विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: रसायन विज्ञान – पदार्थ और परमाणु संरचना विषय-वस्तु: 14.2 पदार्थ की अवस्थाएँ
पदार्थ की अवस्थाएँ रसायन विज्ञान का वह विषय है जो पदार्थ के भौतिक रूप को समझाता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में अवस्थाओं के गुण, अंतर-आण्विक बल, संलयन, वाष्पन, ऊर्ध्वपातन जैसी अवधारणाओं से प्रश्न पूछे जाते हैं। पदार्थ की तीन मुख्य अवस्थाएँ होती हैं — ठोस, द्रव और गैस। तापमान एवं दाब परिवर्तन के साथ पदार्थ एक अवस्था से दूसरी अवस्था में बदल सकता है। रेलवे में प्रयुक्त भाप इंजन, हाइड्रोलिक ब्रेक द्रव तथा संपीड़ित वायु सभी इसी अवस्था परिवर्तन पर आधारित हैं।
पदार्थ की अवस्था मुख्यतः कणों के बीच की दूरी, आकर्षण बल तथा कणों की गति पर निर्भर करती है। ठोस अवस्था में कण बहुत निकट होते हैं, आकर्षण बल अधिकतम होता है और गति केवल कंपन तक सीमित होती है। द्रव अवस्था में कण थोड़े दूर होते हैं, बल मध्यम होता है तथा कण एक-दूसरे पर फिसल सकते हैं। गैस अवस्था में कण अत्यधिक दूर होते हैं, बल न्यूनतम होता है और कण तीव्र गति से स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं।
इस अध्याय में हम तीनों अवस्थाओं के गुणों, अवस्था परिवर्तन की प्रक्रियाओं (गलन, क्वथन, संघनन, जमना, वाष्पन, ऊर्ध्वपातन), ऊर्जा में परिवर्तन तथा अवस्था पर तापमान और दाब के प्रभाव का विस्तार से अध्ययन करेंगे। रेलवे परीक्षा में इस विषय से दो से तीन प्रश्न पूछे जाते हैं, विशेषकर अवस्था परिवर्तन के नाम और दिशा पर आधारित प्रश्न। अवस्था परिवर्तन का सही क्रम याद रखना ही इस अध्याय में सफलता की कुंजी है।
ठोस अवस्था (Solid State): ठोसों का निश्चित आकार, निश्चित आयतन तथा निश्चित घनत्व होता है। इनके कण अत्यंत निकट होते हैं और केवल अपनी स्थिति में कंपन करते हैं। ठोस संपीड्य नहीं होते। लोहा, ताँबा, बर्फ, लकड़ी ठोसों के उदाहरण हैं। ठोसों का अंतर-आण्विक बल सबसे प्रबल होता है।
द्रव अवस्था (Liquid State): द्रवों का निश्चित आयतन होता है परंतु निश्चित आकार नहीं होता, ये बर्तन के आकार में ढल जाते हैं। कण मध्यम दूरी पर होते हैं तथा एक-दूसरे पर फिसलने की क्षमता रखते हैं। द्रव लगभग असंपीड्य होते हैं। जल, तेल, पारा, दूध द्रवों के उदाहरण हैं।
गैस अवस्था (Gaseous State): गैसों का न तो निश्चित आकार होता है और न ही निश्चित आयतन, ये पूरे बर्तन को भर लेती हैं। कण अत्यधिक दूर होते हैं तथा तीव्र गति से चलते हैं। गैसें अत्यधिक संपीड्य होती हैं, इसीलिए इन्हें बोतलों में संपीड़ित करके भरा जाता है। ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन गैसों के उदाहरण हैं।
कणों के बीच की दूरी: ठोस में न्यूनतम, द्रव में मध्यम तथा गैस में अधिकतम होती है। आकर्षण बल: ठोस में अधिकतम, द्रव में मध्यम तथा गैस में न्यूनतम होता है। कणों की गति: ठोस में केवल कंपन, द्रव में फिसलन तथा गैस में स्वतंत्र विचरण होता है।
रेलवे से संबंधित उदाहरण: रेल इंजन में उच्च दाब पर जल की भाप (गैस अवस्था) बनाई जाती है। ब्रेकिंग प्रणाली में संपीड़ित वायु (गैस) का उपयोग होता है। ट्रांसफॉर्मर तेल (द्रव) शीतलन के लिए तथा रेल पटरियाँ (ठोस) लोहे/स्टील से बनी होती हैं।
ताप या दाब बदलने पर पदार्थ एक अवस्था से दूसरी अवस्था में बदल जाता है। इन प्रक्रियाओं को निम्नानुसार समझा जा सकता है।
गलन (Melting): ठोस का ऊष्मा ग्रहण करके द्रव में बदलना गलन कहलाता है। जिस तापमान पर यह परिवर्तन होता है उसे गलनांक कहते हैं। बर्फ का गलनांक 0 डिग्री सेल्सियस है। गलन में ऊष्मा ग्रहण होती है, अतः यह ऊष्माशोषी प्रक्रिया है।
जमना (Freezing): द्रव का ठंडा होकर ठोस में बदलना जमना कहलाता है। जिस तापमान पर यह होता है उसे हिमांक कहते हैं। जल का हिमांक 0 डिग्री सेल्सियस है। जमने में ऊष्मा मुक्त होती है।
वाष्पीकरण (Evaporation): द्रव का किसी भी तापमान पर सतह से गैस में बदलना वाष्पीकरण कहलाता है। वाष्पीकरण से शीतलन होता है, क्योंकि सतह के तीव्र कण ऊर्जा लेकर बाहर निकल जाते हैं। क्वथन (Boiling) में द्रव पूरे आयतन से क्वथनांक पर गैस में बदलता है।
क्वथनांक (Boiling Point): जिस तापमान पर द्रव का क्वथन होता है उसे क्वथनांक कहते हैं। शुद्ध जल का क्वथनांक 100 डिग्री सेल्सियस (1 वायुमंडलीय दाब पर) होता है। क्वथनांक पर द्रव का वाष्प दाब वायुमंडलीय दाब के बराबर हो जाता है।
संघनन (Condensation): गैस का ठंडा होकर द्रव में बदलना संघनन कहलाता है। संघनन में ऊष्मा मुक्त होती है। वायुमंडल में जलवाष्प का संघनन होकर बादल एवं ओस बनते हैं।
ऊर्ध्वपातन (Sublimation): ठोस का द्रव अवस्था से गुजरे बिना सीधे गैस में बदलना ऊर्ध्वपातन कहलाता है। कपूर, नेफ्थलीन, आयोडीन, अमोनियम क्लोराइड तथा शुष्क बर्फ (ठोस CO2) ऊर्ध्वपातन करने वाले पदार्थ हैं। ऊर्ध्वपातन ऊष्माशोषी प्रक्रिया है।
संलयन (Fusion): ठोस का गलकर द्रव बनना संलयन कहलाता है, इसका तापमान संलयन बिंदु कहलाता है। यह ऊष्माशोषी है।
तापमान एवं दाब का प्रभाव: दाब बढ़ाने पर गैस संपीडित होती है और ठोस में बदल सकती है। दाब कम करने पर द्रव का क्वथनांक घट जाता है, इसीलिए ऊँचाई पर जल जल्दी उबलता है। कार्बन डाइऑक्साइड गैस को उच्च दाब पर संपीड़ित करने पर शुष्क बर्फ बनती है।
अवस्था परिवर्तन में ऊर्जा परिवर्तन होता है। ठोस से द्रव, द्रव से गैस — इन ऊर्ध्वगामी प्रक्रियाओं में ऊष्मा ग्रहण होती है (ऊष्माशोषी)। गैस से द्रव, द्रव से ठोस — इन अधोगामी प्रक्रियाओं में ऊष्मा मुक्त होती है (ऊष्माक्षेपी)।
रेलवे इंजन में भाप: लोकोमोटिव बॉयलर में जल को गर्म करके उच्च दाब की भाप बनाई जाती है। यह जल के द्रव से गैस में बदलने (क्वथन) का उदाहरण है। भाप के संघनन से ऊष्मा मुक्त होती है जिसका उपयोग ऊष्मा विनिमय में होता है।
बॉयलर में जल की शुद्धता: बॉयलर में अशुद्ध जल गर्म करने पर वाष्पित हो जाता है और नमक अवशेष के रूप में बच जाता है, यह वाष्पन तथा क्रिस्टलन का व्यावहारिक उदाहरण है। अतः इंजन कर्मियों को बॉयलर जल की गुणवत्ता की जाँच करनी होती है।
संपीड़ित वायु: रेलवे के एयर ब्रेक सिस्टम में संपीड़ित वायु का उपयोग होता है, जो गैस की संपीड्यता का व्यावहारिक उदाहरण है। गैस के संपीडन पर दाब बढ़ता है और अवस्था परिवर्तन की संभावना बनती है।
उदाहरण प्रश्न: बर्फ के 0 डिग्री सेल्सियस पर जल में बदलने को क्या कहते हैं? हल: गलन (संलयन), यह ऊष्माशोषी प्रक्रिया है।
| गुण | ठोस | द्रव | गैस |
|---|---|---|---|
| आकार | निश्चित | अनिश्चित | अनिश्चित |
| आयतन | निश्चित | निश्चित | अनिश्चित |
| संपीड्यता | नहीं | लगभग नहीं | अत्यधिक |
| अंतर-आण्विक बल | अधिकतम | मध्यम | न्यूनतम |
| कणों की गति | केवल कंपन | फिसलन | स्वतंत्र विचरण |
| उदाहरण | लोहा, बर्फ | जल, तेल | वायु, ऑक्सीजन |
| प्रक्रिया | परिवर्तन | ऊष्मा | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| गलन/संलयन | ठोस से द्रव | ग्रहण (शोषी) | बर्फ का जल बनना |
| जमना | द्रव से ठोस | मुक्त (क्षेपी) | जल का बर्फ बनना |
| वाष्पीकरण | द्रव से गैस | ग्रहण (शोषी) | सूती कपड़े सूखना |
| क्वथन | द्रव से गैस | ग्रहण (शोषी) | जल का 100°C पर उबलना |
| संघनन | गैस से द्रव | मुक्त (क्षेपी) | भाप का जल बनना |
| ऊर्ध्वपातन | ठोस से गैस | ग्रहण (शोषी) | कपूर का गायब होना |
flowchart TD
A[पदार्थ की अवस्थाएँ] --> B[ठोस]
A --> C[द्रव]
A --> D[गैस]
A --> E[अवस्था परिवर्तन]
B --> B1[निश्चित आकार व आयतन]
B --> B2[सबसे प्रबल बल]
C --> C1[निश्चित आयतन, अनिश्चित आकार]
C --> C2[फिसलन गति]
D --> D1[अनिश्चित आकार व आयतन]
D --> D2[अधिकतम संपीड्यता]
E --> E1[गलन-जमना]
E --> E2[क्वथन-संघनन]
E --> E3[वाष्पीकरण]
E --> E4[ऊर्ध्वपातन]
E1 --> E11[ऊष्माशोषी]
E2 --> E21[संघनन में ऊष्मा मुक्त]
पदार्थ की अवस्थाएँ रसायन विज्ञान की मूलभूत अवधारणा हैं। इस अध्याय में हमने ठोस, द्रव और गैस तीनों अवस्थाओं के गुणों तथा उनके बीच के अंतर का अध्ययन किया। हमने सीखा कि अंतर-आण्विक बल, कणों की दूरी और गति के आधार पर अवस्था निर्धारित होती है। गलन, जमना, वाष्पीकरण, क्वथन, संघनन तथा ऊर्ध्वपातन जैसी प्रक्रियाओं में ऊष्मा का ग्रहण या मुक्त होना समझा। तापमान और दाब के परिवर्तन से पदार्थ की अवस्था बदलती है। रेलवे के बॉयलर, एयर ब्रेक तथा शीतलन तंत्र सभी अवस्था परिवर्तन के सिद्धांतों पर ही आधारित हैं। इस अध्याय की स्पष्ट समझ न केवल परीक्षा में अंक दिलाती है बल्कि टेक्नीशियन के व्यावहारिक कार्य में भी सहायक होती है।