विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – विद्युत और चुंबकत्व विषय-वस्तु: 13.3 विभवांतर
किसी चालक के दो बिंदुओं के बीच विद्युत आवेश को प्रवाहित करने के लिए उनके बीच विद्युत दाब या विभवांतर की आवश्यकता होती है। जिस प्रकार जल को ऊँचे से नीचे बहाने के लिए ऊँचाई का अंतर चाहिए, उसी प्रकार आवेश को प्रवाहित करने के लिए विभव का अंतर आवश्यक है। किसी बिंदु पर विद्युत विभव वह कार्य है जो एकांक धन आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में किया जाता है। किसी चालक के दो बिंदुओं के बीच का विभवांतर एकांक आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य होता है।
विभवांतर की SI इकाई वोल्ट (V) है। यदि 1 कूलॉम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में 1 जूल कार्य किया जाता है, तो दोनों बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 वोल्ट होता है। वोल्ट की इकाई का नाम इतालवी वैज्ञानिक एलेसांद्रो वोल्टा के सम्मान में रखा गया है। विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर का उपयोग होता है, जिसे परिपथ में समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है। रेलवे की विद्युत प्रणालियों में विभवांतर की सही जानकारी ओवरहेड वायर, सिग्नल और उपकरणों के सुरक्षित संचालन के लिए आवश्यक है।
इस अध्याय में हम विद्युत विभव और विभवांतर की परिभाषा, सूत्र V = W/Q, विद्युत वाहक बल (EMF) तथा विभवांतर के बीच अंतर, सेल की रासायनिक क्रिया और वोल्टमीटर के उपयोग का अध्ययन करेंगे। विभवांतर से जुड़े संख्यात्मक प्रश्न परीक्षा में सामान्यतः पूछे जाते हैं। यह अध्याय ओम के नियम और प्रतिरोध की अवधारणा को समझने का आधार तैयार करता है।
किसी विद्युत परिपथ के दो बिंदुओं A और B के बीच का विभवांतर उस कार्य की मात्रा है जो एकांक आवेश को बिंदु A से B तक ले जाने में किया जाता है। गणितीय रूप से:
V = W / Q
जहाँ V विभवांतर (वोल्ट में), W किया गया कार्य (जूल में) तथा Q प्रवाहित आवेश (कूलॉम में) है। विभवांतर की इकाई वोल्ट है, जिसे 1 वोल्ट = 1 जूल / 1 कूलॉम के रूप में भी व्यक्त किया जा सकता है।
उदाहरण 1: 2 कूलॉम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में 10 जूल कार्य किया जाता है। विभवांतर ज्ञात कीजिए।
हल: V = W/Q = 10/2 = 5 वोल्ट।
उदाहरण 2: किसी परिपथ में 3 एम्पियर धारा 5 ओम प्रतिरोध में प्रवाहित होती है। विभवांतर ज्ञात कीजिए।
हल: ओम के नियम से V = IR = 3 × 5 = 15 वोल्ट।
कार्य और ऊर्जा का संबंध: जब आवेश Q किसी विभवांतर V के बीच प्रवाहित होता है, तो किया गया कार्य W = QV = VIt होता है। चूँकि धारा I = Q/t, इसलिए Q = It और W = VIt। इससे स्पष्ट है कि विद्युत ऊर्जा विभवांतर, धारा और समय का गुणनफल है।
सेल के सिरों के बीच स्थापित अधिकतम विभवांतर को विद्युत वाहक बल (EMF) कहते हैं। जब सेल से धारा नहीं ली जा रही होती है (खुला परिपथ), तब टर्मिनल विभवांतर, EMF के बराबर होता है। जब सेल से धारा ली जाती है, तब सेल के आंतरिक प्रतिरोध के कारण कुछ विभव घट जाता है, और टर्मिनल विभवांतर EMF से कम हो जाता है।
EMF और टर्मिनल विभवांतर में संबंध: यदि सेल का EMF E, आंतरिक प्रतिरोध r तथा परिपथ में धारा I है, तो टर्मिनल विभवांतर V = E − Ir होता है। आंतरिक प्रतिरोध वह प्रतिरोध है जो सेल के अंदर इलेक्ट्रोलाइट और इलेक्ट्रोड के कारण धारा के प्रवाह में बाधा उत्पन्न करता है। रेलवे में बैटरी बैंकों के आंतरिक प्रतिरोध की निगरानी आवश्यक है, क्योंकि बढ़ा हुआ आंतरिक प्रतिरोध उपकरणों के प्रदर्शन को प्रभावित करता है।
उदाहरण 3: किसी सेल का EMF 12 वोल्ट तथा आंतरिक प्रतिरोध 1 ओम है। जब सेल से 2 एम्पियर धारा ली जाती है, तो टर्मिनल विभवांतर ज्ञात कीजिए।
हल: V = E − Ir = 12 − (2 × 1) = 12 − 2 = 10 वोल्ट।
वोल्टमीटर: विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर का उपयोग होता है। इसे परिपथ में समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है, क्योंकि इसे उन्हीं दो बिंदुओं के बीच जोड़ा जाता है जिनके बीच विभवांतर मापना होता है। आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध अनंत होता है, ताकि उसमें से धारा न बहे और परिपथ की स्थिति न बदले।
सेल की संरचना: साधारण वोल्टाई सेल में एक धन इलेक्ट्रोड (ताँबे की पट्टी), एक ऋण इलेक्ट्रोड (जस्ते की पट्टी) और इलेक्ट्रोलाइट (तनु सल्फ्यूरिक अम्ल) होता है। इलेक्ट्रोडों के बीच रासायनिक क्रिया से विभवांतर उत्पन्न होता है। जस्ता ऋण टर्मिनल तथा ताँबा धन टर्मिनल के रूप में कार्य करता है। सेल में रासायनिक ऊर्जा विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होती है।
सेलों का श्रेणी संयोजन: जब कई सेलों को इस प्रकार जोड़ा जाता है कि एक सेल का धन टर्मिनल दूसरे के ऋण टर्मिनल से जुड़ा हो, तो उसे श्रेणी संयोजन कहते हैं। इससे कुल EMF बढ़ जाता है और कुल EMF E = E₁ + E₂ + E₃ + ... होता है। कुल आंतरिक प्रतिरोध r = r₁ + r₂ + r₃ + ... होता है। इस प्रकार के संयोजन का उपयोग तब होता है जब अधिक विभवांतर की आवश्यकता हो।
सेलों का समानांतर संयोजन: जब सभी सेलों के धन टर्मिनल एक साथ तथा ऋण टर्मिनल एक साथ जोड़े जाते हैं, तो उसे समानांतर संयोजन कहते हैं। इसमें विभवांतर समान रहता है परंतु आंतरिक प्रतिरोध कम हो जाता है, जिससे अधिक धारा ली जा सकती है। इस संयोजन का उपयोग बैटरी बैंकों में अधिक धारा देने के लिए किया जाता है।
उदाहरण 4: दो सेलों, प्रत्येक का EMF 1.5 वोल्ट, को श्रेणी में जोड़ा जाता है। कुल EMF कितना होगा?
हल: E = E₁ + E₂ = 1.5 + 1.5 = 3.0 वोल्ट।
| राशि | सूत्र | SI मात्रक |
|---|---|---|
| विभवांतर | V = W/Q | वोल्ट (V) |
| कार्य | W = QV = VIt | जूल (J) |
| आवेश | Q = W/V | कूलॉम (C) |
| ओम का नियम | V = IR | वोल्ट (V) |
| टर्मिनल विभवांतर | V = E − Ir | वोल्ट (V) |
| गुण | विद्युत वाहक बल (EMF) | विभवांतर |
|---|---|---|
| परिभाषा | खुला परिपथ में अधिकतम विभव | परिपथ में दो बिंदुओं के बीच विभव अंतर |
| स्रोत | सेल/जनरेटर | विद्युत उपकरण |
| परिपथ स्थिति | खुला परिपथ में मापा जाता है | बंद परिपथ में मापा जाता है |
| मात्रक | वोल्ट (V) | वोल्ट (V) |
| आंतरिक प्रतिरोध प्रभाव | नहीं पड़ता | प्रभावित होता है |
flowchart TD
A[विभवांतर] --> B[परिभाषा V = W/Q]
A --> C[मात्रक वोल्ट]
A --> D[EMF और विभवांतर]
A --> E[सेल]
A --> F[मापन]
B --> B1[1 वोल्ट = 1 जूल/कूलॉम]
D --> D1[EMF खुला परिपथ में]
D --> D2[V = E - Ir]
E --> E1[श्रेणी संयोजन विभव बढ़ता है]
E --> E2[समानांतर संयोजन धारा बढ़ती है]
F --> F1[वोल्टमीटर समानांतर में]
C --> C1[नाम वोल्टा के नाम पर]
V = W/Q है।Ir को सूत्र में जोड़ देना, जबकि उसे घटाना होता है।V = W/Q के सूत्र से कार्य, आवेश और विभवांतर तीनों ज्ञात करने का अभ्यास करें।V = IR से विभवांतर ज्ञात करने के प्रश्न बार-बार आते हैं, सूत्र अवश्य याद रखें।V = E − Ir का उपयोग करें और इकाइयों को सुसंगत रखें।विभवांतर वह प्रेरक बल है जो विद्युत परिपथ में आवेशों को प्रवाहित करता है। इस अध्याय में हमने विभवांतर की परिभाषा, सूत्र V = W/Q और वोल्ट की अवधारणा को समझा। विद्युत वाहक बल तथा टर्मिनल विभवांतर के बीच के अंतर और आंतरिक प्रतिरोध के प्रभाव का अध्ययन किया। सेलों की संरचना तथा श्रेणी और समानांतर संयोजनों के प्रभाव को भी समझा। वोल्टमीटर द्वारा विभवांतर मापने की विधि सीखी। विभवांतर की यह समझ रेलवे की विद्युत आपूर्ति प्रणाली, बैटरी प्रबंधन और उपकरणों के सही संचालन के लिए आवश्यक है। आगे के अध्याय में प्रतिरोध और ओम का नियम इसी विभवांतर की अवधारणा पर आधारित हैं, इसलिए इन मूल सिद्धांतों को पूर्ण रूप से समझना लाभदायक है।