विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – इतिहास और संस्कृति विषय-वस्तु: 20.1 प्राचीन भारत
प्राचीन भारत का इतिहास विश्व की सबसे प्राचीन एवं समृद्ध सभ्यताओं में से एक है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में सामान्य जागरूकता के अंतर्गत प्राचीन भारत से संबंधित प्रश्न लगभग हर वर्ष पूछे जाते हैं। इस अध्याय में सिंधु घाटी सभ्यता, वैदिक काल, महाजनपदों का उदय, मौर्य एवं गुप्त साम्राज्य जैसी प्रमुख सभ्यताओं और राजवंशों का अध्ययन किया जाएगा। प्राचीन भारत का इतिहास प्रायः प्रस्तर युग, ताम्र पाषाण युग और लौह युग के कालखंडों में विभाजित किया जाता है।
सिंधु घाटी सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है, जो विश्व की चार प्रमुख प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। यह सभ्यता लगभग 2500 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व तक फली-फूली और इसका विस्तार वर्तमान पाकिस्तान के सिंधु नदी क्षेत्र से लेकर भारत के पश्चिमी राज्यों तक था। इस सभ्यता की खोज 1921 ईस्वी में हड़प्पा नामक स्थल से हुई थी। प्रमुख पुरातत्वविदों में दयाराम साहनी ने हड़प्पा तथा राखलदास बनर्जी ने मोहनजोदड़ो की खोज की थी। जॉन मार्शल के निर्देशन में ये उत्खनन संपन्न हुए।
प्राचीन भारत के इतिहास की दृष्टि से वैदिक काल अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी काल में वेदों की रचना हुई जिन्हें भारतीय संस्कृति की जड़ें कहा जाता है। वैदिक काल के पश्चात् महाजनपदों के उदय से राजनीतिक संगठन का विकास हुआ और इसी पृष्ठभूमि में मगध साम्राज्य का उदय हुआ, जिसने आगे चलकर मौर्य एवं गुप्त साम्राज्य के रूप में विशाल विस्तार प्राप्त किया। रेलवे परीक्षा में प्राचीन भारत से प्रायः सभ्यता के स्थल, राजवंशों के संस्थापक, प्रमुख शासक, अभिलेख और उपलब्धियों से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की सबसे परिष्कृत शहरी सभ्यताओं में से एक थी। यह सभ्यता अपनी नगर-योजना, जल निकासी व्यवस्था, ईंटों के मानकीकृत आकार तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए प्रसिद्ध थी। नगरों में बने स्नानागार, अन्नागार, विशाल ग्रैनरी और गोदाम इसकी उन्नत इंजीनियरिंग का प्रमाण देते हैं।
प्रमुख स्थल एवं उत्खननकर्ता: मोहनजोदड़ो (राखलदास बनर्जी, 1922), हड़प्पा (दयाराम साहनी, 1921), चन्हुदड़ो (एन. जी. मजुमदार), कालीबंगा (अमलानंद घोष), लोथल (एस. आर. राव, 1957) और धौलावीरा (आर. एस. बिष्ट, 1985)। मोहनजोदड़ो का अर्थ सिंधी भाषा में "मृतकों का टीला" होता है। लोथल में विश्व का प्राचीनतम कृत्रिम बंदरगाह मिला है और इसे "पूर्व का हड़प्पा" भी कहा जाता है।
मुख्य विशेषताएँ: इस सभ्यता के लोगों ने नदी सभ्यता के निकट बस्तियाँ बसाईं। पकी हुई मिट्टी की ईंटें, मुहरें, तौल-माप के पत्थर, कांस्य की मूर्तियाँ (नर्तकी), पशुपति मुहर और पीतल का उपयोग इस सभ्यता के मुख्य प्रमाण हैं। मोहनजोदड़ो का "विशाल स्नानागार" और "ग्रेट बाथ" इसकी जल प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है। सभ्यता के लोग सूती वस्त्र का उपयोग करने वाले विश्व के पहले लोगों में से थे। हड़प्पाई लिपि अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है, इसलिए इस सभ्यता के बारे में अधिकांश जानकारी पुरातात्विक अवशेषों पर आधारित है।
पतन के कारण: विद्वानों के अनुसार बाढ़, जलवायु परिवर्तन, नदी मार्गों का परिवर्तन या व्यापार में गिरावट इस सभ्यता के पतन के प्रमुख कारण हो सकते हैं। सभ्यता के अवशेषों में कांस्य और पत्थर के औजार प्रचुर मात्रा में मिले हैं। रेलवे परीक्षा में स्थल-उत्खननकर्ता का मिलान करने वाले प्रश्न अत्यंत लोकप्रिय हैं।
वैदिक काल को प्राचीन भारतीय इतिहास में आर्यों के आगमन के साथ जोड़ा जाता है। यह काल दो भागों में विभाजित है – ऋग्वैदिक काल (लगभग 1500-1000 ई.पू.) और उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000-600 ई.पू.)। आर्य शब्द का अर्थ "श्रेष्ठ" या "कुलीन" होता है। चार वेदों में ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद शामिल हैं, जिनमें ऋग्वेद सबसे प्राचीन माना जाता है और इसमें 1028 सूक्त हैं।
ऋग्वैदिक काल: इस काल में समाज जन, विश, गण और कुल में संगठित था। कुल का प्रमुख "कुलप" कहलाता था। राजा की सहायता के लिए "सभा" और "समिति" नामक दो सभाएँ होती थीं। राज्य की आय को "बलि" कहा जाता था। गाय और घोड़े का पालन महत्वपूर्ण व्यवसाय था। इस काल की सबसे महत्वपूर्ण घटना "दशराज्ञ युद्ध" है, जो सूदास और भारत जनों के बीच पारस नदी के तट पर लड़ा गया था।
उत्तर वैदिक काल: इस काल में राज्यों का विकास हुआ और "जनपद" शब्द का प्रयोग होने लगा। कृषि प्रमुख व्यवसाय बन गया और लोहे के हल तथा औजारों का उपयोग शुरू हुआ। इसी काल में वर्ण व्यवस्था ने कठोर रूप ले लिया और जातियों का विकास हुआ। उत्तर वैदिक काल में रचित "ब्राह्मण", "आरण्यक" और "उपनिषद" ग्रंथ महत्वपूर्ण हैं। उपनिषदों को वेदांत भी कहा जाता है क्योंकि ये वेदों के अंत में रचे गए।
छह महत्वपूर्ण ग्रंथ समूह: उपनिषदों की संख्या सामान्यतः 108 मानी जाती है, परंतु मुख्य रूप से 13 उपनिषद प्रसिद्ध हैं। गायत्री मंत्र सविता देवता को समर्पित है और ऋग्वेद में पाया जाता है। इस काल में ही "कुरु" और "पांचाल" जैसे प्रमुख राज्यों का उदय हुआ। रेलवे परीक्षा में वेदों की संख्या, उनके रचयिता और गायत्री मंत्र से संबंधित प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं।
मौर्य साम्राज्य की स्थापना चन्द्रगुप्त मौर्य ने 322 ईसा पूर्व में की थी। इसके मुख्य सलाहकार चाणक्य (कौटिल्य) थे जिन्होंने "अर्थशास्त्र" नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की। चन्द्रगुप्त मौर्य ने नंद वंश का अंत करके मगध पर अपना साम्राज्य स्थापित किया। मौर्य साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) थी। चन्द्रगुप्त मौर्य के उत्तराधिकारी बिन्दुसार हुए, जिन्हें यूनानी लेखकों ने "अमित्रघात" कहा।
अशोक महान: मौर्य वंश का सबसे महान शासक अशोक था, जिसने 268 ईसा पूर्व में गद्दी संभाली। कलिंग युद्ध (261 ईसा पूर्व) में विजय के बाद अशोक ने युद्ध का त्याग कर बौद्ध धर्म अपना लिया। अशोक के अभिलेख प्राकृत भाषा में ब्राह्मी लिपि में लिखे गए हैं और पूरे भारत में बिखरे हैं। उन्होंने धम्म नीति का प्रचार किया और बौद्ध धर्म को विश्व में फैलाने के लिए दूत भेजे। अशोक के स्तंभों में सारनाथ का सिंह स्तंभ भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है।
गुप्त साम्राज्य: गुप्त साम्राज्य की स्थापना श्रीगुप्त ने की थी, परंतु इसका वास्तविक संस्थापक चन्द्रगुप्त प्रथम (319-335 ईस्वी) माना जाता है। गुप्त काल को भारतीय इतिहास का "स्वर्ण युग" कहा जाता है। समुद्रगुप्त को "भारत का नेपोलियन" कहा जाता है, जिसने अनेक विजय अभियान चलाए। चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के दरबार में नवरत्न रहते थे, जिनमें कालिदास प्रमुख थे। इस काल में आर्यभट्ट ने "आर्यभटीय" नामक ग्रंथ की रचना की और शून्य की अवधारणा का विकास हुआ। फाह्यान नामक चीनी यात्री चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में भारत आया था।
अन्य प्रमुख वंश: गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद हर्षवर्धन (606-647 ईस्वी) ने उत्तर भारत में शक्तिशाली साम्राज्य बनाया। चीनी यात्री ह्वेन त्सांग उसके शासनकाल में भारत आया था। दक्षिण भारत में चोल, चेर, पांड्य और पल्लव राजवंश प्रसिद्ध थे। चोल वंश का सबसे महान शासक राजराजा प्रथम और उसका पुत्र राजेंद्र चोल प्रसिद्ध थे, जिन्होंने दक्षिण-पूर्व एशिया तक अभियान चलाए। रेलवे परीक्षा में गुप्त शासकों की उपाधियों और कालखंडों से संबंधित प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण हैं।
| स्थल | उत्खननकर्ता | वर्ष | मुख्य खोज |
|---|---|---|---|
| हड़प्पा | दयाराम साहनी | 1921 | अन्नागार, शवाधान |
| मोहनजोदड़ो | राखलदास बनर्जी | 1922 | विशाल स्नानागार, नर्तकी मूर्ति |
| लोथल | एस. आर. राव | 1957 | कृत्रिम बंदरगाह, जहाज़खाना |
| कालीबंगा | अमलानंद घोष | 1953 | जुते हुए खेत, अग्निकुंड |
| धौलावीरा | आर. एस. बिष्ट | 1985 | जल संचयन प्रणाली |
| राजवंश | संस्थापक | प्रमुख शासक | विशेष उपलब्धि |
|---|---|---|---|
| मौर्य | चन्द्रगुप्त मौर्य (322 ई.पू.) | अशोक | कलिंग युद्ध 261 ई.पू., धम्म नीति |
| गुप्त | चन्द्रगुप्त प्रथम (319 ईस्वी) | समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त द्वितीय | स्वर्ण युग, नवरत्न |
| चोल | करिकाल | राजराजा प्रथम, राजेंद्र चोल | दक्षिण-पूर्व एशिया अभियान |
| पल्लव | सिंहविष्णु | नरसिंहवर्मन | मामल्लपुरम (महाबलीपुरम) मंदिर |
flowchart TD
A[प्राचीन भारत] --> B[सिंधु घाटी सभ्यता]
A --> C[वैदिक काल]
A --> D[महाजनपद एवं मगध]
A --> E[मौर्य साम्राज्य]
A --> F[गुप्त साम्राज्य]
B --> B1[2500-1900 ई.पू.]
B --> B2[हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल]
B --> B3[नगर योजना, स्नानागार]
C --> C1[1500-600 ई.पू.]
C --> C2[चार वेद, उपनिषद]
D --> D1[16 महाजनपद]
D --> D2[मगध सबसे शक्तिशाली]
E --> E1[चन्द्रगुप्त मौर्य]
E --> E2[चाणक्य एवं अर्थशास्त्र]
E --> E3[अशोक एवं कलिंग युद्ध]
F --> F1[समुद्रगुप्त - नेपोलियन]
F --> F2[चन्द्रगुप्त द्वितीय - नवरत्न]
प्राचीन भारत का इतिहास सिंधु घाटी सभ्यता की परिष्कृत नगर योजना से लेकर मौर्य और गुप्त साम्राज्य के स्वर्णिम युग तक फैला हुआ है। इस अध्याय में हमने सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थलों और उनके उत्खननकर्ताओं, वैदिक काल की सामाजिक और धार्मिक संरचना, मौर्य साम्राज्य के विस्तार, अशोक के धम्म नीति के प्रचार तथा गुप्त साम्राज्य की सांस्कृतिक समृद्धि का अध्ययन किया। चोल जैसे दक्षिणी राजवंशों ने समुद्री व्यापार और मंदिर निर्माण में योगदान दिया। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में प्राचीन भारत से तिथियों, स्थलों, शासकों और ग्रंथों से संबंधित प्रश्न बड़ी संख्या में आते हैं। तालिकाओं और माइंड मैप के माध्यम से की गई पुनरावृत्ति इन प्रश्नों को शीघ्र और सटीक हल करने में सहायक सिद्ध होगी।