विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: रसायन विज्ञान – धातु कार्बन और आवर्त सारणी विषय-वस्तु: 16.6 हाइड्रोकार्बन
कार्बन और हाइड्रोजन के परमाणुओं से बने यौगिक हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं। ये कार्बनिक यौगिकों का सबसे सरल वर्ग है, जिससे अन्य सभी कार्बनिक यौगिक व्युत्पन्न होते हैं। हाइड्रोकार्बन ईंधन, गैस, प्लास्टिक, औषधियों तथा औद्योगिक रसायनों का प्रमुख स्रोत हैं। प्राकृतिक गैस का मुख्य घटक मेथेन (CH4) और पेट्रोलियम का प्रमुख घटक विभिन्न हाइड्रोकार्बन होते हैं। रेलवे तथा उद्योग में प्रयुक्त ईंधनों का आधार भी हाइड्रोकार्बन ही हैं।
हाइड्रोकार्बन को मुख्यतः दो वर्गों में बाँटा जाता है — संतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्केन) और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्कीन एवं एल्काइन)। संतृप्त हाइड्रोकार्बन में कार्बन-कार्बन के बीच केवल एकल बंध होते हैं, जबकि असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में कार्बन-कार्बन के बीच द्वि या त्रि बंध होते हैं। संतृप्त हाइड्रोकार्बन का सामान्य सूत्र CnH2n+2 होता है। जिसमें सभी कार्बन परमाणुओं की संयोजकता हाइड्रोजन से संतृप्त होती है।
रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में हाइड्रोकार्बन से 2 से 3 प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें संतृप्त एवं असंतृप्त हाइड्रोकार्बन की पहचान, सामान्य सूत्र, क्रम में प्रथम सदस्य के नाम तथा दहन अभिक्रिया से संबंधित प्रश्न शामिल हैं। मेथेन, एथेन, एथीन, एथाइन जैसे प्रारंभिक हाइड्रोकार्बन के नाम एवं संरचना की पहचान विशेष रूप से पूछी जाती है। इस अध्याय में हम हाइड्रोकार्बनों के वर्गीकरण, गुणों और अभिक्रियाओं को विस्तार से समझेंगे।
संतृप्त हाइड्रोकार्बन वे यौगिक हैं जिनमें कार्बन परमाणु आपस में केवल एकल बंध द्वारा जुड़े होते हैं। इन्हें एल्केन या पैराफिन भी कहते हैं। एल्केन का सामान्य सूत्र CnH2n+2 है। इनमें प्रत्येक कार्बन परमाणु की चारों संयोजकताएँ हाइड्रोजन या कार्बन से संतृप्त होती हैं, इसीलिए ये अधिक अभिक्रियाशील नहीं होते और इन्हें पैराफिन (कम स्नेह वाले) भी कहा जाता है। एल्केन श्रृंखला के प्रथम कुछ सदस्य हैं — मेथेन (CH4), एथेन (C2H6), प्रोपेन (C3H8), ब्यूटेन (C4H10)।
एल्केन अभिक्रियाशीलता में कम सक्रिय होते हैं, परंतु ये ऑक्सीजन की उपस्थिति में दहन करते हैं, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड और जल बनते हैं तथा बड़ी मात्रा में ऊष्मा मुक्त होती है। दहन का सामान्य समीकरण इस प्रकार है: CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O + ऊष्मा। यही कारण है कि एल्केन उत्तम ईंधन हैं। प्राकृतिक गैस (मेथेन), LPG (ब्यूटेन एवं प्रोपेन) तथा पेट्रोल में मौजूद अनेक यौगिक एल्केन ही हैं। ऑक्सीजन की कमी में दहन करने पर एल्केन अपूर्ण दहन द्वारा कार्बन मोनोऑक्साइड उत्पन्न करते हैं, जो विषैली गैस है।
उदाहरण 1: एल्केन का सामान्य सूत्र तथा प्रोपेन का आणविक सूत्र लिखिए।
हल: एल्केन का सामान्य सूत्र CnH2n+2 है। प्रोपेन के लिए n = 3, अतः आणविक सूत्र C3H8 होगा।
असंतृप्त हाइड्रोकार्बन वे यौगिक हैं जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच द्वि या त्रि बंध होते हैं। द्वि बंध वाले हाइड्रोकार्बन एल्कीन कहलाते हैं, जिनका सामान्य सूत्र CnH2n है। एल्कीन श्रृंखला का प्रथम सदस्य एथीन (C2H4) है, जिसका संरचनात्मक सूत्र CH2=CH2 है। त्रि बंध वाले हाइड्रोकार्बन एल्काइन कहलाते हैं, जिनका सामान्य सूत्र CnH2n-2 है। एल्काइन श्रृंखला का प्रथम सदस्य एथाइन (C2H2) है, जिसे एसिटिलीन भी कहते हैं।
असंतृप्त हाइड्रोकार्बन संतृप्त हाइड्रोकार्बन की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील होते हैं, क्योंकि द्वि और त्रि बंध अधिक आसानी से टूटकर अन्य परमाणुओं से जुड़ सकते हैं। एल्कीन और एल्काइन में योगज अभिक्रिया होती है, जिसमें द्वि या त्रि बंध के स्थान पर परमाणु जुड़ जाते हैं। उदाहरण के लिए, एथीन में हाइड्रोजन के योग से एथेन बनता है: C2H4 + H2 → C2H6। इसी प्रकार एथीन में ब्रोमीन जल का रंग नारंगी से रंगहीन हो जाता है, जो असंतृप्ति की पहचान की परीक्षा है।
एल्कीन एवं एल्काइन की पहचान: असंतृप्त हाइड्रोकार्बन की उपस्थिति की जाँच ब्रोमीन जल अथवा पोटैशियम परमैंगनेट विलयन से की जाती है। असंतृप्त यौगिक की उपस्थिति में ब्रोमीन जल का नारंगी-भूरा रंग रंगहीन हो जाता है। इसी प्रकार अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट का गुलाबी रंग भी रंगहीन हो जाता है। संतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्केन) इन परीक्षाओं में कोई रंग परिवर्तन नहीं दिखाते, क्योंकि इनमें द्वि या त्रि बंध नहीं होते।
उदाहरण 2: एथीन में ब्रोमीन जल मिलाने पर क्या होता है?
हल: एथीन असंतृप्त है, अतः ब्रोमीन जल का नारंगी-भूरा रंग योगज अभिक्रिया द्वारा रंगहीन हो जाता है। यह असंतृप्ति की पहचान है।
दहन अभिक्रिया: सभी हाइड्रोकार्बन ऑक्सीजन में दहन करते हैं। पूर्ण दहन में CO2 और जल बनते हैं तथा ऊष्मा एवं प्रकाश मुक्त होते हैं। अपूर्ण दहन (ऑक्सीजन की कमी) में कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और कालिख बनती है। कार्बन मोनोऑक्साइड अत्यंत विषैली गैस है। यही कारण है कि वाहनों के इंजन में अपूर्ण दहन होने पर प्रदूषण बढ़ता है।
योगज अभिक्रिया: असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में द्वि या त्रि बंध के स्थान पर परमाणु जुड़ने की अभिक्रिया योगज अभिक्रिया कहलाती है। हाइड्रोजन का योग (हाइड्रोजनीकरण), हैलोजन का योग (हैलोजनीकरण) तथा जल का योग (हाइड्रेशन) इसी प्रकार की अभिक्रियाएँ हैं। हाइड्रोजनीकरण का उपयोग वनस्पति तेलों को ठोस वनस्पति घी (वनस्पति) में बदलने में होता है।
प्रतिस्थापन अभिक्रिया: संतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्केन) में क्लोरीन या ब्रोमीन जैसे हैलोजन, हाइड्रोजन को प्रतिस्थापित करते हैं। उदाहरण: CH4 + Cl2 → CH3Cl + HCl। इस अभिक्रिया को हैलोजनीकरण या प्रतिस्थापन अभिक्रिया कहते हैं। यह अभिक्रिया सूर्य के प्रकाश (पराबैंगनी विकिरण) की उपस्थिति में होती है।
हाइड्रोकार्बन के उपयोग अनेक हैं — ईंधन के रूप में (मेथेन, ब्यूटेन, पेट्रोल, डीजल), औद्योगिक कच्चा माल के रूप में (प्लास्टिक, रबर, विलायक), वेल्डिंग गैस के रूप में (एथाइन) तथा रेलवे इंजनों में ईंधन के रूप में। एथीन का उपयोग पॉलिथीन बनाने में होता है। इस प्रकार हाइड्रोकार्बन आधुनिक जीवन का आधार हैं।
| वर्ग | बंध का प्रकार | सामान्य सूत्र | प्रथम सदस्य | प्रकृति |
|---|---|---|---|---|
| एल्केन | एकल बंध | CnH2n+2 | मेथेन CH4 | संतृप्त |
| एल्कीन | द्वि बंध | CnH2n | एथीन C2H4 | असंतृप्त |
| एल्काइन | त्रि बंध | CnH2n-2 | एथाइन C2H2 | असंतृप्त |
| नाम | आणविक सूत्र | संरचनात्मक सूत्र | उपयोग |
|---|---|---|---|
| मेथेन | CH4 | CH4 | प्राकृतिक गैस |
| एथेन | C2H6 | CH3-CH3 | ईंधन |
| प्रोपेन | C3H8 | CH3-CH2-CH3 | LPG |
| ब्यूटेन | C4H10 | CH3-CH2-CH2-CH3 | LPG, ब्यूटेन गैस |
flowchart TD
A[हाइड्रोकार्बन C और H के यौगिक] --> B[संतृप्त एल्केन]
A --> C[असंतृप्त]
A --> D[अभिक्रियाएँ]
A --> E[उपयोग]
B --> B1[CnH2n+2]
B --> B2[मेथेन CH4]
C --> C1[एल्कीन CnH2n द्वि बंध]
C --> C2[एल्काइन CnH2n-2 त्रि बंध]
D --> D1[दहन CO2 + H2O]
D --> D2[योगज एथीन → एथेन]
D --> D3[प्रतिस्थापन CH4 + Cl2]
E --> E1[ईंधन]
E --> E2[प्लास्टिक पॉलिथीन]
E --> E3[वेल्डिंग एथाइन]
हाइड्रोकार्बन कार्बनिक रसायन का मूल आधार हैं, जो केवल कार्बन और हाइड्रोजन से बने होते हैं। इस अध्याय में हमने संतृप्त (एल्केन) तथा असंतृप्त (एल्कीन, एल्काइन) हाइड्रोकार्बनों के वर्गीकरण, उनके सामान्य सूत्र, प्रथम सदस्य, गुण तथा दहन, योगज और प्रतिस्थापन जैसी प्रमुख अभिक्रियाओं का अध्ययन किया। असंतृप्ति की पहचान ब्रोमीन जल एवं KMnO4 परीक्षण से होती है। हाइड्रोकार्बन ईंधन, प्लास्टिक तथा औद्योगिक रसायनों के प्रमुख स्रोत हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में सामान्य सूत्र, प्रथम सदस्य एवं अभिक्रिया प्रकारों से प्रश्न अवश्य आते हैं, अतः इनकी दृढ़ पकड़ बनाए रखें। यह अध्याय समजातीय श्रेणी तथा क्रियात्मक समूह के अध्यायों की नींव है।