विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – समसामयिकी और पर्यावरण विषय-वस्तु: 23.10 विज्ञान और तकनीक समसामयिकी
विज्ञान और तकनीक समसामयिकी सामान्य जागरूकता का वह खंड है जिसमें विज्ञान के नवीनतम आविष्कारों, तकनीकी उपलब्धियों, अंतरिक्ष मिशनों, रक्षा तकनीक, सुपरकंप्यूटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और नई तकनीकों से संबंधित जानकारी शामिल होती है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में विज्ञान और तकनीक से जुड़े प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इसरो के मिशन, इसरो के प्रमुख केंद्र, सुपरकंप्यूटर के नाम, परमाणु ऊर्जा, रक्षा प्रणालियाँ और नई तकनीकी पहलें इस खंड के प्रमुख विषय हैं। इन तथ्यों का अद्यतन ज्ञान परीक्षा में सीधे अंक दिलाता है।
विज्ञान और तकनीक के प्रश्नों को हल करने के लिए वर्ष, नाम और स्थान तीनों की जानकारी आवश्यक है। उदाहरण के लिए, भारत का सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर AIरावत (AIRAWAT) है, जो चीन के बाद विश्व का सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर है। भारतीय सुपरकंप्यूटर मिशन के तहत परम (PARAM) श्रृंखला के सुपरकंप्यूटर विकसित किए गए हैं। इसी प्रकार भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस, स्वदेशी टीका कोवैक्सीन और 5G तकनीक से जुड़ी जानकारी परीक्षा में पूछी जाती है। इन तकनीकी उपलब्धियों की जानकारी को नियमित रूप से अद्यतन रखना आवश्यक है, क्योंकि हर वर्ष नए विकास होते रहते हैं।
इस अध्याय में हम अंतरिक्ष तकनीक और इसरो के केंद्रों, सुपरकंप्यूटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा तकनीक, परमाणु ऊर्जा, नई ऊर्जा तकनीक और डिजिटल सेवाओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे। इसके अलावा हाल के वर्षों में विकसित स्वदेशी तकनीकों जैसे UPI, डिजिलॉकर, 5G नेटवर्क और स्मार्ट सिटी की जानकारी भी लेंगे। साथ ही विज्ञान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयासों जैसे सर्न (CERN) और क्वांटम कंप्यूटिंग की मूलभूत जानकारी भी लेंगे। यह अध्याय रेलवे टेक्नीशियन जैसी तकनीकी नौकरियों के उम्मीदवारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि तकनीकी समझ ही इस परीक्षा का मूल आधार है।
इसरो (ISRO) की स्थापना 1969 में हुई और इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है। इसरो के प्रमुख केंद्रों में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) तिरुवनंतपुरम, श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण केंद्र (SDSC-SHAR) आंध्र प्रदेश, विक्रम साराभाई के अलावा सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र भी श्रीहरिकोटा में है। उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए उपयोग होने वाले प्रक्षेपण यानों में PSLV (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान), GSLV (भू-स्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान) और LVM3 (प्रक्षेपण यान मार्क-3) शामिल हैं। GSLV-मार्क-3 को चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण के लिए उपयोग किया गया। इन केंद्रों और यानों के नाम पर परीक्षा में प्रश्न पूछे जाते हैं। PSLV को इसरो का 'कार्यशाला घोड़ा' (Workhorse) कहा जाता है।
भारत का पहला प्रक्षेपण यान SLV-3 था, जो 1980 में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित हुआ। इसके बाद ASLV, PSLV और GSLV विकसित किए गए। PSLV ने चंद्रयान-1, मंगलयान और अनेक विदेशी उपग्रहों को प्रक्षेपित किया है। इसरो द्वारा विकसित नेविगेशन प्रणाली NavIC (नैविक) भारत की स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन प्रणाली है, जो अमेरिकी GPS का विकल्प है। NavIC का पूर्ण रूप 'Navigation with Indian Constellation' है। इन तकनीकी प्रणालियों की जानकारी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इसरो के वैज्ञानिकों में विक्रम साराभाई, सतीश धवन और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का योगदान सबसे प्रमुख है।
अंतरिक्ष के क्षेत्र में हाल के वर्षों की उपलब्धियों में चंद्रयान-3 की सफलता, आदित्य-L1 का प्रक्षेपण और भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 शामिल हैं। भारत ने वर्ष 2023 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने के उद्देश्य से भारतीय अंतरिक्ष नीति को मंजूरी दी। इसके अंतर्गत IN-SPACe और NSIL (न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड) की भूमिका बढ़ाई गई है। मिशन गगनयान भारत का मानवयुक्त अंतरिक्ष कार्यक्रम है। इन नीतियों और मिशनों की जानकारी परीक्षा में निश्चित रूप से पूछी जाती है, इसलिए इन्हें ध्यान से पढ़ें।
सुपरकंप्यूटर उच्च गति की गणना करने वाले कंप्यूटर होते हैं, जो विज्ञान, मौसम पूर्वानुमान और अनुसंधान में उपयोग होते हैं। भारत का सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर AIरावत (AIRAWAT) है, जो विश्व में चीन के सुपरकंप्यूटर के बाद सबसे तेज़ माना जाता है। भारतीय सुपरकंप्यूटर मिशन के तहत परम (PARAM) श्रृंखला के सुपरकंप्यूटर विकसित किए गए हैं, जैसे PARAM Siddhi और PARAM 8000। परम 8000 भारत का पहला स्वदेशी सुपरकंप्यूटर था, जिसे विकसित करने का श्रेय डॉ. विजय भाटकर और उनकी टीम को है। सुपरकंप्यूटरों की गति को फ्लॉप्स (FLOPS) में मापा जाता है। इन तथ्यों पर परीक्षा में प्रश्न पूछे जाते हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence - AI) कंप्यूटरों को मानव जैसी सोचने और सीखने की क्षमता प्रदान करने वाली तकनीक है। AI के उपयोग से चैटबॉट, स्वचालित भाषा अनुवाद और चेहरे की पहचान जैसी सेवाएँ संभव हुई हैं। भारत ने राष्ट्रीय AI रणनीति बनाई है और AI को शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में लागू करने के लिए पहलें की हैं। मशीन लर्निंग (ML) AI का एक उपसमूह है, जिसमें कंप्यूटर डेटा से सीखते हैं। भारत सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए भारतAI (BharatAI) जैसी पहलें भी शुरू की हैं। परीक्षा में AI और ML की परिभाषाएँ तथा भारतीय पहलों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
नई तकनीकों में 5G नेटवर्क, क्वांटम कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) प्रमुख हैं। भारत में 5G सेवाएँ अक्टूबर 2022 से शुरू हुईं, जो पिछले नेटवर्कों से अधिक तेज़ हैं। क्वांटम कंप्यूटिंग एक ऐसी तकनीक है जो क्वांटम भौतिकी के सिद्धांतों पर आधारित है और अत्यधिक जटिल गणनाओं को तेज़ी से हल कर सकती है। भारत ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन को मंजूरी दी है। ब्लॉकचेन एक सुरक्षित डिजिटल लेजर प्रणाली है, जिसका उपयोग क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल रिकॉर्ड में होता है। इन तकनीकों की परिभाषाएँ और भारतीय पहलें परीक्षा में पूछी जाती हैं, इसलिए इन्हें समझकर याद करें।
रक्षा तकनीक के क्षेत्र में भारत ने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस, मिसाइल प्रणाली अग्नि-5, पृथ्वी और ब्रह्मोस तथा परमाणु पनडुब्बी INS अरिहंत का विकास किया है। तेजस भारत का स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान है, जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने विकसित किया है। अग्नि-5 की मारक क्षमता 5000 किलोमीटर से अधिक है। ब्रह्मोस मिसाइल भारत-रूस संयुक्त परियोजना है। INS अरिहंत भारत की पहली स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी है। रक्षा अनुसंधान संगठन DRDO का मुख्यालय नई दिल्ली में है। इन रक्षा प्रणालियों की जानकारी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के प्रमुख परमाणु संयंत्र तारापुर (महाराष्ट्र), कुडनकुलम (तमिलनाडु), काकरापार (गुजरात) और नरौरा (उत्तर प्रदेश) में स्थित हैं। तारापुर भारत का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। कुडनकुलम संयंत्र भारत-रूस सहयोग से बना है। भारत में परमाणु ऊर्जा की स्थापना डॉ. होमी भाभा ने की, जिन्हें भारतीय परमाणु कार्यक्रम का जनक कहा जाता है। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) मुंबई में है। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) परमाणु सुरक्षा की निगरानी करता है। इन केंद्रों और वैज्ञानिकों पर परीक्षा में प्रश्न पूछे जाते हैं।
डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) है, जिसे भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने विकसित किया है। UPI ने डिजिटल भुगतान को आम जनता तक पहुँचाया। डिजिलॉकर डिजिटल दस्तावेज़ों को संग्रहित करने की सुविधा है। आधार विश्व की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली है। भारत में 5G सेवाएँ अक्टूबर 2022 में शुरू हुईं। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 100 शहरों को स्मार्ट शहर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन डिजिटल पहलों की जानकारी परीक्षा में पूछी जाती है। विज्ञान और तकनीक के इस अध्याय को तैयार करने के लिए सभी तकनीकी नाम, वर्ष और स्थान को तालिका के रूप में व्यवस्थित करके पढ़ना सबसे प्रभावी तरीका है।
| तकनीक / वस्तु | विवरण |
|---|---|
| AIरावत (AIRAWAT) | भारत का सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर |
| PARAM 8000 | भारत का पहला स्वदेशी सुपरकंप्यूटर |
| PSLV | ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान |
| NavIC | भारतीय स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली |
| UPI | डिजिटल भुगतान प्रणाली |
| तेजस | स्वदेशी लड़ाकू विमान |
| INS अरिहंत | स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी |
| संयंत्र | राज्य |
|---|---|
| तारापुर | महाराष्ट्र |
| कुडनकुलम | तमिलनाडु |
| काकरापार | गुजरात |
| नरौरा | उत्तर प्रदेश |
flowchart TD
A[विज्ञान और तकनीक समसामयिकी] --> B[अंतरिक्ष तकनीक]
A --> C[सुपरकंप्यूटर]
A --> D[AI और नई तकनीकें]
A --> E[रक्षा तकनीक]
A --> F[परमाणु ऊर्जा]
A --> G[डिजिटल सेवाएँ]
B --> B1[ISRO]
B --> B2[चंद्रयान-3]
B --> B3[NavIC]
C --> C1[AIRAWAT]
C --> C2[PARAM श्रृंखला]
D --> D1[AI]
D --> D2[5G]
D --> D3[क्वांटम कंप्यूटिंग]
E --> E1[तेजस]
E --> E2[अग्नि-5]
F --> F1[होमी भाभा]
F --> F2[BARC]
G --> G1[UPI]
G --> G2[आधार]
विज्ञान और तकनीक समसामयिकी आधुनिक भारत की उपलब्धियों का दर्पण है, जिसमें अंतरिक्ष, सुपरकंप्यूटर, रक्षा, परमाणु ऊर्जा और डिजिटल सेवाओं की तकनीकी प्रगति शामिल है। इस अध्याय में हमने इसरो के केंद्रों, प्रक्षेपण यानों, सुपरकंप्यूटरों, AI, रक्षा प्रणालियों, परमाणु संयंत्रों और UPI जैसी डिजिटल सेवाओं का विस्तार से अध्ययन किया। परीक्षा में तकनीकी नामों, वर्षों और स्थानों पर प्रश्न पूछे जाते हैं। तालिकाओं की नियमित पुनरावृत्ति और नवीनतम तकनीकी समाचारों के अध्ययन से यह खंड पूर्ण अंक दिलाने में सक्षम है। इस प्रकार पूरा अध्याय 'सामान्य जागरूकता – समसामयिकी और पर्यावरण' सफलतापूर्वक सम्पन्न होता है।