विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – यांत्रिकी विषय-वस्तु: 11.4 चाल वेग और त्वरण
गति का गणितीय वर्णन तीन मौलिक राशियों — चाल, वेग और त्वरण — के बिना अधूरा है। चाल यह बताती है कि वस्तु कितनी तेजी से चल रही है, वेग बताता है कि वस्तु किस दिशा में कितनी तेजी से चल रही है, और त्वरण बताता है कि वेग में परिवर्तन की दर क्या है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे प्रतिवर्ष 4 से 6 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें औसत चाल, रूपांतरण और त्वरण की गणना शामिल होती है। रेलवे परिचालन में ट्रेन की चाल, समय-सारणी निर्धारण और सिग्नल व्यवस्था इसी अध्याय के ज्ञान पर आधारित है।
चाल को इकाई समय में तय की गई दूरी के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह एक अदिश राशि है जिसमें केवल परिमाण होता है। वेग को इकाई समय में हुए विस्थापन के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह एक सदिश राशि है जिसमें दिशा भी होती है। दोनों की SI इकाई मीटर प्रति सेकंड है। किसी गतिमान वस्तु की चाल हमेशा धनात्मक होती है, जबकि वेग धनात्मक या ऋणात्मक हो सकता है। किसी वस्तु की चाल कभी ऋणात्मक नहीं होती क्योंकि दूरी कभी ऋणात्मक नहीं होती।
इस अध्याय में हम चाल और वेग की अवधारणा, औसत चाल और औसत वेग, त्वरण की परिभाषा और गणना, किमी/घंटा का मीटर/सेकंड में रूपांतरण तथा गति के समीकरणों का अध्ययन करेंगे। चाल, वेग और त्वरण के बीच के संबंध को समझना न केवल परीक्षा में अंक दिलाता है, बल्कि रेलवे तकनीशियन के दैनिक कार्य में ट्रेन की गति और ब्रेकिंग दूरी का आकलन करने में भी सहायक होता है। यह अध्याय बल और न्यूटन के नियमों की नींव है।
चाल को इकाई समय में तय की गई दूरी के रूप में परिभाषित किया जाता है, अर्थात चाल = दूरी ÷ समय। यदि कोई ट्रेन 2 घंटे में 180 किलोमीटर तय करती है, तो उसकी चाल 90 किलोमीटर प्रति घंटा है। वेग को इकाई समय में हुए विस्थापन के रूप में परिभाषित किया जाता है, अर्थात वेग = विस्थापन ÷ समय। यदि वस्तु प्रारंभिक बिंदु पर लौट आती है तो विस्थापन शून्य होने से उसका औसत वेग शून्य हो जाता है, जबकि औसत चाल धनात्मक रहती है। चाल और वेग दोनों की SI इकाई मीटर/सेकंड है।
यदि कोई वस्तु समान समय अंतरालों में समान दूरी तय करती है, तो उसकी चाल एकसमान कहलाती है। इसके विपरीत असमान चाल में वस्तु असमान दूरी तय करती है। जब कोई वस्तु लंबी दूरी तय करती है और उसकी चाल बदलती रहती है, तो उसकी औसत चाल निकाली जाती है। औसत चाल = कुल तय दूरी ÷ कुल लगा समय। इसी प्रकार औसत वेग = कुल विस्थापन ÷ कुल समय। औसत चाल की गणना कई बार वेगों के औसत से नहीं होती, बल्कि कुल दूरी और कुल समय से होती है।
उदाहरण 1: एक ट्रेन पहले घंटे में 60 किलोमीटर और दूसरे घंटे में 90 किलोमीटर तय करती है। ट्रेन की औसत चाल ज्ञात कीजिए।
हल: कुल दूरी = 60 + 90 = 150 किलोमीटर। कुल समय = 1 + 1 = 2 घंटे। औसत चाल = 150 ÷ 2 = 75 किलोमीटर प्रति घंटा। अतः ट्रेन की औसत चाल 75 किमी/घंटा है।
त्वरण वेग के परिवर्तन की दर है, अर्थात त्वरण = वेग में परिवर्तन ÷ लिया गया समय। यदि किसी वस्तु का प्रारंभिक वेग u और t समय के बाद अंतिम वेग v हो, तो त्वरण a = (v - u) ÷ t होता है। त्वरण एक सदिश राशि है और इसकी SI इकाई मीटर प्रति सेकंड वर्ग है। जब वस्तु का वेग बढ़ता है तो त्वरण धनात्मक होता है, और जब वेग घटता है तो त्वरण ऋणात्मक होता है, जिसे मंदन कहते हैं। यदि वेग में परिवर्तन नहीं होता तो त्वरण शून्य होता है।
जब कोई वस्तु विरामावस्था से चलना प्रारंभ करती है, तो उसका प्रारंभिक वेग शून्य होता है। जब वस्तु रुक जाती है, तो अंतिम वेग शून्य होता है। मुक्त रूप से गिरती वस्तु का त्वरण गुरुत्वीय त्वरण कहलाता है, जिसका मान पृथ्वी की सतह पर लगभग 9.8 मीटर/सेकंड वर्ग होता है। गुरुत्वीय त्वरण का प्रतीक g है। किसी वस्तु को ऊपर फेंकने पर उसकी गति में त्वरण नीचे की ओर होता है, इसलिए वस्तु की चाल धीरे-धीरे घटती है और उच्चतम बिंदु पर शून्य हो जाती है।
उदाहरण 2: एक कार का वेग 5 सेकंड में 20 मीटर/सेकंड से बढ़कर 40 मीटर/सेकंड हो जाता है। त्वरण ज्ञात कीजिए।
हल: त्वरण a = (v - u) ÷ t = (40 - 20) ÷ 5 = 20 ÷ 5 = 4 मीटर/सेकंड वर्ग। अतः कार का त्वरण 4 m/s² है।
उदाहरण 3: एक ट्रेन 10 मीटर/सेकंड की चाल से चल रही है। ब्रेक लगाने पर यह 4 सेकंड में रुक जाती है। ट्रेन का मंदन ज्ञात कीजिए।
हल: यहाँ u = 10, v = 0, t = 4। त्वरण a = (0 - 10) ÷ 4 = -2.5 मीटर/सेकंड वर्ग। अतः मंदन = 2.5 m/s²।
चाल के रूपांतरण के लिए सबसे महत्वपूर्ण संबंध है — 1 किलोमीटर प्रति घंटा = 5/18 मीटर प्रति सेकंड। यह सूत्र इसलिए उपयोगी है क्योंकि रेलवे की चाल सामान्यतः किमी/घंटा में बताई जाती है, जबकि गणनाओं में मीटर/सेकंड की आवश्यकता होती है। किमी/घंटा से मीटर/सेकंड में बदलने के लिए 5/18 से गुणा करते हैं और मीटर/सेकंड से किमी/घंटा में बदलने के लिए 18/5 से गुणा करते हैं। उदाहरण के लिए, 72 किमी/घंटा = 72 × 5/18 = 20 मीटर/सेकंड।
एकसमान त्वरण के लिए गति के तीन समीकरण लागू होते हैं। प्रथम समीकरण v = u + at में अंतिम वेग, प्रारंभिक वेग, त्वरण और समय का संबंध है। द्वितीय समीकरण s = ut + 1/2 at² दूरी ज्ञात करने में सहायक है। तृतीय समीकरण v² = u² + 2as उन प्रश्नों में प्रयोग होता है जिनमें समय नहीं दिया गया। इन समीकरणों का उपयोग करते समय ध्यान रखें कि सभी राशियाँ समान इकाइयों में हों। मुक्त पतन में a = g = 9.8 m/s² और u = 0 लिया जाता है।
उदाहरण 4: एक ट्रेन विरामावस्था से 2 मीटर/सेकंड वर्ग के त्वरण से 5 सेकंड तक चलती है। तय की गई दूरी ज्ञात कीजिए।
हल: यहाँ u = 0, a = 2 m/s², t = 5 s। सूत्र s = ut + 1/2 at² से, s = 0 + 1/2 × 2 × 25 = 25 मीटर। अतः ट्रेन द्वारा तय की गई दूरी 25 मीटर है।
| राशि | परिभाषा | प्रकार | SI इकाई |
|---|---|---|---|
| चाल | दूरी ÷ समय | अदिश | m/s |
| वेग | विस्थापन ÷ समय | सदिश | m/s |
| त्वरण | वेग परिवर्तन ÷ समय | सदिश | m/s² |
| मंदन | ऋणात्मक त्वरण | सदिश | m/s² |
| समीकरण | सूत्र | उपयोग |
|---|---|---|
| प्रथम | v = u + at | अंतिम वेग |
| द्वितीय | s = ut + 1/2 at² | दूरी |
| तृतीय | v² = u² + 2as | समय के बिना दूरी |
| रूपांतरण | 1 km/h = 5/18 m/s | चाल रूपांतरण |
flowchart TD
A[चाल वेग और त्वरण] --> B[चाल]
A --> C[वेग]
A --> D[त्वरण]
A --> E[गति के समीकरण]
B --> B1[दूरी ÷ समय]
B --> B2[अदिश राशि]
C --> C1[विस्थापन ÷ समय]
C --> C2[सदिश राशि]
D --> D1[(v - u) ÷ t]
D --> D2[मंदन ऋणात्मक]
D --> D3[g = 9.8 m/s2]
E --> E1[v = u + at]
E --> E2[s = ut + 1/2 at2]
E --> E3[v2 = u2 + 2as]
चाल, वेग और त्वरण गति का वर्णन करने वाली तीन मौलिक राशियाँ हैं। इस अध्याय में हमने चाल को अदिश तथा वेग और त्वरण को सदिश राशि के रूप में समझा, औसत चाल और औसत वेग की गणना सीखी तथा त्वरण और मंदन की अवधारणा को विस्तार से जाना। किमी/घंटा से मीटर/सेकंड में रूपांतरण और गति के तीन समीकरणों का अभ्यास करके हम विभिन्न प्रकार के संख्यात्मक प्रश्नों को हल करने में सक्षम हुए। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इस अध्याय से निश्चित अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। ट्रेन की चाल, त्वरण और ब्रेकिंग दूरी से संबंधित व्यावहारिक प्रश्न इसी ज्ञान पर आधारित हैं। इन अवधारणाओं की दृढ़ पकड़ बाद के अध्यायों — बल, संवेग और कार्य-ऊर्जा — की समझ को भी मजबूत बनाती है।