विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – यांत्रिकी विषय-वस्तु: 11.7 गुरुत्वाकर्षण
गुरुत्वाकर्षण प्रकृति का वह सार्वभौमिक बल है जो ब्रह्मांड की प्रत्येक वस्तु को अन्य वस्तु की ओर आकर्षित करता है। यह बल पृथ्वी पर वस्तुओं को नीचे गिराने, चंद्रमा को पृथ्वी की परिक्रमा कराने और पृथ्वी को सूर्य के चारों ओर बनाए रखने के लिए उत्तरदायी है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में गुरुत्वाकर्षण से प्रतिवर्ष 2 से 4 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम, गुरुत्वीय त्वरण और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण प्रभाव प्रमुख होते हैं।
वस्तुओं के गिरने का कारण समझने के लिए आइजैक न्यूटन ने अत्यंत महत्वपूर्ण अवलोकन किया। एक कहानी के अनुसार जब एक सेब पेड़ से गिरता हुआ देखा, तो न्यूटन ने सोचा कि जो बल सेब को पृथ्वी की ओर खींचता है, वही बल चंद्रमा को भी पृथ्वी की परिक्रमा कराता है। इसी चिंतन से 1687 में न्यूटन ने सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण का नियम प्रतिपादित किया। इस नियम के अनुसार ब्रह्मांड की प्रत्येक वस्तु अन्य प्रत्येक वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करती है।
इस अध्याय में हम न्यूटन के सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण नियम, गुरुत्वीय स्थिरांक G, गुरुत्वीय त्वरण g तथा इन दोनों में संबंध g = GM/R² का अध्ययन करेंगे। साथ ही गुरुत्वाकर्षण के व्यावहारिक प्रभावों और रेलवे परिचालन से उसके संबंध को भी समझेंगे। ट्रेन का ढलान पर चलना, लिफ्ट का संचालन और पृथ्वी की सतह पर वस्तुओं का भार — सभी गुरुत्वाकर्षण से संबंधित हैं। यह अध्याय द्रव्यमान, भार और मुक्त पतन के अध्याय का आधार है।
न्यूटन का सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण नियम कहता है कि ब्रह्मांड की प्रत्येक वस्तु अन्य प्रत्येक वस्तु को एक बल से आकर्षित करती है, जो उनके द्रव्यमानों के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके केंद्रों के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यदि दो वस्तुओं के द्रव्यमान m1 और m2 हों तथा उनके केंद्रों के बीच की दूरी d हो, तो उनके बीच का गुरुत्वाकर्षण बल F = G m1 m2 ÷ d² होता है। यहाँ G सार्वभौमिक गुरुत्वीय स्थिरांक है, जिसका मान 6.67 × 10⁻¹¹ N m²/kg² होता है।
यह नियम बताता है कि द्रव्यमान बढ़ाने पर गुरुत्वाकर्षण बल बढ़ता है, जबकि दूरी बढ़ाने पर बल तेजी से घटता है, क्योंकि दूरी वर्ग में आती है। गुरुत्वीय स्थिरांक G का मान हर स्थान पर समान होता है, इसलिए इसे सार्वभौमिक कहते हैं। G की विमाएँ M⁻¹ L³ T⁻² होती हैं। इस नियम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ब्रह्मांड के प्रत्येक पिंड — चाहे वह परमाणु हो या तारा — पर समान रूप से लागू होता है। वस्तुओं के छोटे द्रव्यमानों के कारण उनके बीच का गुरुत्वाकर्षण बल अत्यंत कम होता है, इसलिए हम उसे अनुभव नहीं कर पाते।
उदाहरण 1: दो वस्तुओं का द्रव्यमान क्रमशः 2 किलोग्राम और 3 किलोग्राम है, तथा उनके केंद्रों के बीच दूरी 2 मीटर है। उनके बीच का गुरुत्वाकर्षण बल ज्ञात कीजिए। (G = 6.67 × 10⁻¹¹)
हल: F = G m1 m2 ÷ d² = 6.67 × 10⁻¹¹ × 2 × 3 ÷ 4 = 6.67 × 10⁻¹¹ × 6 ÷ 4 = 1.0005 × 10⁻¹⁰ न्यूटन। अतः गुरुत्वाकर्षण बल लगभग 1.0 × 10⁻¹⁰ न्यूटन है।
पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण स्वतंत्र रूप से गिरती वस्तुओं में उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं, जिसका प्रतीक g है। पृथ्वी की सतह पर g का मान लगभग 9.8 मीटर प्रति सेकंड वर्ग होता है। गुरुत्वीय त्वरण के कारण ही सभी वस्तुएँ — चाहे भारी हों या हल्की — बिना वायु प्रतिरोध के समान दर से गिरती हैं। गैलीलियो ने सबसे पहले यह सिद्ध किया कि निर्वात में सभी वस्तुएँ एक ही समय में जमीन पर पहुँचती हैं।
गुरुत्वीय त्वरण g और सार्वभौमिक गुरुत्वीय स्थिरांक G में महत्वपूर्ण अंतर होता है। g का मान स्थान के अनुसार बदलता है — पृथ्वी की सतह पर 9.8 m/s², ऊँचाई बढ़ने पर कम, और ध्रुवों पर भूमध्य रेखा की तुलना में अधिक होता है। इसके विपरीत G का मान ब्रह्मांड के हर स्थान पर स्थिर रहता है। g की इकाई m/s² है जबकि G की इकाई N m²/kg² है। यह अंतर परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है, इसलिए इसे स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है।
दोनों में संबंध इस प्रकार है — पृथ्वी की सतह पर g = GM ÷ R² होता है, जहाँ M पृथ्वी का द्रव्यमान और R पृथ्वी की त्रिज्या है। पृथ्वी के द्रव्यमान का मान लगभग 6 × 10²⁴ किलोग्राम और त्रिज्या लगभग 6.4 × 10⁶ मीटर है। जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह से ऊपर जाते हैं, g का मान घटता जाता है। उच्च ऊँचाई पर g घटने के कारण वस्तुओं का भार भी घटता है। यही कारण है कि किसी वस्तु का भार पृथ्वी की तुलना में चंद्रमा पर लगभग छठा भाग होता है, क्योंकि चंद्रमा का द्रव्यमान पृथ्वी से कम है।
उदाहरण 2: एक वस्तु को विरामावस्था से गिराया जाता है। 3 सेकंड के बाद उसका वेग ज्ञात कीजिए। (g = 9.8 m/s²)
हल: v = u + gt = 0 + 9.8 × 3 = 29.4 मीटर/सेकंड। अतः 3 सेकंड के बाद वस्तु का वेग 29.4 m/s होगा।
गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव पृथ्वी पर हर वस्तु पर पड़ता है। वस्तु का भार, जो द्रव्यमान पर g का गुणनफल है, गुरुत्वाकर्षण के कारण ही होता है। जब कोई लिफ्ट ऊपर जाती है या नीचे आती है, तो उसमें बैठे व्यक्ति के भार में अस्थायी परिवर्तन अनुभव होता है, यह स्पष्ट भार की अवधारणा कहलाती है। रेलवे के संदर्भ में पुलों की रचना, पटरी की नींव और ढलानों पर ट्रेन की गति में गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव का ध्यान रखा जाता है।
गुरुत्वाकर्षण के कारण ही वायुमंडल पृथ्वी से बंधा रहता है, नदियाँ नीचे की ओर बहती हैं और ज्वार-भाटा उत्पन्न होता है। चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण समुद्र में ज्वार आते हैं। गुरुत्वाकर्षण के कारण ही ग्रह सूर्य के चारों ओर तथा चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर अपनी कक्षाओं में बने रहते हैं। इस बल की सार्वभौमिक प्रकृति के कारण ही इसे सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण कहा जाता है। इसी बल के आधार पर कृत्रिम उपग्रहों को पृथ्वी की परिक्रमा में स्थापित किया जाता है, जिनका उपयोग रेलवे के संचार और GPS नेविगेशन में होता है।
उदाहरण 3: किसी वस्तु का द्रव्यमान 10 किलोग्राम है। पृथ्वी पर उसका भार ज्ञात कीजिए। (g = 9.8 m/s²)
हल: भार W = mg = 10 × 9.8 = 98 न्यूटन। अतः वस्तु का भार पृथ्वी पर 98 न्यूटन होगा।
| लक्षण | g (गुरुत्वीय त्वरण) | G (सार्वभौमिक स्थिरांक) |
|---|---|---|
| परिभाषा | गिरती वस्तु का त्वरण | दो वस्तुओं का आकर्षण बल स्थिरांक |
| मान | 9.8 m/s² | 6.67 × 10⁻¹¹ N m²/kg² |
| स्थान के साथ | बदलता है | स्थिर रहता है |
| इकाई | m/s² | N m²/kg² |
| राशि | सूत्र | व्याख्या |
|---|---|---|
| गुरुत्वाकर्षण बल | F = G m1 m2 / d² | दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती |
| भार | W = mg | द्रव्यमान × गुरुत्वीय त्वरण |
| g और G संबंध | g = GM/R² | पृथ्वी की सतह पर |
| मुक्त पतन का वेग | v = gt | प्रारंभिक वेग शून्य |
flowchart TD
A[गुरुत्वाकर्षण] --> B[न्यूटन का नियम]
A --> C[गुरुत्वीय त्वरण g]
A --> D[प्रभाव]
B --> B1[F = G m1 m2/d2]
B --> B2[G = 6.67 × 10-11]
C --> C1[9.8 m/s2]
C --> C2[ऊँचाई पर घटता है]
C --> C3[g = GM/R2]
D --> D1[भार W = mg]
D --> D2[ज्वार-भाटा]
D --> D3[उपग्रह परिक्रमा]
D --> D4[मुक्त पतन]
गुरुत्वाकर्षण ब्रह्मांड की सबसे व्यापक शक्तियों में से एक है, जो सूक्ष्म कणों से लेकर विशाल आकाशगंगाओं तक हर वस्तु को नियंत्रित करता है। इस अध्याय में हमने न्यूटन के सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण नियम, गुरुत्वीय स्थिरांक G, गुरुत्वीय त्वरण g तथा उनके बीच के संबंध g = GM/R² का अध्ययन किया। हमने यह भी जाना कि गुरुत्वाकर्षण के कारण ही वस्तुओं का भार होता है, ज्वार-भाटा उत्पन्न होता है और उपग्रह पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में यह अध्याय सरल और अंक देने वाला है। इस ज्ञान का उपयोग द्रव्यमान, भार और मुक्त पतन के अगले अध्याय में किया जाएगा, इसलिए इन अवधारणाओं की दृढ़ पकड़ अत्यंत आवश्यक है।