विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: गणित – सांख्यिकी त्रिकोणमिति और विविध विषय-वस्तु: 5.5 माध्य माध्यिका और बहुलक
माध्य, माध्यिका और बहुलक आँकड़ों के केंद्रीय प्रवृत्ति के तीन माप (measures of central tendency) हैं, जो किसी वितरण का प्रतिनिधित्व करने वाला एकल मान देते हैं। ये तीनों माप परीक्षा में सबसे अधिक पूछे जाने वाले सांख्यिकीय प्रश्न हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में इस अध्याय से 2 से 3 प्रश्न अवश्य आते हैं। माध्य (औसत) सभी मानों के योग को उनकी संख्या से भाग देने पर प्राप्त होता है। माध्यिका आँकड़ों के क्रमबद्ध होने पर मध्य में स्थित मान होती है। बहुलक वह मान होता है जो आँकड़ों में सबसे अधिक बार आता है।
प्रत्येक माप की अपनी विशेषता होती है। माध्य सभी आँकड़ों का उपयोग करता है और संतुलन बिंदु का कार्य करता है। माध्यिका चरम (extreme) मानों से प्रभावित नहीं होती, इसलिए जब आँकड़ों में बहुत छोटे या बहुत बड़े मान हों, तो माध्यिका अधिक उपयुक्त होती है। बहुलक वह मान है जो वितरण में सर्वाधिक बारंबारता रखता है, जैसे बाजार में सबसे अधिक बिकने वाला जूते का साइज़। तीनों मापों के बीच अनुभवजन्य संबंध बहुलक = 3 × माध्यिका - 2 × माध्य होता है, जो असममित वितरणों पर लागू होता है।
इस अध्याय में हम अपरिष्कृत आँकड़ों और बारंबारता तालिका दोनों के लिए माध्य, माध्यिका और बहुलक ज्ञात करना सीखेंगे। सम (even) और विषम (odd) संख्या में आँकड़ों की माध्यिका के सूत्रों पर विशेष ध्यान देंगे। इसके अलावा सतत वर्गों वाली तालिका के लिए कल्पित माध्य विधि और माध्यिका तथा बहुलक के वर्ग निर्धारण की विधि को समझेंगे। इन गणनाओं की सटीकता परीक्षा में पूर्ण अंक प्राप्त करने की कुंजी है।
माध्य, जिसे औसत भी कहते हैं, आँकड़ों के सभी मानों के योग को मानों की संख्या से भाग देने पर प्राप्त होता है। यदि आँकड़े x₁, x₂, x₃, ..., xₙ हों, तो माध्य = (x₁ + x₂ + x₃ + ... + xₙ)/n होता है। बारंबारता वितरण में माध्य = Σfx / Σf होता है, जहाँ f बारंबारता और x वर्ग मध्य मान है। सतत वितरण में वर्गों के मध्य मान लेकर उपरोक्त सूत्र का प्रयोग किया जाता है। परीक्षा में अपरिष्कृत आँकड़ों का माध्य सबसे सामान्य प्रश्न है।
जब वर्ग अंतरालों की संख्या अधिक हो, तो कल्पित माध्य विधि (assumed mean method) से गणना सरल हो जाती है। इसमें d = x - A लेकर माध्य = A + Σfd/Σf सूत्र से उत्तर निकाला जाता है, जहाँ A कल्पित माध्य है। इस विधि में बड़े मानों की गणना आसान हो जाती है। माध्य के प्रश्नों में यह जाँच अवश्य करें कि सभी मानों का योग सही है, क्योंकि जोड़ में छोटी गलती पूरे उत्तर को गलत कर देती है।
उदाहरण 1: 10 श्रमिकों के दैनिक वेतन 150, 160, 140, 150, 170, 160, 150, 180, 150, 160 रुपये हैं। माध्य वेतन ज्ञात कीजिए।
हल: कुल योग = 150 + 160 + 140 + 150 + 170 + 160 + 150 + 180 + 150 + 160 = 1570।
माध्य = 1570/10 = 157 रुपये।
उदाहरण 2: दी गई तालिका का माध्य ज्ञात कीजिए।
| वर्ग | 0-10 | 10-20 | 20-30 | 30-40 |
|---|---|---|---|---|
| बारंबारता | 4 | 8 | 6 | 2 |
हल: वर्ग मध्य मान क्रमशः 5, 15, 25, 35 हैं।
Σfx = 4×5 + 8×15 + 6×25 + 2×35 = 20 + 120 + 150 + 70 = 360।
Σf = 4 + 8 + 6 + 2 = 20। माध्य = 360/20 = 18।
माध्यिका वह मान है जो आँकड़ों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर बीच में आता है। यह आँकड़ों को दो बराबर भागों में विभाजित करती है। यदि आँकड़ों की संख्या n विषम हो, तो माध्यिका (n+1)/2वाँ मान होता है। यदि n सम हो, तो माध्यिका (n/2)वें और (n/2 + 1)वें मान का औसत होता है। उदाहरण के लिए 5 मानों में तीसरा मान और 6 मानों में तीसरे व चौथे मान का औसत माध्यिका होती है। आँकड़ों को पहले आरोही क्रम में लिखना अनिवार्य है।
सतत वितरण में माध्यिका के लिए पहले माध्यिका वर्ग निर्धारित किया जाता है, जिसकी संचयी बारंबारता N/2 के बराबर या उससे अधिक होती है। माध्यिका का सूत्र माध्यिका = l + [(N/2 - cf)/f] × h है, जहाँ l माध्यिका वर्ग की निम्न सीमा, cf उससे पहले वर्ग की संचयी बारंबारता, f माध्यिका वर्ग की बारंबारता, h वर्ग आकार और N कुल बारंबारता है। यह सूत्र याद रखने और सही वर्ग चुनने का अभ्यास परीक्षा में महत्वपूर्ण है। माध्यिका चरम मानों से प्रभावित नहीं होती, इसीलिए असमान वितरणों के लिए यह सर्वोत्तम माप है।
उदाहरण 3: आँकड़ों 12, 8, 15, 10, 20, 18, 9 की माध्यिका ज्ञात कीजिए।
हल: आरोही क्रम: 8, 9, 10, 12, 15, 18, 20। n = 7 (विषम)।
माध्यिका (7+1)/2 = 4वाँ मान = 12।
उदाहरण 4: आँकड़ों 5, 7, 3, 9, 11, 6 की माध्यिका ज्ञात कीजिए।
हल: आरोही क्रम: 3, 5, 6, 7, 9, 11। n = 6 (सम)।
माध्यिका = (6/2)वाँ और (6/2 + 1)वाँ मानों का औसत = (6 + 7)/2 = 6.5।
बहुलक वह मान है जो आँकड़ों में सबसे अधिक बार आता है। अपरिष्कृत आँकड़ों में सबसे अधिक बारंबारता वाला मान ही बहुलक होता है। किसी वितरण में एक से अधिक बहुलक भी हो सकते हैं (द्विबहुलक वितरण) और कुछ वितरणों में बहुलक नहीं भी होता। वर्गीकृत आँकड़ों में बहुलक वर्ग वह वर्ग है जिसकी बारंबारता सबसे अधिक होती है। बहुलक का सूत्र बहुलक = l + [(f₁ - f₀)/(2f₁ - f₀ - f₂)] × h है, जहाँ l बहुलक वर्ग की निम्न सीमा, f₁ बहुलक वर्ग की बारंबारता, f₀ पिछले वर्ग की तथा f₂ अगले वर्ग की बारंबारता है।
तीनों मापों में संबंध बहुलक = 3 × माध्यिका - 2 × माध्य स्थापित किया गया है, जो मध्यम विषमता वाले वितरणों के लिए लगभग सत्य होता है। यदि वितरण सममित है, तो माध्य = माध्यिका = बहुलक होते हैं। इस संबंध से तीन में से दो ज्ञात होने पर तीसरा निकाला जा सकता है। परीक्षा में इस प्रकार के प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, जिनमें केवल संबंध लगाने से उत्तर मिल जाता है। बहुलक मुख्यतः दुकानदारों के स्टॉक निर्धारण, उत्पादन नियोजन जैसे व्यावहारिक कार्यों में उपयोगी होता है।
उदाहरण 5: आँकड़ों 3, 5, 3, 7, 3, 9, 5, 3, 5, 5, 3 का बहुलक ज्ञात कीजिए।
हल: 3 सात बार, 5 चार बार, 7 एक बार और 9 एक बार आया है। सबसे अधिक बारंबारता 3 की है, अतः बहुलक = 3।
उदाहरण 6: यदि माध्य = 20 और माध्यिका = 22 है, तो बहुलक ज्ञात कीजिए।
हल: बहुलक = 3 × माध्यिका - 2 × माध्य = 3 × 22 - 2 × 20 = 66 - 40 = 26।
| माप | अपरिष्कृत आँकड़े | बारंबारता तालिका |
|---|---|---|
| माध्य | Σx / n | Σfx / Σf |
| माध्यिका (n विषम) | (n+1)/2वाँ मान | l + [(N/2 - cf)/f] × h |
| माध्यिका (n सम) | (n/2)वें व (n/2+1)वें का औसत | माध्यिका वर्ग से |
| बहुलक | सबसे अधिक बारंबारता वाला मान | l + [(f₁ - f₀)/(2f₁ - f₀ - f₂)] × h |
| गुण | माध्य | माध्यिका | बहुलक |
|---|---|---|---|
| चरम मानों का प्रभाव | होता है | नहीं होता | नहीं होता |
| सभी आँकड़ों का उपयोग | करता है | नहीं करता | नहीं करता |
| व्यावहारिक उपयोग | औसत मान | असमान वितरण | बहुमत का मान |
| संबंध | बहुलक = 3 × माध्यिका - 2 × माध्य |
flowchart TD
A[केंद्रीय प्रवृत्ति के माप] --> B[माध्य]
A --> C[माध्यिका]
A --> D[बहुलक]
B --> B1[Σx/n]
B --> B2[Σfx/Σf]
C --> C1[आरोही क्रम]
C --> C2[(n+1)/2वाँ मान]
C --> C3[वर्गीकृत सूत्र]
D --> D1[सर्वाधिक बारंबारता]
D --> D2[बहुलक वर्ग सूत्र]
A --> E[संबंध]
E --> E1[बहुलक = 3×माध्यिका - 2×माध्य]
Σfx की जगह केवल x का योग कर लेना, बारंबारता से गुणा भूल जाना।N/2 से बड़ी संचयी बारंबारता वाले गलत वर्ग का चयन करना।f₀ और f₂ को उलट देना; f₀ पिछले वर्ग की और f₂ अगले वर्ग की बारंबारता है।d = x - A के चिह्नों का ध्यान न रखना।माध्य, माध्यिका और बहुलक सांख्यिकी के तीनों केंद्रीय माप हैं, जो किसी वितरण की समग्र स्थिति को एकल मान में व्यक्त करते हैं। इस अध्याय में हमने अपरिष्कृत आँकड़ों और बारंबारता वितरण दोनों के लिए इन तीनों मापों की गणना की विधि को विस्तार से सीखा। माध्य के लिए Σfx/Σf, माध्यिका के लिए वर्गीकृत सूत्र और बहुलक के लिए बहुलक वर्ग का निर्धारण प्रमुख तकनीकें हैं। तीनों मापों के बीच का अनुभवजन्य संबंध बहुलक = 3 × माध्यिका - 2 × माध्य परीक्षा में समय बचाने वाला साधन है। इन गणनाओं में शुद्धता ही पूर्ण अंक दिलाती है, अतः सूत्रों को याद रखना और नियमित अभ्यास करना आवश्यक है। यह अध्याय सांख्यिकी के शेष अध्यायों की नींव भी है।