विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – अर्थव्यवस्था खेल और विज्ञान विषय-वस्तु: 22.9 अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक
अंतरिक्ष अनुसंधान और रक्षा प्रौद्योगिकी भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं का प्रतीक हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 1969 में स्थापित हुआ, जिसने भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में अग्रणी देशों में स्थान दिलाया। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की सामान्य जागरूकता में अंतरिक्ष मिशन, उपग्रहों, प्रक्षेपण यानों और रक्षा प्रौद्योगिकी से जुड़े प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट 1975 में सोवियत संघ की सहायता से प्रक्षेपित हुआ था। सन् 1980 में रोहिणी उपग्रह को भारत के अपने प्रक्षेपण यान SLV-3 से प्रक्षेपित कर भारत अंतरिक्ष में अपनी क्षमता दिखाने वाला छठा देश बना।
रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत ने मिसाइल विकास, टैंक, युद्धक विमान और नौसेना उपकरणों में बड़ी प्रगति की है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) 1958 में स्थापित हुआ। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में मिसाइल विकास कार्यक्रम ने अग्नि, पृथ्वी, आकाश और त्रिशूल जैसी मिसाइलों को जन्म दिया। भारत का मुख्य सामरिक मिसाइल प्रणाली अग्नि श्रृंखला है। ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस की संयुक्त परियोजना है। परीक्षा की दृष्टि से मिसाइलों के प्रकार, उनकी सीमा और प्रक्षेपण क्षमता महत्वपूर्ण हैं। भारतीय सेना के लिए विकसित किए गए रक्षा उपकरणों के नाम और उनके उपयोग की समझ आवश्यक है।
इस अध्याय में हम ISRO के अंतरिक्ष मिशनों, उपग्रहों और प्रक्षेपण यानों का अध्ययन करेंगे। चंद्रयान मिशन, मंगलयान, गगनयान और आदित्य-एल1 जैसे मिशन भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियाँ हैं। रक्षा क्षेत्र में मिसाइल प्रणालियाँ, युद्धक विमान (जैसे तेजस, सुखोई) और नौसेना के जहाजों (जैसे INS विक्रांत) का ज्ञान परीक्षा के लिए आवश्यक है। अंत में तालिकाओं, माइंड मैप और चित्रों के माध्यम से अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक की संपूर्ण पुनरावृत्ति की जाएगी।
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम डॉ. विक्रम साराभाई के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू हुआ। ISRO का पहला प्रमुख मिशन आर्यभट्ट उपग्रह 1975 में प्रक्षेपित हुआ। भारत के स्वदेशी प्रक्षेपण यानों में SLV-3 (1980), ASLV, PSLV और GSLV शामिल हैं। ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) भारत का सबसे विश्वसनीय प्रक्षेपण यान है, जिसने चंद्रयान-1 और मंगलयान जैसे महत्वपूर्ण मिशनों को अंजाम दिया। भूस्थैतिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV) भारी उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करता है। GSLV मार्क-3 (LVM3) सबसे शक्तिशाली यान है, जिसे चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण के लिए प्रयोग किया गया। परीक्षा में प्रक्षेपण यानों के नाम और उनकी क्षमताओं से प्रश्न पूछे जाते हैं।
चंद्रयान-1 2008 में प्रक्षेपित हुआ, जिसने चंद्रमा पर पानी की खोज में महत्वपूर्ण योगदान दिया। चंद्रयान-2 2019 में प्रक्षेपित हुआ, जिसमें विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर शामिल थे। चंद्रयान-3 2023 में प्रक्षेपित हुआ, जिसने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग की। इस सफलता से भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग करने वाला पहला देश और लैंडिंग करने वाला चौथा देश बना। प्रज्ञान रोवर ने चंद्रमा की सतह पर अनुसंधान किए। मंगलयान (MOM) 2013 में प्रक्षेपित हुआ, जो पहले प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुँचने वाला पहला मिशन था। आदित्य-एल1 सूर्य का अध्ययन करने वाला भारत का पहला सौर मिशन है, जो 2023 में प्रक्षेपित हुआ।
उपग्रहों के क्षेत्र में भारत के संचार उपग्रह जीसैट (GSAT) श्रृंखला, पृथ्वी अवलोकन उपग्रह और नौवहन उपग्रह नाविक (NAVIC) महत्वपूर्ण हैं। नाविक भारत का स्वदेशी नौवहन उपग्रह प्रणाली है, जिसे IRNSS के नाम से भी जाना जाता है। इंसैट (INSAT) भारत का संचार उपग्रह है। भारत के कार्टोसैट उपग्रह नक्शों और भू-सर्वेक्षण के लिए हैं। परीक्षा में उपग्रहों के नाम और उनके उपयोग से प्रश्न पूछे जाते हैं। भारत ने सन् 2017 में एक साथ 104 उपग्रह प्रक्षेपित करके विश्व रिकॉर्ड बनाया। ISRO का मुख्यालय बेंगलुरु में है और प्रक्षेपण स्थल श्रीहरिकोटा (सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र) में है। ये तथ्य परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।
भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी में मिसाइल, विमान, टैंक और नौसेना के क्षेत्र में विकास शामिल है। मिसाइल विकास कार्यक्रम के अंतर्गत डॉ. ए.पी.जे. कलाम के नेतृत्व में इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP) 1983 में शुरू हुआ। इस कार्यक्रम के अंतर्गत पृथ्वी (सतह-से-सतह), अग्नि (सामरिक), आकाश (वायु रक्षा), त्रिशूल (छोटी दूरी) और नाग (टैंक भेदी) मिसाइलें विकसित की गईं। अग्नि श्रृंखला में अग्नि-5 भारत की सबसे लंबी दूरी की मिसाइल है, जो लगभग 5000 किलोमीटर की सीमा तक मार कर सकती है। ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस की संयुक्त उपक्रम है, जो सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। परीक्षा में मिसाइलों के नाम और उनकी सीमा से प्रश्न पूछे जाते हैं।
वायु सेना के क्षेत्र में भारत ने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस विकसित किया है, जो हल्का युद्धक विमान (LCA) है। तेजस का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा किया जाता है। भारतीय वायु सेना के अन्य विमानों में सुखोई-30 MKI, मिराज-2000, राफेल और मिग श्रृंखला शामिल हैं। भारत ने फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान खरीदे हैं। हेलिकॉप्टरों में एएलएच ध्रुव और प्रचंड स्वदेशी हैं। रक्षा उपकरणों के निर्माण में HAL और DRDO की भूमिका महत्वपूर्ण है। रक्षा उत्पादन क्षेत्र में भारत ने मेक इन इंडिया के अंतर्गत आत्मनिर्भरता पर बल दिया है। परीक्षा में स्वदेशी विमानों और हेलिकॉप्टरों के नाम पूछे जाते हैं।
भारतीय नौसेना के क्षेत्र में स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत 2022 में कमीशन हुआ, जो भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत है। नौसेना के युद्धपोतों में INS विराट (सेवानिवृत्त), शिवालिक श्रृंखला और कलवरी श्रृंखला की पनडुब्बियाँ शामिल हैं। अरिहंत श्रृंखला भारत की परमाणु ऊर्जा संचालित पनडुब्बियाँ हैं। INS विक्रांत का निर्माण कोचीन शिपयार्ड में हुआ। रक्षा क्षेत्र में भारत के अन्य प्रमुख उपकरणों में मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन, बीएमपी-2 इन्फैंट्री फाइटिंग व्हीकल और पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर शामिल हैं। अर्जुन टैंक DRDO द्वारा विकसित किया गया है। ये सभी तथ्य रक्षा तकनीक से जुड़े प्रश्नों के उत्तर देने में सहायक हैं।
भारत की रक्षा व्यवस्था में तीन प्रमुख बल हैं — थल सेना, वायु सेना और नौसेना। रक्षा सेवाओं के संचालन की संवैधानिक व्यवस्था में राष्ट्रपति भारतीय सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर होता है। भारत के रक्षा मंत्रालय की स्थापना 1947 में हुई। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की नियुक्ति 2019 में की गई, जो तीनों बलों के समन्वय के लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय थल सेना के प्रमुख सैन्य केंद्रों और युद्धक अभ्यासों का ज्ञान भी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। रक्षा खर्च भारत के केंद्रीय बजट का महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें सैन्य आधुनिकीकरण, पेंशन और सैनिकों की सुविधाएँ शामिल हैं। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में नई नीतियाँ लागू की जा रही हैं।
वर्तमान रक्षा तकनीक में ड्रोन, साइबर युद्ध और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग बढ़ रहा है। भारत ने अपने स्वदेशी ड्रोन और मानव रहित हवाई वाहन (UAV) विकसित किए हैं। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भारत साइबर कमांड और राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति पर कार्य कर रहा है। अंतरिक्ष रक्षा के क्षेत्र में भारत ने सन् 2019 में मिशन शक्ति के अंतर्गत उपग्रह-भेदी मिसाइल (ASAT) का सफल परीक्षण किया। भारत उपग्रह-भेदी क्षमता रखने वाला चौथा देश बना। रक्षा क्षेत्र में बेहतर समन्वय के लिए थल सेना, वायु सेना और नौसेना के संयुक्त अभ्यास आयोजित होते हैं। परीक्षा में मिशन शक्ति और ASAT परीक्षण से प्रश्न पूछे जाते हैं।
रक्षा अनुसंधान में भारत की उपलब्धियों में ब्रह्मोस-2, पिनाका रॉकेट सिस्टम और परमाणु पनडुब्बियों का विकास शामिल है। नौसेना के लिए निखिल श्रृंखला और सोनार प्रणालियाँ विकसित की गई हैं। भारत ने अपनी स्वदेशी मिसाइल प्रणाली एमआर-सैम (मध्यम दूरी सतह से वायु मिसाइल) विकसित की है। रक्षा तकनीक के अध्ययन में मिसाइलों की श्रेणियाँ — बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल, सतह से सतह, सतह से वायु और टैंक भेदी — की समझ आवश्यक है। बैलिस्टिक मिसाइल पृथ्वी की कक्षा के ऊपर जाकर लक्ष्य तक पहुँचती है, जबकि क्रूज मिसाइल वायुमंडल में उड़ान भरती है। इन तकनीकी विवरणों का ज्ञान परीक्षा में उच्च अंक दिलाता है।
| मिशन | वर्ष | मुख्य उपलब्धि |
|---|---|---|
| आर्यभट्ट | 1975 | पहला भारतीय उपग्रह |
| रोहिणी | 1980 | स्वदेशी प्रक्षेपण SLV-3 |
| चंद्रयान-1 | 2008 | चंद्रमा पर जल का पता |
| मंगलयान | 2013 | पहले प्रयास में मंगल कक्षा |
| चंद्रयान-3 | 2023 | दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग |
| आदित्य-एल1 | 2023 | पहला सौर मिशन |
| मिसाइल | प्रकार | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| अग्नि-5 | बैलिस्टिक | 5000 किमी तक मारक |
| पृथ्वी | सतह से सतह | सामरिक |
| ब्रह्मोस | क्रूज | भारत-रूस संयुक्त |
| आकाश | वायु रक्षा | मध्यम दूरी |
| त्रिशूल | छोटी दूरी | नौसेना रक्षा |
| नाग | टैंक भेदी | सटीक लक्ष्य |
flowchart TD
A[अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक] --> B[ISRO]
A --> C[अंतरिक्ष मिशन]
A --> D[रक्षा तकनीक]
A --> E[रक्षा बल]
B --> B1[1969 स्थापित]
B --> B2[मुख्यालय बेंगलुरु]
C --> C1[चंद्रयान मिशन]
C --> C2[मंगलयान]
C --> C3[आदित्य-एल1]
C --> C4[गगनयान]
D --> D1[मिसाइलें]
D --> D2[तेजस विमान]
D --> D3[INS विक्रांत]
D --> D4[ब्रह्मोस]
E --> E1[थल सेना]
E --> E2[वायु सेना]
E --> E3[नौसेना]
E --> E4[CDS 2019]
अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक भारत की वैज्ञानिक और सैन्य क्षमताओं का प्रतीक है। इस अध्याय में हमने ISRO के अंतरिक्ष मिशनों — चंद्रयान, मंगलयान और आदित्य-एल1 — तथा भारत के रक्षा उपकरणों का अध्ययन किया। चंद्रयान-3 की दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग और मंगलयान की पहले प्रयास में सफलता भारत की बड़ी उपलब्धियाँ हैं। मिसाइलों के प्रकार, स्वदेशी विमानों और नौसेना के जहाजों की जानकारी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। मिशन शक्ति और ASAT परीक्षण जैसे वर्तमान तथ्य भी याद रखने योग्य हैं। त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाओं और माइंड मैप की सहायता से इन तथ्यों को दोहराकर परीक्षा में निश्चित अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।