विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: तर्कशक्ति – तर्क और विश्लेषणात्मक तर्क विषय-वस्तु: 9.8 विश्लेषणात्मक तर्क
विश्लेषणात्मक तर्क (Analytical Reasoning) तर्कशक्ति का वह संयुक्त विषय है जिसमें स्थिति, क्रम, व्यवस्था, गणना और संबंधों के विश्लेषण के प्रश्न सम्मिलित होते हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में विश्लेषणात्मक तर्क पर प्रतिवर्ष विविध प्रश्न पूछे जाते हैं। इन प्रश्नों में एक परिस्थिति दी जाती है और उसके आधार पर विभिन्न प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षार्थी को दी गई जानकारी का गहन विश्लेषण करके तार्किक निष्कर्ष निकालने होते हैं।
विश्लेषणात्मक तर्क के प्रश्नों में प्रायः एक संयुक्त परिस्थिति दी जाती है जिसमें कई शर्तें होती हैं। उदाहरण के लिए, कुछ व्यक्तियों की एक पंक्ति में स्थिति, उनकी आयु, उनके पेशे या उनके संबंधों की जानकारी दी जाती है। इन शर्तों का विश्लेषण करके प्रश्नों का उत्तर दिया जाता है। विश्लेषणात्मक तर्क में दी गई सभी शर्तों को एक साथ संतुष्ट करने वाली व्यवस्था बनाना ही सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।
इस अध्याय में हम संयुक्त परिस्थितियों का विश्लेषण, सभी शर्तों को संतुष्ट करने वाली व्यवस्था निर्माण, और क्रम-संबंध-गणना से जुड़े प्रश्नों को हल करना सीखेंगे। परीक्षा की दृष्टि से ये प्रश्न मध्यम से कठिन स्तर के होते हैं। दी गई जानकारी को व्यवस्थित रूप में लिखना और हर शर्त की जाँच करना ही इस विषय की सफलता की कुंजी है।
विश्लेषणात्मक तर्क के प्रश्नों को हल करने के लिए सबसे पहले दी गई जानकारी को व्यवस्थित रूप में लिखा जाता है। प्रत्येक व्यक्ति या वस्तु के बारे में दी गई सभी बातें अलग-अलग लिखकर उनके बीच संबंध स्थापित किए जाते हैं। यदि स्थिति पंक्ति में है, तो पंक्ति का चित्र बनाकर जानकारी भरी जाती है। यदि संबंधों की बात है, तो वेन आरेख या तालिका बनाई जाती है। व्यवस्थित लेखन से सभी शर्तों को देखना आसान हो जाता है।
उदाहरण 1: चार मित्र A, B, C, D एक पंक्ति में बैठे हैं। A, B के तुरंत बाएँ है। C, D के तुरंत दाएँ है। B, D के बाएँ है। पंक्ति का क्रम क्या है?
हल: A, B के बाएँ, B, D के बाएँ और D, C के बाएँ। अतः क्रम A, B, D, C है।
विश्लेषणात्मक तर्क में क्रम से जुड़े प्रश्नों में ऊँचाई, आयु, वजन या अंकों के आधार पर व्यवस्था बनानी होती है। इन प्रश्नों में चिह्न विधि (> , <) का प्रयोग करके पूरी श्रृंखला बनाई जाती है। स्थिति से जुड़े प्रश्नों में बाएँ-दाएँ या दक्षिणावर्त-वामावर्त व्यवस्था बनती है। सभी शर्तों को एक साथ संतुष्ट करना आवश्यक है। किसी भी एक शर्त की अनदेखी पूरे उत्तर को गलत कर सकती है।
उदाहरण 2: पाँच लोगों की ऊँचाई: रमेश, सुरेश से लंबा है। मोहन, सुरेश से छोटा है। विजय, रमेश से लंबा है। अजय, मोहन से लंबा है। दूसरा सबसे लंबा कौन है?
हल: श्रृंखला विजय > रमेश > सुरेश > अजय > मोहन, अतः दूसरा सबसे लंबा रमेश है।
विश्लेषणात्मक तर्क में गणना से जुड़े प्रश्नों में कुल व्यक्तियों की संख्या, आयु का योग, औसत या वेन आरेख की गणना होती है। संबंधों से जुड़े प्रश्नों में पारिवारिक संबंध, पेशा या निवास स्थान के आधार पर विश्लेषण होता है। इन प्रश्नों में दी गई सभी जानकारी को तालिका में भरकर प्रश्नों का उत्तर निकाला जाता है। तालिका विधि जटिल प्रश्नों को सरल बनाती है।
उदाहरण 3: 30 लोगों में 18 हिंदी और 12 अंग्रेजी बोलते हैं। 5 लोग दोनों बोलते हैं। कुल कितने लोग केवल हिंदी बोलते हैं?
हल: केवल हिंदी = 18 - 5 = 13 लोग।
| प्रश्न का प्रकार | विधि | उदाहरण |
|---|---|---|
| क्रम | चिह्न विधि से श्रृंखला | विजय > रमेश > सुरेश |
| स्थिति | चित्र बनाकर व्यवस्था | A, B, D, C |
| गणना | सूत्र से संख्या | केवल हिंदी = 13 |
| संबंध | तालिका विधि | पेशे और निवास |
| चरण | क्रिया | विवरण |
|---|---|---|
| पहला | जानकारी लिखें | सभी शर्तों को अलग-अलग |
| दूसरा | विधि चुनें | चित्र, तालिका या चिह्न |
| तीसरा | व्यवस्था बनाएँ | सभी शर्तें संतुष्ट करें |
| चौथा | जाँच करें | हर शर्त से सत्यापन |
flowchart TD
A[विश्लेषणात्मक तर्क] --> B[जानकारी का विश्लेषण]
A --> C[क्रम प्रश्न]
A --> D[स्थिति प्रश्न]
A --> E[गणना और संबंध]
B --> B1[व्यवस्थित लेखन]
B --> B2[सभी शर्तें संतुष्ट]
C --> C1[चिह्न विधि]
C --> C2[श्रृंखला निर्माण]
D --> D1[पंक्ति चित्र]
D --> D2[वृत्त व्यवस्था]
E --> E1[सूत्र और तालिका]
E --> E2[वेन आरेख]
विश्लेषणात्मक तर्क तर्कशक्ति का एक संयुक्त विषय है जो क्रम, स्थिति, गणना और संबंधों के विश्लेषण की क्षमता को एक साथ परखता है। इस अध्याय में हमने दी गई जानकारी का व्यवस्थित विश्लेषण, सभी शर्तों को संतुष्ट करने वाली व्यवस्था निर्माण, तथा चिह्न, चित्र, तालिका और वेन आरेख की विधियाँ सीखीं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में इन प्रश्नों को धैर्यपूर्वक व्यवस्थित विधि से हल करने पर सुनिश्चित अंक प्राप्त होते हैं। सभी शर्तों का सत्यापन ही इस विषय में सफलता की कुंजी है।