विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: रसायन विज्ञान – धातु कार्बन और आवर्त सारणी विषय-वस्तु: 16.2 अभिक्रियाशीलता श्रेणी
धातुएँ अपनी रासायनिक अभिक्रियाशीलता में एक-दूसरे से भिन्न होती हैं। कुछ धातुएँ बहुत अधिक अभिक्रियाशील होती हैं, जैसे पोटैशियम और सोडियम, जो वायु एवं जल से तुरंत अभिक्रिया करती हैं। वहीं कुछ धातुएँ, जैसे सोना और चाँदी, अत्यधिक अक्रिय होती हैं, इसीलिए इन्हें वायु, जल एवं अम्लों के संपर्क में रखने पर भी आसानी से संक्षारित नहीं किया जा सकता। धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित करने से बनी सूची को अभिक्रियाशीलता श्रेणी या विद्युत्-रसायन श्रेणी कहते हैं। यह श्रेणी रसायन विज्ञान में धातुओं के व्यवहार को समझने की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है।
अभिक्रियाशीलता श्रेणी का ज्ञान रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस विषय से प्रतिवर्ष 2 से 3 प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं, जिनमें विस्थापन अभिक्रिया का निर्धारण, धातु एवं अम्ल की अभिक्रिया से हाइड्रोजन गैस का निकलना तथा उत्तम धातुओं द्वारा न्यून अभिक्रियाशील धातुओं के लवणों से उनका विस्थापन शामिल है। ये प्रश्न सरल होते हैं बशर्ते अभ्यर्थी को श्रेणी का क्रम तथा श्रेणी में स्थान के अनुसार धातुओं के गुण याद हों।
इस अध्याय में हम अभिक्रियाशीलता श्रेणी का पूर्ण क्रम, श्रेणी के आधार पर धातुओं की जल, अम्ल और ऑक्सीजन से अभिक्रिया, विस्थापन अभिक्रियाएँ तथा धातुओं का निष्कर्षण उनके अयस्कों से करने की विधि का अध्ययन करेंगे। श्रेणी में उच्च स्थान वाली धातुएँ अधिक अभिक्रियाशील होती हैं और अपने लवणों के विलयन से नीचे वाली धातुओं को विस्थापित करती हैं। इस अवधारणा का उपयोग धातुओं की सक्रियता तुलना तथा अनेक औद्योगिक प्रक्रियाओं में होता है।
अभिक्रियाशीलता श्रेणी में धातुओं को सबसे अधिक अभिक्रियाशील से सबसे कम अभिक्रियाशील की ओर व्यवस्थित किया जाता है। श्रेणी का क्रम निम्न है: पोटैशियम (K) > सोडियम (Na) > कैल्शियम (Ca) > मैग्नीशियम (Mg) > ऐलुमिनियम (Al) > जिंक (Zn) > आयरन (Fe) > लेड (Pb) > हाइड्रोजन (H) > कॉपर (Cu) > मर्करी (Hg) > सिल्वर (Ag) > गोल्ड (Au)।
श्रेणी में हाइड्रोजन को संदर्भ तत्व के रूप में रखा गया है। हाइड्रोजन से ऊपर स्थित धातुएँ अम्लों से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं, जबकि हाइड्रोजन से नीचे स्थित धातुएँ (जैसे कॉपर, सिल्वर, गोल्ड) तनु अम्लों से हाइड्रोजन मुक्त नहीं करतीं। श्रेणी में जितनी ऊपर धातु होती है, वह उतनी ही अधिक अभिक्रियाशील, आयन बनाने में उतनी ही प्रवृत्त तथा ऑक्सीकरण के प्रति उतनी ही संवेदनशील होती है।
कंठस्थ करने की ट्रिक: परीक्षा में क्रम याद रखने के लिए संक्षिप्त रूप "पोसो कामै ऐ जिंक आय ले हाइ कॉम सिल गो" अथवा "K Na Ca Mg Al Zn Fe Pb H Cu Hg Ag Au" के पहले अक्षरों का प्रयोग करें। यह क्रम सभी विस्थापन एवं निष्कर्षण प्रश्नों की जड़ है।
उदाहरण 1: निम्न धातुओं को अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित कीजिए — लेड, कॉपर, मैग्नीशियम, सिल्वर।
हल: श्रेणी के अनुसार क्रम है — मैग्नीशियम > लेड > कॉपर > सिल्वर।
जल से अभिक्रिया: श्रेणी के शीर्ष पर स्थित अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ (K, Na, Ca) ठंडे जल से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं तथा संगत हाइड्रॉक्साइड बनाती हैं। मैग्नीशियम गर्म जल से अभिक्रिया करता है, जबकि ऐलुमिनियम, जिंक और आयरन भाप से अभिक्रिया करके धातु ऑक्साइड और हाइड्रोजन बनाते हैं। कॉपर, सिल्वर, गोल्ड जल से अभिक्रिया नहीं करते।
अम्लों से अभिक्रिया: हाइड्रोजन से ऊपर स्थित धातुएँ तनु अम्ल (HCl, H2SO4) से अभिक्रिया करके धातु लवण तथा हाइड्रोजन गैस बनाती हैं। उदाहरण: Zn + 2HCl → ZnCl2 + H2। धातुएँ जितनी अधिक अभिक्रियाशील होती हैं, अम्ल के साथ उतनी ही प्रबल हिंसक अभिक्रिया करती हैं। हाइड्रोजन से नीचे की धातुएँ अम्लों से अभिक्रिया नहीं करतीं।
विस्थापन अभिक्रिया: श्रेणी में ऊपर स्थित अधिक अभिक्रियाशील धातु, नीचे स्थित कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर देती है। उदाहरण: Fe + CuSO4 → FeSO4 + Cu। इस अभिक्रिया में आयरन कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील होने के कारण कॉपर सल्फेट के नीले विलयन से कॉपर को विस्थापित कर देता है। इसी प्रकार Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu तथा Cu + 2AgNO3 → Cu(NO3)2 + 2Ag होता है।
उदाहरण 2: क्या कॉपर, आयरन सल्फेट के विलयन से आयरन को विस्थापित कर सकता है?
हल: नहीं, क्योंकि कॉपर, आयरन से कम अभिक्रियाशील है। केवल अधिक अभिक्रियाशील धातु ही कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण से विस्थापित कर सकती है।
अभिक्रियाशीलता श्रेणी का उपयोग धातुओं के अयस्कों से निष्कर्षण की विधि निर्धारित करने में होता है। श्रेणी में सबसे नीचे स्थित धातुएँ (Hg, Ag, Au) प्रायः मुक्त अवस्था में मिलती हैं, अतः इन्हें विशेष निष्कर्षण की आवश्यकता नहीं होती। मध्य श्रेणी की धातुएँ (Zn, Fe, Pb) कार्बन द्वारा उनके ऑक्साइडों को अपचयित करके निकाली जाती हैं। शीर्ष श्रेणी की धातुएँ (K, Na, Ca, Mg, Al) कार्बन द्वारा अपचयित नहीं की जा सकतीं, इन्हें विद्युत् अपघटन विधि द्वारा निकाला जाता है।
धातुओं के निष्कर्षण में अभिक्रियाशीलता श्रेणी का महत्व यह है कि अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुओं के ऑक्साइडों से कार्बन उन्हें अपचयित नहीं कर सकता, क्योंकि ऐसी धातुओं की ऑक्सीजन के प्रति आकर्षण शक्ति कार्बन से अधिक होती है। इसलिए ऐलुमिनियम जैसी धातुओं को विद्युत्-अपघटन द्वारा ही निकाला जाता है। कम अभिक्रियाशील धातुओं के ऑक्साइडों का अपचयन कार्बन, हाइड्रोजन अथवा कार्बन मोनोऑक्साइड द्वारा आसानी से किया जा सकता है। श्रेणी में स्थान के अनुसार निष्कर्षण विधि का चयन परीक्षा में बहुत पूछा जाने वाला प्रश्न है।
| धातु | प्रतीक | जल से अभिक्रिया | तनु अम्ल से अभिक्रिया | निष्कर्षण विधि |
|---|---|---|---|---|
| पोटैशियम | K | ठंडे जल से तीव्र | प्रबल अभिक्रिया | विद्युत्-अपघटन |
| सोडियम | Na | ठंडे जल से तीव्र | प्रबल अभिक्रिया | विद्युत्-अपघटन |
| कैल्शियम | Ca | ठंडे जल से अभिक्रिया | प्रबल अभिक्रिया | विद्युत्-अपघटन |
| मैग्नीशियम | Mg | गर्म जल से | H2 मुक्त | विद्युत्-अपघटन |
| ऐलुमिनियम | Al | भाप से | H2 मुक्त | विद्युत्-अपघटन |
| जिंक | Zn | भाप से | H2 मुक्त | कार्बन अपचयन |
| आयरन | Fe | भाप से | H2 मुक्त | कार्बन अपचयन |
| लेड | Pb | कोई नहीं | H2 मुक्त | कार्बन अपचयन |
| कॉपर | Cu | कोई नहीं | कोई नहीं | सरल विधि |
| सिल्वर | Ag | कोई नहीं | कोई नहीं | सरल विधि |
| गोल्ड | Au | कोई नहीं | कोई नहीं | मुक्त अवस्था |
| अभिक्रिया | अधिक अभिक्रियाशील | कम अभिक्रियाशील | परिणाम |
|---|---|---|---|
| Zn + CuSO4 → ZnSO4 + Cu | जिंक | कॉपर | कॉपर धातु अवक्षेपित |
| Fe + CuSO4 → FeSO4 + Cu | आयरन | कॉपर | कॉपर धातु अवक्षेपित |
| Cu + 2AgNO3 → Cu(NO3)2 + 2Ag | कॉपर | सिल्वर | सिल्वर धातु अवक्षेपित |
| Mg + 2HCl → MgCl2 + H2 | मैग्नीशियम | हाइड्रोजन | हाइड्रोजन गैस मुक्त |
| Zn + 2HCl → ZnCl2 + H2 | जिंक | हाइड्रोजन | हाइड्रोजन गैस मुक्त |
flowchart TD
A[अभिक्रियाशीलता श्रेणी] --> B[क्रम K Na Ca Mg Al Zn Fe Pb H Cu Hg Ag Au]
A --> C[जल से अभिक्रिया]
A --> D[अम्ल से अभिक्रिया]
A --> E[विस्थापन अभिक्रिया]
A --> F[धातु निष्कर्षण]
C --> C1[K Na Ca ठंडा जल]
C --> C2[Mg गर्म जल]
C --> C3[Al Zn Fe भाप]
D --> D1[H से ऊपर H2 मुक्त]
D --> D2[H से नीचे कोई अभिक्रिया नहीं]
E --> E1[ऊपर की धातु नीचे की धातु को विस्थापित करती है]
F --> F1[शीर्ष श्रेणी विद्युत्-अपघटन]
F --> F2[मध्य श्रेणी कार्बन अपचयन]
F --> F3[निचली श्रेणी मुक्त अवस्था]
अभिक्रियाशीलता श्रेणी धातुओं के रासायनिक व्यवहार को समझने की आधारशिला है। इस अध्याय में हमने धातुओं को उनकी अभिक्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित करने वाली श्रेणी, जल तथा अम्लों से धातुओं की अभिक्रिया, विस्थापन अभिक्रियाओं के नियम तथा अयस्कों से धातु निष्कर्षण की विधियों का अध्ययन किया। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इस विषय से विस्थापन एवं निष्कर्षण आधारित 2 से 3 प्रश्न अवश्य पूछे जाते हैं। श्रेणी का क्रम तथा उसके अनुप्रयोग की दृढ़ पकड़ ही इन प्रश्नों को शीघ्रता से हल करने की कुंजी है। नियमित अभ्यास से अभ्यर्थी इन प्रश्नों को बिना किसी हिचकिचाहट के सटीकता से हल कर सकता है।