21.8 संसद और सरकार Notes

21.8 संसद और सरकार

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – भूगोल और राजव्यवस्था विषय-वस्तु: 21.8 संसद और सरकार

1. परिचय

भारत में संसदीय प्रणाली प्रचलित है, जिसमें संसद देश की सर्वोच्च विधायिका है। भारत की संसद द्विसदनीय (बाइकैमरल) है, जिसमें राष्ट्रपति, लोकसभा (निचला सदन) और राज्यसभा (उच्च सदन) शामिल हैं। संविधान के अनुच्छेद 79 से 122 तक संसद की संरचना, अधिकार और कार्यप्रणाली का वर्णन है। संसद का मुख्य कार्य कानून बनाना, कर लगाना, सरकार के कार्यों पर नियंत्रण रखना और देश की नीतियों पर विचार करना है। भारत की सरकार 'केंद्र में मजबूत, राज्यों में स्वायत्त' संघीय ढाँचे पर कार्य करती है, किंतु प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कार्यकारिणी (कार्यपालिका) संसद के प्रति उत्तरदायी होती है।

लोकसभा (हाउस ऑफ द पीपल) को प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा वयस्क मताधिकार के आधार पर चुना जाता है। लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 550 है, जिसमें राज्यों से 530 और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 सदस्य शामिल होते हैं। लोकसभा की कुल वर्तमान सदस्य संख्या 543 है। लोकसभा का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है, जिसे राष्ट्रपति द्वारा भंग किया जा सकता है। राज्यसभा (काउंसिल ऑफ स्टेट्स) को राज्यों की विधानसभाओं द्वारा परोक्ष रूप से चुना जाता है तथा यह स्थायी सदन है। राज्यसभा के एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं। राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 है और वर्तमान में 245 सदस्य हैं।

रेलवे परीक्षा में संसद और सरकार से संबंधित प्रश्नों में लोकसभा-राज्यसभा की सदस्य संख्या, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की शक्तियाँ, मंत्रिपरिषद की संरचना, धन विधेयक की प्रक्रिया, अविश्वास प्रस्ताव और संसदीय समितियों के प्रश्न पूछे जाते हैं। राष्ट्रपति भारत के संवैधानिक प्रमुख हैं, जबकि प्रधानमंत्री कार्यपालिका का वास्तविक प्रमुख होता है। इस अध्याय में हम संसद की संरचना, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद, केंद्रीय सचिवालय और विधि निर्माण प्रक्रिया का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

2. लोकसभा और राज्यसभा

लोकसभा संसद का निचला सदन है और इसे जनता का सदन कहा जाता है। लोकसभा के सदस्य सीधे (प्रत्यक्ष) जनता द्वारा चुने जाते हैं। लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 550 है। संविधान के 104वें संशोधन (2020) के अनुसार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सीटों का आरक्षण 2030 तक बढ़ाया गया है। लोकसभा का अध्यक्ष (स्पीकर) सदन की कार्यवाही का संचालन करता है। लोकसभा के अध्यक्ष को 'सदन की शक्ति का अवतार' कहा जाता है। लोकसभा का कार्यकाल पाँच वर्ष है और इसके कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति इसे भंग कर सकता है। धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है। लोकसभा द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पारित करने पर मंत्रिपरिषद को इस्तीफा देना पड़ता है।

राज्यसभा संसद का उच्च सदन है और इसे 'राज्यों का सदन' कहा जाता है। राज्यसभा के सदस्य राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा परोक्ष रूप से चुने जाते हैं। राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 है, जिसमें से 238 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से तथा 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नामित होते हैं (कला, साहित्य, विज्ञान, समाजसेवा के क्षेत्र से)। राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसे भंग नहीं किया जा सकता। इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं, जिससे राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष होता है। राज्यसभा का सभापति (चेयरमैन) उपराष्ट्रपति होता है। राज्यसभा में सबसे अधिक सीटें उत्तर प्रदेश (31) के पास हैं।

लोकसभा और राज्यसभा में कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं। धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत होता है और राज्यसभा को धन विधेयक पर अधिकतम 14 दिनों में रिपोर्ट देनी होती है। साधारण विधेयकों पर दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में निर्णय होता है, जिसमें लोकसभा के सदस्यों की संख्या अधिक होने के कारण लोकसभा का पलड़ा भारी रहता है। अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में ही लाया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं। राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा भंग करने पर राज्यसभा स्थायी रहती है। संसद के संयुक्त सत्र की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है।

3. राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति

राष्ट्रपति भारत का प्रथम नागरिक और संविधान के अनुच्छेद 52 के अनुसार राज्य का प्रमुख है। राष्ट्रपति को अनुच्छेद 54 के अनुसार निर्वाचक मंडल द्वारा चुना जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य, राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य तथा दिल्ली और पुडुचेरी की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं। राष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है तथा वह पुनः चुना जा सकता है। राष्ट्रपति के चुनाव में 'एकल संक्रमणीय मत प्रणाली' तथा 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व' पद्धति का उपयोग होता है। राष्ट्रपति पर महाभियोग (इम्पीचमेंट) संविधान के उल्लंघन के आधार पर चलाया जा सकता है, जिसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक है। राष्ट्रपति द्वारा आपातकाल (अनुच्छेद 352, 356, 360) की घोषणा की जा सकती है।

राष्ट्रपति की शक्तियाँ व्यापक हैं। वह कार्यपालिका का प्रमुख है, सशस्त्र बलों का सर्वोच्च कमांडर है, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद की नियुक्ति करता है, राज्यपालों, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है। राष्ट्रपति को क्षमादान की शक्ति प्राप्त है (अनुच्छेद 72)। राष्ट्रपति के पास संसद को सम्बोधित करने और दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने की शक्ति है। राष्ट्रपति का अभिभाषण संसद के प्रत्येक अधिवेशन की शुरुआत में होता है। राष्ट्रपति को विधेयक पर अपनी अनुमति देनी होती है और वह विधेयक को लौटा सकता है (धन विधेयक को छोड़कर) तथा पॉकेट वीटो का प्रयोग कर सकता है। राष्ट्रपति का निर्वाचन परोक्ष रूप से होता है और उसके कार्य में राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह से बंधा होता है, किंतु वह एक बार सलाह पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है (44वें संशोधन के बाद)।

उपराष्ट्रपति भारत का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद है। उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा परोक्ष रूप से किया जाता है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है। राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति अधिकतम छह माह तक राष्ट्रपति के कार्य कर सकता है। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे और प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन थे। राष्ट्रपति पद हेतु उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 35 वर्ष होती है। राष्ट्रपति के विरुद्ध चुनावी विवाद का निर्णय उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाता है।

4. प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद

प्रधानमंत्री भारत सरकार का वास्तविक (कैबिनेट) प्रमुख होता है और संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है। प्रधानमंत्री सामान्यतः उस दल या गठबंधन के नेता होते हैं जिन्हें लोकसभा में बहुमत प्राप्त होता है। प्रधानमंत्री की नियुक्ति में राष्ट्रपति उसे ही चुनता है जिसके पास लोकसभा में बहुमत का विश्वास हो। प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का प्रमुख है, राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच सेतु का कार्य करता है। प्रधानमंत्री की शक्तियों में मंत्रियों का चयन, विभागों का बँटवारा, मंत्रिपरिषद की बैठकों की अध्यक्षता और सरकार के समन्वय का कार्य शामिल है। प्रधानमंत्री लोकसभा के नेता के रूप में कार्य करता है (यदि वह लोकसभा का सदस्य हो)। प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू थे।

मंत्रिपरिषद तीन स्तरों में विभाजित होती है – कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उप मंत्री। कैबिनेट मंत्री प्रमुख विभागों के प्रमुख होते हैं और कैबिनेट ही सरकार का वास्तविक निर्णयकर्ता निकाय है। कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करता है। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है (अनुच्छेद 75)। मंत्रिपरिषद का कोई सदस्य यदि छह माह तक संसद का सदस्य नहीं होता तो उसे मंत्री पद से हटना पड़ता है। मंत्रियों के वेतन और भत्ते द्वितीय अनुसूची में निर्धारित हैं। मंत्रिपरिषद का गठन और पुनर्गठन प्रधानमंत्री के विवेक पर निर्भर है। भारत में 'सरकार के मंत्रिमंडलीय रूप' की व्यवस्था है, अर्थात कैबिनेट ही वास्तविक कार्यपालिका है।

विधि निर्माण प्रक्रिया में कोई विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है, किंतु धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत होता है। विधेयक तीन वाचन (रीडिंग) के बाद पारित होता है और दूसरे सदन में भेजा जाता है। दूसरे सदन की स्वीकृति के बाद विधेयक राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत होता है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद विधेयक 'अधिनियम' बन जाता है। धन विधेयक का वर्णन अनुच्छेद 110 में है। संसद के अधिवेशन के लिए राष्ट्रपति आह्वान करता है और दोनों सदनों के बीच कम से कम छह माह का अंतर नहीं हो सकता। संसद में 'प्रश्न काल' के दौरान सदस्य सरकार से प्रश्न पूछते हैं। शून्य काल के दौरान सदस्य बिना पूर्व सूचना के मुद्दे उठाते हैं। अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में प्रस्तुत होता है और इसे कम से कम 50 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: संसद की संरचना

विवरण लोकसभा राज्यसभा
अधिकतम सदस्य 550 250 (238 चुने + 12 नामित)
वर्तमान सदस्य 543 245
चुनाव प्रत्यक्ष (जनता) परोक्ष (विधानसभाओं से)
कार्यकाल 5 वर्ष स्थायी, एक-तिहाई हर 2 वर्ष में
सभापति अध्यक्ष (स्पीकर) उपराष्ट्रपति (सभापति)
धन विधेयक केवल यहीं प्रस्तुत केवल सिफारिश

तालिका 2: प्रमुख संवैधानिक पद

पद चुनाव / नियुक्ति प्रमुख कार्य
राष्ट्रपति निर्वाचक मंडल द्वारा (अ. 54) राज्य प्रमुख, सर्वोच्च कमांडर
उपराष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों द्वारा राज्यसभा का सभापति
प्रधानमंत्री राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त कार्यपालिका का वास्तविक प्रमुख
लोकसभा अध्यक्ष लोकसभा सदस्यों द्वारा सदन का संचालन

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[संसद और सरकार] --> B[संसद]
    A --> C[कार्यपालिका]
    B --> B1[लोकसभा - 543]
    B --> B2[राज्यसभा - 245]
    B --> B3[राष्ट्रपति]
    C --> C1[प्रधानमंत्री]
    C --> C2[मंत्रिपरिषद]
    C --> C3[कैबिनेट]
    C1 --> D1[वास्तविक कार्यकारी प्रमुख]
    C2 --> D2[लोकसभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व]
    B3 --> E1[राज्य का प्रमुख]
    B3 --> E2[अनुच्छेद 52]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

भारतीय संसद की संरचना राष्ट्रपति संसद का भाग लोकसभा 543 सदस्य (अधिकतम 550) अध्यक्ष - स्पीकर राज्यसभा 245 सदस्य (अधिकतम 250) सभापति - उपराष्ट्रपति लोकसभा - प्रत्यक्ष चुनाव, 5 वर्ष का कार्यकाल राज्यसभा - स्थायी सदन, एक-तिहाई सदस्य 2 वर्ष में सेवानिवृत्त धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत होता है स्वर्ण नियम राज्यसभा स्थायी है और अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में लाया जाता है।

भारत में सरकार की संरचना राष्ट्रपति राज्य का प्रमुख प्रधानमंत्री कार्यपालिका का वास्तविक प्रमुख मंत्रिपरिषद (कैबिनेट सहित) सामूहिक उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 75) राष्ट्रपति - अनुच्छेद 52, निर्वाचक मंडल द्वारा चुनाव प्रधानमंत्री - मंत्रिपरिषद का प्रमुख, संसद में बहुमत आवश्यक स्वर्ण नियम राष्ट्रपति नाममात्र प्रमुख है, वास्तविक शक्ति प्रधानमंत्री व मंत्रिपरिषद के पास है।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. छात्र राष्ट्रपति को कार्यपालिका का वास्तविक प्रमुख बता देते हैं, जबकि वास्तविक प्रमुख प्रधानमंत्री है।
  2. लोकसभा और राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या (550 और 250) को वर्तमान संख्या (543 और 245) से मिला देना गलत है।
  3. उपराष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल द्वारा होता है, ऐसा बताना गलत है; उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों के सदस्य करते हैं।
  4. धन विधेयक को राज्यसभा में भी प्रस्तुत किया जा सकता है, यह मानना गलत है; धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत होता है।
  5. अविश्वास प्रस्ताव को राज्यसभा में भी लाया जा सकता है, यह गलत है; यह केवल लोकसभा में लाया जाता है।
  6. राज्यसभा को भंग करने की व्यवस्था बताना गलत है; राज्यसभा स्थायी सदन है।
  7. राष्ट्रपति के चुनाव में मत का भार समान होता है, यह गलत है; चुने गए सदस्यों के मत का मूल्य उनके राज्य की जनसंख्या पर निर्भर करता है।
  8. संयुक्त सत्र की अध्यक्षता राष्ट्रपति करता है, यह गलत है; अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. लोकसभा (550/543) और राज्यसभा (250/245) की अधिकतम और वर्तमान संख्या को अलग-अलग रटें।
  2. 'धन विधेयक' और 'अविश्वास प्रस्ताव' दोनों केवल लोकसभा से संबंधित हैं, यह जोड़ी याद रखें।
  3. राष्ट्रपति के चुनाव (अनुच्छेद 54) और क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 72) को स्थान से जोड़कर स्मरण करें।
  4. मंत्रिपरिषद का सामूहिक उत्तरदायित्व अनुच्छेद 75 में है, इसे भाग V से जोड़ें।
  5. राज्यसभा के नामित सदस्यों की संख्या 12 है, यह आंकड़ा प्रश्नों में बार-बार आता है।
  6. पद धारण करने की न्यूनतम आयु याद रखें – राष्ट्रपति 35, लोकसभा सदस्य 25, राज्यसभा सदस्य 30 वर्ष।
  7. संसद के अधिवेशनों के बीच अधिकतम छह माह का अंतर हो सकता है, यह नियम याद रखें।

10. निष्कर्ष

भारत की संसदीय प्रणाली देश के लोकतांत्रिक ढाँचे की आधारशिला है। इस अध्याय में हमने संसद की द्विसदनीय संरचना (लोकसभा और राज्यसभा), राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव और कार्य, प्रधानमंत्री की भूमिका तथा मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व का अध्ययन किया। धन विधेयक की प्रक्रिया, अविश्वास प्रस्ताव और विधि निर्माण के चरण भी परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। राष्ट्रपति नाममात्र प्रमुख और प्रधानमंत्री वास्तविक प्रमुख है, यह मूल सिद्धांत स्पष्ट रखने से कई प्रश्नों के उत्तर आसानी से मिल जाते हैं। तालिकाओं और माइंड मैप के माध्यम से इन तथ्यों की पुनरावृत्ति करने से परीक्षा में सफलता निश्चित होती है।