विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – इतिहास और संस्कृति विषय-वस्तु: 20.3 आधुनिक भारत
आधुनिक भारत का इतिहास प्रायः 1757 ईस्वी के प्लासी के युद्ध से प्रारंभ माना जाता है, जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में राजनीतिक शक्ति प्राप्त करना शुरू किया। यह काल 1947 तक फैला है जब भारत स्वतंत्र हुआ। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में आधुनिक भारत से संबंधित प्रश्न बड़ी संख्या में पूछे जाते हैं, जिनमें गवर्नर जनरलों के कार्य, महत्वपूर्ण अधिनियम, सुधार आंदोलन और विद्रोह प्रमुख हैं। इस अध्याय में कंपनी शासन, गवर्नर जनरलों के योगदान, 1857 के विद्रोह तथा वायसराय के काल की महत्वपूर्ण घटनाओं का अध्ययन किया जाएगा।
भारत में यूरोपीय शक्तियों का आगमन 15वीं शताब्दी के अंत से हुआ। पुर्तगाली वास्को डी गामा ने 1498 में भारत के कालीकट (केरल) तट पर कदम रखा। इसके बाद डच, ब्रिटिश और फ्रांसीसी व्यापारियों ने भारत में व्यापारिक कंपनियाँ स्थापित कीं। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1600 में हुई और 1612 में उसे मुगल बादशाह जहाँगीर से सूरत में व्यापार की अनुमति मिली। 1690 में जॉब चार्नॉक ने कलकत्ता (कोलकाता) की नींव रखी। धीरे-धीरे कंपनी व्यापार से राजनीति में उतरती गई।
आधुनिक भारत का इतिहास तीन मुख्य चरणों में बँटा है – कंपनी शासन (1757-1858), ब्रिटिश क्राउन शासन (1858-1947) और स्वतंत्रता आंदोलन। प्लासी के युद्ध के बाद कंपनी ने बंगाल पर नियंत्रण पाया और बक्सर (1764) के बाद राजस्व अधिकार प्राप्त किए। 1857 के महान विद्रोह के बाद कंपनी का शासन समाप्त होकर सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन आ गया। इस काल में अनेक सुधार, विद्रोह और राष्ट्रीय आंदोलन हुए जिन्होंने भारतीय राष्ट्रवाद का बीजारोपण किया।
प्लासी का युद्ध (1757) रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना और बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के बीच लड़ा गया। इस युद्ध में सिराजुद्दौला के सेनापति मीर जाफर ने विश्वासघात किया और कंपनी की विजय हुई। प्लासी के युद्ध को भारत में ब्रिटिश शासन की नींव कहा जाता है। बक्सर का युद्ध (1764) में मीर कासिम, शुजाउद्दौला और शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना हेक्टर मुनरो के नेतृत्व में कंपनी से पराजित हुई। 1765 में क्लाइव ने मुगल बादशाह से बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी (राजस्व) प्राप्त की।
वारेन हेस्टिंग्स (1774-1785): प्रथम गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल थे। उन्होंने 1774 में "रेगुलेटिंग एक्ट" पारित करवाया और 1781 में "कोलकाता मदरसा" की स्थापना की। विलियम जोन्स के साथ मिलकर उन्होंने 1784 में "एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल" की स्थापना की। उनका प्रसिद्ध मुकदमा नंद कुमार का था।
लॉर्ड कॉर्नवालिस (1786-1793): उन्होंने "स्थायी बंदोबस्त" (परमानेंट सेटलमेंट) 1793 में लागू किया, जिसमें जमींदारों को भूमि का स्थायी स्वामित्व दिया गया। उन्हें "भारत में सिविल सेवा का जनक" कहा जाता है। उन्होंने न्याय व्यवस्था को विभाजित किया।
लॉर्ड वेलेजली (1798-1805): उन्होंने "सहायक संधि" (सब्सिडियरी अलायंस) की नीति अपनाई। इसके तहत भारतीय राज्यों को कंपनी की सेना रखनी होती थी। हैदराबाद और मैसूर इस नीति के अधीन आए। उन्होंने 1800 में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की।
लॉर्ड विलियम बेंटिक (1828-1835): उन्होंने 1829 में "सती प्रथा" का उन्मूलन किया और 1833 में चार्टर एक्ट पारित करवाया। उन्होंने अंग्रेजी शिक्षा को बढ़ावा दिया। मैकाले के "मिनट" के आधार पर 1835 में अंग्रेजी को शिक्षा का माध्यम बनाया गया। लॉर्ड डलहौजी ने "व्यपगत सिद्धांत" (डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स) के तहत जिन राज्यों में गोद लेने की प्रथा नहीं थी, उन्हें ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया। सतारा (1848) पहला राज्य था जो इस सिद्धांत के अधीन आया। डलहौजी ने रेलवे, टेलीग्राफ और डाक टिकट की शुरुआत की।
महत्वपूर्ण सुधार: लॉर्ड रिपन ने 1882 में "वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट" समाप्त किया और "इल्बर्ट बिल" प्रस्तुत किया। उन्हें "भारत में स्थानीय स्वशासन का जनक" कहा जाता है। लॉर्ड कर्जन ने 1905 में बंगाल का विभाजन किया जिसने स्वदेशी आंदोलन को जन्म दिया। लॉर्ड मिंटो को "भारतीय असंतोष का जनक" कहा जाता था।
1857 का विद्रोह भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा जनविद्रोह था। इसे पहला स्वतंत्रता संग्राम भी कहा जाता है। विद्रोह का मुख्य कारण चर्बी वाले कारतूस थे, जिनका उपयोग करने से सैनिकों को मना कर दिया गया। इसके अलावा "व्यपगत सिद्धांत", जमींदारों की जमीनों की जब्ती, विधवा पुनर्विवाह कानून, सामाजिक सुधारों के प्रति असंतोष और आर्थिक शोषण इसके कारण थे।
प्रारंभिक घटनाएँ: विद्रोह की शुरुआत 29 मार्च 1857 को बैरकपुर में मंगल पांडे ने की थी, जिसने अपने अंग्रेज अधिकारी पर गोली चलाई। 10 मई 1857 को मेरठ के सैनिकों ने विद्रोह कर दिल्ली की ओर कूच किया। दिल्ली में मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर द्वितीय को विद्रोह का नेता घोषित किया गया।
प्रमुख केंद्र और नेता: दिल्ली में बहादुर शाह जफर, कानपुर में नाना साहेब, झाँसी में रानी लक्ष्मीबाई, लखनऊ में बेगम हज़रत महल और बिहार के आरा में कुंवर सिंह ने विद्रोह का नेतृत्व किया। रानी लक्ष्मीबाई और तांत्या टोपे ने गुरिल्ला युद्ध का प्रयोग किया। अंग्रेजी सेना ने 1858 में झाँसी और ग्वालियर पर पुनः अधिकार कर लिया।
परिणाम: 1858 में ब्रिटिश संसद ने "गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट" पारित किया जिसके द्वारा कंपनी का शासन समाप्त कर भारत सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया। भारत का पहला वायसराय लॉर्ड कैनिंग बना। इसके बाद "गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1858" के द्वारा "भारत सचिव" का पद बनाया गया और "वायसराय की कार्यकारी परिषद" का गठन हुआ। 1858 में ही महारानी विक्टोरिया की "शाही उद्घोषणा" में भारतीयों को समान अधिकार देने का वादा किया गया।
1858 के बाद भारत पर ब्रिटिश क्राउन के प्रतिनिधि वायसराय का शासन हुआ। लॉर्ड कैनिंग (1858-1862) भारत का पहला वायसराय था। उसके काल में 1861 में "भारतीय परिषद अधिनियम" पारित हुआ जिसमें भारतीयों को विधान परिषद में शामिल करने की व्यवस्था की गई। लॉर्ड लिटन (1876-1880) के काल में 1877 में "दिल्ली दरबार" का आयोजन हुआ जिसमें महारानी विक्टोरिया को "कैसर-ए-हिन्द" की उपाधि दी गई। लिटन के काल में 1878 में "वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट" पारित हुआ जो भारतीय पत्रकारिता पर प्रतिबंध लगाता था।
लॉर्ड रिपन (1880-1884): उन्होंने वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट समाप्त किया, इल्बर्ट बिल प्रस्तुत किया और स्थानीय स्वशासन की नींव रखी। 1882 में "हंटर आयोग" की नियुक्ति शिक्षा सुधार के लिए हुई। लॉर्ड डफरिन (1884-1888) के काल में 1885 में "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस" की स्थापना ए. ओ. ह्यूम ने की।
लॉर्ड कर्जन (1899-1905): उसने 1905 में बंगाल विभाजन किया और 1904 में "विश्वविद्यालय अधिनियम" पारित कराया। उसने पुरातत्व विभाग स्थापित किया और "एनसिएंट मॉन्यूमेंट्स प्रिजर्वेशन एक्ट" लागू किया। 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में "स्वदेशी आंदोलन" चला।
लॉर्ड मिंटो (1905-1910): उनके काल में 1906 में "मुस्लिम लीग" की स्थापना हुई और 1909 में "मिंटो-मॉर्ले सुधार" अधिनियम पारित हुआ जिसमें सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व (अलग निर्वाचन क्षेत्र) की व्यवस्था की गई। लॉर्ड हार्डिंग (1910-1916) के काल में 1911 में बंगाल का विभाजन रद्द किया गया और राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित की गई। 1912 में दिल्ली दरबार में किंग जॉर्ज पंचम का आगमन हुआ।
लॉर्ड चेम्सफोर्ड (1916-1921): उनके काल में 1919 में "राउलट एक्ट" पारित हुआ और अप्रैल 1919 में "जलियांवाला बाग नरसंहार" हुआ। 1919 में ही "मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार" अधिनियम पारित हुआ जिसमें द्वैध शासन (डायार्की) प्रणाली प्रांतों में लागू की गई। लॉर्ड इरविन (1926-1931) के काल में 1928 में "साइमन कमीशन" भारत आया जिसके विरोध में "लाला लाजपत राय" की मृत्यु हुई। 1930 में "दांडी यात्रा" और "सविनय अवज्ञा आंदोलन" चला। 1931 में "गांधी-इरविन समझौता" हुआ।
लॉर्ड वेवेल (1943-1947): उनके काल में 1945 में "शिमला सम्मेलन" हुआ और 1946 में "कैबिनेट मिशन" भारत आया। लॉर्ड माउंटबेटन (1947) भारत का अंतिम वायसराय था, जिसके काल में 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। उसने "माउंटबेटन योजना" (3 जून 1947 की योजना) प्रस्तुत की जिसके आधार पर भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ। सीमा आयोग का अध्यक्ष सर सिरिल रैडक्लिफ था।
| गवर्नर जनरल | काल | प्रमुख कार्य |
|---|---|---|
| वारेन हेस्टिंग्स | 1774-1785 | रेगुलेटिंग एक्ट 1774 |
| लॉर्ड कॉर्नवालिस | 1786-1793 | स्थायी बंदोबस्त 1793 |
| लॉर्ड वेलेजली | 1798-1805 | सहायक संधि नीति |
| लॉर्ड विलियम बेंटिक | 1828-1835 | सती प्रथा उन्मूलन 1829 |
| लॉर्ड डलहौजी | 1848-1856 | व्यपगत सिद्धांत, रेलवे |
| वायसराय | काल | महत्वपूर्ण घटना |
|---|---|---|
| लॉर्ड कैनिंग | 1858-1862 | प्रथम वायसराय, 1858 अधिनियम |
| लॉर्ड लिटन | 1876-1880 | वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट 1878 |
| लॉर्ड रिपन | 1880-1884 | इल्बर्ट बिल, स्थानीय स्वशासन |
| लॉर्ड कर्जन | 1899-1905 | बंगाल विभाजन 1905 |
| लॉर्ड माउंटबेटन | 1947 | अंतिम वायसराय, स्वतंत्रता |
flowchart TD
A[आधुनिक भारत] --> B[कंपनी शासन 1757-1858]
A --> C[1857 विद्रोह]
A --> D[ब्रिटिश क्राउन शासन 1858-1947]
A --> E[स्वतंत्रता 1947]
B --> B1[प्लासी 1757]
B --> B2[बक्सर 1764]
B --> B3[स्थायी बंदोबस्त 1793]
B --> B4[व्यपगत सिद्धांत]
C --> C1[मंगल पांडे]
C --> C2[रानी लक्ष्मीबाई]
C --> C3[नाना साहेब]
D --> D1[कांग्रेस 1885]
D --> D2[बंगाल विभाजन 1905]
D --> D3[जलियांवाला बाग 1919]
E --> E1[15 अगस्त 1947]
आधुनिक भारत का इतिहास ब्रिटिश कंपनी के व्यापारिक आगमन से लेकर पूर्ण स्वतंत्रता तक की लंबी यात्रा है। प्लासी और बक्सर के युद्धों ने कंपनी को राजनीतिक शक्ति दी, जबकि 1857 के विद्रोह ने ब्रिटिश क्राउन का सीधा शासन स्थापित कराया। गवर्नर जनरलों और वायसरायों के काल में अनेक सुधार, विद्रोह और अधिनियम हुए जिन्होंने भारतीय राष्ट्रवाद को जन्म दिया। इस अध्याय में हमने कंपनी शासन की स्थापना, 1857 के विद्रोह के कारण और नेता, तथा वायसराय काल की महत्वपूर्ण घटनाओं का अध्ययन किया। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा के लिए तिथियों, अधिनियमों और शासकों के मिलान वाले प्रश्नों को हल करने हेतु तालिकाओं का अभ्यास अत्यंत लाभदायक है।