विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – इतिहास और संस्कृति विषय-वस्तु: 20.8 वास्तुकला और विरासत
भारतीय वास्तुकला विश्व की सबसे प्राचीन और विविध वास्तुकलाओं में से एक है। सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना से लेकर मुगल काल की भव्य इमारतों तक, भारतीय स्थापत्य ने अनेक शैलियों का विकास किया। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में भारतीय स्थापत्य, महत्वपूर्ण स्मारक, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और इनके निर्माताओं से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इस अध्याय में प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक वास्तुकला तथा भारत के प्रमुख धरोहर स्थलों का अध्ययन किया जाएगा।
भारतीय वास्तुकला की मुख्य शैलियों में नागर, द्रविड़ और वेसर शैली शामिल हैं। नागर शैली उत्तर भारत में प्रचलित है जिसकी विशेषता ऊँचे शिखर हैं। द्रविड़ शैली दक्षिण भारत में प्रचलित है जिसमें गोपुरम (मंदिर के प्रवेश द्वार पर ऊँचे टॉवर) होते हैं। वेसर शैली दोनों का मिश्रण है। मध्यकाल में इंडो-इस्लामिक शैली का विकास हुआ जिसमें मेहराब, गुंबद और मीनारें प्रमुख हैं। मुगल काल में यह शैली अपने चरम पर पहुँची।
भारत में वर्तमान में 40 से अधिक स्थल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं। इनमें ताजमहल, लाल किला, कुतुब मीनार, अजंता-एलोरा की गुफाएँ, सांची का स्तूप, महाबलीपुरम, हम्पी, खजुराहो और जयपुर शामिल हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) इन धरोहरों के संरक्षण का कार्य करता है। इस अध्याय में इन सभी स्थलों की स्थापत्य विशेषताओं, निर्माताओं और यूनेस्को मान्यता के वर्षों का अध्ययन करेंगे।
प्राचीन भारत की वास्तुकला सिंधु घाटी सभ्यता से प्रारंभ होती है। मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानागार (ग्रेट बाथ), हड़प्पा की पकी ईंटों की नगर योजना और धौलावीरा की जल संचयन प्रणाली प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। सिंधु सभ्यता के लोग अभेद्य नगर नियोजन और जल निकासी व्यवस्था के लिए प्रसिद्ध थे।
मौर्य वास्तुकला: मौर्य काल में स्तंभों, स्तूपों और राजमहलों का निर्माण हुआ। अशोक के स्तंभों में सारनाथ का सिंह स्तंभ (राष्ट्रीय प्रतीक) और लौरिया-नंदनगढ़ का स्तंभ प्रसिद्ध हैं। अशोक ने सांची और सारनाथ में बौद्ध स्तूपों का निर्माण कराया। सांची का स्तूप मध्य प्रदेश में स्थित है और इसकी गोलाकार संरचना बौद्ध धर्म का प्रतीक है।
गुप्त वास्तुकला: गुप्त काल को "मंदिर निर्माण का स्वर्ण युग" कहा जाता है। इस काल में दशावतार मंदिर (देवगढ़), बोधगया का महाबोधि मंदिर और उदयगिरि की गुफाएँ बनीं। गुप्त काल में मंदिरों की नागर शैली का विकास हुआ। इसी काल में अजंता और एलोरा की गुफाओं का निर्माण प्रारंभ हुआ।
द्रविड़ वास्तुकला (दक्षिण भारत): पल्लव वंश के काल में महाबलीपुरम (मामल्लपुरम) के रथ मंदिर बने जिन्हें सात पगोडा कहा जाता है। चोल वंश के राजराजा प्रथम ने तंजावुर (तंजौर) का बृहदेश्वर मंदिर बनवाया जो यूनेस्को विश्व धरोहर है। राष्ट्रकूट वंश के कृष्ण प्रथम ने एलोरा का कैलास मंदिर बनवाया जो एक ही चट्टान से काटकर बनाया गया है और विश्व की सबसे बड़ी एकाश्मक (एक चट्टान से बनी) संरचना है। होयसल वंश के बेलूर और हलेबिड मंदिर अपनी नाजुक नक्काशी के लिए प्रसिद्ध हैं।
मध्य भारत: खजुराहो (मध्य प्रदेश) के चंदेल वंश के मंदिरों में कंदारिया महादेव मंदिर सबसे प्रसिद्ध है जो यूनेस्को विश्व धरोहर है। कोणार्क (ओडिशा) का सूर्य मंदिर अपनी रथाकृति (पहियों वाले रथ) के लिए प्रसिद्ध है और इसे "ब्लैक पगोडा" कहा जाता है। कोणार्क मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर है।
मध्यकालीन भारत में इंडो-इस्लामिक शैली की वास्तुकला का विकास हुआ जिसमें मेहराब, गुंबद, मीनार और जालीदार नक्काशी प्रमुख हैं। दिल्ली सल्तनत के काल में कुतुब मीनार (दिल्ली) का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1193 में प्रारंभ कराया और इल्तुतमिश ने पूरा करवाया। कुतुब मीनार 73 मीटर ऊँची विश्व की सबसे ऊँची ईंट की मीनार है। अलाइ दरवाजा अलाउद्दीन खिलजी का निर्माण है। तुगलक काल में तुगलकाबाद किला बना।
लोदी वंश की वास्तुकला: लोदी वंश के काल में लोदी उद्यान (दिल्ली) में मकबरे बने। इस काल में शीशा लगाकर रंगीन पत्थरों का उपयोग हुआ।
मुगल वास्तुकला: मुगल काल भारतीय वास्तुकला का स्वर्ण युग है। बाबर ने बागों का निर्माण कराया। हुमायूँ का मकबरा (दिल्ली, 1570) मुगल काल का पहला महत्वपूर्ण मकबरा है। अकबर ने आगरा किला और फतेहपुर सीकरी (1571) का निर्माण कराया। फतेहपुर सीकरी में बुलंद दरवाजा (54 मीटर ऊँचा) गुजरात विजय की स्मृति में बनाया गया। सलीम चिश्ती का मकबरा भी फतेहपुर सीकरी में है।
शाहजहाँ की वास्तुकला: शाहजहाँ के काल को मुगल वास्तुकला का चरम कहा जाता है। उसने ताजमहल (आगरा, 1631-1653) बनवाया जो मुमताज महल की स्मृति में सफेद संगमरमर से बना है और विश्व के सात अजूबों में शामिल है। उसने दिल्ली में लाल किला और जामा मस्जिद, आगरा में मोती मस्जिद का निर्माण कराया। ताजमहल को यूनेस्को ने 1983 में विश्व धरोहर घोषित किया। शाहजहाँ ने "मयूर सिंहासन" भी बनवाया। शालीमार बाग (कश्मीर) भी इसी काल का है।
अन्य मध्यकालीन स्मारक: गोल गुंबज (बीजापुर) विश्व के सबसे बड़े गुंबदों में से एक है। चारमीनार (हैदराबाद) कुली कुतुब शाह का निर्माण है। गोलकुंडा किला हैदराबाद की प्रसिद्ध ध्वनि-विज्ञान वाली इमारत है। विजयनगर के हम्पी में वित्तला मंदिर का "संगीत स्तंभ" प्रसिद्ध है। मराठा काल में पेशवाओं ने शनिवारवाड़ा (पुणे) बनवाया।
आधुनिक भारत की वास्तुकला में ब्रिटिश शासन के दौरान यूरोपीय शैली का प्रभाव दिखाई दिया। एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने नई दिल्ली का राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट का निर्माण कराया। राष्ट्रपति भवन (1931) विश्व के सबसे बड़े राष्ट्रपति आवासों में से एक है। इंडिया गेट प्रथम विश्व युद्ध के सैनिकों की स्मृति में बना है। संसद भवन भी इसी काल का निर्माण है।
प्रमुख यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (भारत):
अजंता और एलोरा की गुफाएँ (महाराष्ट्र, 1983): अजंता की 29 गुफाएँ बौद्ध धर्म से संबंधित हैं और भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध हैं। एलोरा की 34 गुफाओं में हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म के मंदिर हैं; कैलास मंदिर इनमें सबसे प्रसिद्ध है।
कुतुब मीनार (दिल्ली, 1993): लोहे का स्तंभ (इसका जंग नहीं लगता) कुतुब परिसर में स्थित है। यह चौथी शताब्दी का है।
लाल किला (दिल्ली, 2007): शाहजहाँ का निर्माण, 1638-1648 में बना। हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री यहाँ ध्वज फहराते हैं।
हम्पी (कर्नाटक, 1986): विजयनगर साम्राज्य की राजधानी। वित्तला मंदिर और स्टोन चैरियट (पत्थर का रथ) यहाँ के प्रमुख आकर्षण हैं।
महाबलीपुरम (तमिलनाडु, 1984): पल्लव वंश के रथ मंदिर (सात पगोडा) और तट मंदिर।
खजुराहो (मध्य प्रदेश, 1986): चंदेल वंश के मंदिर, कंदारिया महादेव मंदिर प्रसिद्ध।
कोणार्क सूर्य मंदिर (ओडिशा, 1984): रथाकृति मंदिर, ब्लैक पगोडा।
सांची स्तूप (मध्य प्रदेश, 1989): अशोक द्वारा प्रारंभ किया गया बौद्ध स्तूप।
जयपुर (राजस्थान, 2019): 'पिंक सिटी' के रूप में विश्व धरोहर घोषित। हवा महल, जंतर मंतर (2010) जयपुर में है।
चंडीगढ़ कैपिटल कॉम्प्लेक्स (2016): ले कोर्बूजिए द्वारा डिज़ाइन किया गया।
रानी की वाव (गुजरात, 2014): पाटन का सीढ़ीदार कुआँ, सोलंकी वंश का निर्माण।
विश्व धरोहर के रूप में नई दिल्ली का अहमदाबाद (2017) भारत का पहला सिटी विश्व धरोहर स्थल है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की स्थापना 1861 में अलेक्जेंडर कनिंघम द्वारा की गई थी।
| स्मारक | निर्माता | काल |
|---|---|---|
| कुतुब मीनार | कुतुबुद्दीन ऐबक/इल्तुतमिश | 1193 |
| ताजमहल | शाहजहाँ | 1631-1653 |
| लाल किला | शाहजहाँ | 1638-1648 |
| फतेहपुर सीकरी | अकबर | 1571 |
| बृहदेश्वर मंदिर | राजराजा प्रथम | चोल काल |
| कैलास मंदिर | कृष्ण प्रथम | राष्ट्रकूट काल |
| स्थल | राज्य | वर्ष |
|---|---|---|
| ताजमहल | उत्तर प्रदेश | 1983 |
| अजंता-एलोरा गुफाएँ | महाराष्ट्र | 1983 |
| महाबलीपुरम | तमिलनाडु | 1984 |
| हम्पी | कर्नाटक | 1986 |
| खजुराहो | मध्य प्रदेश | 1986 |
| सांची स्तूप | मध्य प्रदेश | 1989 |
| कुतुब मीनार | दिल्ली | 1993 |
| लाल किला | दिल्ली | 2007 |
flowchart TD
A[वास्तुकला और विरासत] --> B[प्राचीन वास्तुकला]
A --> C[मध्यकालीन वास्तुकला]
A --> D[मुगल वास्तुकला]
A --> E[विश्व धरोहर]
B --> B1[सिंधु सभ्यता]
B --> B2[अशोक के स्तूप]
B --> B3[गुप्त मंदिर]
C --> C1[कुतुब मीनार]
C --> C2[चारमीनार]
D --> D1[ताजमहल]
D --> D2[लाल किला]
D --> D3[फतेहपुर सीकरी]
E --> E1[अजंता-एलोरा]
E --> E2[सांची]
E --> E3[हम्पी]
भारतीय वास्तुकला सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर आधुनिक काल तक विभिन्न शैलियों में विकसित हुई है। प्राचीन काल के स्तूप और मंदिर, मध्यकाल की इंडो-इस्लामिक इमारतें और मुगल काल के ताजमहल जैसे अद्वितीय स्मारक भारत की समृद्ध विरासत के प्रतीक हैं। यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त 40 से अधिक धरोहर स्थलों ने इस विरासत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई है। इस अध्याय में हमने प्रमुख स्मारकों, उनके निर्माताओं, स्थापत्य शैलियों और धरोहर स्थलों का विस्तृत अध्ययन किया। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा के लिए स्मारक-निर्माता और धरोहर-राज्य-वर्ष के मिलान वाले प्रश्नों की तालिकाबद्ध पुनरावृत्ति अत्यंत आवश्यक है।