कार्बन और सहसंयोजक बंध Notes

कार्बन और सहसंयोजक बंध

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: रसायन विज्ञान – धातु कार्बन और आवर्त सारणी विषय-वस्तु: 16.5 कार्बन और सहसंयोजक बंध

1. परिचय

कार्बन पृथ्वी पर सबसे प्रचुर तथा महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है, जो सभी जैविक यौगिकों की रीढ़ है। कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 तथा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4 है। इसका अर्थ है कि कार्बन के सबसे बाहरी कोश (M कोश) में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं। अष्टक नियम को पूर्ण करने के लिए कार्बन को 4 और इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। परंतु कार्बन न तो आसानी से इलेक्ट्रॉन त्यागता है और न ही ग्रहण करता है, क्योंकि यह प्रक्रिया ऊर्जा की दृष्टि से कठिन होती है। इसके बजाय कार्बन इलेक्ट्रॉनों का सहभाजन करके स्थायित्व प्राप्त करता है।

इलेक्ट्रॉनों के सहभाजन से बनने वाला बंध सहसंयोजक बंध कहलाता है। कार्बन अपने जैसे ही कार्बन परमाणु के साथ अथवा हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर, हैलोजन जैसे तत्वों के साथ सहसंयोजक बंध बना सकता है। सहसंयोजक बंध बनने में इलेक्ट्रॉनों की जोड़ियों का सहभाजन होता है, अतः कार्बन चतुःसंयोजी (टेट्रावेलेंट) तत्व है, अर्थात यह चार सहसंयोजक बंध बनाता है। कार्बन का यही चतुःसंयोजकता गुण उसे लाखों यौगिक बनाने में सक्षम बनाता है।

रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में कार्बन और सहसंयोजक बंध से 2 से 4 प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें सहसंयोजक बंध की परिभाषा, एकल-द्वि-त्रि बंध, कार्बन की चतुःसंयोजकता, कैटिनेशन गुण तथा कार्बन यौगिकों की अधिक संख्या के कारण प्रमुख प्रश्न शामिल हैं। सहसंयोजक यौगिकों के गुण — कम गलनांक, क्वथनांक तथा विद्युत् का कुचालक होना — भी परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इस अध्याय में हम इन सभी अवधारणाओं को विस्तार से समझेंगे।

2. सहसंयोजक बंध और बंधों के प्रकार

सहसंयोजक बंध वह रासायनिक बंध है जो दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों के एक या अधिक जोड़े साझा करने से बनता है। साझा किए गए इलेक्ट्रॉन दोनों परमाणुओं के नाभिक द्वारा आकर्षित होते हैं, जिससे बंध स्थायी होता है। सहसंयोजक बंध दो प्रकार के होते हैं — ध्रुवीय (पोलर) तथा अध्रुवीय (नॉन-पोलर) सहसंयोजक बंध। यदि दोनों परमाणु समान हों (जैसे H2, Cl2, O2), तो बंध अध्रुवीय होता है। यदि परमाणु भिन्न हों तथा विद्युत्-ऋणात्मकता में अंतर हो (जैसे HCl), तो बंध ध्रुवीय होता है।

साझा किए गए इलेक्ट्रॉन जोड़ों की संख्या के आधार पर सहसंयोजक बंध तीन प्रकार के होते हैं — एकल बंध, द्वि बंध और त्रि बंध। एकल बंध में एक इलेक्ट्रॉन जोड़ी साझा होती है, जैसे मेथेन में कार्बन और हाइड्रोजन के बीच का बंध। द्वि बंध में दो इलेक्ट्रॉन जोड़े साझा होते हैं, जैसे कार्बन डाइऑक्साइड में कार्बन और ऑक्सीजन के बीच का बंध। त्रि बंध में तीन इलेक्ट्रॉन जोड़े साझा होते हैं, जैसे नाइट्रोजन अणु में दो नाइट्रोजन परमाणुओं के बीच का बंध। बंधों की संख्या बढ़ने पर बंध की लंबाई घटती है तथा बंध ऊर्जा बढ़ती है।

उदाहरण 1: मेथेन (CH4) की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना बनाइए।

हल: कार्बन के बाह्यतम कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं तथा प्रत्येक हाइड्रोजन में 1 इलेक्ट्रॉन। चार हाइड्रोजन परमाणु कार्बन के साथ चार एकल बंध बनाते हैं, जिससे कार्बन अष्टक तथा प्रत्येक हाइड्रोजन द्विक (हेलियम विन्यास) पूर्ण करता है।

3. कार्बन की चतुःसंयोजकता और कैटिनेशन

कार्बन की चतुःसंयोजकता (टेट्रावेलेंसी) का अर्थ है कि कार्बन अपने चार बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों का उपयोग करके चार सहसंयोजक बंध बना सकता है। इसी कारण कार्बन अनेक प्रकार के यौगिक बना पाता है। कार्बन हाइड्रोजन से एकल बंध द्वारा (मेथेन), ऑक्सीजन से द्वि बंध द्वारा (CO2) तथा नाइट्रोजन से त्रि बंध द्वारा जुड़ सकता है। कार्बन की विभिन्न संयोजकता अवस्थाएँ ही कार्बनिक यौगिकों की विविधता का आधार हैं।

कार्बन का दूसरा विशिष्ट गुण कैटिनेशन है। कैटिनेशन का अर्थ है कार्बन परमाणुओं का आपस में जुड़कर लंबी श्रृंखलाएँ, शाखाएँ अथवा वलय (रिंग) बनाना। कार्बन-कार्बन बंध अत्यधिक स्थायी होता है क्योंकि कार्बन के परमाणु छोटे आकार के होते हैं तथा बंध में अधिक ऊर्जा निकलती है। इसी कारण कार्बन लाखों-करोड़ों यौगिक बनाता है, जबकि अन्य तत्वों की संख्या की तुलना में कार्बन यौगिकों की संख्या सर्वाधिक है।

कार्बन के यौगिकों की संख्या अत्यधिक होने के चार मुख्य कारण हैं — कैटिनेशन (स्व-संयोजन), चतुःसंयोजकता, कार्बन-कार्बन बंध की स्थायित्व तथा बंधों की विविधता (एकल, द्वि, त्रि)। इसके अतिरिक्त कार्बन में समावयवता (आइसोमेरिज्म) का गुण होता है, जिसमें एक ही आणविक सूत्र के कई विभिन्न संरचनात्मक सूत्र बनते हैं। ये सभी गुण मिलकर कार्बनिक रसायन की विशालता का कारण बनते हैं।

4. सहसंयोजक यौगिकों के गुण और महत्व

सहसंयोजक यौगिक प्रायः गैस, द्रव अथवा कम गलनांक वाले ठोस होते हैं, क्योंकि इनके अणुओं के बीच केवल दुर्बल अंतराआण्विक बल होते हैं। इनके गलनांक और क्वथनांक कम होते हैं। सहसंयोजक यौगिक विद्युत् के कुचालक होते हैं, क्योंकि इनमें स्वतंत्र रूप से गतिशील आयन या इलेक्ट्रॉन नहीं होते। ये यौगिक प्रायः जल में अविलेय होते हैं परंतु कार्बनिक विलायकों (जैसे बेंजीन, कार्बन टेट्राक्लोराइड) में विलेय होते हैं। उदाहरण के लिए, नमक (आयनिक) जल में घुलता है, परंतु मोम या शर्करा (सहसंयोजक) कार्बनिक विलायकों में घुलती है।

सहसंयोजक यौगिकों के सामान्य उदाहरण हैं — मेथेन (CH4), कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), जल (H2O), अमोनिया (NH3), हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl) तथा ऑक्सीजन (O2)। जल और अमोनिया जैसे ध्रुवीय सहसंयोजक यौगिक विद्युत् के आंशिक चालक होते हैं, जबकि अध्रुवीय यौगिक पूर्ण कुचालक होते हैं। कार्बन की उपस्थिति के कारण बनने वाले सहसंयोजक यौगिकों का उपयोग ईंधन, विलायक, प्लास्टिक, औषधियाँ तथा रंग-रंजक बनाने में होता है।

उदाहरण 2: CO2 अणु में कार्बन और ऑक्सीजन के बीच किस प्रकार का बंध होता है?

हल: CO2 अणु में कार्बन प्रत्येक ऑक्सीजन के साथ द्वि सहसंयोजक बंध (C=O) बनाता है। अतः CO2 में द्वि सहसंयोजक बंध उपस्थित होते हैं।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: सहसंयोजक बंधों के प्रकार

बंध का प्रकार साझा इलेक्ट्रॉन जोड़े उदाहरण बंध लंबाई
एकल बंध 1 CH4, HCl, H2 सबसे लंबी
द्वि बंध 2 CO2, O2 मध्यम
त्रि बंध 3 N2 सबसे छोटी

तालिका 2: आयनिक और सहसंयोजक यौगिकों की तुलना

गुण आयनिक यौगिक सहसंयोजक यौगिक
बंधन इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण इलेक्ट्रॉन सहभाजन
गलनांक उच्च निम्न
विद्युत् चालकता विलयन/पिघली अवस्था में चालक कुचालक
जल में घुलनशीलता सामान्यतया विलेय सामान्यतया अविलेय
उदाहरण NaCl, KCl CH4, CO2, H2O

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[कार्बन और सहसंयोजक बंध] --> B[कार्बन विन्यास 2 4]
    A --> C[सहसंयोजक बंध]
    A --> D[बंध के प्रकार]
    A --> E[कार्बन के विशेष गुण]
    A --> F[सहसंयोजक यौगिकों के गुण]
    C --> C1[इलेक्ट्रॉन सहभाजन]
    C --> C2[ध्रुवीय व अध्रुवीय]
    D --> D1[एकल बंध CH4]
    D --> D2[द्वि बंध CO2]
    D --> D3[त्रि बंध N2]
    E --> E1[चतुःसंयोजकता]
    E --> E2[कैटिनेशन]
    E --> E3[समावयवता]
    F --> F1[कम गलनांक क्वथनांक]
    F --> F2[विद्युत् कुचालक]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

कार्बन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और बंध C 2 विन्यास 2, 4 = बाह्य कोश में 4 इलेक्ट्रॉन चतुःसंयोजकता: कार्बन 4 सहसंयोजक बंध बनाता है इलेक्ट्रॉन त्याग या ग्रहण की बजाय सहभाजन कैटिनेशन: कार्बन-कार्बन श्रृंखला लंबी श्रृंखला - शाखाएँ - वलय बनाने की क्षमता स्वर्ण नियम कार्बन इलेक्ट्रॉनों का सहभाजन कर अष्टक पूर्ण करता है।

सहसंयोजक बंधों के प्रकार एकल बंध H - H 1 इलेक्ट्रॉन जोड़ी द्वि बंध O = O 2 इलेक्ट्रॉन जोड़ी त्रि बंध N ≡ N 3 इलेक्ट्रॉन जोड़ी मेथेन CH4 की संरचना H - C - H (कार्बन के चार एकल बंध) कार्बन चतुःसंयोजी, सभी बंध समान ज्यामिति: चतुष्फलकीय बंध लंबाई: एकल > द्वि > त्रि बंध ऊर्जा: त्रि > द्वि > एकल स्वर्ण नियम साझा इलेक्ट्रॉन जोड़े बढ़ने पर बंध लंबाई घटती है।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. कार्बन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 4 लिखना; वास्तव में कार्बन (क्रमांक 6) का विन्यास 2, 4 होता है।
  2. कार्बन को आयनिक बंध बनाने वाला तत्व मानना; कार्बन केवल सहसंयोजक बंध बनाता है।
  3. CO2 में एकल बंध मान लेना; वास्तव में CO2 में द्वि बंध (C=O) होते हैं।
  4. त्रि बंध में केवल दो इलेक्ट्रॉन जोड़े साझा होते हैं यह मानना; त्रि बंध में तीन जोड़े साझा होते हैं।
  5. सहसंयोजक यौगिकों के गलनांक उच्च मानना; इनके गलनांक और क्वथनांक निम्न होते हैं।
  6. सहसंयोजक यौगिकों को विद्युत् का सुचालक मानना; ये कुचालक होते हैं।
  7. कार्बन यौगिकों की अधिक संख्या का एकमात्र कारण कैटिनेशन मानना; चतुःसंयोजकता एवं बंध विविधता भी कारण हैं।
  8. कार्बन के चारों बंधों में भिन्नता मानना; वास्तव में कार्बन के सभी चार बंध समान होते हैं।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. कार्बन का विन्यास 2, 4 तथा चतुःसंयोजकता का गुण रटें, यह प्रारंभिक प्रश्न है।
  2. एकल, द्वि और त्रि बंध के उदाहरण क्रमशः CH4, CO2, N2 याद रखें।
  3. सहसंयोजक यौगिकों के तीन गुण — निम्न गलनांक, कुचालक, कार्बनिक विलायक में विलेय — कंठस्थ करें।
  4. बंध लंबाई का क्रम एकल > द्वि > त्रि तथा बंध ऊर्जा का क्रम त्रि > द्वि > एकल रखें।
  5. कैटिनेशन प्रश्न में कार्बन की श्रृंखला, शाखा और वलय बनाने की क्षमता का उल्लेख करें।
  6. H2O और NH3 को ध्रुवीय सहसंयोजक यौगिक मानें, क्योंकि इनमें विद्युत्-ऋणात्मकता में अंतर होता है।
  7. कार्बन यौगिकों की संख्या का कारण पूछे जाने पर चारों गुण — कैटिनेशन, चतुःसंयोजकता, बंध स्थायित्व, समावयवता — बताएँ।
  8. संरचना बनाने वाले प्रश्न में पहले कार्बन के चार इलेक्ट्रॉन दिखाएँ, फिर प्रत्येक हाइड्रोजन से एक-एक बंध जोड़ें।

10. निष्कर्ष

कार्बन और सहसंयोजक बंध कार्बनिक रसायन की नींव हैं। इस अध्याय में हमने कार्बन के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, चतुःसंयोजकता, कैटिनेशन तथा इलेक्ट्रॉन सहभाजन से बनने वाले सहसंयोजक बंध की अवधारणा को विस्तार से समझा। एकल, द्वि और त्रि बंधों की संरचना तथा सहसंयोजक यौगिकों के गुणों (निम्न गलनांक, विद्युत् कुचालकता) का अध्ययन किया। कार्बन का चतुःसंयोजकता एवं कैटिनेशन गुण ही उसे लाखों यौगिक बनाने में सक्षम बनाता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इस विषय से अवधारणात्मक प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इन मूलभूत अवधारणाओं की दृढ़ पकड़ ही हाइड्रोकार्बन और कार्बनिक यौगिकों के आगामी अध्यायों को समझने की कुंजी है।