विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – यांत्रिकी विषय-वस्तु: 11.8 द्रव्यमान भार और मुक्त पतन
द्रव्यमान, भार और मुक्त पतन तीन परस्पर संबंधित अवधारणाएँ हैं जो गुरुत्वाकर्षण के अध्ययन का हिस्सा हैं। द्रव्यमान किसी वस्तु में निहित पदार्थ की कुल मात्रा है, जबकि भार वह बल है जिससे पृथ्वी उस वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करती है। मुक्त पतन वह गति है जिसमें कोई वस्तु केवल गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में गिरती है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इन अवधारणाओं से 2 से 4 प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें द्रव्यमान और भार का अंतर सबसे लोकप्रिय प्रश्न है।
द्रव्यमान और भार को अक्सर एक ही राशि समझ लिया जाता है, परंतु ये भिन्न राशियाँ हैं। द्रव्यमान एक अदिश राशि है जो स्थान के अनुसार नहीं बदलती, जबकि भार एक सदिश राशि है जो g के मान के अनुसार बदलता है। किसी वस्तु का द्रव्यमान पृथ्वी पर, चंद्रमा पर या अंतरिक्ष में समान रहता है, परंतु उसका भार इन स्थानों पर अलग-अलग होता है। द्रव्यमान की SI इकाई किलोग्राम है, जबकि भार की SI इकाई न्यूटन है। द्रव्यमान को कमानी तुला से नहीं, साधारण तराजू से मापा जाता है, जबकि भार कमानी तुला (स्प्रिंग बैलेंस) से मापा जाता है।
इस अध्याय में हम द्रव्यमान और भार की परिभाषा, उनके बीच का अंतर, भार की गणना W = mg से, मुक्त पतन की गति तथा मुक्त पतन के समीकरणों का अध्ययन करेंगे। मुक्त पतन में वस्तु का त्वरण g होता है और प्रारंभिक वेग शून्य होता है। इस अध्याय के ज्ञान का उपयोग ट्रेन के भार निर्धारण, माल ढुलाई की गणना और रेलवे पुलों की रचना में होता है। यह अध्याय पिछले गुरुत्वाकर्षण अध्याय की निरंतरता है।
द्रव्यमान किसी वस्तु में उपस्थित पदार्थ की मात्रा है। यह एक अदिश राशि है जिसका स्थान के साथ कोई संबंध नहीं होता। द्रव्यमान की SI इकाई किलोग्राम है। द्रव्यमान को तराजू द्वारा मापा जाता है। द्रव्यमान का जड़त्व से सीधा संबंध होता है — जिस वस्तु का द्रव्यमान जितना अधिक होता है, उसका जड़त्व उतना ही अधिक होता है। द्रव्यमान कभी शून्य नहीं हो सकता। द्रव्यमान की विमाएँ M होती हैं। द्रव्यमान सदैव धनात्मक होता है।
भार वह बल है जिससे पृथ्वी किसी वस्तु को अपने केंद्र की ओर आकर्षित करती है। भार का सूत्र W = mg है, जहाँ m द्रव्यमान और g गुरुत्वीय त्वरण है। भार एक सदिश राशि है जो पृथ्वी के केंद्र की ओर कार्य करता है। भार की SI इकाई न्यूटन है। भार g पर निर्भर करता है, इसलिए जहाँ g बदलता है, वहाँ भार भी बदलता है। चंद्रमा पर g का मान पृथ्वी से लगभग छह गुना कम होता है, इसलिए वस्तु का भार चंद्रमा पर लगभग छठा भाग हो जाता है, जबकि द्रव्यमान अपरिवर्तित रहता है। भार को कमानी तुला (स्प्रिंग बैलेंस) से मापा जाता है।
उदाहरण 1: एक ट्रेन डिब्बे का द्रव्यमान 5000 किलोग्राम है। पृथ्वी पर उसका भार ज्ञात कीजिए। (g = 9.8 m/s²)
हल: भार W = mg = 5000 × 9.8 = 49000 न्यूटन। अतः डिब्बे का भार 49000 न्यूटन होगा।
द्रव्यमान और भार में अनेक महत्वपूर्ण अंतर हैं। द्रव्यमान पदार्थ की मात्रा है जबकि भार एक बल है। द्रव्यमान अदिश राशि है जबकि भार सदिश राशि है। द्रव्यमान की इकाई किलोग्राम है जबकि भार की इकाई न्यूटन है। द्रव्यमान स्थान के अनुसार नहीं बदलता जबकि भार स्थान के अनुसार बदलता है। द्रव्यमान तराजू से मापा जाता है जबकि भार कमानी तुला से मापा जाता है। द्रव्यमान का मान सदैव धनात्मक होता है जबकि भार भी धनात्मक होता है परंतु गुरुत्वाकर्षण की दिशा में कार्य करता है।
एक विशेष स्थिति में भार शून्य हो सकता है। जब कोई वस्तु मुक्त रूप से गिरती है या उपग्रह कक्षा में घूमता है, तो वह भारहीनता की स्थिति में होता है। भारहीनता का अर्थ है कि वस्तु का आभासी भार शून्य हो गया है, परंतु उसका द्रव्यमान यथावत बना रहता है। इसी कारण अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष स्टेशन में तैरते हुए दिखाई देते हैं। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि भारहीनता का अर्थ द्रव्यमानहीनता नहीं है। द्रव्यमान की तुलना में भार के प्रश्न रेलवे परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।
उदाहरण 2: किसी वस्तु का द्रव्यमान 60 किलोग्राम है। चंद्रमा पर उसका भार ज्ञात कीजिए। (चंद्रमा पर g = 1.67 m/s²)
हल: भार W = mg = 60 × 1.67 = 100.2 न्यूटन। अतः वस्तु का चंद्रमा पर भार 100.2 न्यूटन होगा, जबकि द्रव्यमान 60 किलोग्राम ही रहेगा।
मुक्त पतन वह गति है जिसमें कोई वस्तु केवल गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में गिरती है। मुक्त पतन में वस्तु का त्वरण गुरुत्वीय त्वरण g के बराबर होता है। मुक्त पतन की शुरुआत में वस्तु का प्रारंभिक वेग शून्य होता है। मुक्त पतन में वस्तु की गति के लिए गति के समीकरण लागू होते हैं, जिनमें a = g रखा जाता है। इस प्रकार मुक्त पतन में v = gt, s = 1/2 gt² और v² = 2gs जैसे समीकरण उपयोग में आते हैं। ये समीकरण प्रारंभिक वेग शून्य होने की स्थिति के लिए हैं।
निर्वात में सभी वस्तुएँ — चाहे भारी हों या हल्की — समान दर से गिरती हैं, क्योंकि निर्वात में वायु का प्रतिरोध नहीं होता। सामान्य वायुमंडल में हल्की वस्तुएँ जैसे पंख वायु प्रतिरोध के कारण धीरे गिरते हैं। मुक्त पतन की अवधारणा गैलीलियो के प्रसिद्ध प्रयोग से संबंधित है, जिसमें उन्होंने सिद्ध किया कि दो भिन्न द्रव्यमानों की वस्तुएँ एक साथ जमीन पर पहुँचती हैं। जब कोई वस्तु मुक्त रूप से गिरती है, तो उसका वेग हर सेकंड g मात्रा में बढ़ता जाता है, अर्थात 1 सेकंड बाद g, 2 सेकंड बाद 2g इत्यादि।
उदाहरण 3: एक वस्तु को एक इमारत की छत से विरामावस्था से गिराया जाता है। 4 सेकंड में वह कितनी दूरी तय करेगी? (g = 9.8 m/s²)
हल: s = 1/2 gt² = 1/2 × 9.8 × 16 = 78.4 मीटर। अतः वस्तु 4 सेकंड में 78.4 मीटर की दूरी तय करेगी।
उदाहरण 4: एक वस्तु को विराम से गिराया जाता है। 5 सेकंड के बाद उसका वेग ज्ञात कीजिए। (g = 9.8 m/s²)
हल: v = gt = 9.8 × 5 = 49 मीटर/सेकंड। अतः 5 सेकंड के बाद वस्तु का वेग 49 m/s होगा।
| लक्षण | द्रव्यमान | भार |
|---|---|---|
| परिभाषा | पदार्थ की मात्रा | गुरुत्वाकर्षण बल |
| राशि का प्रकार | अदिश | सदिश |
| SI इकाई | किलोग्राम | न्यूटन |
| स्थान के साथ | नहीं बदलता | बदलता है |
| मापन उपकरण | तराजू | कमानी तुला |
| सूत्र | - | W = mg |
| समीकरण | सूत्र | व्याख्या |
|---|---|---|
| वेग | v = gt | प्रारंभिक वेग शून्य |
| दूरी | s = 1/2 gt² | विराम से गिरना |
| वेग-दूरी संबंध | v² = 2gs | समय के बिना |
flowchart TD
A[द्रव्यमान भार और मुक्त पतन] --> B[द्रव्यमान]
A --> C[भार]
A --> D[मुक्त पतन]
B --> B1[पदार्थ की मात्रा]
B --> B2[इकाई किलोग्राम]
B --> B3[स्थान के साथ स्थिर]
C --> C1[W = mg]
C --> C2[इकाई न्यूटन]
C --> C3[स्थान के साथ बदलता है]
D --> D1[त्वरण g]
D --> D2[v = gt]
D --> D3[s = 1/2 gt2]
D --> D4[भारहीनता]
द्रव्यमान, भार और मुक्त पतन यांत्रिकी की वे अवधारणाएँ हैं जो गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव को व्यावहारिक रूप में व्यक्त करती हैं। इस अध्याय में हमने द्रव्यमान को पदार्थ की मात्रा और भार को गुरुत्वाकर्षण बल के रूप में समझा, उनके बीच के अंतर का अध्ययन किया और मुक्त पतन की गति के समीकरणों को सीखा। द्रव्यमान की इकाई किलोग्राम और भार की इकाई न्यूटन है, यह अंतर परीक्षा का महत्वपूर्ण बिंदु है। मुक्त पतन में वस्तु का त्वरण g और प्रारंभिक वेग शून्य होता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में ये प्रश्न सरल एवं निश्चित अंक देने वाले हैं। रेलवे माल ढुलाई, भार निर्धारण और पुलों की रचना में इन अवधारणाओं का व्यावहारिक उपयोग होता है।