विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: गणित – सांख्यिकी त्रिकोणमिति और विविध विषय-वस्तु: 5.4 प्रारंभिक सांख्यिकी
सांख्यिकी गणित की वह शाखा है जो आँकड़ों (data) के संग्रह, वर्गीकरण, प्रस्तुतीकरण और विश्लेषण से संबंधित है। सांख्यिकी शब्द का प्रयोग दो अर्थों में होता है — आँकड़ों के रूप में तथा आँकड़ों की व्याख्या करने वाली विधियों के रूप में। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में सांख्यिकी के प्रारंभिक अध्याय से 1 से 2 प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके अंतर्गत आँकड़ों के प्रकार, आवृत्ति वितरण, बारंबारता तालिका और आँकड़ों की प्रस्तुति की मूल अवधारणाएँ आती हैं। इन्हीं की नींव पर माध्य, माध्यिका, बहुलक जैसे आगे के विषय टिके हैं।
आँकड़े दो प्रकार के होते हैं — प्राथमिक आँकड़े और द्वितीयक आँकड़े। प्राथमिक आँकड़े सीधे स्रोत से एकत्र किए जाते हैं, जैसे किसी सर्वेक्षण में पूछताछ द्वारा प्राप्त जानकारी। द्वितीयक आँकड़े पहले से प्रकाशित स्रोतों जैसे पुस्तकों, रिपोर्टों और पत्रिकाओं से लिए जाते हैं। परीक्षा की दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण वर्गीकरण है — अपरिष्कृत (raw) आँकड़े, पृथक (discrete) आँकड़े और सतत (continuous) आँकड़े। इनकी पहचान और उपयोग का अभ्यास होना आवश्यक है।
इस अध्याय में हम अपरिष्कृत आँकड़ों से आवृत्ति वितरण तालिका बनाना सीखेंगे। साथ ही वर्ग अंतराल, वर्ग सीमा, वर्ग आकार, मध्य मान जैसी अवधारणाओं को समझेंगे। बारंबारता (आवृत्ति), कुल बारंबारता, संचयी बारंबारता तथा वर्गों की संख्या निकालने की विधि पर भी ध्यान देंगे। इसके अलावा आँकड़ों के प्रस्तुतीकरण के विभिन्न तरीकों — बार आलेख, दंड आलेख, आवृत्ति बहुभुज, हिस्टोग्राम और आयतचित्र — की प्रारंभिक जानकारी भी सीखेंगे। ये सभी अवधारणाएँ परीक्षा में सीधे पूछी जाती हैं।
आँकड़ों के संग्रह के बाद उन्हें वर्गीकृत किया जाता है ताकि वे समझने और विश्लेषण करने योग्य बनें। एक आकलन या सर्वेक्षण द्वारा एकत्र किए गए आँकड़ों को अपरिष्कृत आँकड़े कहते हैं। इन्हें आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना वर्गीकरण का प्रथम चरण है। इसके बाद आवृत्ति वितरण तालिका बनाई जाती है, जिसमें प्रत्येक मान की बारंबारता (जितनी बार वह आया है) लिखी जाती है। बारंबारता को आवृत्ति भी कहते हैं और इसे चिह्नांकन (tally marks) द्वारा गिना जाता है।
जब आँकड़ों की संख्या बड़ी होती है और मानों की श्रेणी अधिक होती है, तब आँकड़ों को वर्ग अंतरालों में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक वर्ग अंतराल की दो सीमाएँ होती हैं — निम्न सीमा और उच्च सीमा। वर्ग का मध्य मान (class mark) दोनों सीमाओं का औसत होता है। वर्ग की चौड़ाई को वर्ग आकार कहते हैं। वर्गों की संख्या 1 + 3.3 log n जैसे सूत्रों से भी निकाली जाती है, परंतु परीक्षा में आमतौर पर दी गई वर्गों की संख्या से ही तालिका बनानी होती है। वर्ग अंतराल खुले या बंद दोनों प्रकार के हो सकते हैं।
उदाहरण 1: 20 विद्यार्थियों के अंक हैं: 12, 15, 12, 17, 15, 12, 19, 15, 17, 15, 12, 19, 15, 17, 12, 15, 19, 17, 12, 15। आवृत्ति वितरण तालिका बनाइए।
हल: अंक 12 कुल 6 बार, अंक 15 कुल 7 बार, अंक 17 कुल 4 बार तथा अंक 19 कुल 3 बार आए हैं। अतः तालिका इस प्रकार होगी:
| अंक | बारंबारता |
|---|---|
| 12 | 6 |
| 15 | 7 |
| 17 | 4 |
| 19 | 3 |
कुल बारंबारता = 6 + 7 + 4 + 3 = 20।
सतत आँकड़ों के लिए आवृत्ति वितरण में वर्ग अंतराल बनाए जाते हैं। प्रत्येक आँकड़े को उसके वर्ग में चिह्नांकित करके बारंबारता निकाली जाती है। संचयी बारंबारता (cumulative frequency) किसी वर्ग तक की सभी बारंबारताओं का योग होती है। यह दो प्रकार की होती है — "कम से कम" प्रकार (एक से कम / less than) और "से अधिक" प्रकार (more than)। संचयी बारंबारता का उपयोग माध्यिका ज्ञात करने में होता है, जिसे अगले अध्याय में पढ़ेंगे। किसी वर्ग की बारंबारता, उस वर्ग की संचयी बारंबारता और पिछले वर्ग की संचयी बारंबारता का अंतर होती है।
वर्ग अंतराल बनाते समय वर्ग की सीमाएँ इस प्रकार रखी जाती हैं कि कोई भी मान दो वर्गों में न आए। खुले वर्ग अंतराल जैसे 10-20 में 20 शामिल नहीं होता, जबकि बंद वर्ग 10-20 में 20 शामिल हो सकता है। परीक्षा में प्रायः ऐसी तालिकाएँ दी जाती हैं जिनमें वर्ग और बारंबारता पहले से होते हैं, और प्रश्न किसी विशेष वर्ग की बारंबारता, संचयी बारंबारता या कुल बारंबारता निकालने के होते हैं। इन्हें तालिका को पढ़कर ही हल किया जा सकता है, अतः तालिका पढ़ने का अभ्यास आवश्यक है।
उदाहरण 2: दी गई तालिका से वर्ग 30-40 की संचयी बारंबारता और कुल बारंबारता ज्ञात कीजिए।
| वर्ग | 10-20 | 20-30 | 30-40 | 40-50 |
|---|---|---|---|---|
| बारंबारता | 5 | 8 | 12 | 5 |
हल: वर्ग 10-20 तक संचयी = 5, 20-30 तक = 5 + 8 = 13, 30-40 तक = 13 + 12 = 25। अतः वर्ग 30-40 की संचयी बारंबारता = 25 और कुल बारंबारता = 5 + 8 + 12 + 5 = 30।
एकत्र किए गए आँकड़ों को तालिका या आलेख के रूप में प्रस्तुत करने से उनका विश्लेषण सरल हो जाता है। आँकड़ों के प्रस्तुतीकरण की मुख्य विधियाँ हैं — दंड आलेख (bar graph), दंड आलेख (बार ग्राफ), आयतचित्र (histogram), आवृत्ति बहुभुज (frequency polygon) तथा वृत्त आलेख (pie chart)। दंड आलेख में पृथक आँकड़ों को समान चौड़ाई के दंडों द्वारा दिखाया जाता है, जिनकी ऊँचाई बारंबारता के समानुपाती होती है। आयतचित्र में सतत आँकड़ों के वर्गों को उनकी बारंबारता के अनुपात में आयत बनाकर दिखाया जाता है।
आवृत्ति बहुभुज वर्गों के मध्य मानों को उनकी बारंबारताओं के सापेक्ष बिंदुओं द्वारा मिलाने से बनता है। इसे आयतचित्र के साथ या उसके बिना भी बनाया जा सकता है। वृत्त आलेख में पूरे वृत्त को अलग-अलग त्रिज्यखंडों में बाँटा जाता है, जिनका कोण उनके भाग के अनुपात में होता है। किसी त्रिज्यखंड का कोण = (भाग/कुल) × 360° होता है। इन सभी प्रस्तुतियों की पहचान और उनसे जानकारी निकालने के प्रश्न परीक्षा में पूछे जाते हैं। आलेखों के अध्ययन को आलेखीय विश्लेषण भी कहते हैं।
उदाहरण 3: पाँच दिनों में एक कारखाने में बने बोल्टों की संख्या 120, 150, 130, 160, 140 है। इन्हें दंड आलेख द्वारा दर्शाने के लिए किस आँकड़े की जानकारी आवश्यक है, यह बताइए तथा कुल बोल्टों की संख्या निकालिए।
हल: दंड आलेख के लिए प्रत्येक दिन का नाम और संगत संख्या आवश्यक है। कुल बोल्ट = 120 + 150 + 130 + 160 + 140 = 700।
उदाहरण 4: एक कक्षा के 90 विद्यार्थियों में 30 ने गणित, 40 ने विज्ञान और शेष ने सामाजिक विज्ञान चुना। गणित चुनने वालों का वृत्त आलेख में कोण ज्ञात कीजिए।
हल: कोण = (30/90) × 360° = 120°।
सामाजिक विज्ञान चुनने वाले = 90 - 30 - 40 = 20, इनका कोण = (20/90) × 360° = 80°।
| संकल्पना | परिभाषा |
|---|---|
| अपरिष्कृत आँकड़े | बिना वर्गीकृत, सीधे एकत्र किए आँकड़े |
| बारंबारता | किसी मान के आने की संख्या |
| वर्ग अंतराल | सतत आँकड़ों का समूह |
| वर्ग मध्य मान | (निम्न सीमा + उच्च सीमा) / 2 |
| संचयी बारंबारता | किसी वर्ग तक की बारंबारताओं का योग |
| कुल बारंबारता | सभी बारंबारताओं का योग |
| विधि | उपयोग |
|---|---|
| दंड आलेख | पृथक आँकड़ों की तुलना |
| आयतचित्र (हिस्टोग्राम) | सतत आँकड़ों के वर्ग |
| आवृत्ति बहुभुज | मध्य मानों का आलेख |
| वृत्त आलेख | भागों का अनुपात, कोण = (भाग/कुल) × 360° |
| संचयी वक्र (ओजाइव) | संचयी बारंबारता से माध्यिका |
flowchart TD
A[प्रारंभिक सांख्यिकी] --> B[आँकड़ों का संग्रह]
A --> C[वर्गीकरण]
A --> D[आवृत्ति वितरण]
A --> E[प्रस्तुतीकरण]
B --> B1[प्राथमिक आँकड़े]
B --> B2[द्वितीयक आँकड़े]
C --> C1[पृथक और सतत]
C --> C2[आरोही क्रम]
D --> D1[बारंबारता]
D --> D2[वर्ग अंतराल]
D --> D3[संचयी बारंबारता]
E --> E1[दंड आलेख]
E --> E2[आयतचित्र]
E --> E3[आवृत्ति बहुभुज]
E --> E4[वृत्त आलेख]
360° की जगह 180° से गुणा करना।(निम्न + उच्च)/2 को ध्यान रखें।प्रारंभिक सांख्यिकी रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 के गणित पाठ्यक्रम का एक आधारभूत और आसान अध्याय है। इस अध्याय में हमने आँकड़ों के प्रकारों, उनके संग्रह और वर्गीकरण को समझा। अपरिष्कृत आँकड़ों से आवृत्ति वितरण तालिका बनाना, वर्ग अंतराल, वर्ग मध्य मान और संचयी बारंबारता की अवधारणाएँ विस्तार से सीखीं। आँकड़ों के प्रस्तुतीकरण की मुख्य विधियों — दंड आलेख, आयतचित्र, आवृत्ति बहुभुज और वृत्त आलेख — से परिचय प्राप्त किया तथा वृत्त आलेख में कोण ज्ञात करने की विधि सीखी। इन सभी अवधारणाओं की पकड़ ही आगे के अध्यायों — माध्य, माध्यिका, बहुलक, तालिका और ग्राफ तथा आँकड़ा विश्लेषण — की नींव है। सरल और स्पष्ट अवधारणाओं के कारण यह अध्याय परीक्षा में निश्चित अंक दिलाने वाला है।