विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – इतिहास और संस्कृति विषय-वस्तु: 20.4 भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन 1857 के विद्रोह से लेकर 1947 की स्वतंत्रता तक चला एक विशाल जन आंदोलन था। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में इस आंदोलन के विभिन्न चरणों, नेताओं, आंदोलनों और महत्वपूर्ण घटनाओं से संबंधित प्रश्न बड़ी संख्या में पूछे जाते हैं। इस अध्याय में कांग्रेस की स्थापना, उदारवादी और चरमपंथी विचारधारा, होम रूल आंदोलन, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन तथा स्वतंत्रता के अंतिम चरण का अध्ययन किया जाएगा।
आधुनिक राष्ट्रवाद का विकास 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुआ। 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना ने राष्ट्रवादी आंदोलन को संगठित रूप प्रदान किया। कांग्रेस के प्रारंभिक नेता जिन्हें उदारवादी कहा गया, संवैधानिक तरीकों और याचिकाओं के माध्यम से सुधार चाहते थे। इनमें दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता, गोपाल कृष्ण गोखले, एस. एन. बनर्जी और महादेव गोविंद रानाडे प्रमुख थे। दादाभाई नौरोजी ने "धन अपवहन सिद्धांत" (ड्रेन थ्योरी) प्रस्तुत किया।
20वीं शताब्दी के प्रारंभ में कांग्रेस के अंदर उदारवादी और चरमपंथी नेताओं के बीच मतभेद स्पष्ट हुए। लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल को "लाल-बाल-पाल" कहा जाता था, जिन्होंने स्वराज की माँग उठाई। 1907 में सूरत अधिवेशन में कांग्रेस दो गुटों में विभाजित हो गई। 1916 में लखनऊ अधिवेशन में दोनों गुट पुनः एक हो गए और मुस्लिम लीग के साथ लखनऊ समझौता हुआ। इसी काल में गांधीजी का भारतीय राजनीति में प्रवेश हुआ जिन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा के माध्यम से आंदोलन को जन आंदोलन बना दिया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को बंबई में ए. ओ. ह्यूम द्वारा की गई। इसका पहला अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी था। उदारवादी युग (1885-1905) में कांग्रेस के नेता ब्रिटिश शासन के प्रति वफादार रहे और समझौते तथा याचिकाओं के माध्यम से सुधार माँगते रहे। इन्होंने भारतीय सिविल सेवा में भारतीयों की भागीदारी, सैन्य खर्च में कमी और विधान परिषदों के विस्तार की माँग की।
महत्वपूर्ण घटनाएँ: 1892 में "भारतीय परिषद अधिनियम" पारित हुआ जिसने विधान परिषदों का विस्तार किया। दादाभाई नौरोजी ने 1892 में अंग्रेजी संसद में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 1905 में बंगाल के विभाजन के विरोध में "स्वदेशी आंदोलन" और "बहिष्कार आंदोलन" चला। स्वदेशी आंदोलन में विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार और देशी वस्तुओं का प्रयोग किया गया। यह आंदोलन बंगाल से पूरे देश में फैला।
चरमपंथी युग (1905-1919): इस काल में बाल गंगाधर तिलक ने "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" का नारा दिया। तिलक ने "गणपति उत्सव" और "शिवाजी उत्सव" की शुरुआत की तथा "केसरी" और "मराठा" नामक समाचार पत्र चलाए। लाला लाजपत राय ने "पंजाब केसरी" के नाम से लोकप्रियता पाई। बिपिन चंद्र पाल बंगाल से थे। 1907 में सूरत अधिवेशन में कांग्रेस का विभाजन हुआ। 1908 में तिलक को षड्यंत्र के आरोप में मांडले जेल (बर्मा) भेजा गया। 1909 में मिंटो-मॉर्ले सुधार अधिवेशन में "सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व" की व्यवस्था की गई जिसने मुस्लिम लीग (1906) को पृथक अधिकार दिए।
क्रांतिकारी आंदोलन: इसी काल में क्रांतिकारियों ने सशस्त्र संघर्ष का मार्ग अपनाया। अरविंदो घोष, बाल गंगाधर तिलक से प्रभावित थे। 1908 में खुदीराम बोस ने मुजफ्फरपुर में बम फेंका। मदन लाल ढींगरा ने 1909 में लंदन में कर्जन वाइली की हत्या की। रासबिहारी बोस और सचिंद्रनाथ सान्याल ने दिल्ली में वाइसराय लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंका (1912)। बंगाल में अनुशीलन समिति और पंजाब में गदर पार्टी (1913) सक्रिय थीं।
महात्मा गांधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे, जहाँ उन्होंने 1906 में "सत्याग्रह" की अवधारणा का विकास किया। भारत में उनका पहला सत्याग्रह 1917 में चंपारण (बिहार) में हुआ जो नील की खेती के विरोध में था। 1918 में अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन और खेड़ा (गुजरात) में कर वसूली के विरोध में सत्याग्रह किया गया। 1919 में राउलट एक्ट के विरोध में गांधीजी ने "सत्याग्रह" का आह्वान किया परंतु जलियांवाला बाग नरसंहार के बाद उन्होंने आंदोलन वापस ले लिया।
असहयोग आंदोलन (1920-1922): 1920 में कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में कांग्रेस ने गांधीजी के असहयोग कार्यक्रम को अपनाया। इस आंदोलन में स्कूलों, कॉलेजों और अदालतों का बहिष्कार, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और खिलाफत आंदोलन का समर्थन शामिल था। 1921 में गांधीजी को "राष्ट्रपिता" की संज्ञा देते हुए पूरे देश ने सहयोग किया। फरवरी 1922 में चौरी-चौरा (उत्तर प्रदेश) में हिंसा होने के बाद गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया। 1922 में ही गांधीजी को राजद्रोह के आरोप में 6 वर्ष की जेल हुई।
सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-1934): 1928 में कांग्रेस ने साइमन कमीशन का विरोध किया। 1929 में लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस ने "पूर्ण स्वराज" का प्रस्ताव पारित किया और 26 जनवरी 1930 को पहली बार "स्वतंत्रता दिवस" मनाया गया। 1930 में गांधीजी ने नमक कानून तोड़ने के लिए "दांडी यात्रा" की जो साबरमती आश्रम से दांडी (240 मील) तक चली। 1931 में गांधी-इरविन समझौते के बाद दूसरा गोलमेज सम्मेलन (1931) लंदन में हुआ। 1932 में पूना समझौता गांधीजी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के बीच हुआ।
भारत छोड़ो आंदोलन (1942): 8 अगस्त 1942 को बंबई में कांग्रेस ने "भारत छोड़ो प्रस्ताव" पारित किया और गांधीजी ने "करो या मरो" का नारा दिया। इस आंदोलन में गांधीजी सहित सभी प्रमुख नेता जेल में डाल दिए गए। आंदोलन का जन आधार बहुत व्यापक था और जनता ने रेलवे, डाकघर और सरकारी भवनों पर हमले किए। 1942 में ही सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में "आज़ाद हिंद फौज" की स्थापना की और जापान की मदद से भारत की ओर बढ़े। उन्होंने "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा" का नारा दिया।
द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) के बाद ब्रिटेन की शक्ति कमजोर हो गई और भारत में स्वतंत्रता की माँग तीव्र हो गई। 1945 में शिमला सम्मेलन विफल हुआ। 1946 में "कैबिनेट मिशन" भारत आया जिसने त्रि-स्तरीय योजना प्रस्तुत की। 1946 में कांग्रेस ने "नेहरू की अध्यक्षता में अंतरिम सरकार" का गठन किया। 1946 में "रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह" (बंबई) ने ब्रिटिश शासन पर दबाव बढ़ाया। 1947 में लॉर्ड माउंटबेटन ने "माउंटबेटन योजना" प्रस्तुत की जिसके आधार पर भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ।
महत्वपूर्ण घटनाएँ 1939-1947: 1939 में कांग्रेस ने द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटेन की मदद से इनकार किया और "पूर्ण स्वतंत्रता" की माँग की। 1935 में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट पारित हुआ जिसके तहत प्रांतीय स्वायत्तता और प्रांतीय विधानसभाओं के चुनाव हुए। 1937 के चुनावों में कांग्रेस ने 11 में से 8 प्रांतों में सरकार बनाई। 1939 में कांग्रेस ने अपनी सरकारें त्याग दीं। इसी वर्ष 22 दिसंबर 1939 को कांग्रेस ने "मुक्ति दिवस" मनाया।
विभाजन और स्वतंत्रता: 3 जून 1947 की योजना के अनुसार सीमा आयोग ने सिरिल रैडक्लिफ की अध्यक्षता में भारत और पाकिस्तान की सीमाएँ निर्धारित कीं। 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान और 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। जवाहरलाल नेहरू ने 15 अगस्त 1947 को संसद भवन के प्रांगण से "ट्रिस्ट विद डेस्टिनी" भाषण दिया। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू बने। भारत की संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकार किया जो 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ।
महत्वपूर्ण सत्याग्रह और नारे: गांधीजी के चंपारण (1917), खेड़ा (1918), अहमदाबाद (1918) सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन (1920), सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930), और भारत छोड़ो आंदोलन (1942) प्रमुख चरण थे। भगत सिंह ने "इंकलाब जिंदाबाद" का नारा दिया। 1929 में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका। 1931 में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को लाहौर जेल में फांसी दी गई। सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस की दो बार (1938, 1939) अध्यक्षता की और 1939 में फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की।
| आंदोलन | वर्ष | मुख्य नारा/विशेषता |
|---|---|---|
| बंगाल विभाजन विरोध | 1905 | स्वदेशी और बहिष्कार |
| होम रूल आंदोलन | 1916 | तिलक और बेसेंट |
| असहयोग आंदोलन | 1920-1922 | स्कूल-अदालत बहिष्कार |
| सविनय अवज्ञा आंदोलन | 1930-1934 | दांडी यात्रा, नमक कानून |
| भारत छोड़ो आंदोलन | 1942 | करो या मरो |
| भारत स्वतंत्र | 15 अगस्त 1947 | ट्रिस्ट विद डेस्टिनी |
| नेता | नारा / योगदान |
|---|---|
| बाल गंगाधर तिलक | स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है |
| गांधीजी | करो या मरो, सत्याग्रह |
| भगत सिंह | इंकलाब जिंदाबाद |
| सुभाष चंद्र बोस | तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा |
| जवाहरलाल नेहरू | ट्रिस्ट विद डेस्टिनी |
| दादाभाई नौरोजी | धन अपवहन सिद्धांत |
flowchart TD
A[भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन] --> B[1885 कांग्रेस स्थापना]
A --> C[1905 स्वदेशी आंदोलन]
A --> D[गांधी युग 1919-1947]
A --> E[स्वतंत्रता 1947]
D --> D1[1917 चंपारण सत्याग्रह]
D --> D2[1920 असहयोग आंदोलन]
D --> D3[1930 सविनय अवज्ञा]
D --> D4[1942 भारत छोड़ो]
D --> D5[दांडी यात्रा 1930]
E --> E1[विभाजन 1947]
E --> E2[नेहरू प्रधानमंत्री]
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन 1885 में कांग्रेस की स्थापना से लेकर 1947 की स्वतंत्रता तक विभिन्न चरणों में विकसित हुआ। उदारवादी युग की याचिकाओं से शुरू होकर चरमपंथी नेताओं की स्वराज की माँग, क्रांतिकारियों का सशस्त्र संघर्ष और अंततः गांधीजी के सत्याग्रह तथा अहिंसा के मार्ग ने आंदोलन को जन आंदोलन बना दिया। असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलन ने ब्रिटिश शासन को कमजोर किया और 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ। इस अध्याय में हमने आंदोलनों के चरण, नेताओं के नारे और महत्वपूर्ण तिथियों का विस्तृत अध्ययन किया। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा के लिए इन तथ्यों की तालिकाबद्ध पुनरावृत्ति आवश्यक है।