विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – भूगोल और राजव्यवस्था विषय-वस्तु: 21.10 चुनाव और राजनीतिक व्यवस्था
चुनाव लोकतंत्र की रीढ़ हैं और भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग चुनावों का स्वतंत्र और निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित करता है। भारत में प्रत्येक नागरिक को सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर मतदान का अधिकार प्राप्त है। 61वें संविधान संशोधन (1989) द्वारा मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई थी। भारत में चुनाव नियमित अंतराल पर होते हैं और इनमें लोकसभा चुनाव, राज्य विधानसभा चुनाव, स्थानीय निकाय चुनाव, राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव और राज्यसभा चुनाव शामिल हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में 'प्रथम-पश्च-सिद्धांत' (फर्स्ट पास्ट द पोस्ट) प्रणाली का उपयोग होता है।
भारत की राजनीतिक व्यवस्था बहुदलीय लोकतंत्र पर आधारित है। भारत में कई राष्ट्रीय दल, राज्यीय दल और पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दल कार्य करते हैं। चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दलों की संख्या वर्ष 2023 के अनुसार सात है। इनमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी), आम आदमी पार्टी, नेशनल पीपल्स पार्टी और तृणमूल कांग्रेस शामिल हैं। चुनाव चिन्हों का आवंटन चुनाव आयोग करता है। भारत में चुनाव सुधार के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वीवीपैट का उपयोग किया जा रहा है।
रेलवे परीक्षा में चुनाव और राजनीतिक व्यवस्था से संबंधित प्रश्नों में मतदान आयु, चुनाव आयोग की संरचना, राष्ट्रीय दलों की संख्या, ईवीएम-वीवीपैट, दल-बदल विरोधी कानून, आदर्श आचार संहिता और राजनीतिक दलों की मान्यता के मानदंड शामिल हैं। इस अध्याय में हम चुनाव प्रणाली, चुनाव आयोग, राजनीतिक दलों की संरचना, चुनाव सुधार तथा भारत की राजनीतिक व्यवस्था का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा किया जाता है। चुनाव में 'प्रथम-पश्च-सिद्धांत' (फर्स्ट पास्ट द पोस्ट) प्रणाली अपनाई जाती है, जिसमें किसी निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक मत प्राप्त करने वाला उम्मीदवार विजयी घोषित होता है। भारत में मतदान के लिए मतदाता की पहचान का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के चुनाव परोक्ष रूप से होते हैं, जिनमें 'एकल संक्रमणीय मत' तथा 'आनुपातिक प्रतिनिधित्व' प्रणाली का उपयोग होता है। राज्यसभा के सदस्य राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं। भारत में सामान्य चुनावों के लिए अधिकतम छह माह तक स्थानों का रिक्त रहना आवश्यक है, अर्थात लोकसभा के कार्यकाल के दौरान किसी सदस्य की मृत्यु या इस्तीफे पर उपचुनाव होते हैं।
भारत में मतदाता की पंजीकरण प्रक्रिया मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय द्वारा संचालित होती है। मतदान के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष है। भारत में विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिक (एनआरआई) भी मतदान कर सकते हैं, यदि वे मतदाता सूची में पंजीकृत हैं। भारत में चुनाव प्रक्रिया में 'आदर्श आचार संहिता' (मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट) घोषणा के दिन से चुनाव परिणाम तक लागू होती है। इसका उल्लंघन करने वाले उम्मीदवार या दल के विरुद्ध चुनाव आयोग कार्रवाई कर सकता है। चुनाव के दौरान नामांकन पत्र, चुनावी सभाएँ, प्रचार और मतगणना की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार होती है। भारत में चुनावी प्रचार के लिए खर्च की अधिकतम सीमा निर्धारित है, जिसे चुनाव आयोग समय-समय पर संशोधित करता है।
भारत में मतदान की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी है। चुनाव आयोग ने मतदान केंद्रों पर सभी मतदाताओं की सुविधा के लिए रैंप, व्हीलचेयर और पर्दा व्यवस्था सुनिश्चित की है। घर से वृद्ध मतदाताओं और दिव्यांगजनों के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है। भारत में वन नक्षत्र सीटों के निर्धारण में परिसीमन (डिलिमिटेशन) किया जाता है, जो जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएँ निर्धारित करता है। नोटा (NOTA) का प्रावधान भी है, जिसमें मतदाता किसी भी उम्मीदवार को न चुनकर 'उपरोक्त में से कोई नहीं' का विकल्प चुन सकता है। यह व्यवस्था सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर लागू की गई थी।
भारत का चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है जो अनुच्छेद 324 के तहत कार्य करता है। इसकी स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी और इसी दिन को 'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' के रूप में मनाया जाता है। मूल रूप से चुनाव आयोग एक सदस्यीय था, किंतु 1989 में चुनाव आयुक्तों की संख्या बढ़ाकर तीन कर दी गई। वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दो चुनाव आयुक्त कार्य करते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है, जो भी पहले हो। मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है, जिसमें संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत आवश्यक होता है। भारत के प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन थे।
चुनाव आयोग के मुख्य कार्यों में मतदाता सूची तैयार करना, राजनीतिक दलों का पंजीकरण और मान्यता, चुनाव चिन्हों का आवंटन, चुनाव तिथियों की घोषणा, आदर्श आचार संहिता का पालन, ईवीएम-वीवीपैट का प्रबंधन और चुनाव परिणामों की घोषणा शामिल हैं। चुनाव आयोग राज्यों में चुनावों की निगरानी के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति करता है। चुनाव आयोग द्वारा लगातार चुनाव सुधार किए जा रहे हैं, जिनमें वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) का उपयोग, डाक मतपत्र (पोस्टल बैलेट) की व्यवस्था, ईटीपीबीएस (ईटीपीबीएस) के माध्यम से सर्विस मतदाताओं का मतदान, चुनावी खर्च की निगरानी और सीसीटीवी कैमरों से मतदान केंद्रों की निगरानी शामिल हैं।
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) भारत में 1982 से उपयोग की जा रही है। ईवीएम में बैलेट यूनिट और कंट्रोल यूनिट होती है, जबकि 2013 से वीवीपैट (वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) भी जोड़ा गया, जो मतदाता को उसके मत का प्रमाण देता है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2019 में वीवीपैट मिलान (वेरिफिकेशन) को अनिवार्य कर दिया था। ईवीएम की विशेषता है कि इसमें एक मतदाता केवल एक बार मतदान कर सकता है, क्योंकि इसमें प्री-प्रोग्रामिंग होती है। डाक मतपत्र प्रणाली में सशस्त्र बलों के कर्मी और विदेश में तैनात सर्विस मतदाता मतदान करते हैं। चुनाव आयोग ने नई दिल्ली में 'राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल' (NVSP) की स्थापना की है, जिससे मतदाता ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं।
भारत में बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था है, जिसमें राष्ट्रीय दल, राज्यीय दल और पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त दल शामिल हैं। राष्ट्रीय दल की मान्यता के लिए चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित मानदंड हैं – लोकसभा या विधानसभा चुनावों में कम से कम 4 राज्यों में 6% वोट प्राप्त करना तथा लोकसभा में कम से कम 4 सीटें प्राप्त करना, या कम से कम 2 प्रतिशत लोकसभा सीटें (11 सीटें) कम से कम 3 राज्यों से प्राप्त करना। वर्ष 2023 के अनुसार सात राष्ट्रीय दल हैं – भारतीय जनता पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी), आम आदमी पार्टी, नेशनल पीपल्स पार्टी और तृणमूल कांग्रेस। भारतीय जनता पार्टी वर्तमान में लोकसभा में सबसे बड़ा दल है।
राज्यीय दलों में ऐसे दल शामिल होते हैं जो किसी विशेष राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में मान्यता प्राप्त होते हैं। भारत में राज्यीय दलों की संख्या 50 से अधिक है। चुनाव आयोग प्रत्येक राज्यीय दल को एक अलग चुनाव चिन्ह आवंटित करता है। भारत में 'राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन' (NDA), 'इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस' (INDIA) जैसे गठबंधन भी कार्य करते हैं। गठबंधन सरकारों में कई दल मिलकर सरकार बनाते हैं। भारत की राजनीतिक व्यवस्था में प्रधानमंत्री केंद्र में और मुख्यमंत्री राज्यों में कार्यपालिका के प्रमुख होते हैं। विधायिका में विधेयक पारित करने, विधेयकों पर चर्चा करने और सरकार को नियंत्रित करने का कार्य होता है।
भारत में चुनावी सुधारों के अंतर्गत दल-बदल विरोधी कानून भी महत्वपूर्ण है। दल-बदल विरोधी कानून 1985 में 52वें संविधान संशोधन द्वारा लागू किया गया था। इसके अनुसार कोई सदस्य यदि अपनी पार्टी छोड़कर किसी अन्य दल में जाता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त हो सकती है। इस कानून की व्यवस्था दसवीं अनुसूची में वर्णित है। दल-बदल विरोधी कानून का निर्णय सदन के अध्यक्ष या सभापति द्वारा किया जाता है। 1999 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय (किहोतो हॉलोहन मामला) में यह स्पष्ट किया गया कि दल-बदल पर निर्णय सदन के पीठासीन अधिकारी की स्वतंत्र जाँच के बाद होना चाहिए। भारत में चुनावों में मतदाताओं की संख्या 96 करोड़ से अधिक है, जो विश्व में सर्वाधिक है।
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| मतदान की न्यूनतम आयु | 18 वर्ष (61वाँ संशोधन, 1989) |
| चुनाव आयोग की स्थापना | 25 जनवरी 1950 |
| राष्ट्रीय मतदाता दिवस | 25 जनवरी |
| प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त | सुकुमार सेन |
| चुनाव प्रणाली (लोकसभा) | प्रथम-पश्च-सिद्धांत (FPTP) |
| राष्ट्रपति चुनाव प्रणाली | आनुपातिक प्रतिनिधित्व, एकल संक्रमणीय मत |
| ईवीएम का उपयोग | 1982 से |
| वीवीपैट का उपयोग | 2013 से |
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| राष्ट्रीय दल | 7 (भाजपा, कांग्रेस, बसपा, माकपा, आप, एनपीपी, तृणमूल) |
| दल-बदल विरोधी कानून | 52वाँ संशोधन, 1985 (दसवीं अनुसूची) |
| आदर्श आचार संहिता | चुनाव घोषणा से परिणाम तक |
| नोटा (NOTA) | 'उपरोक्त में से कोई नहीं' विकल्प |
| मुख्य चुनाव आयुक्त कार्यकाल | 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो पहले) |
flowchart TD
A[चुनाव और राजनीतिक व्यवस्था] --> B[चुनाव प्रणाली]
A --> C[चुनाव आयोग]
A --> D[राजनीतिक दल]
B --> B1[FPTP - लोकसभा विधानसभा]
B --> B2[आनुपातिक - राष्ट्रपति]
B --> B3[मतदान आयु 18 वर्ष]
B --> B4[ईवीएम - वीवीपैट]
C --> C1[अनुच्छेद 324]
C --> C2[25 जनवरी 1950]
C --> C3[मुख्य चुनाव आयुक्त]
D --> D1[7 राष्ट्रीय दल]
D --> D2[राज्यीय दल]
D --> D3[गठबंधन]
D --> D4[दल-बदल विरोधी कानून 1985]
चुनाव और राजनीतिक व्यवस्था भारतीय लोकतंत्र का जीवंत प्रमाण हैं। इस अध्याय में हमने भारत की चुनाव प्रणाली, चुनाव आयोग की संरचना, ईवीएम-वीवीपैट, राजनीतिक दलों की मान्यता, दल-बदल विरोधी कानून, आदर्श आचार संहिता और बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था का अध्ययन किया। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहाँ मतदाताओं की संख्या 96 करोड़ से अधिक है। मतदान की आयु 18 वर्ष, प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन तथा दसवीं अनुसूची में दल-बदल विरोधी कानून की व्यवस्था जैसे तथ्य परीक्षा में निश्चित अंक दिलाते हैं। तालिकाओं और माइंड मैप के माध्यम से नियमित पुनरावलोकन से इन विषयों पर पूर्ण पकड़ बनती है।