धातुएँ हैं, कुछ अधातुएँ हैं और कुछ उपधातुएँ (Metalloids) हैं। आवर्त सारणी में धातुएँ बाईं ओर और अधातुएँ दाईं ओर स्थित होती हैं।
धातुएँ वे तत्व हैं जो चमकीली होती हैं, ऊष्मा और विद्युत की सुचालक होती हैं, आघातवर्ध्य (Malleable) और तन्य (Ductile) होती हैं। इनके इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति होती है, अर्थात ये विद्युत धनात्मक तत्व हैं। उदाहरण — लोहा, ताँबा, एल्युमीनियम, सोना, चाँदी, जिंक, सोडियम, मैग्नीशियम। अधातुएँ वे तत्व हैं जो प्रायः बिना चमक के होती हैं, विद्युत की कुचालक होती हैं और इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति रखती हैं। उदाहरण — कार्बन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, सल्फर, फॉस्फोरस, क्लोरीन।
रेलवे टेक्नीशियन की दृष्टि से धातु-अधातु का ज्ञान विशेष उपयोगी है, क्योंकि रेल पटरियाँ, पुल, इंजन और उपकरण सभी धातुओं से बने होते हैं। धातुओं के संक्षारण से बचाव, मिश्र धातुओं (Alloys) का निर्माण और विद्युत तारों में ताँबे का उपयोग सभी धातुओं के गुणों पर निर्भर करते हैं। इस अध्याय में हम धातु और अधातुओं के भौतिक तथा रासायनिक गुणों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
धातुओं के प्रमुख भौतिक गुण निम्न हैं —
चमक (Lustre): धातुएँ चमकीली होती हैं। सोना, चाँदी और ताँबे में विशेष चमक होती है। इसी चमक के कारण गहने बनाने में इनका उपयोग होता है।
ऊष्मा और विद्युत की सुचालकता: धातुएँ ऊष्मा और विद्युत की अच्छी सुचालक होती हैं। ताँबा और एल्युमीनियम विद्युत तारों में उपयोग होते हैं क्योंकि ये विद्युत की उत्तम सुचालक हैं। चाँदी विद्युत की सर्वश्रेष्ठ सुचालक है, परंतु महँगी होने के कारण इसका प्रयोग सीमित है।
आघातवर्ध्यता (Malleability): धातुओं को पीटकर पतली चादर (पत्तर) में बदला जा सकता है। एल्युमीनियम के पत्तर और सोने की पन्नी इसी गुण के कारण बनते हैं।
तन्यता (Ductility): धातुओं से पतले तार खींचे जा सकते हैं। ताँबे और एल्युमीनियम के तार विद्युत चालन में उपयोग होते हैं।
कठोरता: अधिकांश धातुएँ कठोर होती हैं। सोडियम और पोटेशियम जैसी धातुएँ मुलायम हैं, जिन्हें चाकू से काटा जा सकता है।
घनत्व और गलनांक: धातुओं का घनत्व और गलनांक सामान्यतः उच्च होता है। लिथियम जैसी कुछ हल्की धातुएँ जल पर तैरती हैं।
उदाहरण 1: आवर्त सारणी में धातुओं की स्थिति —
आवर्त सारणी में धातुएँ विकर्ण रेखा (बोरॉन से पोलोनियम) के बाईं ओर स्थित होती हैं। अधातुएँ दाईं ओर तथा उपधातुएँ विकर्ण के आसपास स्थित होती हैं।
अधातुओं के प्रमुख भौतिक गुण धातुओं के ठीक विपरीत होते हैं —
चमक: अधातुओं में सामान्यतः चमक नहीं होती। अपवाद — हीरा (कार्बन का रूप) और आयोडीन चमकीले होते हैं। हीरे में अद्वितीय चमक होती है।
चालकता: अधातुएँ ऊष्मा और विद्युत की कुचालक होती हैं। ग्रेफाइट (कार्बन का रूप) विद्युत की चालक है, परंतु ऊष्मा की नहीं। यह अधातु का चालकता वाला अपवाद है। अतः अधातुओं में विद्युत चालकता का एकमात्र उदाहरण ग्रेफाइट है।
आघातवर्ध्यता और तन्यता: अधातुएँ भंगुर (Brittle) होती हैं, इन्हें पीटकर पत्तर या खींचकर तार नहीं बनाया जा सकता। सल्फर और फॉस्फोरस आघात से टूट जाते हैं।
कठोरता: अधिकांश अधातुएँ मुलायम या भंगुर होती हैं। हीरा अधातु का सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है।
घनत्व और गलनांक: अधातुओं का घनत्व और गलनांक प्रायः कम होता है।
अवस्था: अधातुएँ कमरे के ताप पर ठोस, द्रव या गैस तीनों अवस्थाओं में मिल सकती हैं। ब्रोमीन एकमात्र द्रव अधातु है। ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, क्लोरीन गैसीय अधातुएँ हैं।
उदाहरण 2: एकमात्र द्रव धातु और द्रव अधातु —
पारा (Hg) एकमात्र द्रव धातु है, जबकि ब्रोमीन (Br₂) एकमात्र द्रव अधातु है। ये दोनों रेलवे परीक्षा में सामान्य प्रश्न हैं।
धातुओं और अधातुओं के रासायनिक गुण उनकी इलेक्ट्रॉन त्यागने या ग्रहण करने की प्रवृत्ति पर आधारित होते हैं।
ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया: धातुएँ ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर धातु ऑक्साइड बनाती हैं, जो क्षारीय होते हैं। 2Mg + O₂ → 2MgO। MgO जल में घुलकर मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड बनाता है, जो क्षारीय है। अधातुएँ ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर अधातु ऑक्साइड बनाती हैं, जो अम्लीय होते हैं। C + O₂ → CO₂। CO₂ जल में घुलकर कार्बोनिक अम्ल बनाता है, जो अम्लीय है।
जल के साथ अभिक्रिया: कुछ धातुएँ जल से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस बनाती हैं। सोडियम और पोटेशियम ठंडे जल से तीव्र अभिक्रिया करते हैं। 2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂। मैग्नीशियम गर्म जल से अभिक्रिया करता है, जबकि लोहा भाप से। अधिकांश अधातुएँ जल से अभिक्रिया नहीं करतीं।
अम्लों के साथ अभिक्रिया: अधिकांश धातुएँ अम्लों से अभिक्रिया कर लवण और हाइड्रोजन गैस बनाती हैं। Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂। अधातुएँ प्रायः अम्लों से हाइड्रोजन नहीं विस्थापित करतीं।
उदाहरण 3: सोडियम की जल के साथ अभिक्रिया —
2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂ + ऊष्मा
सोडियम अत्यधिक क्रियाशील धातु है। इसे जल में डालने पर तीव्र अभिक्रिया होती है और हाइड्रोजन गैस निकलती है। सोडियम को मिट्टी के तेल में रखा जाता है, क्योंकि यह वायु और जल से तीव्र अभिक्रिया करता है।
आयन निर्माण: धातुएँ इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं। Na → Na⁺ + e⁻। अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणायन बनाती हैं। Cl + e⁻ → Cl⁻। धातु और अधातु की अभिक्रिया में आयनिक यौगिक बनते हैं, जैसे NaCl में Na⁺ और Cl⁻ आयन होते हैं।
| गुण | धातुएँ | अधातुएँ |
|---|---|---|
| चमक | चमकीली | सामान्यतः बिना चमक |
| चालकता | सुचालक | कुचालक |
| आघातवर्ध्यता | हाँ | भंगुर |
| तन्यता | हाँ | नहीं |
| अवस्था | कमरे के ताप पर ठोस | ठोस/द्रव/गैस |
| उदाहरण | Fe, Cu, Al, Ag | C, O₂, N₂, S, Cl₂ |
| अपवाद | Hg द्रव धातु | ग्रेफाइट चालक, Br₂ द्रव |
| अभिक्रिया | धातुओं के साथ | अधातुओं के साथ |
|---|---|---|
| ऑक्सीजन से | क्षारीय ऑक्साइड (MgO) | अम्लीय ऑक्साइड (CO₂) |
| जल से | हाइड्रोजन गैस (कुछ धातुएँ) | प्रायः कोई अभिक्रिया नहीं |
| अम्ल से | लवण + H₂ | प्रायः कोई अभिक्रिया नहीं |
| आयन | धनायन (Na⁺) | ऋणायन (Cl⁻) |
| उदाहरण | Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂ | C + O₂ → CO₂ |
flowchart TD
A[धातु और अधातु] --> B[धातुएँ]
A --> C[अधातुएँ]
A --> D[उपधातुएँ]
A --> E[आवर्त सारणी]
B --> B1[चमक, सुचालक]
B --> B2[आघातवर्ध्य, तन्य]
B --> B3[क्षारीय ऑक्साइड]
C --> C1[भंगुर, कुचालक]
C --> C2[अम्लीय ऑक्साइड]
C --> C3[ऋणायन बनाते हैं]
D --> D1[सिलिकॉन, जर्मेनियम]
E --> E1[बाईं ओर धातु]
E --> E2[दाईं ओर अधातु]
B1 --> X1[Cu, Al तार]
C2 --> X2[CO₂, SO₂]
C --> X3[Br₂ द्रव अधातु]
धातु और अधातु तत्वों की दो मूल श्रेणियाँ हैं, जो आवर्त सारणी की नींव हैं। धातुएँ चमकीली, सुचालक, आघातवर्ध्य और तन्य होती हैं, तथा इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाती हैं। अधातुएँ भंगुर, कुचालक होती हैं और इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋणायन बनाती हैं। धातु ऑक्साइड क्षारीय और अधातु ऑक्साइड अम्लीय होते हैं। आवर्त सारणी में धातुएँ बाईं ओर, अधातुएँ दाईं ओर और उपधातुएँ विकर्ण के आसपास स्थित होती हैं। पारा, ब्रोमीन और ग्रेफाइट जैसे अपवाद विशेष रूप से याद रखने योग्य हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में इनसे नियमित प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए इन अवधारणाओं की दृढ़ पकड़ अत्यंत आवश्यक है।