विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: रसायन विज्ञान – पदार्थ और परमाणु संरचना विषय-वस्तु: 14.8 संयोजकता और रासायनिक सूत्र
संयोजकता और रासायनिक सूत्र रसायन विज्ञान की वह शाखा है जो बताती है कि तत्व आपस में किस प्रकार संयोग करके यौगिक बनाते हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इस अध्याय से संयोजकता के मान, रासायनिक सूत्र बनाने की विधि, आयनों के सूत्र तथा सामान्य यौगिकों के रासायनिक सूत्रों से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। संयोजकता किसी तत्व के परमाणु की संयोजन क्षमता है, अर्थात एक परमाणु हाइड्रोजन के कितने परमाणुओं के साथ संयोग कर सकता है या हाइड्रोजन के कितने परमाणुओं का स्थान ले सकता है। रासायनिक सूत्र किसी यौगिक में उपस्थित तत्वों के प्रतीकों और उनकी संख्या को दर्शाता है।
किसी तत्व की संयोजकता उसके बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या से ज्ञात होती है। यदि बाह्यतम कोश में 4 से कम इलेक्ट्रॉन हों तो संयोजकता उन इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है, और यदि 4 से अधिक हों तो संयोजकता 8 घटाकर इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है। उदाहरण के लिए सोडियम (2, 8, 1) की संयोजकता 1 है, क्लोरीन (2, 8, 7) की संयोजकता 8 - 7 = 1 है। यही संयोजकता तत्वों की संयोजन क्षमता निर्धारित करती है।
इस अध्याय में हम संयोजकता की परिभाषा, संयोजकता ज्ञात करने की विधि, कुछ तत्वों की संयोजकता के मान, मूलक (रैडिकल) और आयन, रासायनिक सूत्र लिखने के नियम, संयोजकता से रासायनिक सूत्र बनाने की क्रॉस-गुणा विधि तथा सामान्य यौगिकों के सूत्रों का विस्तार से अध्ययन करेंगे। रेलवे परीक्षा में इस विषय से 2 से 3 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें सूत्र बनाना सबसे सामान्य प्रश्न है।
संयोजकता किसी तत्व की वह क्षमता है जो बताती है कि उसका एक परमाणु दूसरे तत्व के कितने परमाणुओं से संयोग कर सकता है। संयोजकता का आधार हाइड्रोजन माना जाता है, जिसकी संयोजकता सदैव 1 होती है। संयोजकता का निर्धारण बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनों से होता है।
संयोजकता ज्ञात करने की विधि: सबसे पहले तत्व का इलेक्ट्रॉन वितरण लिखें। यदि बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 4 या उससे कम हो तो संयोजकता उसी संख्या के बराबर होती है। यदि बाह्यतम कोश में 4 से अधिक इलेक्ट्रॉन हों तो संयोजकता 8 घटाकर इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है। हीलियम, निऑन, आर्गन जैसी अक्रिय गैसों की संयोजकता शून्य होती है क्योंकि इनके बाह्य कोश पूर्ण होते हैं।
कुछ तत्वों की संयोजकता: हाइड्रोजन (1), ऑक्सीजन (2), नाइट्रोजन (3), कार्बन (4), सोडियम (1), पोटैशियम (1), मैग्नीशियम (2), कैल्शियम (2), एलुमिनियम (3), क्लोरीन (1), सल्फर (2), लोहा (2 और 3, परिवर्ती संयोजकता), ताँबा (1 और 2), पारा (1 और 2), सीसा (2 और 4)। जिन तत्वों की संयोजकता एक से अधिक होती है, उनकी परिवर्ती संयोजकता कहलाती है, जैसे लोहे की संयोजकता 2 और 3 दोनों होती है।
रेलवे संदर्भ: लीड-एसिड बैटरी में लेड (Pb) और लेड डाइऑक्साइड (PbO2) का उपयोग होता है। पीतल में ताँबा और जस्ता होता है। इन धातुओं की संयोजकता समझने से उनके यौगिकों के सूत्र स्पष्ट होते हैं।
उदाहरण प्रश्न: मैग्नीशियम (Mg, Z = 12) की संयोजकता ज्ञात कीजिए। हल: इलेक्ट्रॉन वितरण 2, 8, 2। बाह्य कोश में 2 इलेक्ट्रॉन, अतः संयोजकता 2 है।
मूलक परमाणुओं का वह समूह है जो एक इकाई की तरह व्यवहार करता है तथा यौगिक में सम्मिलित होता है। मूलक को रैडिकल भी कहते हैं। जो मूलक धनात्मक आवेश रखता है उसे धनात्मक मूलक या धनायन तथा जो ऋणात्मक आवेश रखता है उसे ऋणात्मक मूलक या ऋणायन कहते हैं। मूलक की संयोजकता उसके आवेश के बराबर होती है।
धनात्मक मूलक (कटायन): हाइड्रोजन (H+), सोडियम (Na+), पोटैशियम (K+), चाँदी (Ag+), अमोनियम (NH4+), कैल्शियम (Ca2+), मैग्नीशियम (Mg2+), जस्ता (Zn2+), क्यूप्रिक (Cu2+), फेरस (Fe2+), फेरिक (Fe3+), एलुमिनियम (Al3+)।
ऋणात्मक मूलक (एनायन): क्लोराइड (Cl-), ब्रोमाइड (Br-), आयोडाइड (I-), हाइड्रॉक्साइड (OH-), नाइट्रेट (NO3-), बाइकार्बोनेट (HCO3-), ऑक्साइड (O2-), सल्फाइड (S2-), सल्फेट (SO4 2-), कार्बोनेट (CO3 2-), फॉस्फेट (PO4 3-)।
यौगिक की उदासीनता: कोई भी यौगिक विद्युत रूप से उदासीन होता है। अतः यौगिक में धनात्मक और ऋणात्मक आवेशों का कुल योग शून्य होता है। यही सिद्धांत रासायनिक सूत्र बनाने का आधार है। सोडियम क्लोराइड (NaCl) में Na+ का +1 आवेश Cl- के -1 आवेश से संतुलित होता है।
मूलकों की संयोजकता: एक संयोजक मूलकों (Na+, Cl-, K+, OH-, NO3-) की संयोजकता 1 होती है। द्विसंयोजक मूलकों (Ca2+, Mg2+, O2-, SO4 2-) की संयोजकता 2 होती है। त्रिसंयोजक मूलकों (Al3+, PO4 3-) की संयोजकता 3 होती है।
रासायनिक सूत्र किसी यौगिक में उपस्थित तत्वों के प्रतीकों तथा उनकी संख्या का संक्षिप्त रूप है। रासायनिक सूत्र लिखने के लिए क्रॉस-गुणा विधि (वैलेंसी क्रॉसिंग) का उपयोग किया जाता है।
सूत्र लिखने के नियम: पहले धनात्मक मूलक (धातु) का प्रतीक लिखें, फिर ऋणात्मक मूलक (अधातु) का। प्रत्येक मूलक की संयोजकता लिखें। फिर क्रॉस-गुणा करें — पहले मूलक की संयोजकता दूसरे मूलक के नीचे और दूसरे की संयोजकता पहले के नीचे लिखें। यदि अनुपात को सरल बनाया जा सके तो सरल करें। यदि एक से अधिक बहुपरमाणुक मूलक हों तो उन्हें कोष्ठक में लिखें।
क्रॉस-गुणा विधि के उदाहरण: जल (H2O): H की संयोजकता 1, O की 2; क्रॉस-गुणा करने पर H2O। कार्बन डाइऑक्साइड (CO2): C की संयोजकता 4, O की 2; अनुपात 4:2 = 2:1, अतः CO2। सोडियम क्लोराइड (NaCl): Na की संयोजकता 1, Cl की 1; अतः NaCl। मैग्नीशियम क्लोराइड (MgCl2): Mg की संयोजकता 2, Cl की 1; अतः MgCl2। एलुमिनियम ऑक्साइड (Al2O3): Al की संयोजकता 3, O की 2; अतः Al2O3। कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3): Ca की संयोजकता 2, CO3 की 2; अनुपात सरल होकर 1:1, अतः CaCO3।
अधिक उदाहरण: सोडियम सल्फेट (Na2SO4): Na की संयोजकता 1, SO4 की 2; अतः Na2SO4। एलुमिनियम सल्फेट (Al2(SO4)3): Al की संयोजकता 3, SO4 की 2; अतः Al2(SO4)3। अमोनियम फॉस्फेट ((NH4)3PO4): NH4 की संयोजकता 1, PO4 की 3; अतः (NH4)3PO4। कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड (Ca(OH)2): Ca की संयोजकता 2, OH की 1; अतः Ca(OH)2।
सामान्य यौगिकों के सूत्र: जल H2O, कार्बन डाइऑक्साइड CO2, सोडियम क्लोराइड NaCl, सल्फ्यूरिक अम्ल H2SO4, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल HCl, नाइट्रिक अम्ल HNO3, अमोनिया NH3, मीथेन CH4, चूने का पत्थर CaCO3, सोडियम बाइकार्बोनेट NaHCO3, विरंजक चूर्ण CaOCl2, कॉपर सल्फेट CuSO4, लोहे का जंग Fe2O3।
उदाहरण प्रश्न: एलुमिनियम और सल्फेट मूलक का सूत्र लिखिए। हल: Al की संयोजकता 3, SO4 की 2; क्रॉस-गुणा से Al2(SO4)3।
| तत्व | प्रतीक | इलेक्ट्रॉन वितरण | संयोजकता |
|---|---|---|---|
| हाइड्रोजन | H | 1 | 1 |
| ऑक्सीजन | O | 2, 6 | 2 |
| नाइट्रोजन | N | 2, 5 | 3 |
| कार्बन | C | 2, 4 | 4 |
| सोडियम | Na | 2, 8, 1 | 1 |
| कैल्शियम | Ca | 2, 8, 8, 2 | 2 |
| एलुमिनियम | Al | 2, 8, 3 | 3 |
| क्लोरीन | Cl | 2, 8, 7 | 1 |
| मूलक | प्रकार | आवेश/संयोजकता |
|---|---|---|
| अमोनियम | NH4+ | 1 (धनात्मक) |
| सोडियम | Na+ | 1 (धनात्मक) |
| कैल्शियम | Ca2+ | 2 (धनात्मक) |
| एलुमिनियम | Al3+ | 3 (धनात्मक) |
| क्लोराइड | Cl- | 1 (ऋणात्मक) |
| हाइड्रॉक्साइड | OH- | 1 (ऋणात्मक) |
| सल्फेट | SO4 2- | 2 (ऋणात्मक) |
| कार्बोनेट | CO3 2- | 2 (ऋणात्मक) |
| फॉस्फेट | PO4 3- | 3 (ऋणात्मक) |
flowchart TD
A[संयोजकता और रासायनिक सूत्र] --> B[संयोजकता]
A --> C[मूलक]
A --> D[रासायनिक सूत्र]
B --> B1[बाह्य कोश इलेक्ट्रॉन]
B --> B2[<=4: समान संख्या]
B --> B3[>4: 8 - संख्या]
C --> C1[धनात्मक मूलक Na+, Ca2+]
C --> C2[ऋणात्मक मूलक Cl-, SO4 2-]
D --> D1[क्रॉस-गुणा विधि]
D --> D2[यौगिक उदासीन]
D1 --> D11[H2O, CO2, NaCl]
D1 --> D12[Al2O3, CaCO3]
B3 --> B31[क्लोरीन 8-7=1]
संयोजकता और रासायनिक सूत्र यौगिकों की संरचना समझने की कुंजी है। इस अध्याय में हमने संयोजकता की परिभाषा और बाह्य कोश इलेक्ट्रॉनों से उसे ज्ञात करने की विधि का अध्ययन किया। सोडियम की संयोजकता 1, क्लोरीन की 1, मैग्नीशियम की 2, एलुमिनियम की 3 तथा कार्बन की 4 है। मूलक (धनात्मक और ऋणात्मक) और आयनों की अवधारणा को समझा, जिसमें NH4+, OH-, SO4 2-, CO3 2- आदि शामिल हैं। क्रॉस-गुणा विधि द्वारा रासायनिक सूत्र बनाना सीखा, जिसमें आवेशों का योग शून्य होने का नियम मुख्य है। जल, CO2, NaCl, Al2O3, Ca(OH)2, Al2(SO4)3 जैसे सूत्रों का निर्माण अभ्यास किया। यह अध्याय रासायनिक समीकरण और रासायनिक अभिक्रियाओं के अध्यायों की नींव है। रेलवे परीक्षा में सूत्र-आधारित प्रश्न उच्च स्कोरिंग हैं, अतः क्रॉस-गुणा विधि का अभ्यास आवश्यक है।