विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – विद्युत और चुंबकत्व विषय-वस्तु: 13.8 विद्युतचुंबकीय प्रभाव
विद्युत और चुंबकत्व आपस में गहराई से संबंधित हैं। विद्युत धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है, और चुंबकीय क्षेत्र में स्थित धारावाही चालक पर बल कार्य करता है। इन घटनाओं को सामूहिक रूप से विद्युतचुंबकीय प्रभाव कहते हैं। 1820 में ओर्स्टेड ने दिखाया कि धारावाही तार के पास रखी चुंबकीय सुई विक्षेपित हो जाती है, जिससे सिद्ध हुआ कि विद्युत धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। इसके बाद यह ज्ञात हुआ कि चुंबकीय क्षेत्र में रखा धारावाही चालक भी बल का अनुभव करता है। इस परस्पर संबंध का अध्ययन विद्युतचुंबकीय प्रभाव कहलाता है।
धारावाही चालक पर लगने वाले चुंबकीय बल की दिशा फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम द्वारा ज्ञात की जाती है। यदि बाएँ हाथ की तर्जनी उंगली को चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में, मध्यमा उंगली को धारा की दिशा में फैलाएँ, तो अंगूठा चालक पर लगने वाले बल की दिशा दर्शाता है। यही बल विद्युत मोटर के घूर्णन का कारण है। रेलवे के विद्युत इंजनों में उपयोग होने वाले ट्रैक्शन मोटर इसी सिद्धांत पर कार्य करते हैं।
इस अध्याय में हम धारा और चुंबकत्व के संबंध, धारावाही चालक पर बल, फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम, विद्युत चुंबक की संरचना और उसके अनुप्रयोग, वृत्तीय पाश और परिनालिका के चुंबकीय क्षेत्र तथा रिले और घंटी जैसे उपकरणों के सिद्धांत का अध्ययन करेंगे। यह अध्याय विद्युत मोटर और जनित्र के सिद्धांतों की नींव रखता है, जिसे अगले अध्यायों में विस्तार से पढ़ेंगे।
जब किसी धारावाही चालक को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो चालक पर एक बल कार्य करता है। यह बल तीन चीजों पर निर्भर करता है — चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता (B), चालक में धारा (I) और चालक की लंबाई (l)। इस बल का सूत्र है:
F = B × I × l × sinθ
जहाँ θ चालक और चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के बीच का कोण है। जब चालक क्षेत्र के लंबवत होता है, तो θ = 90° और sinθ = 1, अतः बल अधिकतम F = BIl होता है। जब चालक क्षेत्र के समानांतर होता है, तो θ = 0° और बल शून्य होता है। बल की दिशा धारा और क्षेत्र दोनों की दिशा पर निर्भर करती है। इस बल को चुंबकीय बल कहते हैं और यह हमेशा धारा तथा क्षेत्र दोनों की दिशाओं के लंबवत होता है।
उदाहरण 1: एक धारावाही चालक 0.5 मीटर लंबा है और उसमें 3 एम्पियर धारा प्रवाहित होती है। चालक 2 टेस्ला के चुंबकीय क्षेत्र में क्षेत्र के लंबवत रखा है। चालक पर लगने वाला बल ज्ञात कीजिए।
हल: F = BIl = 2 × 3 × 0.5 = 3 न्यूटन।
फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम (Fleming's Left Hand Rule): यह नियम धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा ज्ञात करने के लिए है। बाएँ हाथ की तीन अंगुलियों को इस प्रकार फैलाएँ कि ये आपस में समकोण पर हों — तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र (B) की दिशा में, मध्यमा धारा (I) की दिशा में, तो अंगूठा बल (F) की दिशा दर्शाता है। याद रखने के लिए: बल-क्षेत्र-धारा अर्थात् अंगूठा-तर्जनी-मध्यमा (BFI)।
उदाहरण 2: चुंबकीय क्षेत्र 1.5 टेस्ला है, चालक की लंबाई 0.2 मीटर और धारा 4 एम्पियर है। चालक क्षेत्र के लंबवत है। बल ज्ञात कीजिए।
हल: F = BIl = 1.5 × 4 × 0.2 = 1.2 न्यूटन।
विद्युत चुंबक (Electromagnet): जब किसी परिनालिका के अंदर नरम लोहे का क्रोड रखा जाता है और उसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसे विद्युत चुंबक कहते हैं। धारा प्रवाहित होने पर नरम लोहे का क्रोड चुंबकीय हो जाता है और धारा बंद होते ही अपना चुंबकत्व खो देता है। विद्युत चुंबक का चुंबकत्व धारा के परिमाण और फेरों की संख्या बदलकर नियंत्रित किया जा सकता है। धारा बढ़ाने पर चुंबकत्व बढ़ता है और फेरों की संख्या बढ़ाने पर भी चुंबकत्व बढ़ता है।
विद्युत चुंबक के गुणधर्म: यह तीव्र चुंबकत्व प्रदर्शित कर सकता है, धारा बंद होते ही चुंबकत्व समाप्त हो जाता है, और इसकी ध्रुवता को धारा की दिशा बदलकर परिवर्तित किया जा सकता है। इन गुणों के कारण विद्युत चुंबक का उपयोग व्यापक रूप से होता है।
विद्युत चुंबक के अनुप्रयोग: रेलवे के विद्युत लिफ्टिंग क्रेन में भारी लोहे के सामान को उठाने के लिए, विद्युत घंटी में, रिले परिपथों में, चिकित्सा क्षेत्र में MRI मशीनों में और टेलीफोन के ईयरपीस में विद्युत चुंबक का उपयोग होता है। विद्युत चुंबक की सहायता से रेलवे के क्रॉसिंग बैरियर और सिग्नल प्रणाली भी संचालित होती है।
विद्युत चुंबक बनाम स्थायी चुंबक: विद्युत चुंबक में अस्थायी चुंबकत्व होता है, जिसे नियंत्रित किया जा सकता है, जबकि स्थायी चुंबक का चुंबकत्व सदैव बना रहता है। विद्युत चुंबक अधिक प्रबल चुंबकत्व उत्पन्न कर सकता है, जबकि स्थायी चुंबक का चुंबकत्व सीमित होता है। नरम लोहे से विद्युत चुंबक और स्टील से स्थायी चुंबक बनाया जाता है।
विद्युत घंटी (Electric Bell): विद्युत घंटी में विद्युत चुंबक, आर्मेचर, घंटी और संपर्क पेंच होता है। जब स्विच दबाया जाता है, तो धारा प्रवाहित होती है और विद्युत चुंबक आर्मेचर को आकर्षित करता है। आर्मेचर की गति से घंटी बजती है और साथ ही संपर्क टूट जाता है, जिससे धारा बंद हो जाती है। विद्युत चुंबक चुंबकत्व खो देता है, आर्मेचर वापस आ जाता है और संपर्क फिर से जुड़ जाता है। यह प्रक्रिया बार-बार दोहराई जाती है, जिससे घंटी निरंतर बजती रहती है।
विद्युत रिले (Relay): रिले एक विद्युतचुंबकीय स्विच है जो कम शक्ति वाली धारा द्वारा बड़ी धारा के परिपथ को चालू या बंद करता है। रिले का उपयोग रेलवे सिग्नलिंग प्रणाली, स्वचालित नियंत्रण परिपथों और सुरक्षा उपकरणों में होता है। रिले में एक विद्युत चुंबक होता है, जो धारा प्रवाहित होने पर संपर्कों को खींचकर मुख्य परिपथ को पूर्ण करता है।
धारावाही पाश और परिनालिका के अनुप्रयोग: धारावाही वृत्तीय पाश का व्यवहार चुंबकीय द्विध्रुव की तरह होता है। गैल्वेनोमीटर, अमीटर और वोल्टमीटर जैसे मापन उपकरण धारावाही कुंडली पर चुंबकीय बल के सिद्धांत पर कार्य करते हैं। इन उपकरणों में धारावाही कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में घूमती है और उसका विक्षेपण धारा के अनुक्रमानुपाती होता है। रेलवे तकनीशियन के लिए इन उपकरणों का कार्य सिद्धांत समझना आवश्यक है, क्योंकि ये निरीक्षण और मापन में उपयोग होते हैं।
| संकल्पना | सूत्र / नियम | उपयोग |
|---|---|---|
| चुंबकीय बल | F = BIl sinθ | चालक पर बल |
| अधिकतम बल | F = BIl (θ = 90°) | लंबवत स्थिति |
| फ्लेमिंग वाम हस्त | तर्जनी=B, मध्यमा=I, अंगूठा=F | बल की दिशा |
| विद्युत चुंबक का क्षेत्र | B = μ₀nI | परिनालिका क्षेत्र |
| गुण | विद्युत चुंबक | स्थायी चुंबक |
|---|---|---|
| चुंबकत्व | अस्थायी, नियंत्रित | स्थायी |
| पदार्थ | नरम लोहा | स्टील, एल्निको |
| प्रबलता | अत्यधिक बढ़ाई जा सकती है | सीमित |
| नियंत्रण | धारा से | संभव नहीं |
| उपयोग | क्रेन, घंटी, रिले | कम्पास, स्पीकर |
flowchart TD
A[विद्युतचुंबकीय प्रभाव] --> B[धारा और चुंबकत्व का संबंध]
A --> C[चालक पर बल]
A --> D[विद्युत चुंबक]
A --> E[अनुप्रयोग]
B --> B1[ओर्स्टेड का प्रयोग]
C --> C1[F = BIl sinθ]
C --> C2[फ्लेमिंग वाम हस्त नियम]
D --> D1[नरम लोहे का क्रोड]
D --> D2[धारा से नियंत्रण]
E --> E1[लिफ्टिंग क्रेन]
E --> E2[विद्युत घंटी]
E --> E3[रिले]
E --> E4[गैल्वेनोमीटर]
sinθ लिखना भूल जाना, विशेषकर जब चालक क्षेत्र से कोण बनाता है।F = BIl के संख्यात्मक प्रश्नों में इकाइयों को सुसंगत रखें (B टेस्ला, I एम्पियर, l मीटर)।विद्युतचुंबकीय प्रभाव विद्युत और चुंबकत्व के बीच के गहरे संबंध को प्रकट करता है। इस अध्याय में हमने सीखा कि विद्युत धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है और चुंबकीय क्षेत्र में रखा धारावाही चालक बल का अनुभव करता है। धारावाही चालक पर लगने वाले बल का सूत्र F = BIl sinθ और फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम द्वारा बल की दिशा ज्ञात करने की विधि समझी। विद्युत चुंबक की संरचना, उसके नियंत्रणीय गुणधर्म और लिफ्टिंग क्रेन, घंटी, रिले जैसे अनुप्रयोगों का अध्ययन किया। गैल्वेनोमीटर जैसे मापन उपकरणों के कार्य सिद्धांत को भी समझा। यह अध्याय विद्युत मोटर और जनित्र के सिद्धांतों का आधार है, जिन्हें अगले अध्यायों में विस्तार से पढ़ेंगे। रेलवे के विद्युत इंजन, सिग्नलिंग और सुरक्षा प्रणालियों में इन अवधारणाओं का व्यापक उपयोग है, अतः इन्हें गहराई से समझना आवश्यक है।