विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: गणित – बीजगणित विषय-वस्तु: 3.6 संख्या बीजगणित
संख्या बीजगणित बीजगणित की वह शाखा है जिसमें संख्याओं के गुणधर्मों और उनके बीच संबंधों को बीजीय विधियों से व्यक्त किया जाता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में संख्या बीजगणित के अंतर्गत विषम और सम संख्याएँ, क्रमागत संख्याएँ, वर्ग एवं घन, वर्गमूल एवं घनमूल, अभाज्य संख्याएँ, गुणनखंडन, इकाई अंक (unit digit), संख्याओं का वर्गीकरण तथा प्रतिशत और अनुपात से जुड़े बीजीय संबंध शामिल हैं। यह खंड इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं तथा यह शॉर्टकट विधियों से सबसे तेज हल होने वाला विषय है।
संख्याओं का सही वर्गीकरण परीक्षा में पूछे जाने वाले सबसे सामान्य प्रश्नों में से एक है। प्राकृतिक संख्याएँ (1, 2, 3, ...), पूर्ण संख्याएँ (0, 1, 2, ...), पूर्णांक, सम और विषम संख्याएँ, अभाज्य संख्याएँ (1 और स्वयं से विभाज्य), भाज्य संख्याएँ, वर्ग और घन संख्याएँ — इन सभी की स्पष्ट समझ आवश्यक है। इसके अतिरिक्त क्रमागत संख्याओं का बीजीय निरूपण, जैसे n, n + 1, n + 2, संख्या-आधारित समस्याओं को हल करने की कुंजी है। यही बीजीय निरूपण बड़ी संख्याओं के गुणों को सिद्ध करने में सहायक होता है।
इस अध्याय में हम संख्याओं के प्रकार, इकाई अंक ज्ञात करने की विधियाँ, वर्गमूल और घनमूल निकालने के अभाज्य गुणनखंडन तथा अनुमान विधियाँ, क्रमागत संख्याओं से संबंधित बीजीय समस्याएँ और कुछ मानक परिणामों का अध्ययन करेंगे। प्रत्येक अवधारणा के साथ हल किए गए संख्यात्मक उदाहरण दिए गए हैं। अंत में त्वरित पुनरावृत्ति के लिए तालिकाएँ, माइंड मैप, महत्वपूर्ण चित्र, सामान्य त्रुटियाँ और परीक्षा युक्तियाँ प्रस्तुत की गई हैं ताकि परीक्षा में समान प्रश्न बिना समय बर्बाद किए हल किए जा सकें।
संख्याओं के वर्गीकरण की संपूर्ण जानकारी होना आवश्यक है। सम संख्याएँ वे हैं जो 2 से विभाज्य होती हैं और इनका इकाई अंक 0, 2, 4, 6 या 8 होता है। विषम संख्याओं का इकाई अंक 1, 3, 5, 7 या 9 होता है। अभाज्य संख्या में केवल दो भाजक होते हैं — 1 और स्वयं, जबकि भाज्य संख्या में दो से अधिक भाजक होते हैं। 2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है। 1 न तो अभाज्य है और न ही भाज्य। वर्ग संख्याएँ किसी संख्या का वर्ग होती हैं, जैसे 1, 4, 9, 16, 25 और इनका इकाई अंक कभी 2, 3, 7 या 8 नहीं हो सकता।
इकाई अंक ज्ञात करने की विधि घातों वाले प्रश्नों में अत्यंत उपयोगी है। किसी भी संख्या की घात का इकाई अंक केवल मूल संख्या के इकाई अंक पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए 7 की घातों के इकाई अंक 7, 9, 3, 1 के चक्र में दोहराते हैं। सामान्यतः इकाई अंक d वाली संख्या के लिए घातों के इकाई अंक चक्र की लंबाई 4 या उसका भाजक होती है। घात को 4 से विभाजित कर शेषफल के आधार पर इकाई अंक ज्ञात किया जाता है। उदाहरण के लिए 7³¹ में, 31 को 4 से भाग देने पर शेषफल 3 आता है, अतः 7³ का इकाई अंक 3 होगा।
उदाहरण 1: 2²³ का इकाई अंक ज्ञात कीजिए।
हल: 2 की घातों के इकाई अंकों का चक्र है 2, 4, 8, 6। 23 को 4 से भाग देने पर शेषफल 3 आता है। चक्र में तीसरा अंक 8 है, अतः इकाई अंक 8 होगा।
उदाहरण 2: 4³² का इकाई अंक ज्ञात कीजिए।
हल: 4 की घातों के इकाई अंक 4 और 6 के चक्र में दोहराते हैं। सम घात पर इकाई अंक 6 होता है। 32 सम है, अतः इकाई अंक 6 है।
वर्गमूल और घनमूल संख्या बीजगणित के महत्वपूर्ण अंग हैं। किसी संख्या का वर्गमूल वह संख्या है जो स्वयं से गुणा करने पर मूल संख्या देती है, जैसे √81 = 9 क्योंकि 9 × 9 = 81। वर्गमूल निकालने की अभाज्य गुणनखंडन विधि में संख्या के अभाज्य गुणनखंड करके प्रत्येक अभाज्य को जोड़े में लेकर एक-एक लिखा जाता है। लंबी भाग विधि (long division method) बड़ी संख्याओं के वर्गमूल के लिए उपयुक्त है। घनमूल निकालने के लिए संख्या के अभाज्य गुणनखंड में प्रत्येक अभाज्य को तीन-तीन के समूह में लेकर एक-एक लिखा जाता है।
वर्ग संख्याओं के कुछ विशेष गुण परीक्षा में अत्यधिक उपयोगी होते हैं। दो क्रमागत प्राकृतिक संख्याओं के वर्गों का अंतर इन संख्याओं के योग के बराबर होता है, जैसे 6² - 5² = 36 - 25 = 11 = 6 + 5। n² - (n - 1)² = 2n - 1 सदैव विषम संख्या होती है। किसी वर्ग संख्या के अभाज्य गुणनखंड में प्रत्येक अभाज्य की घात सम होती है। ये गुण प्रश्नों को तुरंत हल करने में सहायक होते हैं। परीक्षा में यह भी पूछा जाता है कि दी गई संख्याओं में से कौन पूर्ण वर्ग है — इसके लिए इकाई अंकों की जाँच सबसे पहले करनी चाहिए।
उदाहरण 3: 7056 का वर्गमूल अभाज्य गुणनखंडन विधि से ज्ञात कीजिए।
हल: 7056 = 2 × 2 × 2 × 2 × 3 × 3 × 7 × 7 = 2⁴ × 3² × 7²। जोड़े बनाने पर √7056 = 2 × 2 × 3 × 7 = 84।
उदाहरण 4: 5832 का घनमूल ज्ञात कीजिए।
हल: 5832 = 2 × 2 × 2 × 3 × 3 × 3 × 3 × 3 × 3 = 2³ × 3⁶। तीनों के समूह बनाने पर ∛5832 = 2 × 3 × 3 = 18।
उदाहरण 5: दो क्रमागत विषम संख्याएँ जिनका योग 44 है, ज्ञात कीजिए।
हल: माना संख्याएँ n और n + 2 हैं। तब n + (n + 2) = 44, अतः 2n + 2 = 44, 2n = 42, n = 21। संख्याएँ 21 और 23 हैं।
क्रमागत संख्याओं से संबंधित समस्याएँ बीजीय निरूपण पर आधारित होती हैं। तीन क्रमागत संख्याओं को n, n + 1, n + 2 या फिर सम संख्याओं के लिए n, n + 2, n + 4 के रूप में लिखा जाता है। तीन क्रमागत संख्याओं का योग सदैव बीच की संख्या का तीन गुना होता है। इसलिए यदि तीन क्रमागत संख्याओं का योग 51 है, तो बीच की संख्या 17 होगी और संख्याएँ 16, 17, 18 होंगी। n क्रमागत प्राकृतिक संख्याओं का योग n(n + 1)/2 के सूत्र से निकाला जाता है।
क्रमागत विषम और सम संख्याओं के योग के सूत्र भी महत्वपूर्ण हैं। पहली n विषम संख्याओं का योग n² होता है। पहली n सम संख्याओं का योग n(n + 1) होता है। पहली n प्राकृतिक संख्याओं के वर्गों का योग n(n + 1)(2n + 1)/6 होता है। ये सूत्र संख्यात्मक प्रश्नों को बिना लंबी गणना के तुरंत हल कर देते हैं। उदाहरण के लिए पहली 10 विषम संख्याओं का योग 10² = 100 है, जिसे वास्तविक रूप से जोड़ने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे सूत्र परीक्षा में समय बचाने का सबसे प्रभावी साधन हैं।
उदाहरण 6: पहली 15 प्राकृतिक संख्याओं का योग ज्ञात कीजिए।
हल: सूत्र n(n + 1)/2 से, 15 × 16/2 = 120।
उदाहरण 7: तीन क्रमागत सम संख्याओं का योग 66 है। सबसे बड़ी संख्या ज्ञात कीजिए।
हल: माना संख्याएँ n, n + 2, n + 4 हैं। योग 3n + 6 = 66, अतः 3n = 60, n = 20। सबसे बड़ी संख्या n + 4 = 24 है।
उदाहरण 8: पहली 20 विषम संख्याओं का योग क्या है?
हल: पहली n विषम संख्याओं का योग n² = 20² = 400।
| प्रकार | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| सम संख्या | 2 से विभाज्य | 2, 4, 6, 8 |
| विषम संख्या | 2 से विभाज्य नहीं | 1, 3, 5, 7 |
| अभाज्य संख्या | केवल 1 और स्वयं के भाजक | 2, 3, 5, 7, 11 |
| भाज्य संख्या | दो से अधिक भाजक | 4, 6, 8, 9 |
| पूर्ण वर्ग | किसी संख्या का वर्ग | 1, 4, 9, 16, 25 |
| पूर्ण घन | किसी संख्या का घन | 1, 8, 27, 64, 125 |
| श्रृंखला | सूत्र | उदाहरण |
|---|---|---|
| पहली n प्राकृतिक संख्याएँ | n(n + 1)/2 | 1 + 2 + ... + 10 = 55 |
| पहली n विषम संख्याएँ | n² | 1 + 3 + ... + 19 = 100 |
| पहली n सम संख्याएँ | n(n + 1) | 2 + 4 + ... + 20 = 110 |
| वर्गों का योग | n(n + 1)(2n + 1)/6 | 1² + 2² + 3² = 14 |
| घनों का योग | [n(n + 1)/2]² | 1³ + 2³ + 3³ = 36 |
flowchart TD
A[संख्या बीजगणित] --> B[संख्याओं के प्रकार]
A --> C[इकाई अंक विधि]
A --> D[वर्गमूल एवं घनमूल]
A --> E[क्रमागत संख्याएँ]
A --> F[योग के सूत्र]
B --> B1[सम, विषम, अभाज्य, भाज्य]
C --> C1[घात को 4 से भाग देकर चक्र]
D --> D1[अभाज्य गुणनखंडन विधि]
E --> E1[n, n+1, n+2]
F --> F1[n(n+1)/2]
F --> F2[n² विषम योग]
संख्या बीजगणित गणित का वह भाग है जो संख्याओं के गुणों और उनकी बीजीय संरचना को समझाता है। इस अध्याय में हमने संख्याओं के प्रकार, इकाई अंक की विधि, वर्गमूल और घनमूल की गणना, क्रमागत संख्याओं की समस्याएँ तथा योग के मानक सूत्रों का विस्तार से अध्ययन किया। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में ये अवधारणाएँ सीधे और तेज हल होने वाले प्रश्नों के रूप में पूछी जाती हैं। सूत्रों की स्मृति और शॉर्टकट विधियों की पकड़ ही इस अध्याय में अधिकतम अंक अर्जित करने का माध्यम है। नियमित अभ्यास के साथ इन विधियों का उपयोग करने वाला अभ्यर्थी निश्चित रूप से समय प्रबंधन और शुद्धता दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करेगा।