विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – समसामयिकी और पर्यावरण विषय-वस्तु: 23.6 पर्यावरणीय मुद्दे
पर्यावरणीय मुद्दे आधुनिक युग की सबसे गंभीर चुनौतियाँ हैं, जो वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, भूमि क्षरण, वनों की कटाई, अपशिष्ट प्रबंधन और जैव विविधता की हानि से संबंधित हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में पर्यावरणीय मुद्दों से सामान्य जागरूकता खंड में प्रश्न पूछे जाते हैं। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI), PM 2.5 और PM 10 जैसे प्रदूषक कण, ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन, ओजोन परत का क्षय और अम्लीय वर्षा जैसे विषय परीक्षा में प्रमुख रूप से पूछे जाते हैं। इन मुद्दों की वैज्ञानिक समझ पर्यावरण से जुड़े सभी प्रश्नों को हल करने में सहायक है।
पर्यावरणीय मुद्दों का अध्ययन करते समय प्रदूषण के प्रकार, उनके स्रोत और उनके प्रभावों को समझना आवश्यक है। वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत वाहन, उद्योग, बिजली संयंत्र और जैविक ईंधन हैं। जल प्रदूषण के स्रोत औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि रसायन और घरेलू कचरा हैं। मृदा प्रदूषण के प्रमुख कारण रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और खनन हैं। इन सभी के परिणामस्वरूप जैव विविधता में कमी, स्वास्थ्य समस्याएँ और पारिस्थितिकी तंत्र का बिगड़ना होता है। परीक्षा में स्रोत-प्रदूषण के मिलान वाले प्रश्न बहुत पूछे जाते हैं।
इस अध्याय में हम वायु, जल, मृदा और ध्वनि प्रदूषण के प्रकार, उनके स्रोत और नियंत्रण उपायों का विस्तार से अध्ययन करेंगे। साथ ही अपशिष्ट प्रबंधन, ई-कचरा, प्लास्टिक प्रदूषण और राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रमों की जानकारी भी लेंगे। पर्यावरण मंत्रालय की पहलों जैसे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), वन संरक्षण कानून और स्वच्छ भारत मिशन पर भी प्रश्न बनते हैं। पर्यावरणीय मुद्दों का यह ज्ञान वर्तमान समय की चुनौतियों को समझने में भी सहायक है।
वायु प्रदूषण वायुमंडल में हानिकारक गैसों और कणों की उपस्थिति है, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को क्षति पहुँचाती है। वायु प्रदूषण के प्रमुख प्रदूषक कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), ओजोन (O3) और सूक्ष्म कण (PM2.5, PM10) हैं। PM2.5 वे सूक्ष्म कण हैं जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर से कम होता है और ये फेफड़ों में गहराई तक पहुँचकर स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचाते हैं। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) वायु की गुणवत्ता को मापने का मानक है, जिसे छह श्रेणियों में बाँटा गया है: अच्छा, संतोषजनक, मध्यम, खराब, बहुत खराब और गंभीर। परीक्षा में AQI की श्रेणियों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
वायु प्रदूषण के प्रभावों में श्वसन रोग, हृदय रोग, अस्थमा और आँखों की जलन शामिल हैं। स्मॉग धुएँ और कोहरे का मिश्रण है, जो सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के कई शहरों में गंभीर समस्या बन जाता है। स्मॉग में निहित PM2.5 कण स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं। ग्रीनहाउस गैसों में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), मीथेन (CH4), नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) और जलवाष्प शामिल हैं। CO2 ग्रीनहाउस प्रभाव में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है। ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, जिसे ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं।
वायु प्रदूषण नियंत्रण के उपायों में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, स्वच्छ ईंधन (CNG, बिजली) का उपयोग, वृक्षारोपण और उद्योगों में फिल्टर लगाना शामिल है। भारत सरकार ने BS-VI ईंधन मानकों को 1 अप्रैल 2020 से लागू किया, जिससे वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण में कमी आई है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) का लक्ष्य 2024 तक वायु प्रदूषण में 20-30 प्रतिशत की कमी लाना था, जिसे अब 40 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत 132 प्रदूषित शहरों को चिन्हित किया गया है। इन सरकारी पहलों पर परीक्षा में प्रश्न पूछे जाते हैं।
जल प्रदूषण जल निकायों में हानिकारक पदार्थों के मिलने से होता है, जिससे जलीय जीवन और मानव स्वास्थ्य को खतरा होता है। जल प्रदूषण के प्रमुख स्रोत औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि में उपयोग होने वाले रासायनिक उर्वरक, घरेलू सीवेज और प्लास्टिक कचरा हैं। जल में मौजूद नाइट्रेट और फॉस्फेट यूट्रोफिकेशन का कारण बनते हैं, जिससे शैवाल की अत्यधिक वृद्धि होती है और जल में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। गंगा, यमुना जैसी नदियों का प्रदूषण एक गंभीर मुद्दा है। नमामि गंगे कार्यक्रम गंगा नदी की सफाई के लिए चलाया गया राष्ट्रीय अभियान है। जल प्रदूषण के कारण जलजनित रोग जैसे हैजा, टाइफाइड और पेचिश फैलते हैं।
मृदा प्रदूषण मिट्टी में हानिकारक रसायनों के संचय से होता है। इसके प्रमुख कारण अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग, औद्योगिक अपशिष्टों का निस्तारण और खनन गतिविधियाँ हैं। मृदा प्रदूषण के कारण मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती है और फसलों में हानिकारक रसायन पहुँचते हैं। इसका परिणाम मानव स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डालता है। जैविक खेती और वर्मी कम्पोस्ट जैसे उपायों से मृदा प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है। ध्वनि प्रदूषण का मापन डेसिबल (dB) में किया जाता है। 85 डेसिबल से अधिक की ध्वनि लंबे समय तक सुनने पर श्रवण शक्ति को नुकसान पहुँचाती है। ध्वनि प्रदूषण के मुख्य स्रोत वाहन, औद्योगिक मशीनें और पटाखे हैं।
अपशिष्ट प्रबंधन पर्यावरणीय मुद्दों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ठोस अपशिष्ट, प्लास्टिक कचरा और ई-कचरा (इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट) के उचित निस्तारण की आवश्यकता है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत कचरे के पृथक्करण और पुनर्चक्रण पर बल दिया जाता है। भारत सरकार ने 2019 से सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम उठाए और 2022 से कुछ सिंगल-यूज़ प्लास्टिक उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया। ई-कचरे में मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं, जिनमें खतरनाक धातुएँ होती हैं। इन्हें रिसाइकिल करना आवश्यक है ताकि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रहें।
पर्यावरण संरक्षण के लिए भारत में कई कानून और संस्थाएँ हैं। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 भारत का प्रमुख पर्यावरणीय कानून है। वन संरक्षण अधिनियम 1980 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 भी महत्वपूर्ण कानून हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना 2010 में की गई थी, जो पर्यावरणीय विवादों के निपटारे के लिए एक विशेष अदालत है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) वायु और जल प्रदूषण की निगरानी करता है। इन कानूनों और संस्थाओं पर परीक्षा में प्रश्न पूछे जाते हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) पर्यावरण नीतियों का निर्माण करता है।
प्रमुख पर्यावरणीय कार्यक्रमों में नमामि गंगे कार्यक्रम (2014), राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (2019) और मिशन लाइफ (Life - Lifestyle for Environment) शामिल हैं। मिशन लाइफ को COP26 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेश किया था, जिसका उद्देश्य जीवनशैली में बदलाव से पर्यावरण की रक्षा करना है। इसके साथ ही सूर्यमित्र, प्रकृति से जुड़े कार्यक्रम और पर्यावरण शिक्षा अभियान चलाए जाते हैं। राष्ट्रीय हरित मिशन के तहत वनीकरण को बढ़ावा दिया जाता है। इन कार्यक्रमों के शुरुआती वर्ष और उद्देश्यों पर परीक्षा में निश्चित प्रश्न पूछे जाते हैं।
वन और वन्यजीव संरक्षण के संदर्भ में प्रोजेक्ट टाइगर (1973) और प्रोजेक्ट एलिफेंट (1992) प्रमुख हैं। प्रोजेक्ट टाइगर के तहत राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) कार्य करता है। इन परियोजनाओं से जंगली जानवरों की संख्या में वृद्धि हुई है। वन (संरक्षण) अधिनियम वनों की कटाई को नियंत्रित करता है। पर्यावरणीय मुद्दों के इस अध्याय को तैयार करने के लिए प्रदूषण के प्रकार, स्रोत, प्रभाव और नियंत्रण के उपायों को तालिका के रूप में व्यवस्थित करके पढ़ना सबसे अच्छा तरीका है। यह अध्याय परीक्षा के साथ-साथ वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने में भी सहायक है।
| प्रदूषण का प्रकार | मुख्य स्रोत | प्रमुख प्रभाव |
|---|---|---|
| वायु प्रदूषण | वाहन, उद्योग, बिजली संयंत्र | श्वसन रोग, स्मॉग |
| जल प्रदूषण | औद्योगिक अपशिष्ट, सीवेज | जलजनित रोग, यूट्रोफिकेशन |
| मृदा प्रदूषण | रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक | उर्वरा शक्ति में कमी |
| ध्वनि प्रदूषण | वाहन, पटाखे, मशीनें | श्रवण हानि |
| कानून / संस्था | वर्ष / विवरण |
|---|---|
| वन्यजीव संरक्षण अधिनियम | 1972 |
| प्रोजेक्ट टाइगर | 1973 |
| वन संरक्षण अधिनियम | 1980 |
| पर्यावरण संरक्षण अधिनियम | 1986 |
| प्रोजेक्ट एलिफेंट | 1992 |
| राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) | 2010 |
| नमामि गंगे कार्यक्रम | 2014 |
flowchart TD
A[पर्यावरणीय मुद्दे] --> B[वायु प्रदूषण]
A --> C[जल प्रदूषण]
A --> D[मृदा प्रदूषण]
A --> E[ध्वनि प्रदूषण]
A --> F[अपशिष्ट प्रबंधन]
B --> B1[PM2.5, PM10]
B --> B2[AQI]
B --> B3[स्मॉग]
C --> C1[यूट्रोफिकेशन]
C --> C2[नमामि गंगे]
D --> D1[रासायनिक उर्वरक]
E --> E1[डेसिबल में माप]
F --> F1[ई-कचरा]
F --> F2[प्लास्टिक प्रतिबंध]
A --> G[संरक्षण कानून]
G --> G1[NGT 2010]
G --> G2[पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986]
पर्यावरणीय मुद्दे वर्तमान युग की गंभीर चुनौतियाँ हैं, जिनके बारे में जानकारी परीक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक जीवन में भी आवश्यक है। इस अध्याय में हमने वायु, जल, मृदा और ध्वनि प्रदूषण के स्रोतों और प्रभावों, अपशिष्ट प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण के कानूनों और संस्थाओं का विस्तार से अध्ययन किया। परीक्षा में प्रदूषण के प्रकार, प्रदूषकों के नाम और पर्यावरणीय कानूनों के वर्षों पर प्रश्न पूछे जाते हैं। इन तथ्यों को तालिकाओं में सुव्यवस्थित करके पुनरावृत्ति करने से यह खंड आसानी से तैयार हो जाता है। अब अगले अध्याय में हम जलवायु परिवर्तन के मुद्दे का अध्ययन करेंगे।