विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – भूगोल और राजव्यवस्था विषय-वस्तु: 21.3 नदियाँ पर्वत और झीलें
भारत की नदियाँ, पर्वत और झीलें देश की प्राकृतिक संपदा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। नदियाँ पेयजल, सिंचाई, विद्युत उत्पादन और परिवहन का माध्यम हैं, जबकि पर्वत जलवायु, वर्षा और जलविभाजक के रूप में कार्य करते हैं। भारतीय नदियों को मुख्यतः दो श्रेणियों में बाँटा जाता है – हिमालय से निकलने वाली नदियाँ तथा प्रायद्वीप से निकलने वाली नदियाँ। हिमालयी नदियाँ (गंगा, यमुना, सिंधु, ब्रह्मपुत्र) बारहमासी हैं, जबकि प्रायद्वीपीय नदियाँ (गोदावरी, कृष्णा, कावेरी) मुख्यतः वर्षा पर निर्भर रहती हैं। रेलवे परीक्षा में नदियों के उद्गम स्थल, संगम और उनकी सहायक नदियों के प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
पर्वतों की दृष्टि से हिमालय भारत का प्रमुख जलविभाजक है, क्योंकि इससे अनेक बारहमासी नदियाँ निकलती हैं। पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट भी प्रमुख जलविभाजक हैं। नर्मदा नदी विंध्याचल और सतपुड़ा के बीच से निकलकर पश्चिम की ओर बहती है, जबकि ताप्ती नदी भी पश्चिम की ओर बहने वाली प्रमुख प्रायद्वीपीय नदी है। अधिकांश प्रायद्वीपीय नदियाँ पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, जबकि नर्मदा, ताप्ती और साबरमती जैसी कुछ नदियाँ पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में मिलती हैं।
झीलों की दृष्टि से भारत में जम्मू-कश्मीर की वूलर झील (भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील), ओडिशा की चिल्का झील (भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील) और मणिपुर की लोकटक झील (पूर्वोत्तर की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील) विशेष उल्लेखनीय हैं। इस अध्याय में हम प्रमुख नदियों के उद्गम, मार्ग, सहायक नदियाँ, महत्वपूर्ण पर्वत श्रृंखलाएँ और प्रमुख झीलों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
सिंधु नदी तिब्बत के मानसरोवर क्षेत्र के पास बोखरचु में निकलती है और भारत में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख तथा पंजाब से होकर बहती है। सिंधु की प्रमुख सहायक नदियाँ हैं – झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज। इन पाँच नदियों के कारण ही पंजाब को 'पाँच नदियों का प्रदेश' कहा जाता है। सिंधु की लंबाई लगभग 2900 किलोमीटर है और यह अरब सागर में गिरती है। सिंधु जल समझौता 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था, जिसके अनुसार सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी पाकिस्तान को तथा रावी, ब्यास और सतलुज का पानी भारत को मिलता है।
गंगा नदी उत्तराखंड के गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती है। गंगोत्री ग्लेशियर से निकलने वाली धारा भागीरथी कहलाती है तथा देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा के संगम से गंगा का निर्माण होता है। गंगा की कुल लंबाई लगभग 2525 किलोमीटर है। गंगा के दाहिने किनारे की सहायक नदियाँ हैं – यमुना, सोन, दामोदर और पुनपुन, जबकि बाएँ किनारे की सहायक नदियाँ हैं – गंडक, घाघरा, गोमती और कोसी। गंगा का सबसे बड़ा उपग्रही नदी घाघरा है। यमुना यमुनोत्री से निकलती है तथा इलाहाबाद (प्रयागराज) में गंगा से संगम करती है, इसी स्थान पर संगम कहलाता है। गंगा बांग्लादेश में प्रवेश करने के बाद पद्मा नाम से बहती है और अंततः बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के पास चेमयुंगदुंग ग्लेशियर से निकलती है, जहाँ उसे सांपो (त्सांगपो) नाम दिया गया है। यह अरुणाचल प्रदेश में भारत में प्रवेश करती है जहाँ इसे दिहांग या सियांग कहा जाता है, तथा आगे चलकर असम में ब्रह्मपुत्र नाम से बहती है। ब्रह्मपुत्र की प्रमुख सहायक नदियाँ हैं – लोहित, दिबांग, सुबनसिरी और मानस। असम में ब्रह्मपुत्र को 'मजुली द्वीप' के नाम से प्रसिद्ध विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप मिलता है। बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र को जमुना नाम से जाना जाता है और यह बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
गोदावरी भारत की सबसे लंबी प्रायद्वीपीय नदी है और इसे 'दक्षिण गंगा' या 'वृद्ध गंगा' भी कहा जाता है। यह महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर पहाड़ियों से निकलती है तथा इसकी कुल लंबाई लगभग 1465 किलोमीटर है। गोदावरी महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ से होकर बहती है तथा बंगाल की खाड़ी में गिरती है। गोदावरी की प्रमुख सहायक नदियाँ हैं – प्राणहिता, इंद्रावती, मंजिरा और सबरी। इस नदी पर पोलावरम बांध परियोजना स्थित है। कृष्णा नदी महाराष्ट्र के महाबलेश्वर के पास से निकलती है और इसकी लंबाई लगभग 1400 किलोमीटर है। कृष्णा की सहायक नदियाँ हैं – तुंगभद्रा, भीमा, कोयना और मुसी। तुंगभद्रा बांध परियोजना इसी नदी पर स्थित है।
कावेरी नदी कर्नाटक के ब्रह्मगिरि पहाड़ियों (तालकावेरी) से निकलती है। इसकी लंबाई लगभग 800 किलोमीटर है और यह कर्नाटक तथा तमिलनाडु से होकर बहती है। कावेरी को 'दक्षिण की गंगा' भी कहा जाता है। कावेरी की सहायक नदियाँ हैं – काबिनी, भवानी और अमरावती। शिवसमुद्रम जलप्रपात कावेरी नदी पर स्थित है। कावेरी जल विवाद भारत और तमिलनाडु-कर्नाटक के बीच प्रसिद्ध है। नर्मदा नदी मध्य प्रदेश के अमरकंटक पठार से निकलती है और पश्चिम की ओर बहते हुए गुजरात के खंभात की खाड़ी में गिरती है। नर्मदा की सहायक नदियाँ हैं – तवा, बरना और हिरन। सरदार सरोवर बांध परियोजना नर्मदा पर स्थित है। ताप्ती नदी मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई से निकलती है और अरब सागर में गिरती है। महानदी छत्तीसगढ़ के सिहावा (रायपुर) से निकलती है और हीराकुंड बांध (दुनिया का सबसे लंबा बांध) इसी पर स्थित है।
प्रायद्वीपीय नदियों का एक प्रमुख लक्षण यह है कि ये मौसमी होती हैं तथा वर्षा पर निर्भर रहती हैं। नर्मदा और ताप्ती पश्चिम की ओर बहने वाली प्रमुख नदियाँ हैं, जबकि गोदावरी, कृष्णा, कावेरी और महानदी पूर्व की ओर बहती हैं। पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ प्रायः अपने मुहाने पर डेल्टा बनाती हैं, जबकि पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ एश्चुरी बनाती हैं। साबरमती गुजरात की नदी है और अहमदाबाद इसके किनारे स्थित है।
भारत की झीलों को मीठे पानी की और खारे पानी की झीलों में बाँटा जा सकता है। वूलर झील जम्मू-कश्मीर में स्थित भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है, जिसका निर्माण झेलम नदी की टेक्टोनिक गतिविधि से हुआ है। दल झील भी जम्मू-कश्मीर में है, जिस पर प्रसिद्ध शिकारा और हाउसबोट पाए जाते हैं। चिल्का झील ओडिशा में स्थित भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है तथा यह एक लैगून (अघाड़) है। चिल्का में दयानद के संगम पर प्रसिद्ध पक्षी अभयारण्य है। पुलिकट झील आंध्र प्रदेश-तमिलनाडु की सीमा पर स्थित दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील है। लोकटक झील मणिपुर में स्थित पूर्वोत्तर की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है और यहाँ विश्व प्रसिद्ध तैरते हुए द्वीप (फुम्डी) पाए जाते हैं।
वेम्बनाड झील केरल की सबसे बड़ी झील है, जो कोच्चि (एर्नाकुलम) से जुड़ी है। सम्बर झील राजस्थान में स्थित भारत की सबसे बड़ी आंतरिक खारे पानी की झील है तथा यहाँ नमक उत्पादन होता है। लोनार झील महाराष्ट्र में स्थित एक उल्कापात (गड्ढा) झील है, जो खारे पानी की है। पंचम सागर या बाइकल झील का कोई भारतीय उदाहरण नहीं है, परंतु उदयपुर की पिछोला झील और पुष्कर की झील पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। परीक्षा में झीलों के प्रश्नों में वूलर को सबसे बड़ी मीठे पानी की तथा चिल्का को सबसे बड़ी खारे पानी की झील के रूप में याद रखना आवश्यक है। कृत्रिम झीलों में हीराकुंड, गांधी सागर और नागार्जुन सागर विशेष उल्लेखनीय हैं।
पर्वतों की दृष्टि से भारत के प्रमुख दर्रे भी महत्वपूर्ण हैं। जम्मू-कश्मीर में पीर पंजाल दर्रा, जोजिला दर्रा, बनिहाल दर्रा और काराकोरम दर्रा स्थित हैं। नाथुला दर्रा सिक्किम में भारत-चीन सीमा पर स्थित है। बोमडिला दर्रा अरुणाचल प्रदेश में है। शिपकिला दर्रा हिमाचल प्रदेश में है। ये दर्रे व्यापारिक और सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
| नदी | उद्गम स्थल | अंत / सागर |
|---|---|---|
| गंगा | गंगोत्री ग्लेशियर (भागीरथी + अलकनंदा) | बंगाल की खाड़ी |
| यमुना | यमुनोत्री ग्लेशियर | प्रयागराज में गंगा से संगम |
| सिंधु | बोखरचु (तिब्बत, मानसरोवर) | अरब सागर |
| ब्रह्मपुत्र | चेमयुंगदुंग (तिब्बत) | बंगाल की खाड़ी |
| गोदावरी | त्र्यंबकेश्वर (नासिक) | बंगाल की खाड़ी |
| नर्मदा | अमरकंटक पठार | खंभात की खाड़ी (अरब सागर) |
| कावेरी | ब्रह्मगिरि (तालकावेरी) | बंगाल की खाड़ी |
| झील / बांध | स्थान | विशेषता |
|---|---|---|
| वूलर झील | जम्मू-कश्मीर | भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील |
| चिल्का झील | ओडिशा | भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील |
| लोकटक झील | मणिपुर | तैरते हुए द्वीप (फुम्डी) |
| हीराकुंड बांध | महानदी, ओडिशा | विश्व का सबसे लंबा बांध |
| सरदार सरोवर | नर्मदा, गुजरात | बहुउद्देशीय परियोजना |
flowchart TD
A[नदियाँ पर्वत और झीलें] --> B[हिमालयी नदियाँ]
A --> C[प्रायद्वीपीय नदियाँ]
A --> D[झीलें]
A --> E[पर्वत एवं दर्रे]
B --> B1[गंगा - गंगोत्री]
B --> B2[सिंधु - बोखरचु]
B --> B3[ब्रह्मपुत्र - सांपो]
B --> B4[यमुना - यमुनोत्री]
C --> C1[गोदावरी - दक्षिण गंगा]
C --> C2[नर्मदा - पश्चिम की ओर]
C --> C3[कृष्णा - महाबलेश्वर]
C --> C4[कावेरी - ब्रह्मगिरि]
D --> D1[वूलर - सबसे बड़ी मीठे पानी की]
D --> D2[चिल्का - सबसे बड़ी खारे पानी की]
D --> D3[लोकटक - फुम्डी]
E --> E1[हिमालय दर्रे - नाथुला, जोजिला]
नदियाँ, पर्वत और झीलें भारत के प्राकृतिक जल संसाधनों की रीढ़ हैं। इस अध्याय में हमने हिमालयी नदियों (गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र) तथा प्रायद्वीपीय नदियों (गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा, ताप्ती, महानदी) के उद्गम, मार्ग और सहायक नदियों का अध्ययन किया। हमने वूलर, चिल्का, लोकटक, सम्बर और वेम्बनाड जैसी प्रमुख झीलों तथा हीराकुंड, सरदार सरोवर जैसे बांधों की जानकारी प्राप्त की। नदियों के बहाव की दिशा, उद्गम स्थल और झीलों की विशेषताओं की पकड़ परीक्षा में निश्चित अंक दिलाती है। इन तथ्यों को तालिकाओं में स्मरण करने से त्वरित पुनरावृत्ति संभव होती है और उत्तरों में सटीकता बढ़ती है।