विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – यांत्रिकी विषय-वस्तु: 11.10 कार्य ऊर्जा और शक्ति
कार्य, ऊर्जा और शक्ति भौतिकी की वे मौलिक अवधारणाएँ हैं जो ऊर्जा के संरक्षण, रूपांतरण और उपयोग की दर को समझाती हैं। भौतिकी में कार्य का अर्थ दैनिक जीवन के कार्य से भिन्न है। भौतिकी के अनुसार कार्य तभी होता है जब किसी वस्तु पर बल लगे और वह वस्तु बल की दिशा में विस्थापित हो। यदि बल लगने पर भी वस्तु नहीं चलती, तो कार्य शून्य होता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में कार्य, ऊर्जा और शक्ति से 3 से 5 प्रश्न प्रतिवर्ष पूछे जाते हैं।
कार्य का सूत्र W = F × s है, जहाँ F बल और s बल की दिशा में विस्थापन है। कार्य की SI इकाई जूल है। जब एक न्यूटन का बल किसी वस्तु को एक मीटर की दूरी तक विस्थापित करता है, तो एक जूल कार्य होता है। ऊर्जा वह क्षमता है जिसके द्वारा कार्य किया जाता है, और शक्ति कार्य करने की दर है। ऊर्जा की SI इकाई भी जूल है, जबकि शक्ति की SI इकाई वाट है। रेलवे इंजनों की शक्ति हॉर्सपावर में भी मापी जाती है, जहाँ 1 हॉर्सपावर लगभग 746 वाट के बराबर होता है।
इस अध्याय में हम कार्य की परिभाषा और गणना, गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा की अवधारणा, ऊर्जा संरक्षण का नियम तथा शक्ति की गणना का अध्ययन करेंगे। गतिज ऊर्जा गतिमान वस्तु में निहित होती है जबकि स्थितिज ऊर्जा स्थिति या आकृति के कारण होती है। रेलवे के संदर्भ में चलती ट्रेन की गतिज ऊर्जा, ढलान पर ट्रेन की स्थितिज ऊर्जा और इंजन की शक्ति का निर्धारण इन्हीं अवधारणाओं पर आधारित है। यह अध्याय संपूर्ण यांत्रिकी का समापन अध्याय है।
भौतिकी में कार्य उस स्थिति में होता है जब बल के प्रभाव से वस्तु विस्थापित होती है। कार्य का सूत्र W = F × s है, जहाँ F लगाया गया बल और s बल की दिशा में विस्थापन है। कार्य की SI इकाई जूल है। एक जूल कार्य तब होता है जब एक न्यूटन का बल किसी वस्तु को एक मीटर की दूरी तक विस्थापित करता है। कार्य एक अदिश राशि है। यदि बल और विस्थापन समान दिशा में हों तो कार्य धनात्मक होता है, और विपरीत दिशा में हों तो ऋणात्मक होता है।
कार्य शून्य होने की कुछ विशेष स्थितियाँ होती हैं। जब कोई व्यक्ति दीवार को धक्का देता है परंतु दीवार हिलती नहीं, तो विस्थापन शून्य होने से कार्य शून्य होता है। इसी प्रकार, जब बल और विस्थापन के बीच 90 डिग्री का कोण होता है, तो कार्य शून्य होता है। उदाहरण के लिए, जब कोई व्यक्ति सिर पर भार रखकर क्षैतिज चलता है, तो भार की दिशा (नीचे) और विस्थापन की दिशा (क्षैतिज) के बीच 90 डिग्री का कोण होता है, इसलिए उस भार पर किया गया कार्य शून्य होता है। वृत्तीय गति में केन्द्राभिमुख बल द्वारा किया गया कार्य भी शून्य होता है, क्योंकि बल त्रिज्या के अनुदिश तथा विस्थापन स्पर्शरेखा के अनुदिश होता है।
उदाहरण 1: एक ट्रेन इंजन 5000 न्यूटन का बल लगाकर डिब्बों को 100 मीटर खींचता है। किया गया कार्य ज्ञात कीजिए।
हल: कार्य W = F × s = 5000 × 100 = 500000 जूल। अतः किया गया कार्य 500000 जूल है।
ऊर्जा वह क्षमता है जिसके द्वारा कार्य किया जा सकता है। ऊर्जा की SI इकाई जूल है। जिस वस्तु में जितनी अधिक ऊर्जा होती है, वह उतना अधिक कार्य कर सकती है। ऊर्जा मुख्यतः दो प्रकार की होती है — गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा। गतिज ऊर्जा किसी वस्तु में उसकी गति के कारण होती है। गतिज ऊर्जा का सूत्र KE = 1/2 mv² है, जहाँ m द्रव्यमान और v वेग है। गतिज ऊर्जा वेग के वर्ग के समानुपाती होती है, इसलिए वेग दोगुना करने पर गतिज ऊर्जा चार गुना हो जाती है। चलती ट्रेन, बहती नदी और चलती हवा में गतिज ऊर्जा होती है।
स्थितिज ऊर्जा किसी वस्तु में उसकी स्थिति, स्थान या आकृति के कारण होती है। गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का सूत्र PE = mgh है, जहाँ m द्रव्यमान, g गुरुत्वीय त्वरण और h ऊँचाई है। ऊँचाई पर रखी वस्तु में अधिक स्थितिज ऊर्जा होती है, जैसे बाँध का जल, ऊँचाई पर रखा पत्थर और खींची हुई कमानी। स्थितिज ऊर्जा और गतिज ऊर्जा एक-दूसरे में बदलती रहती हैं। गेंद को ऊपर फेंकने पर उसकी गतिज ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा में बदलती है, और गिरते समय स्थितिज ऊर्जा पुनः गतिज ऊर्जा में बदलती है। ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न नष्ट, केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है।
उदाहरण 2: 1000 किलोग्राम द्रव्यमान की ट्रेन 20 मीटर/सेकंड की चाल से चल रही है। उसकी गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
हल: KE = 1/2 mv² = 1/2 × 1000 × 20 × 20 = 200000 जूल। अतः ट्रेन की गतिज ऊर्जा 200000 जूल है।
उदाहरण 3: 50 किलोग्राम का डिब्बा 10 मीटर की ऊँचाई पर रखा है। उसकी स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए। (g = 9.8 m/s²)
हल: PE = mgh = 50 × 9.8 × 10 = 4900 जूल। अतः डिब्बे की स्थितिज ऊर्जा 4900 जूल है।
शक्ति कार्य करने की दर है। शक्ति का सूत्र P = W ÷ t है, जहाँ W किया गया कार्य और t समय है। शक्ति की SI इकाई वाट है। एक वाट वह शक्ति है जब एक सेकंड में एक जूल कार्य किया जाता है। शक्ति की अन्य इकाई हॉर्सपावर है, जो इंजनों की शक्ति मापने में प्रयुक्त होती है। 1 हॉर्सपावर = 746 वाट होता है। शक्ति को किलोवाट (1000 वाट) और मेगावाट (10 लाख वाट) में भी मापा जाता है। शक्ति यह बताती है कि कार्य कितनी तेजी से हो रहा है, न कि कुल कितना कार्य हुआ है।
यदि दो इंजन समान कार्य करें परंतु एक उसे कम समय में करे, तो कम समय लेने वाला इंजन अधिक शक्तिशाली कहलाता है। शक्ति का संबंध बल और वेग से भी होता है, P = F × v होता है। रेलवे में इंजन की शक्ति से ही यह निर्धारित होता है कि वह कितनी भारी ट्रेन को कितनी चाल से खींच सकता है। रेल इंजन की शक्ति सामान्यतः हजारों हॉर्सपावर में होती है। बिजली के क्षेत्र में शक्ति की इकाई किलोवाट घंटा विद्युत ऊर्जा की इकाई है। इन अवधारणाओं का सही ज्ञान रेलवे परीक्षा के संख्यात्मक प्रश्नों को हल करने में सहायक है।
उदाहरण 4: एक इंजन 10 सेकंड में 50000 जूल कार्य करता है। उसकी शक्ति ज्ञात कीजिए।
हल: शक्ति P = W ÷ t = 50000 ÷ 10 = 5000 वाट। अतः इंजन की शक्ति 5000 वाट होगी।
| राशि | सूत्र | SI इकाई |
|---|---|---|
| कार्य | W = F × s | जूल |
| गतिज ऊर्जा | KE = 1/2 mv² | जूल |
| स्थितिज ऊर्जा | PE = mgh | जूल |
| शक्ति | P = W ÷ t | वाट |
| शक्ति | P = F × v | वाट |
| संबंध | मान |
|---|---|
| 1 किलोवाट | 1000 वाट |
| 1 हॉर्सपावर | 746 वाट |
| 1 जूल | 1 न्यूटन × 1 मीटर |
| ऊर्जा संरक्षण | ऊर्जा न उत्पन्न होती है न नष्ट |
flowchart TD
A[कार्य ऊर्जा और शक्ति] --> B[कार्य]
A --> C[ऊर्जा]
A --> D[शक्ति]
B --> B1[W = F × s]
B --> B2[इकाई जूल]
C --> C1[गतिज ऊर्जा 1/2 mv2]
C --> C2[स्थितिज ऊर्जा mgh]
C --> C3[ऊर्जा संरक्षण]
D --> D1[P = W ÷ t]
D --> D2[इकाई वाट]
D --> D3[1 hp = 746 W]
कार्य, ऊर्जा और शक्ति यांत्रिकी की संपूर्ण संरचना का समापन करने वाली अवधारणाएँ हैं। इस अध्याय में हमने कार्य को बल और विस्थापन के गुणनफल के रूप में, ऊर्जा को कार्य करने की क्षमता के रूप में और शक्ति को कार्य करने की दर के रूप में समझा। गतिज ऊर्जा 1/2 mv² और स्थितिज ऊर्जा mgh की गणना के साथ ऊर्जा संरक्षण के नियम का भी अध्ययन किया। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में यह अध्याय निश्चित अंक देने वाला है। रेलवे इंजन की शक्ति, ट्रेन की गतिज ऊर्जा और ब्रेकिंग व्यवस्था में इन अवधारणाओं का व्यावहारिक उपयोग होता है। कार्य, ऊर्जा और शक्ति की दृढ़ पकड़ के साथ भौतिकी के यांत्रिकी भाग का संपूर्ण अध्ययन पूर्ण होता है और परीक्षा में सफलता के लिए ठोस आधार तैयार होता है।