विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: गणित – अंकगणित विषय-वस्तु: 2.7 समय और कार्य
समय और कार्य (Time and Work) अंकगणित का वह विषय है जिसमें किसी कार्य को पूरा करने में लगने वाले समय, कार्य करने वाले व्यक्तियों की संख्या तथा कार्य की मात्रा के बीच के संबंध का अध्ययन किया जाता है। इस विषय की मूल अवधारणा यह है कि कार्य और समय आनुपातिक हैं, अर्थात यदि किसी कार्य को पूरा करने के लिए अधिक लोग कार्य करें तो समय घट जाता है, और कम लोग कार्य करें तो समय बढ़ जाता है। इसे व्युत्क्रमानुपात का सिद्धांत कहते हैं। इसी प्रकार यदि किसी व्यक्ति को एक कार्य पूरा करने में X दिन लगते हैं, तो वह एक दिन में कार्य का 1/X भाग करता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में समय और कार्य के प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं, जिससे यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
समय और कार्य के प्रश्नों को हल करने का सबसे सरल तरीका प्रति दिन किए गए कार्य का भिन्न निकालना है। यदि A किसी कार्य को X दिनों में और B उसी कार्य को Y दिनों में पूरा करता है, तो A का एक दिन का कार्य 1/X और B का एक दिन का कार्य 1/Y है। दोनों मिलकर एक दिन में (1/X + 1/Y) कार्य करते हैं, और कुल कार्य XY/(X+Y) दिनों में पूरा होता है। इसी प्रकार तीन या अधिक व्यक्तियों के लिए 1/X + 1/Y + 1/Z का उपयोग किया जाता है। इन भिन्नों को जोड़ने से पहले हर का LCM लेना आवश्यक होता है, जिससे गणना सरल हो जाती है।
रेलवे परीक्षा की दृष्टि से इस विषय में तीन प्रकार के प्रश्न मुख्य रूप से पूछे जाते हैं। पहला, जब A और B के अलग-अलग समय ज्ञात हों और संयुक्त समय पूछा जाए। दूसरा, जब संयुक्त समय और एक व्यक्ति का समय ज्ञात हो तो दूसरे व्यक्ति का समय निकालना। तीसरा, M1 D1 H1 = M2 D2 H2 जैसे अनुपात पर आधारित प्रश्न, जहाँ M व्यक्तियों की संख्या, D दिन और H घंटे हैं। इसके अतिरिक्त वेतन या मजदूरी का बंटवारा किए गए कार्य के अनुपात में किया जाता है। इन अवधारणाओं की पूरी समझ ही परीक्षा में अंक दिलाने वाली होती है।
समय और कार्य का मूल सूत्र है: कार्य = दर × समय। यदि कोई व्यक्ति किसी कार्य को D दिनों में पूरा करता है, तो उसकी एक दिन की कार्य दर 1/D होती है। इसके विपरीत यदि कोई व्यक्ति एक दिन में 1/D कार्य करता है, तो वह D दिनों में पूरा कार्य करेगा। यही संकल्पना प्रश्नों के हर रूप का आधार है। व्यक्तियों की संख्या बढ़ाने पर समय घटता है, इसलिए M1 × D1 = M2 × D2 का संबंध लागू होता है। यदि कार्य की मात्रा में भिन्नता हो तो M1 D1 / W1 = M2 D2 / W2 सूत्र उपयोग होता है।
उदाहरण 1: A किसी कार्य को 12 दिनों में और B उसी कार्य को 18 दिनों में पूरा करता है। दोनों मिलकर कार्य कितने दिनों में पूरा करेंगे?
हल: A का एक दिन का कार्य = 1/12, B का एक दिन का कार्य = 1/18। संयुक्त कार्य = 1/12 + 1/18 = (3 + 2)/36 = 5/36। अतः समय = 36/5 = 7.2 दिन।
उदाहरण 2: A और B मिलकर एक कार्य 6 दिनों में पूरा करते हैं। अकेला A इसे 10 दिनों में पूरा करता है। अकेला B कितने दिनों में पूरा करेगा?
हल: संयुक्त एक दिन का कार्य = 1/6, A का = 1/10। B का एक दिन का कार्य = 1/6 - 1/10 = (5 - 3)/30 = 2/30 = 1/15। अतः B अकेले 15 दिनों में कार्य पूरा करेगा।
जब किसी कार्य में व्यक्तियों की संख्या, कार्य के दिनों और प्रतिदिन के घंटों में परिवर्तन किया जाता है, तो M1 D1 H1 = M2 D2 H2 के सिद्धांत का उपयोग किया जाता है। इस सूत्र में M व्यक्तियों की संख्या, D दिनों की संख्या और H प्रतिदिन कार्य के घंटे हैं। यदि कार्य की मात्रा भी भिन्न हो, तो M1 D1 H1 / W1 = M2 D2 H2 / W2 लागू होता है। इस प्रकार के प्रश्नों में पहले सभी ज्ञात मानों को सूत्र में रखकर अज्ञात मान निकाला जाता है।
उदाहरण 3: 10 व्यक्ति किसी कार्य को 8 दिनों में पूरा करते हैं। इसी कार्य को 16 व्यक्ति कितने दिनों में पूरा करेंगे?
हल: 10 × 8 = 16 × D, अतः D = 80/16 = 5 दिन।
उदाहरण 4: 15 व्यक्ति प्रतिदिन 6 घंटे कार्य करके एक कार्य 20 दिनों में पूरा करते हैं। 20 व्यक्ति प्रतिदिन 8 घंटे कार्य करके उसी कार्य को कितने दिनों में पूरा करेंगे?
हल: 15 × 20 × 6 = 20 × D × 8, अतः D = (15 × 20 × 6)/(20 × 8) = 1800/160 = 11.25 दिन।
जब कई व्यक्ति मिलकर कार्य करते हैं, तो अर्जित मजदूरी या वेतन का वितरण उनके द्वारा किए गए कार्य के अनुपात में किया जाता है। यदि A एक कार्य 6 दिनों में और B 12 दिनों में करता है, तो A की कार्य दर B से दोगुनी है, अतः वेतन भी दोगुना मिलेगा। सामान्यतः कार्य की तुलना में दर के अनुपात को उल्टा लिया जाता है; यदि A का समय B के समय का आधा है, तो A की दर B की दर की दोगुनी होगी। कुछ प्रश्नों में एक ही कार्य की तुलना में अलग-अलग व्यक्तियों के लिए आधे या दो गुने समय का उपयोग भी किया जाता है।
उदाहरण 5: A और B मिलकर एक कार्य 8 दिनों में पूरा करते हैं और कुल वेतन 1,800 रुपये मिलता है। A अकेला कार्य 12 दिनों में करता है। B का वेतन कितना होगा?
हल: A का एक दिन का कार्य = 1/12, संयुक्त = 1/8। B का एक दिन का कार्य = 1/8 - 1/12 = (3 - 2)/24 = 1/24। A : B की दर = 1/12 : 1/24 = 2 : 1। अतः B का वेतन = 1800 × 1/3 = 600 रुपये।
उदाहरण 6: A किसी कार्य को 20 दिनों में और B उसे 30 दिनों में करता है। दोनों मिलकर कार्य शुरू करते हैं, परंतु A कार्य समाप्त होने से 4 दिन पहले कार्य छोड़ देता है। कुल कार्य कितने दिनों में पूरा होगा?
हल: माना कुल समय T दिन। B ने T दिन और A ने (T - 4) दिन कार्य किया। (T - 4)/20 + T/30 = 1। (3(T - 4) + 2T)/60 = 1, अतः 3T - 12 + 2T = 60, 5T = 72, T = 14.4 दिन।
| स्थिति | सूत्र | टिप्पणी |
|---|---|---|
| एक दिन का कार्य | 1/D | D दिनों में कार्य पूरा हो |
| A व B मिलकर | (X + Y)/XY दिन | 1/X + 1/Y = संयुक्त दर |
| अकेले B का समय | XY/(Y - X) | जब X व Y संयुक्त एवं A ज्ञात |
| व्यक्ति-दिन-घंटा | M1 D1 H1 = M2 D2 H2 | कार्य समान हो |
| वेतन वितरण | कार्य दर के अनुपात में | दर ∝ 1/समय |
| कार्य पूर्ण करने का समय | एक दिन का कार्य | संयुक्त समय |
|---|---|---|
| A = 12 दिन, B = 18 दिन | 1/12 + 1/18 = 5/36 | 36/5 = 7.2 दिन |
| A = 10 दिन, B = 15 दिन | 1/10 + 1/15 = 1/6 | 6 दिन |
| A = 20 दिन, B = 30 दिन | 1/20 + 1/30 = 1/12 | 12 दिन |
| A = 8 दिन, B = 12 दिन | 1/8 + 1/12 = 5/24 | 24/5 = 4.8 दिन |
flowchart TD
A[समय और कार्य] --> B[एक दिन का कार्य 1/D]
A --> C[संयुक्त कार्य]
A --> D[व्यक्ति-दिन-घंटा संबंध]
A --> E[वेतन वितरण]
B --> B1[कार्य = दर × समय]
C --> C1[1/X + 1/Y का LCM विधि से योग]
C --> C2[संयुक्त समय = XY/(X+Y)]
D --> D1[M1 D1 H1 = M2 D2 H2]
D --> D2[व्युत्क्रमानुपात सिद्धांत]
E --> E1[वेतन ∝ कार्य दर]
E --> E2[दर ∝ 1/समय]
समय और कार्य अंकगणित का वह विषय है जो एक दिन के कार्य के भिन्न और व्युत्क्रमानुपात के सिद्धांत पर आधारित है। इस अध्याय में हमने एक दिन का कार्य, A और B के संयुक्त समय, व्यक्ति-दिन-घंटा के संबंध तथा वेतन के वितरण की विधि सीखी। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में इन्हीं अवधारणाओं से नियमित रूप से प्रश्न पूछे जाते हैं। भिन्नों के योग, LCM का उपयोग तथा M1 D1 H1 = M2 D2 H2 के सिद्धांत की पकड़ ही सटीक उत्तर की कुंजी है। नियमित अभ्यास के साथ इस विषय में महारत हासिल करके परीक्षा में सुनिश्चित अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।