विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – समसामयिकी और पर्यावरण विषय-वस्तु: 23.8 जैव विविधता और संरक्षण
जैव विविधता (Biodiversity) का अर्थ है पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों की विविधता, जिसमें वनस्पति, जीव-जंतु, सूक्ष्मजीव और उनके पारिस्थितिकी तंत्र शामिल हैं। जैव विविधता पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता का आधार है, क्योंकि यह खाद्य श्रृंखला, जल चक्र और जलवायु संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में जैव विविधता और संरक्षण से संबंधित प्रश्न सामान्य जागरूकता खंड में पूछे जाते हैं। राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, बायोस्फीयर रिजर्व, लुप्तप्राय प्रजातियाँ और संरक्षण परियोजनाएँ इस खंड के प्रमुख विषय हैं।
जैव विविधता को तीन स्तरों में विभाजित किया जाता है: आनुवंशिक विविधता, प्रजाति विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र विविधता। आनुवंशिक विविधता एक ही प्रजाति के भीतर जीनों में अंतर है। प्रजाति विविधता किसी क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न प्रजातियों की संख्या है। पारिस्थितिकी तंत्र विविधता विभिन्न आवासों और पारिस्थितिकी तंत्रों की विविधता है। भारत विश्व के 17 महामहत्वपूर्ण (Mega-diverse) देशों में से एक है, जहाँ पृथ्वी की कुल प्रजातियों का लगभग 8 प्रतिशत पाया जाता है। परीक्षा में जैव विविधता के स्तर और भारत की स्थिति पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
इस अध्याय में हम जैव विविधता के महत्व, हॉटस्पॉट क्षेत्रों, राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों, बायोस्फीयर रिजर्व और संरक्षण से जुड़ी परियोजनाओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे। साथ ही लुप्तप्राय प्रजातियों और उनके संरक्षण के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों जैसे CITES और रामसर सम्मेलन की जानकारी भी लेंगे। भारत के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों जैसे जिम कॉर्बेट, कान्हा, सुंदरवन और काजीरंगा के स्थान और विशेषताएँ परीक्षा में अक्सर पूछी जाती हैं। जैव विविधता का यह ज्ञान पर्यावरण संरक्षण की समग्र समझ के लिए आवश्यक है।
जैव विविधता पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह मानव को भोजन, औषधि, ईंधन, लकड़ी और आश्रय प्रदान करती है। परागण (Pollination), मृदा निर्माण, जल शुद्धिकरण और अपघटन जैसी पारिस्थितिकी सेवाएँ जैव विविधता पर निर्भर करती हैं। आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में अनेक पौधों का औषधीय उपयोग होता है, जैसे नीम, तुलसी और अश्वगंधा। जैव विविधता जितनी अधिक होती है, पारिस्थितिकी तंत्र उतना ही स्थिर और लचीला होता है। परीक्षा में पारिस्थितिकी सेवाओं और औषधीय पौधों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
जैव विविधता हॉटस्पॉट वे क्षेत्र हैं जहाँ पारिस्थितिकी तंत्र की उच्च विविधता होती है, परंतु वहाँ के प्राकृतिक आवास अत्यधिक संकट में होते हैं। विश्व में कुल 36 जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं। भारत में चार हॉटस्पॉट क्षेत्र हैं: हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट और सुंदरलैंड। इनमें पश्चिमी घाट भारत के सबसे महत्वपूर्ण जैव विविधता क्षेत्रों में से एक है, जहाँ अनेक स्थानिक (Endemic) प्रजातियाँ पाई जाती हैं। स्थानिक प्रजातियाँ वे होती हैं जो केवल एक विशेष क्षेत्र में पाई जाती हैं। परीक्षा में भारत के हॉटस्पॉट क्षेत्रों के नाम और उनके विशेष जीवों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
भारत में जैव विविधता से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारी याद रखें: भारत का राष्ट्रीय उद्यान 1936 में स्थापित किया गया था। बंगाल टाइगर भारत का राष्ट्रीय पशु है। भारत में कुल 106 से अधिक राष्ट्रीय उद्यान, 550 से अधिक वन्यजीव अभयारण्य और 18 से अधिक बायोस्फीयर रिजर्व हैं। इनमें से प्रत्येक का अपना विशेष जीव-जंतु और वनस्पति है। जैव विविधता के संरक्षण के लिए इन संख्या के आँकड़े परीक्षा में महत्वपूर्ण होते हैं, हालाँकि नवीनतम संख्या समाचारों में बदलती रहती है, इसलिए अद्यतन जानकारी रखें।
भारत के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों का ज्ञान परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है। जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखंड में है और यह भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान है, जिसकी स्थापना 1936 में हेली नेशनल पार्क के नाम से हुई थी। यह बाघों के लिए प्रसिद्ध है। सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान पश्चिम बंगाल में है और यह विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन क्षेत्र है, जहाँ रॉयल बंगाल टाइगर पाया जाता है। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भी है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम में है, जो एकसिंघी गैंडे (One-horned Rhino) के लिए विश्व प्रसिद्ध है। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश में है, जो बाघ और बारहसिंगा के लिए जाना जाता है। इन उद्यानों के स्थान और विशेष जीवों पर परीक्षा में निश्चित प्रश्न पूछे जाते हैं।
गिर राष्ट्रीय उद्यान गुजरात में है, जो एशियाई शेर का एकमात्र प्राकृतिक आवास है। बांदीपुर और नागरहोल कर्नाटक में हैं, जो बाघ संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं। रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान में है, जो बाघों के लिए प्रसिद्ध है। पेरियार राष्ट्रीय उद्यान केरल में है, जहाँ हाथी और बाघ पाए जाते हैं। दांडेली उडुपी कर्नाटक में है। सुंदरवन, काजीरंगा और जिम कॉर्बेट जैसे उद्यानों का यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में पंजीकरण भी महत्वपूर्ण है। इन सभी उद्यानों को राज्य और विशेष जीव के साथ याद करने के लिए तालिका बनाना सबसे अच्छा तरीका है।
बायोस्फीयर रिजर्व पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए स्थापित क्षेत्र हैं, जिनमें जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के विकास पर भी ध्यान दिया जाता है। भारत के प्रमुख बायोस्फीयर रिजर्व में नीलगिरी (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक), नंदा देवी (उत्तराखंड), सुंदरवन (पश्चिम बंगाल) और मन्नार की खाड़ी (तमिलनाडु) शामिल हैं। नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व भारत का पहला बायोस्फीयर रिजर्व है, जो 1986 में स्थापित हुआ। इन रिजर्वों की स्थापना वर्ष और स्थान पर परीक्षा में प्रश्न पूछे जाते हैं।
लुप्तप्राय (Endangered) प्रजातियाँ वे जीव हैं जो विलुप्ति के खतरे का सामना कर रही हैं। भारत की प्रमुख लुप्तप्राय प्रजातियों में बाघ, एशियाई शेर, एकसिंघी गैंडा, बारहसिंगा, हिम तेंदुआ, स्नो लेपर्ड, भारतीय गिद्ध और नदी डॉल्फिन शामिल हैं। भारतीय नदी डॉल्फिन (गंगा डॉल्फिन) को राष्ट्रीय जलीय जानवर घोषित किया गया है। लुप्तप्राय प्रजातियों की सूची का प्रबंधन IUCN (International Union for Conservation of Nature) द्वारा किया जाता है। IUCN की लाल सूची (Red List) में विलुप्तप्राय जीवों की स्थिति दर्ज की जाती है। परीक्षा में IUCN की भूमिका और लुप्तप्राय प्रजातियों के नाम पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
भारत में वन्यजीव संरक्षण के लिए कई परियोजनाएँ चलाई गई हैं। प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में शुरू हुआ, जिसके अंतर्गत बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रोजेक्ट एलिफेंट 1992 में शुरू हुआ। प्रोजेक्ट राइनो (गैंडा) और प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड भी संचालित किए जाते हैं। गिद्ध संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं, क्योंकि गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट आई थी। राष्ट्रीय गंगा डॉल्फिन अभियान भी चलाया जा रहा है। इन परियोजनाओं के शुरुआती वर्ष और उद्देश्यों पर परीक्षा में प्रश्न पूछे जाते हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 इन सभी प्रयासों का कानूनी आधार है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैव विविधता के संरक्षण के लिए कई सम्मेलन हुए हैं। CITES (वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सम्मेलन) 1973 में हुआ, जिसका मुख्यालय जिनेवा में है। रामसर सम्मेलन 1971 में आर्द्रभूमि (Wetlands) के संरक्षण के लिए हुआ, जिसका नाम ईरान के रामसर शहर के नाम पर रखा गया। भारत में रामसर स्थलों की संख्या 80 से अधिक है। कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डाइवर्सिटी (CBD) 1992 में रियो सम्मेलन में हुआ। भारत में जैव विविधता अधिनियम 2002 में लागू हुआ। इन सम्मेलनों और कानूनों के वर्ष पर परीक्षा में निश्चित प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए इन्हें ध्यान से याद रखें।
| राष्ट्रीय उद्यान | राज्य | विशेष जीव |
|---|---|---|
| जिम कॉर्बेट | उत्तराखंड | बाघ (पहला राष्ट्रीय उद्यान) |
| सुंदरवन | पश्चिम बंगाल | रॉयल बंगाल टाइगर |
| काजीरंगा | असम | एकसिंघी गैंडा |
| गिर | गुजरात | एशियाई शेर |
| कान्हा | मध्य प्रदेश | बाघ, बारहसिंगा |
| रणथंभौर | राजस्थान | बाघ |
| सम्मेलन / कानून | वर्ष | उद्देश्य |
|---|---|---|
| रामसर सम्मेलन | 1971 | आर्द्रभूमि संरक्षण |
| वन्यजीव संरक्षण अधिनियम | 1972 | वन्यजीव संरक्षण |
| CITES | 1973 | लुप्तप्राय प्रजातियों का व्यापार नियंत्रण |
| प्रोजेक्ट टाइगर | 1973 | बाघ संरक्षण |
| जैव विविधता अधिनियम | 2002 | जैव विविधता संरक्षण |
flowchart TD
A[जैव विविधता और संरक्षण] --> B[जैव विविधता के स्तर]
A --> C[हॉटस्पॉट]
A --> D[राष्ट्रीय उद्यान]
A --> E[लुप्तप्राय प्रजातियाँ]
A --> F[संरक्षण प्रयास]
B --> B1[आनुवंशिक]
B --> B2[प्रजाति]
B --> B3[पारिस्थितिकी तंत्र]
C --> C1[हिमालय]
C --> C2[पश्चिमी घाट]
C --> C3[इंडो-बर्मा]
D --> D1[जिम कॉर्बेट]
D --> D2[सुंदरवन]
D --> D3[काजीरंगा]
E --> E1[बाघ]
E --> E2[गैंडा]
E --> E3[गंगा डॉल्फिन]
F --> F1[प्रोजेक्ट टाइगर]
F --> F2[CITES]
F --> F3[रामसर सम्मेलन]
जैव विविधता पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ है, जिसका संरक्षण मानव अस्तित्व के लिए अनिवार्य है। इस अध्याय में हमने जैव विविधता के स्तरों, हॉटस्पॉट क्षेत्रों, प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों, लुप्तप्राय प्रजातियों और संरक्षण प्रयासों का विस्तार से अध्ययन किया। परीक्षा में राष्ट्रीय उद्यानों के स्थान, उनके विशेष जीव और संरक्षण परियोजनाओं के वर्षों पर प्रश्न पूछे जाते हैं। तालिकाओं की नियमित पुनरावृत्ति से यह खंड आसानी से तैयार किया जा सकता है। अब अगले अध्याय में हम महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनाओं का अध्ययन करेंगे।