21.4 जलवायु मिट्टी और कृषि Notes

21.4 जलवायु मिट्टी और कृषि

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – भूगोल और राजव्यवस्था विषय-वस्तु: 21.4 जलवायु मिट्टी और कृषि

1. परिचय

भारत की जलवायु मुख्यतः मानसूनी जलवायु है, जिसे 'मानसून प्रकार की जलवायु' कहा जाता है। मानसून शब्द अरबी भाषा के 'मौसम' शब्द से बना है। भारत में वर्षा का अधिकांश हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) से प्राप्त होता है। भारत की जलवायु को चार ऋतुओं में विभाजित किया जा सकता है – शीत ऋतु (दिसंबर-फरवरी), ग्रीष्म ऋतु (मार्च-मई), वर्षा ऋतु (जून-सितंबर) और शरद ऋतु (अक्टूबर-नवंबर)। जलवायु का सीधा प्रभाव मिट्टी के निर्माण और कृषि पद्धतियों पर पड़ता है, इसलिए ये तीनों विषय आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।

भारत में कई प्रकार की मिट्टी पाई जाती है, जिनमें प्रमुख हैं – जलोढ़ मिट्टी, काली (रेगुर) मिट्टी, लाल मिट्टी, लैटेराइट मिट्टी, मरुस्थलीय मिट्टी और पर्वतीय मिट्टी। जलोढ़ मिट्टी भारत में सबसे अधिक क्षेत्र (लगभग 40 प्रतिशत) में फैली हुई है और यह सबसे उपजाऊ है। काली मिट्टी दक्कन के लावा क्षेत्र में पाई जाती है तथा कपास की खेती के लिए प्रसिद्ध है, इसलिए इसे 'रेगुर' या 'काली कपास मिट्टी' भी कहा जाता है। मिट्टी की उर्वरता ही किसी क्षेत्र में उगाई जाने वाली फसलों का निर्धारण करती है।

कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की मुख्य रीढ़ है और भारत की लगभग आधी जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती है। भारत में फसलों को मुख्यतः तीन मौसमों में उगाया जाता है – खरीफ (जून-सितंबर), रबी (अक्टूबर-मार्च) और जायद (अप्रैल-जून)। चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास और गन्ना खरीफ की फसलें हैं, जबकि गेहूँ, जौ, चना, सरसों और मटर रबी की फसलें हैं। इस अध्याय में हम भारत की जलवायु, मानसून प्रणाली, मिट्टियों के प्रकार तथा कृषि की विभिन्न पद्धतियों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

2. भारत की जलवायु और मानसून

भारत की जलवायु मानसून प्रधान है तथा यहाँ जून से सितंबर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून से वर्षा होती है। दक्षिण-पश्चिम मानसून हिंद महासागर से आने वाली आर्द्र हवाएँ हैं, जो केरल के तट पर मई के अंत या जून की शुरुआत में पहुँचती हैं। इस घटना को 'मानसून का आगमन' (मॉनसून बर्स्ट) कहा जाता है। केरल को भारत का 'मानसून का द्वार' कहा जाता है। मानसून की दो शाखाएँ होती हैं – अरब सागर की शाखा और बंगाल की खाड़ी की शाखा। अरब सागर की शाखा पश्चिमी घाट से टकराकर मुंबई, गुजरात और मध्य भारत में वर्षा कराती है, जबकि बंगाल की खाड़ी की शाखा पूर्वोत्तर भारत में वर्षा कराती है।

भारत में वर्षा का वितरण असमान है। मेघालय की चेरापूंजी और मासिनराम दुनिया के सबसे अधिक वर्षा वाले स्थानों में से हैं। मासिनराम को विश्व में सबसे अधिक औसत वार्षिक वर्षा (लगभग 11872 मिमी) वाला स्थान माना जाता है। राजस्थान का पश्चिमी क्षेत्र सबसे कम वर्षा वाला क्षेत्र है। भारत में वर्षा के औसत से कम होने की स्थिति को 'अनावृष्टि' (सूखा) तथा अधिक होने की स्थिति को 'अतिवृष्टि' (बाढ़) कहा जाता है। मानसून की देर से शुरुआत या जल्दी समाप्ति कृषि को प्रभावित करती है। एल नीनो का प्रभाव भारतीय मानसून को कमजोर करता है, जबकि ला नीना मानसून को मजबूत करता है।

भारत की जलवायु को कोपेन और थॉर्नवेट जैसे विद्वानों ने विभिन्न वर्गों में बाँटा है। भारत में मुख्यतः तीन प्रकार की जलवायु पाई जाती है – उष्णकटिबंधीय जलवायु (दक्षिण भारत), उपोष्ण जलवायु (मध्य और उत्तर भारत) तथा शुष्क जलवायु (राजस्थान)। हिमालय का उत्तरी क्षेत्र अल्पाइन जलवायु क्षेत्र है। तापमान की दृष्टि से भारत में दिसंबर-जनवरी में उत्तर में कड़ाके की सर्दी पड़ती है, जबकि दक्षिण में तापमान मध्यम रहता है। भारत में गर्मी की लहरें उत्तर और मध्य भारत में अप्रैल-जून में चलती हैं।

3. भारत की प्रमुख मिट्टियाँ

जलोढ़ मिट्टी भारत में सबसे व्यापक मिट्टी है, जो सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र के मैदानों में फैली है। यह नदियों द्वारा जमा की गई सिल्ट से निर्मित होती है और इसमें खादर (नवीन जलोढ़, बाढ़ के मैदान में) तथा बांगर (प्राचीन जलोढ़, ऊँचे क्षेत्र में) दो प्रकार होते हैं। जलोढ़ मिट्टी में पोटाश, चूना और फॉस्फोरिक अम्ल प्रचुर होता है, किंतु नाइट्रोजन की कमी पाई जाती है। यह गेहूँ, चावल, गन्ना, मक्का और दलहन की खेती के लिए सर्वोत्तम है। काली मिट्टी (रेगुर) महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और तेलंगाना के लावा क्षेत्र में पाई जाती है। यह लावा (बेसाल्ट) चट्टानों के अपक्षय से बनी है तथा कपास की खेती के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। काली मिट्टी में नमी धारण करने की क्षमता अधिक होती है और इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और लौह तत्व प्रचुर होते हैं।

लाल मिट्टी प्रायद्वीपीय पठार के पूर्वी भाग में पाई जाती है। यह प्राचीन क्रिस्टलीय चट्टानों के अपक्षय से बनी है और इसमें लोहे के कारण लाल रंग होता है। लाल मिट्टी में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की कमी होती है। लैटेराइट मिट्टी उच्च तापमान और अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों (केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल) में पाई जाती है। इस मिट्टी में निक्षालन के कारण अधिकांश पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, इसलिए यह कम उपजाऊ होती है, किंतु चाय और कॉफी की खेती इस पर होती है। मरुस्थलीय मिट्टी राजस्थान और गुजरात के कच्छ क्षेत्र में पाई जाती है, जो रेतीली और कम उपजाऊ होती है। पर्वतीय मिट्टी हिमालय की ढलानों पर पाई जाती है, जहाँ फलों (सेब, चाय) की खेती होती है।

मिट्टी का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है क्योंकि मिट्टी का कटाव (अपरदन) हवा और पानी के कारण होता है। मिट्टी संरक्षण के उपायों में वृक्षारोपण, समोच्च (कंटूर) जुताई, पट्टीदार खेती, बाँधों का निर्माण और पवन अवरोधक पेड़ लगाना शामिल है। मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए रासायनिक खादों के संतुलित उपयोग तथा हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा दिया जाता है। परीक्षा में मिट्टी के प्रश्नों में प्रत्येक मिट्टी का क्षेत्र और उसमें होने वाली फसलों का संबंध याद रखना आवश्यक है।

4. कृषि और फसल मौसम

भारत में फसलों को उनके उगने के मौसम के आधार पर खरीफ, रबी और जायद में विभाजित किया जाता है। खरीफ फसलें दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा के साथ (जून-सितंबर) बोई जाती हैं, जिनमें चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास, गन्ना, मूंगफली और तिल शामिल हैं। चावल भारत की प्रमुख खाद्य फसल है और इसकी खेती मुख्यतः पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, पंजाब और ओडिशा में होती है। रबी फसलें सर्दियों में (अक्टूबर-मार्च) बोई जाती हैं, जिनमें गेहूँ, जौ, चना, मटर, सरसों और अलसी शामिल हैं। गेहूँ की खेती पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में प्रमुख है। जायद फसलें गर्मियों में (अप्रैल-जून) उगाई जाती हैं, जिनमें खरबूजा, तरबूज, ककड़ी और ग्रीष्मकालीन सब्जियाँ शामिल हैं।

भारत विश्व में चावल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और गेहूँ का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। कपास का सबसे बड़ा उत्पादक भारत है (चीन के बाद) तथा गन्ना, मूंगफली, चाय और जूट के उत्पादन में भारत अग्रणी है। जूट की खेती मुख्यतः पश्चिम बंगाल में होती है तथा यहाँ 'झूम' खेती पूर्वोत्तर में की जाती है। भारत में हरित क्रांति (1960 के दशक) की शुरुआत एम. एस. स्वामीनाथन के नेतृत्व में हुई, जिसने गेहूँ और चावल के उत्पादन को कई गुना बढ़ा दिया। श्वेत क्रांति (दुग्ध उत्पादन) का श्रेय वर्गीज़ कुरियन को दिया जाता है, जबकि नीली क्रांति मत्स्य पालन से संबंधित है। पीली क्रांति तिलहन और लाल क्रांति मांस तथा टमाटर से संबंधित है।

भारत में सिंचाई के प्रमुख स्रोत हैं – नहरें, कुआँ, नलकूप और तालाब। प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं में हीराकुंड (महानदी), भाखड़ा-नांगल (सतलुज), नागार्जुन सागर (कृष्णा), इंदिरा गांधी नहर (राजस्थान) और सरदार सरोवर (नर्मदा) शामिल हैं। भारत में प्रमुख कृषि पद्धतियों में मिश्रित खेती, बहुफसलीय खेती, जैविक खेती और पर्यावरण-अनुकूल खेती शामिल हैं। कृषि के विकास के लिए भारत सरकार 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' और 'किसान क्रेडिट कार्ड' जैसी योजनाएँ चलाती है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: भारत की प्रमुख मिट्टियाँ और फसलें

मिट्टी का प्रकार मुख्य क्षेत्र उपयुक्त फसलें
जलोढ़ मिट्टी सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान गेहूँ, चावल, गन्ना
काली (रेगुर) मिट्टी दक्कन लावा क्षेत्र कपास, गन्ना, तंबाकू
लाल मिट्टी प्रायद्वीपीय पूर्वी भाग मोटे अनाज, दलहन
लैटेराइट मिट्टी केरल, कर्नाटक, ओडिशा चाय, कॉफी, नारियल
मरुस्थलीय मिट्टी राजस्थान, कच्छ कम उपजाऊ, बाजरा
पर्वतीय मिट्टी हिमालय की ढलानें फल, चाय

तालिका 2: फसल मौसम और प्रमुख फसलें

फसल मौसम अवधि प्रमुख फसलें
खरीफ जून-सितंबर चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास, गन्ना
रबी अक्टूबर-मार्च गेहूँ, जौ, चना, मटर, सरसों
जायद अप्रैल-जून खरबूजा, तरबूज, सब्जियाँ

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[जलवायु मिट्टी और कृषि] --> B[जलवायु]
    A --> C[मिट्टी]
    A --> D[कृषि]
    B --> B1[मानसूनी जलवायु]
    B --> B2[दक्षिण-पश्चिम मानसून जून-सितंबर]
    B --> B3[मासिनराम - सबसे अधिक वर्षा]
    C --> C1[जलोढ़ - 40% क्षेत्र]
    C --> C2[काली - कपास]
    C --> C3[लैटेराइट - चाय कॉफी]
    C --> C4[लाल - प्रायद्वीपीय]
    D --> D1[खरीफ - चावल कपास]
    D --> D2[रबी - गेहूँ चना]
    D --> D3[जायद - तरबूज]
    D --> D4[हरित क्रांति - स्वामीनाथन]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

भारत की जलवायु और मानसून चक्र ग्रीष्म ऋतु (मार्च-मई) उच्च तापमान, गर्म लू वर्षा ऋतु (जून-सितंबर) दक्षिण-पश्चिम मानसून, केरल से आगमन शरद ऋतु (अक्टूबर-नवंबर) मानसून की वापसी शीत ऋतु (दिसंबर-फरवरी) ठंडी हवाएँ, उत्तर में पाला स्वर्ण नियम दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगमन केरल से जून में होता है, इसका स्मरण रखें।

भारत की प्रमुख मिट्टियाँ जलोढ़ मिट्टी सबसे व्यापक (~40% क्षेत्र), सबसे उपजाऊ काली (रेगुर) मिट्टी दक्कन लावा क्षेत्र, कपास की खेती लाल मिट्टी प्रायद्वीपीय पठार का पूर्वी भाग लैटेराइट मिट्टी केरल-कर्नाटक, चाय-कॉफी की खेती स्वर्ण नियम काली मिट्टी = कपास, जलोढ़ = गेहूँ-चावल, लैटेराइट = चाय-कॉफी।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. छात्र मानसून की शुरुआत को मुंबई से मान लेते हैं, जबकि मानसून का आगमन सबसे पहले केरल में होता है।
  2. जलोढ़ मिट्टी को काली मिट्टी समझ लेना गलत है; दोनों की उत्पत्ति (नदी सिल्ट बनाम लावा) भिन्न है।
  3. खरीफ फसलों में गेहूँ को शामिल करना सबसे आम गलती है; गेहूँ रबी की फसल है।
  4. लैटेराइट मिट्टी को सबसे उपजाऊ मिट्टी बताना गलत है, यह कम उपजाऊ होती है।
  5. हरित क्रांति का श्रेय एम. एस. स्वामीनाथन को देने के स्थान पर केवल बीज कंपनियों को देना गलत है।
  6. मासिनराम को मेघालय के बजाय असम में बताना गलत है; दोनों वर्षा स्थल मेघालय में हैं।
  7. रबी फसलों का मौसम जून-सितंबर बताना गलत है; रबी का मौसम अक्टूबर-मार्च है।
  8. काली मिट्टी को केवल महाराष्ट्र तक सीमित मानना गलत है; यह मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक तक फैली है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. मिट्टी-फसल संबंध की एक-एक पंक्ति रटें – काली-कपास, जलोढ़-गेहूँ चावल, लैटेराइट-चाय कॉफी।
  2. फसल मौसम का प्रश्न आते ही पहले चावल-गेहूँ का भेद याद करें – चावल खरीफ, गेहूँ रबी।
  3. मानसून संबंधी प्रश्न में केरल को 'मानसून का द्वार' कहने वाला उत्तर चुनें।
  4. क्रांतियों की सूची रटें – हरित (खाद्यान्न), श्वेत (दुग्ध), नीली (मत्स्य), पीली (तिलहन)।
  5. वर्षा वितरण में 'सबसे अधिक' पूछे जाने पर मासिनराम और 'सबसे कम' पूछे जाने पर राजस्थान का उत्तर दें।
  6. सिंचाई परियोजनाओं को नदियों से जोड़कर रखें – भाखड़ा-नांगल (सतलुज), नागार्जुन सागर (कृष्णा)।
  7. परीक्षा में पूछे गए मिट्टी वर्गीकरण में सर्वप्रथम क्षेत्र की दृष्टि से व्यापक मिट्टी जलोढ़ को चिह्नित करें।

10. निष्कर्ष

जलवायु, मिट्टी और कृषि परस्पर जुड़े हुए ऐसे विषय हैं जो भारत की अर्थव्यवस्था और कृषक समुदाय की नींव हैं। इस अध्याय में हमने मानसूनी जलवायु के चक्र, वर्षा वितरण, प्रमुख मिट्टियों के प्रकार, उनकी विशेषताएँ और फसल मौसमों (खरीफ, रबी, जायद) का अध्ययन किया। हरित, श्वेत, नीली और पीली क्रांतियों की जानकारी भी परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। मिट्टी-फसल और मौसम-फसल के संबंधों की पकड़ प्रश्नों को तेजी से हल करने में सहायक है। इस अध्याय की तालिकाओं और माइंड मैप का बार-बार पुनरावलोकन करने से रेलवे परीक्षा में अंक अर्जित करना सुनिश्चित होता है।