विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – अर्थव्यवस्था खेल और विज्ञान विषय-वस्तु: 22.2 बैंकिंग और मुद्रा
बैंकिंग प्रणाली किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती है, जो जमाकर्ताओं और उधारकर्ताओं के बीच धन के प्रवाह को व्यवस्थित करती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भारत की केंद्रीय बैंक है, जिसकी स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हिल्टन यंग कमीशन की सिफारिश पर की गई थी। रिजर्व बैंक देश में मुद्रा जारी करने, मौद्रिक नीति बनाने और बैंकिंग प्रणाली को नियंत्रित करने का कार्य करता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में बैंकिंग शब्दों, RBI की भूमिका, मुद्रा जारी करने और बैंकिंग योजनाओं से प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। मुद्रा का अर्थ विनिमय का वह माध्यम है जिसे वस्तुओं और सेवाओं के लिए सर्वमान्य रूप से स्वीकार किया जाता है।
भारतीय बैंकिंग प्रणाली का विकास सन् 1949 में बैंकिंग विनियमन अधिनियम से शुरू माना जाता है। सन् 1969 में 14 प्रमुख बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया, उसके बाद 1980 में 6 और बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ। इस प्रकार कुल 20 बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ। बैंकिंग प्रणाली में वाणिज्यिक बैंक, सहकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और विकास बैंक शामिल हैं। सन् 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद नरसिंहम समिति की सिफारिशों के आधार पर बैंकिंग क्षेत्र में सुधार हुए, जिससे निजी बैंकों का प्रवेश संभव हुआ। आधुनिक बैंकिंग में यूपीआई, नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल भुगतान ने क्रांति ला दी है।
इस अध्याय में हम RBI की भूमिका और कार्य, वाणिज्यिक बैंकों के प्रकार, मुद्रा से जुड़ी संकल्पनाएँ, बैंकिंग में केंद्रीय बैंक के उपकरण, बैंकिंग योजनाएँ और डिजिटल बैंकिंग का अध्ययन करेंगे। परीक्षा की दृष्टि से रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, CRR, SLR, नोट छपाई के जिम्मेदार अधिकारी और मुद्रा सप्लाई के माप बेहद महत्वपूर्ण हैं। मुद्रा जारी करने की विभिन्न प्रणालियाँ, RBI के गवर्नरों के नाम और वर्तमान मुद्रा सुधारों को भी समझेंगे। अंत में तालिकाओं, माइंड मैप और चित्रों से संपूर्ण विषय की पुनरावृत्ति की जाएगी।
भारतीय रिजर्व बैंक भारत का केंद्रीय बैंक है और इसे बैंकों का बैंक भी कहा जाता है। RBI के मुख्य कार्यों में नोट जारी करना, मुद्रा की आपूर्ति का नियंत्रण, बैंकों का पर्यवेक्षण, विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन और सरकार के लिए बैंकर की भूमिका शामिल है। RBI भारतीय मुद्रा (रुपया) की आपूर्ति को नियंत्रित करता है और देश में एक रुपये के नोट तथा सिक्कों को छोड़कर सभी नोटों के मुद्रण का अधिकार रखता है। एक रुपये का नोट वित्त मंत्रालय की ओर से जारी होता है और उस पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। नोटों पर RBI के गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं। सिक्कों के ढलाई का अधिकार वित्त मंत्रालय के अधीन रहता है।
मौद्रिक नीति के अंतर्गत RBI विभिन्न उपकरणों का उपयोग करता है। रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है, जबकि रिवर्स रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों से धन जमा करता है। सीआरआर (Cash Reserve Ratio) वह अनुपात है जिसमें बैंकों को अपनी जमा राशि का एक निश्चित भाग RBI के पास नकद रखना होता है, जबकि SLR (Statutory Liquidity Ratio) में बैंकों को नकद, सोना या प्रतिभूतियों में निवेश रखना होता है। बैंक दर वह दर है जिस पर RBI बैंकों को दीर्घकालिक ऋण देता है। मुद्रास्फीति नियंत्रित करने के लिए RBI रेपो रेट बढ़ाता है, जिससे अर्थव्यवस्था में धन का प्रवाह घटता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में RBI ने कई बार रेपो रेट में परिवर्तन किया।
RBI के प्रमुख कार्यों में करेंसी मैनेजमेंट के अंतर्गत नोटों की छपाई, नोटों का वितरण और पुराने नोटों का नष्ट करना शामिल है। RBI का मुख्यालय मुंबई में है। RBI की स्थापना से पहले भारत में मुद्रा प्रणाली की देखरेख सरकारी टकसाल करती थी। भारत की मुद्रा रुपया है, जिसे 100 पैसे में विभाजित किया गया है। RBI की संपूर्ण मौद्रिक नीति की समीक्षा मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा की जाती है, जिसकी अध्यक्षता RBI गवर्नर करते हैं। MPC का लक्ष्य खुदरा मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत के आसपास बनाए रखना है। परीक्षा में MPC की संरचना और मुद्रास्फीति लक्ष्य से प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
वाणिज्यिक बैंक वे वित्तीय संस्थाएँ हैं जो जनता से जमा राशि स्वीकार करती हैं और उसे ऋण के रूप में प्रदान करती हैं। भारत में वाणिज्यिक बैंकों को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (जैसे SBI, पंजाब नेशनल बैंक), निजी क्षेत्र के बैंक (जैसे HDFC, ICICI), विदेशी बैंक (जैसे सिटी बैंक) और छोटे वित्त बैंकों में वर्गीकृत किया जाता है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) भारत का सबसे बड़ा वाणिज्यिक बैंक है, जिसकी स्थापना 1955 में हुई थी। SBI का उद्गम 1806 में स्थापित बैंक ऑफ कलकत्ता से माना जाता है। बैंकों की मुख्य गतिविधियों में चालू खाता, बचत खाता, सावधि जमा, ऋण और अग्रिम, धन हस्तांतरण और डिजिटल सेवाएँ शामिल हैं।
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB) की स्थापना 1975 में नरसिंहम समिति की सिफारिश पर की गई थी, जिनका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएँ पहुँचाना है। सहकारी बैंक समुदाय आधारित बैंक होते हैं जो अपने सदस्यों को सेवाएँ प्रदान करते हैं। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) की स्थापना 1982 में कृषि ऋण के लिए हुई थी। भारतीय औद्योगिक विकास बैंक (IDBI) और भारतीय निर्यात-आयात बैंक (EXIM Bank) जैसे विशिष्ट बैंक भी हैं। बैंकों में जमा के सुरक्षित होने के लिए डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) द्वारा प्रति जमाकर्ता अधिकतम 5 लाख रुपये का बीमा कवर प्रदान किया जाता है, जिसे हाल में बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया गया।
बैंकिंग प्रणाली में मुद्रा सप्लाई को विभिन्न मापों से जाना जाता है — M0 (रिजर्व मनी), M1 (जनता के पास नकद + मांग जमा), M2, M3 (व्यापक मुद्रा = M1 + सावधि जमा) और M4। बैंक द्वारा सृजित ऋण को क्रेडिट सृजन कहते हैं। नोटों के साथ सिक्कों की ढलाई सिक्का अधिनियम 2011 के तहत होती है। मुद्रा में मुख्य प्रचलित नोट 10, 20, 50, 100, 200, 500 और 2000 रुपये के होते हैं, परंतु 2000 रुपये का नोट हाल में प्रचलन से बाहर कर दिया गया। सन् 2016 में विमुद्रीकरण के अंतर्गत 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट अमान्य कर दिए गए थे। डिजिटल बैंकिंग के अंतर्गत UPI, रुपे कार्ड, भीम ऐप और नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की भूमिका महत्वपूर्ण है।
सरकार समय-समय पर विभिन्न बैंकिंग योजनाएँ चलाती है। प्रधानमंत्री जन धन योजना (2014) का उद्देश्य हर परिवार को बैंक खाता उपलब्ध कराना है। यह योजना दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन योजना है। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना जैसी योजनाओं का क्रियान्वयन बैंकों के माध्यम से होता है। मुद्रा योजना छोटे व्यवसायों को ऋण देने के लिए है। इन योजनाओं से जुड़े प्रश्न परीक्षा में सामान्य जागरूकता खंड में पूछे जाते हैं, इसलिए योजनाओं के नाम और प्रारंभ वर्ष याद रखने आवश्यक हैं।
मुद्रा प्रणाली के संदर्भ में भारत में नोटों की छपाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) के मुद्रणालयों में होती है। मुद्रा सप्लाई के प्रबंधन का मुख्य सिद्धांत है कि जनता की मांग के अनुसार नोटों का मुद्रण किया जाए। सन् 2016 में भारत सरकार ने नोटों पर महात्मा गांधी सीरीज के बाद महात्मा गांधी न्यू सीरीज (MGNS) के नोट जारी किए। नोटों की पहचान में प्रत्येक नोट पर RBI गवर्नर का हस्ताक्षर, मूल्य अंकन, जल चिह्न और सुरक्षा धागा होता है। मुद्रा में नकली नोटों से बचने के लिए RBI ने सुरक्षा सुविधाएँ विकसित की हैं। रेलवे के स्टेशनों और टिकट काउंटर पर भी नकली मुद्रा की जाँच के उपकरण लगाए गए हैं।
वर्तमान में भारत डिजिटल भुगतान की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) द्वारा दैनिक करोड़ों लेनदेन होते हैं। NPCI की स्थापना 2008 में हुई थी, जो रुपे कार्ड और UPI जैसी डिजिटल सेवाएँ संचालित करता है। बैंकिंग लोकपाल योजना के अंतर्गत बैंक ग्राहक अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। परीक्षा की दृष्टि से RBI की स्थापना वर्ष (1935), मुख्यालय (मुंबई), गवर्नर की भूमिका, मौद्रिक नीति उपकरण और बैंकिंग योजनाओं के वर्ष बेहद महत्वपूर्ण हैं। मुद्रा सप्लाई के मापों M0 से M4 तक का क्रम और उनकी परिभाषा भी बार-बार पूछे जाने वाले विषय हैं।
| उपकरण | परिभाषा |
|---|---|
| रेपो रेट | RBI द्वारा बैंकों को अल्पकालिक ऋण की दर |
| रिवर्स रेपो रेट | RBI द्वारा बैंकों से धन जमा करने की दर |
| सीआरआर (CRR) | जमा का नकद भाग RBI के पास रखना |
| एसएलआर (SLR) | जमा का निवेश नकद/सोना/प्रतिभूतियों में |
| बैंक दर | RBI द्वारा बैंकों को दीर्घकालिक ऋण की दर |
| MPC लक्ष्य | खुदरा मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत |
| संस्था | स्थापना वर्ष | मुख्य भूमिका |
|---|---|---|
| RBI | 1935 | केंद्रीय बैंक |
| SBI | 1955 | सबसे बड़ा वाणिज्यिक बैंक |
| RRB | 1975 | ग्रामीण बैंकिंग |
| NABARD | 1982 | कृषि ऋण |
| NPCI | 2008 | डिजिटल भुगतान |
| DICGC | 1961 | जमा बीमा (5 लाख रुपये) |
flowchart TD
A[बैंकिंग और मुद्रा] --> B[RBI]
A --> C[वाणिज्यिक बैंक]
A --> D[मुद्रा प्रणाली]
A --> E[डिजिटल बैंकिंग]
B --> B1[नोट जारी करना]
B --> B2[मौद्रिक नीति]
B --> B3[बैंकों का पर्यवेक्षण]
B --> B4[MPC - मुद्रास्फीति 4%]
C --> C1[SBI 1955]
C --> C2[RRB 1975]
C --> C3[सहकारी बैंक]
D --> D1[रुपया = 100 पैसे]
D --> D2[M0 से M4 माप]
D --> D3[सिक्का ढलाई वित्त मंत्रालय]
E --> E1[UPI]
E --> E2[NPCI 2008]
E --> E3[रुपे कार्ड]
बैंकिंग और मुद्रा अर्थव्यवस्था की आधारशिला है और इस अध्याय का ज्ञान परीक्षा के लिए अनिवार्य है। हमने RBI की भूमिका, मौद्रिक नीति के उपकरण, वाणिज्यिक बैंकों के प्रकार और मुद्रा सप्लाई के मापों का विस्तृत अध्ययन किया। रेपो रेट, CRR, SLR जैसी संकल्पनाओं की सटीक परिभाषाएँ और उनके उपयोग को समझना परीक्षा में उच्च अंक दिलाता है। बैंकिंग संस्थाओं की स्थापना वर्ष और उनकी भूमिका को तालिकाओं द्वारा स्मरण किया गया। डिजिटल बैंकिंग और UPI से जुड़े वर्तमान तथ्य भी महत्वपूर्ण हैं। त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाओं और माइंड मैप की सहायता से इस अध्याय को पूर्ण रूप से आत्मसात किया जा सकता है। नियमित अभ्यास से ये प्रश्न सुनिश्चित अंक प्रदान करते हैं।