गति Notes

गति

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – यांत्रिकी विषय-वस्तु: 11.2 गति

1. परिचय

गति भौतिकी का वह मूल अध्याय है जो हमारे चारों ओर घटित होने वाली हर हलचल का गणितीय वर्णन करता है। किसी वस्तु की स्थिति में समय के साथ होने वाले परिवर्तन को गति कहते हैं। सूर्य का उदय, पक्षियों का उड़ना, गाड़ी का चलना और ट्रेन का पटरी पर दौड़ना — सभी गति के उदाहरण हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में गति के अध्याय से प्रतिवर्ष 3 से 5 प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें चाल, वेग, त्वरण, गति के समीकरण तथा ग्राफ-आधारित प्रश्न प्रमुख होते हैं। रेलवे के कार्यक्षेत्र में ट्रेन की चाल, सिग्नल दूरी और ब्रेकिंग दूरी की गणना के लिए इस अध्याय का ज्ञान आवश्यक है।

गति का अध्ययन करते समय सबसे पहले वस्तु की स्थिति को किसी संदर्भ बिंदु के सापेक्ष परिभाषित करना आवश्यक है। संदर्भ बिंदु के बिना यह बताना असंभव है कि वस्तु गतिमान है या स्थिर। उदाहरण के लिए, एक स्थिर खड़ा व्यक्ति चलती ट्रेन के अंदर बैठा यात्री ही सही, परंतु ट्रेन के सापेक्ष वह स्थिर दिखता है, जबकि प्लेटफार्म के सापेक्ष वह गतिमान है। इस प्रकार गति सापेक्ष होती है और उसे हमेशा किसी न किसी संदर्भ के सापेक्ष ही व्यक्त किया जाता है।

इस अध्याय में हम गति के प्रकारों — एकसमान और असमान गति, एकसमान त्वरित और एकसमान मंदित गति — तथा गति के तीन समीकरणों v = u + at, s = ut + 1/2 at² और v² = u² + 2as का विस्तार से अध्ययन करेंगे। साथ ही स्थिति-समय और वेग-समय ग्राफों की व्याख्या और उनसे चाल, वेग तथा त्वरण निकालने की विधि भी सीखेंगे। यह अध्याय आगे के अध्यायों — बल, संवेग और कार्य-ऊर्जा — की समझ के लिए अनिवार्य आधार है।

2. गति के प्रकार

गति को मुख्यतः दो प्रकारों में बाँटा जा सकता है — एकसमान गति और असमान गति। यदि कोई वस्तु समान समय अंतरालों में समान दूरी तय करती है, तो उसकी गति एकसमान गति कहलाती है। उदाहरण के लिए, एक ट्रेन जो हर 30 मिनट में 30 किलोमीटर तय करती है, वह एकसमान गति से चल रही है। इसके विपरीत, यदि वस्तु समान समय अंतरालों में असमान दूरी तय करती है, तो उसकी गति असमान गति कहलाती है। वास्तविक जीवन में अधिकांश गतियाँ असमान होती हैं क्योंकि सड़क की स्थिति, ट्रैफिक और ढाल के कारण चाल बदलती रहती है।

गति को गति के पथ के आधार पर भी वर्गीकृत किया जा सकता है। यदि किसी वस्तु का गति पथ एक सरल रेखा है, तो उसे सरल रेखीय गति कहते हैं। यदि गति पथ एक वृत्त है, तो उसे वृत्तीय गति कहते हैं, जैसे घड़ी की सुई की गति। किसी वस्तु के बिंदु के चारों ओर दोलन करने की गति को आवर्ती गति कहते हैं, जैसे पेंडुलम की गति। ट्रेन के पहियों की गति घूर्णन गति तथा प्लेटफार्म पर चलते यात्री की गति सरल रेखीय गति का उदाहरण है।

त्वरण के आधार पर गति तीन प्रकार की होती है — एकसमान त्वरित गति जिसमें वेग में समान दर से परिवर्तन होता है, असमान त्वरित गति जिसमें त्वरण बदलता रहता है, और एकसमान मंदित गति जिसमें वस्तु का वेग समान दर से घटता है। ट्रेन के स्टेशन से खुलने पर उसकी गति एकसमान त्वरित गति होती है, जबकि ब्रेक लगाने पर वह मंदित गति का उदाहरण है। जब मंदन अत्यधिक होता है तो वह अवत्वरण कहलाता है।

3. गति के समीकरण

एकसमान त्वरण से गतिमान वस्तु के लिए गति के तीन मुख्य समीकरण होते हैं। पहला समीकरण v = u + at है, जो अंतिम वेग, प्रारंभिक वेग, त्वरण और समय में संबंध स्थापित करता है। यहाँ v अंतिम वेग, u प्रारंभिक वेग, a त्वरण और t समय है। दूसरा समीकरण s = ut + 1/2 at² है, जो तय की गई दूरी s को प्रारंभिक वेग, त्वरण और समय के संदर्भ में व्यक्त करता है। तीसरा समीकरण v² = u² + 2as है, जो वेग, त्वरण और दूरी के बीच संबंध देता है और उन प्रश्नों में उपयोगी है जहाँ समय नहीं दिया गया हो।

इन समीकरणों का उपयोग करते समय चिह्न परंपरा का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। यदि वस्तु गति की दिशा में त्वरित हो रही है तो त्वरण धनात्मक लिया जाता है, और यदि मंदित हो रही है तो त्वरण ऋणात्मक लिया जाता है। जब वस्तु विरामावस्था से गति शुरू करती है तो u = 0 होता है, और जब वस्तु रुक जाती है तो v = 0 होता है। स्वतंत्र रूप से गिरती वस्तु के लिए गुरुत्वीय त्वरण g का उपयोग किया जाता है, जिसका मान लगभग 9.8 मीटर/सेकंड² होता है।

उदाहरण 1: एक ट्रेन विरामावस्था से 2 मीटर/सेकंड² के एकसमान त्वरण से चलना प्रारंभ करती है। 10 सेकंड के बाद उसका वेग क्या होगा?

हल: यहाँ u = 0, a = 2 मीटर/सेकंड², t = 10 सेकंड। सूत्र v = u + at से, v = 0 + 2 × 10 = 20 मीटर/सेकंड। अतः ट्रेन का वेग 20 मीटर/सेकंड होगा।

उदाहरण 2: एक कार 30 मीटर/सेकंड की चाल से चल रही है। ब्रेक लगाने पर वह 2 मीटर/सेकंड² की दर से मंदित होती है। रुकने से पहले वह कितनी दूरी तय करेगी?

हल: यहाँ u = 30, v = 0, a = -2 मीटर/सेकंड²। सूत्र v² = u² + 2as से, 0 = (30)² + 2 × (-2) × s, अर्थात 4s = 900, अतः s = 225 मीटर। कार 225 मीटर की दूरी तय करने के बाद रुकेगी।

4. ग्राफों द्वारा गति का वर्णन

स्थिति-समय ग्राफ में समय को क्षैतिज अक्ष पर और स्थिति को ऊर्ध्वाधर अक्ष पर दर्शाया जाता है। इस ग्राफ का ढाल वस्तु का वेग बताता है। एक सरल रेखा में बढ़ता हुआ स्थिति-समय ग्राफ एकसमान वेग को दर्शाता है, जबकि वक्र रेखा असमान वेग को। यदि ग्राफ समय अक्ष के समांतर है, तो वस्तु स्थिर है। वेग-समय ग्राफ का ढाल त्वरण बताता है और इस ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल तय की गई दूरी के बराबर होता है।

वेग-समय ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल ज्ञात करना दूरी निकालने की सबसे प्रचलित विधि है। यदि ग्राफ एक आयत है, तो क्षेत्रफल = वेग × समय होगा। यदि ग्राफ एक त्रिभुज है, तो क्षेत्रफल = 1/2 × आधार × ऊँचाई होगा। समलंब चतुर्भुज के आकार के ग्राफ के लिए क्षेत्रफल = 1/2 × (समांतर भुजाओं का योग) × ऊँचाई होता है। इन ज्यामितीय सूत्रों की सहायता से किसी भी वेग-समय ग्राफ से दूरी आसानी से निकाली जा सकती है।

उदाहरण 3: एक ट्रेन का वेग-समय ग्राफ एक त्रिभुज बनाता है जिसका आधार 20 सेकंड और ऊँचाई (अधिकतम वेग) 30 मीटर/सेकंड है। ट्रेन द्वारा तय की गई कुल दूरी ज्ञात कीजिए।

हल: वेग-समय ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल = 1/2 × आधार × ऊँचाई = 1/2 × 20 × 30 = 300 मीटर। अतः ट्रेन द्वारा तय की गई कुल दूरी 300 मीटर है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: गति के तीन समीकरण

समीकरण सूत्र उपयोग
प्रथम v = u + at अंतिम वेग ज्ञात करना
द्वितीय s = ut + 1/2 at² दूरी ज्ञात करना
तृतीय v² = u² + 2as समय के बिना दूरी ज्ञात करना

तालिका 2: गति के प्रकार और उदाहरण

गति का प्रकार लक्षण उदाहरण
एकसमान गति समान समय में समान दूरी स्थिर चाल की ट्रेन
असमान गति समान समय में असमान दूरी भीड़भाड़ वाली सड़क पर बस
एकसमान त्वरित गति वेग में समान दर से वृद्धि स्टेशन से खुलती ट्रेन
एकसमान मंदित गति वेग में समान दर से कमी ब्रेक लगाती ट्रेन
वृत्तीय गति वृत्ताकार पथ पर गति घड़ी की सुई

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[गति] --> B[गति के प्रकार]
    A --> C[गति के समीकरण]
    A --> D[ग्राफ विधि]
    B --> B1[एकसमान गति]
    B --> B2[असमान गति]
    B --> B3[एकसमान त्वरित गति]
    B --> B4[एकसमान मंदित गति]
    C --> C1[v = u + at]
    C --> C2[s = ut + 1/2 at2]
    C --> C3[v2 = u2 + 2as]
    D --> D1[स्थिति-समय ग्राफ ढाल = वेग]
    D --> D2[वेग-समय ग्राफ ढाल = त्वरण]
    D --> D3[क्षेत्रफल = दूरी]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

वेग-समय ग्राफ समय (s) वेग (m/s) एकसमान गति एकसमान त्वरित गति स्वर्ण नियम वेग-समय ग्राफ के नीचे का क्षेत्रफल ही तय की गई दूरी है।

गति के तीन समीकरण v = u + at प्रथम समीकरण s = ut + 1/2 at² द्वितीय समीकरण v² = u² + 2as तृतीय समीकरण मंदन होने पर a ऋणात्मक लें विराम से चलने पर u = 0 रुकने पर v = 0 मुक्त पतन में a = g = 9.8 m/s² स्वर्ण नियम मंदित गति में त्वरण को हमेशा ऋणात्मक चिह्न के साथ लिखें।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. मंदित गति में त्वरण को धनात्मक लेना सबसे आम गलती है; मंदन का अर्थ ऋणात्मक त्वरण है।
  2. v = u + at में समय इकाई को सेकंड में न बदलकर मिनट में रखना गलत उत्तर देता है।
  3. किमी/घंटा को मीटर/सेकंड में बदले बिना सीधे समीकरणों में उपयोग करना।
  4. एकसमान गति को एकसमान त्वरित गति समझना; एकसमान गति में त्वरण शून्य होता है।
  5. वेग-समय ग्राफ का क्षेत्रफल ज्ञात करते समय सही ज्यामितीय आकृति न पहचानना।
  6. दूरी और विस्थापन को एक ही मानना, जबकि विस्थापन दिशा सहित होता है।
  7. v² = u² + 2as में वर्ग करते समय इकाई के वर्ग को भूल जाना।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. तीनों समीकरणों के अनुप्रयोग को पहचानें — प्रश्न में दी गई राशियों के अनुसार समीकरण चुनें।
  2. सभी चालों को पहले मीटर/सेकंड में बदलें, क्योंकि त्वरण की इकाई m/s² होती है।
  3. ग्राफ प्रश्नों में पहले पहचानें कि ग्राफ आयत, त्रिभुज या समलंब है, फिर क्षेत्रफल निकालें।
  4. मुक्त पतन के प्रश्नों में u = 0 तथा a = g लें, क्योंकि ये सीधे उत्तर तक पहुँचाते हैं।
  5. स्थिति-समय ग्राफ का ढाल वेग तथा वेग-समय ग्राफ का ढाल त्वरण देता है — याद रखें।
  6. प्रश्न में मंदन शब्द दिखे तो तुरंत a ऋणात्मक लें और v = 0 रखें।
  7. उत्तर की इकाई लिखना न भूलें, क्योंकि कई प्रश्नों में इकाई गलत होने पर अंक कटते हैं।

10. निष्कर्ष

गति भौतिकी का वह अध्याय है जो वस्तुओं की हलचल को संख्याओं और समीकरणों में व्यक्त करता है। इस अध्याय में हमने गति के प्रकारों, गति के तीन समीकरणों और ग्राफ-आधारित विधियों का अध्ययन किया। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में यह अध्याय सीधे अंक देने वाला है, क्योंकि इसके प्रश्न सूत्रों पर आधारित होते हैं। ट्रेन की चाल, ब्रेकिंग दूरी और त्वरण से संबंधित व्यावहारिक प्रश्न इसी अध्याय के ज्ञान पर निर्भर करते हैं। गति के समीकरणों की दृढ़ पकड़ बाद के अध्यायों — बल, संवेग, गुरुत्वाकर्षण और कार्य-ऊर्जा — को समझने में अत्यंत सहायक होगी। नियमित अभ्यास से इन समीकरणों का त्वरित अनुप्रयोग करना सीखकर परीक्षा में पूर्ण अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।