प्रकाश का परावर्तन Notes

प्रकाश का परावर्तन

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – ऊष्मा ध्वनि और प्रकाश विषय-वस्तु: 12.7 प्रकाश का परावर्तन

1. परिचय

प्रकाश ऊर्जा का वह रूप है जिसके कारण हम वस्तुओं को देख पाते हैं। जब प्रकाश किसी चमकदार (पॉलिश) सतह से टकराकर वापस लौटता है, तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में प्रकाश के परावर्तन से प्रतिवर्ष 2 से 3 प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें परावर्तन के नियम, समतल दर्पण में प्रतिबिंब की विशेषताएँ, दर्पण का झुकाव, वस्तु-प्रतिबिंब की दूरी तथा प्रकाश की गति पर आधारित प्रश्न आते हैं। इसके अलावा परावर्तित प्रकाश के व्यावहारिक उपयोग और दर्पण से संबंधित प्रश्न भी पूछे जाते हैं।

प्रकाश एक अनुप्रस्थ विद्युतचुंबकीय तरंग है, जिसकी गति निर्वात में 3 × 10^8 m/s होती है। प्रकाश का परावर्तन चिकनी, चमकदार सतहों जैसे दर्पण, शांत जल की सतह, पॉलिश धातु से होता है। खुरदरी सतहें प्रकाश को बिखेर देती हैं, जिसे विसरित परावर्तन कहते हैं। यही कारण है कि खुरदरी सतह से हमें प्रतिबिंब नहीं दिखता, परंतु वस्तु दिखाई देती है। हमें कोई वस्तु दिखाई देती है क्योंकि प्रकाश वस्तु से परावर्तित होकर हमारी आँखों तक पहुँचता है। इसीलिए अंधेरे कमरे में वस्तुएँ नहीं दिखतीं।

इस विषय में हम परावर्तन के दो नियमों, समतल दर्पण में बनने वाले प्रतिबिंब के गुण, दर्पण के झुकाने पर परावर्तित किरण के विचलन, विसरित और नियमित परावर्तन के बीच अंतर तथा परावर्तन के व्यावहारिक अनुप्रयोगों का अध्ययन करेंगे। हम दर्पण में बनी वस्तु और प्रतिबिंब की दूरी से संबंधित संख्यात्मक उदाहरणों का अभ्यास करेंगे। रेलवे परीक्षा में परावर्तन के नियम, समतल दर्पण के प्रतिबिंब के गुण तथा दर्पण झुकाव का सूत्र θ = 2α सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।

2. परावर्तन के नियम और उनका अनुप्रयोग

प्रकाश के परावर्तन के दो नियम हैं। प्रथम नियम: आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब सदैव एक ही तल में होते हैं। द्वितीय नियम: आपतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है (∠i = ∠r)। इन दोनों नियमों को परावर्तन के नियम कहते हैं। आपतन कोण और परावर्तन कोण दोनों अभिलंब से मापे जाते हैं, न कि सतह से। अभिलंब आपतन बिंदु पर सतह पर खींचा गया लंब है। यदि प्रकाश अभिलंब के साथ आपतित होता है (i = 0), तो परावर्तित किरण भी अभिलंब के साथ ही वापस लौटती है।

परावर्तन की घटना में वस्तु की स्थिति और दर्पण की दूरी के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध है। समतल दर्पण में प्रतिबिंब की दूरी सदैव दर्पण से वस्तु की दूरी के बराबर होती है। प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बनता है और वह काल्पनिक (virtual), सीधा (erect) तथा वस्तु के आकार के बराबर होता है। प्रतिबिंब पार्श्व रूप से उल्टा (laterally inverted) होता है, अर्थात वस्तु का दायाँ भाग प्रतिबिंब में बायाँ दिखाई देता है। यही कारण है कि दर्पण में लिखे अक्षर उल्टे दिखते हैं।

दर्पण का झुकाव: यदि किसी समतल दर्पण को θ कोण से घुमाया जाए, तो परावर्तित किरण 2θ कोण से विचलित हो जाती है। यदि आपतित किरण स्थिर हो और दर्पण को कोण α से घुमाया जाए, तो परावर्तित किरण 2α कोण से घूम जाती है। यह सिद्धांत दर्पण गैल्वेनोमीटर और सेक्सटेंट जैसे उपकरणों में प्रयोग होता है। समतल दर्पण की सहायता से ऊँचाई मापने और वस्तु की स्थिति ज्ञात करने में यही नियम उपयोगी है।

उदाहरण 1: यदि आपतन कोण 40° है, तो परावर्तन कोण और परावर्तित किरण का अभिलंब से विचलन क्या होगा?

हल: परावर्तन के नियम से ∠i = ∠r, अतः ∠r = 40°। अभिलंब से मापने पर परावर्तित किरण 40° पर होगी। यदि सतह से मापें तो परावर्तन कोण सतह से = 90° - 40° = 50°।

उदाहरण 2: दर्पण से 30 cm दूर रखी वस्तु का प्रतिबिंब दर्पण से कितनी दूरी पर बनेगा?

हल: समतल दर्पण में प्रतिबिंब की दूरी वस्तु की दूरी के बराबर होती है। अतः प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 30 cm पर बनेगा। वस्तु और प्रतिबिंब के बीच की दूरी 30 + 30 = 60 cm होगी।

3. नियमित और विसरित परावर्तन

जब प्रकाश की समांतर किरणें किसी चिकनी, चमकदार सतह (जैसे दर्पण, पॉलिश धातु, शांत जल) से परावर्तित होती हैं, तो परावर्तित किरणें भी समांतर रहती हैं। इस परावर्तन को नियमित परावर्तन (regular reflection) कहते हैं। इसी से हमें दर्पणों में स्पष्ट प्रतिबिंब मिलता है। जब प्रकाश की समांतर किरणें किसी खुरदरी सतह (जैसे कागज, दीवार, पत्थर) से परावर्तित होती हैं, तो परावर्तित किरणें विभिन्न दिशाओं में बिखर जाती हैं। इसे विसरित परावर्तन (diffused reflection) कहते हैं। विसरित परावर्तन के कारण ही हम खुरदरी सतहों से परावर्तित प्रकाश को सभी दिशाओं से देख पाते हैं।

विसरित परावर्तन का ही कारण है कि दिन में कमरा प्रकाशित दिखाई देता है, भले ही सूर्य का प्रकाश सीधे उसमें न पहुँचता हो। दीवारें प्रकाश को विसरित रूप से परावर्तित कर सभी दिशाओं में फैला देती हैं। पुस्तक, कागज आदि से परावर्तित प्रकाश विसरित होता है, इसलिए हम उन्हें किसी भी दिशा से पढ़ सकते हैं। नियमित परावर्तन में प्रतिबिंब स्पष्ट और विसरित परावर्तन में प्रतिबिंब नहीं बनता, क्योंकि विसरित परावर्तन में किरणें व्यवस्थित नहीं रहतीं। परावर्तन के नियम दोनों प्रकार के परावर्तनों में लागू होते हैं।

व्यावहारिक उदाहरण: स्कूल में परेड की मार्च-पास्ट में बच्चे अपना पैर सही दिशा में रखने के लिए मार्चिंग बैंड की ओर देखते हैं। सिनेमा हॉलों की स्क्रीन को खुरदरा और सफेद रखा जाता है ताकि सभी दर्शकों को स्पष्ट चित्र दिखे (विसरित परावर्तन)। पुस्तकालयों और कक्षाओं में प्रकाश विसरित परावर्तन से ही हर ओर फैलता है।

4. समतल दर्पण के प्रतिबिंब के गुण

समतल दर्पण में बनने वाले प्रतिबिंब के प्रमुख गुण निम्न हैं: - प्रतिबिंब काल्पनिक (virtual) होता है, अर्थात इसे स्क्रीन पर प्राप्त नहीं किया जा सकता। - प्रतिबिंब सीधा (erect) होता है, अर्थात उल्टा नहीं। - प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बराबर होता है। - दर्पण से प्रतिबिंब की दूरी दर्पण से वस्तु की दूरी के बराबर होती है। - प्रतिबिंब पार्श्व रूप से उल्टा (laterally inverted) होता है, दायाँ बायाँ हो जाता है।

प्रतिबिंब की गति: यदि वस्तु दर्पण की ओर v वेग से चलती है, तो प्रतिबिंब विपरीत दिशा में उतनी ही गति से चलता है, और वस्तु की सापेक्ष गति 2v हो जाती है। यदि दर्पण को v वेग से चलाया जाए तो प्रतिबिंब 2v वेग से चलता है। यह तथ्य परीक्षा के संख्यात्मक प्रश्नों में अक्सर पूछा जाता है।

उदाहरण 3: एक व्यक्ति दर्पण की ओर 2 m/s की गति से चल रहा है। उसके प्रतिबिंब की सापेक्ष गति कितनी होगी?

हल: वस्तु की गति v = 2 m/s है। प्रतिबिंब विपरीत दिशा में 2 m/s से चलता है। सापेक्ष गति = v + v = 2 + 2 = 4 m/s। अतः प्रतिबिंब की सापेक्ष गति 4 m/s है।

उदाहरण 4: समतल दर्पण के सामने 25 cm दूर रखी मोमबत्ती और उसके प्रतिबिंब के बीच की दूरी क्या होगी?

हल: प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 25 cm पर बनेगा। वस्तु और प्रतिबिंब के बीच की दूरी = 25 + 25 = 50 cm होगी।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: नियमित और विसरित परावर्तन

गुण नियमित परावर्तन विसरित परावर्तन
सतह चिकनी, चमकदार खुरदरी
परावर्तित किरणें समांतर रहती हैं बिखर जाती हैं
प्रतिबिंब स्पष्ट बनता है नहीं बनता
उदाहरण दर्पण, शांत जल कागज, दीवार

तालिका 2: समतल दर्पण के प्रतिबिंब के गुण

गुण विवरण
प्रकार काल्पनिक (virtual)
अभिविन्यास सीधा (erect)
आकार वस्तु के बराबर
दूरी दर्पण से बराबर दूरी
पार्श्व व्युत्क्रम दायाँ बायाँ हो जाता है

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[प्रकाश का परावर्तन] --> B[परावर्तन के नियम]
    A --> C[नियमित परावर्तन]
    A --> D[विसरित परावर्तन]
    A --> E[समतल दर्पण प्रतिबिंब]
    A --> F[दर्पण का झुकाव]
    B --> B1[आपतित, परावर्तित, अभिलंब एक तल में]
    B --> B2[i = r]
    C --> C1[चिकनी सतह, स्पष्ट प्रतिबिंब]
    D --> D1[खुरदरी सतह, बिखराव]
    E --> E1[काल्पनिक, सीधा, बराबर आकार]
    E --> E2[पार्श्व व्युत्क्रम]
    F --> F1[दर्पण θ घुमाने पर किरण 2θ घूमती है]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

प्रकाश के परावर्तन के नियम समतल दर्पण अभिलंब आपतित किरण परावर्तित किरण i r i = r (आपतन कोण = परावर्तन कोण) आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में होते हैं स्वर्ण नियम आपतन कोण और परावर्तन कोण अभिलंब से मापे जाते हैं।

समतल दर्पण में प्रतिबिंब समतल दर्पण वस्तु दूरी u u = 30 cm प्रतिबिंब दूरी v = u प्रतिबिंब दर्पण के पीछे, काल्पनिक, सीधा और बराबर आकार का पार्श्व व्युत्क्रम - दायाँ बायाँ हो जाता है स्वर्ण नियम समतल दर्पण में प्रतिबिंब की दूरी वस्तु की दूरी के बराबर होती है।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. आपतन कोण को सतह से मापना; आपतन कोण अभिलंब से मापा जाता है।
  2. विसरित परावर्तन में परावर्तन के नियम लागू नहीं होते मानना; ये नियम दोनों में लागू होते हैं।
  3. समतल दर्पण के प्रतिबिंब को वास्तविक मानना; प्रतिबिंब काल्पनिक होता है।
  4. समतल दर्पण में प्रतिबिंब का आकार घटता-बढ़ता मानना; आकार सदैव वस्तु के बराबर होता है।
  5. दर्पण को α कोण से घुमाने पर परावर्तित किरण α कोण से घूमती मानना; सही विचलन 2α है।
  6. वस्तु दर्पण की ओर v से चलने पर सापेक्ष गति v मानना; सही सापेक्ष गति 2v है।
  7. पार्श्व व्युत्क्रम को ऊपर-नीचे उलटना मानना; पार्श्व व्युत्क्रम में दायाँ-बायाँ बदलता है।
  8. प्रकाश की गति को वायु में 3 × 10^5 m/s लिखना; सही मान 3 × 10^8 m/s है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. परावर्तन के दोनों नियम रटें — विशेषकर i = r और तीनों एक तल में।
  2. समतल दर्पण के प्रतिबिंब के पाँच गुण रटें, यह सीधे प्रश्न के रूप में आता है।
  3. दर्पण झुकाव सूत्र: दर्पण θ घुमाने पर परावर्तित किरण 2θ घूमती है।
  4. सापेक्ष गति के प्रश्न: वस्तु v से चलने पर प्रतिबिंब की सापेक्ष गति 2v होती है।
  5. विसरित परावर्तन के उदाहरण (कागज, दीवार) और नियमित के (दर्पण, शांत जल) अलग रखें।
  6. प्रकाश की गति 3 × 10^8 m/s और ध्वनि की गति 343 m/s — दोनों अलग रटें।
  7. प्रतिबिंब की दूरी के प्रश्न में वस्तु-प्रतिबिंब की कुल दूरी 2 × दूरी होती है।
  8. आपतन कोण 0° होने पर किरण अभिलंब के साथ ही वापस लौटती है।

10. निष्कर्ष

प्रकाश का परावर्तन प्रकाशिकी का आधारभूत सिद्धांत है। इस अध्याय में हमने परावर्तन के दो नियमों, नियमित और विसरित परावर्तन के बीच अंतर, समतल दर्पण में बनने वाले प्रतिबिंब के गुण तथा दर्पण झुकाव के सिद्धांत का अध्ययन किया। हमने दूरी, सापेक्ष गति और आपतन-परावर्तन कोण पर आधारित संख्यात्मक उदाहरणों का अभ्यास किया। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इस विषय से 2 से 3 प्रश्न अवश्य आते हैं। परावर्तन के नियमों की सटीक पकड़, समतल दर्पण के प्रतिबिंब के गुणों की जानकारी और सूत्रों के सही प्रयोग से विद्यार्थी इन प्रश्नों को आसानी से हल कर सकता है। यह अध्याय आगे दर्पण (गोलीय दर्पण), अपवर्तन और लेंस के अध्यायों की मजबूत नींव है।